बुधवार, 14 अप्रैल 2010

मानवअधिकार वादी भी माओवादियो जेसे ,

मानव अधिकार वादी अब क्यों चुप हे , उनकी चहक चहक खामोश हे।
कहं हे तिस्ता , कहा हे सरदेसाई । नक्सल वाद के आगे सब चुप हें ।
नक्सल वाद के बेरहम नर संहार की निंदा के लिय इनके होठ सिलगय ।
अपराधियो के पैरोकार शांत चित हिंदुत्व के विरुद तो तूफान उठा ले ते हें ।
मगर तब सच में कोई बंदूक हो तो , ख़ामोशी जिन्दावाद .... ,
तथाकथित मानवता वादी असल ने कोन हे ..., यह पता लगाना चाहिए ,
क्यों की इनकी गति विधि तो माओवादियो जेसा हे,
हिंदुत्व को बदनाम करो , उन्हें गलत सवित करो ,
तमाम हिसक आतंक वादियो , उग्र वादियो ,नक्सल वादियो , माओ वादियो के आगे चुप रहना ।
सच तो यह हे की बुधि के अजीर्ण से पीड़ित मानवता वाद खुद संदेह में हें ।
इन लोगों को , हिदू को बदनाम करने की ही तनाख्ह मिलती हें ।
के छुपे दुसमन हें, इनके नाकाव नोच लेने चाहिए ।
ये ओट से माओवाद हे ।
अरविन्द सीसोदिया
राधा क्रिशन मंदिर रोड , ददवारा ;
कोटा जन २ , राजस्थान ।

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