बुधवार, 28 अप्रैल 2010

कुम्भं एक पवित्र विचार एक पवित्र उर्जा ...

कुम्भं एक पवित्र विचार एक पवित्र उर्जा ... । पावन धाम हरिद्वार की यात्रा हुई , बहुत से विचारों का आदान प्रदान हुआ । समझमें आया कुम्भं विचारों का प्रवाह जन जन को देने की व्यवस्था थी । खोजों को बाटने की एक दुसरे को जानने समझाने की व्यवस्था का प्रवंधन था ।
आश्रम अनुसंधान शाला होते थे , उनमें समाज की उपयोगिता के प्रयोग होते थे । उपयोगी जानकारी एकत्र कर इन माध्यमों से सरे देश में पहुचाई जाती थी ।
साधू शोधर्थी होते थे , चिंतन के द्वारा मन के द्वारा बहस के द्वारा तथ्य और तत्व पर निर्णय लिए जाते थे ।
समाज में धर्म का बड़ा दर्जा उनकी उच्च स्तर के कारण हे , वह सु व्यवस्था का निर्माता हे, शन्ति का और सद विचारों का प्रेरक हे । संतोष का स्रोत हे । सब को सुख देने वाली व्यवस्था का हमेशा ही समाज में स्वगत होता हे । यही हिंदुत्व की विशेषता हे ।
सनातन का मतलव सदेव नूतनता लिए हुए । सदेव सत्यता लिए हुए । अपनी खिड़की दरवाजे खुले रखना , प्रदूषित बहार , शुद्ध अंदर ।
अरविन्द सीसोदिया
राधा क्रिशन मंदिर रोड , वार्ड ५९ ,
कोटा २ , राजस्थान ।

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