सोमवार, 31 मई 2010

अफजल गुरु - फ़ांसी की सजा को आजीवन कारावास में बदलने की साजिस हे

अफजल गुरु की दया याचिका को जिस तरह से लंबित रखा जा रहा हे उसकी पीछे कांग्रेस की अत्यंत निंदनीय कूटनीति काम कर रही हे , ये लोग अफजल को फाँसी देने से डर रहे हें और किसी तरह  से उसे आजीवन कारावास में बदलना चाहते हें ,
खासखबर . कॉम पर ३१-०५-२०१० की तारीख में एक खबर हे ,
अफजल गुरू की फांसी टालने की साजिश तो नहीं , इसका शरांस हे की -
इस तरह  के कुछ मामले सुप्रीम कोर्ट द्वारा फाँसी से आजीवन कारावास में बदलने के निर्णय दिए गये हें , उनमें न्यायलय  का तर्क था की फ़ांसी देने में  की गई अत्यधिक देरी फ़ांसी  की सजा को उम्र केद में बदलने का पर्याप्त आधर हे , प . बंगाल के रोड्र्ग्स की फ़ांसी को उम्र केद में बदला था , इसी तरह से उ प्र की एक निचली अदालत ने तीन व्यक्तियों की हत्या के आरोपी को फ़ांसी की सजा दी थी मगर इलाहवाद हाई कोर्ट ने  उसे बरी कर दिया था मामला सुप्रीम कोर्ट पहुचा सजा को सही मानते हुए अधिक समय गुजरने से उसे उम्र केद में तब्दील कर दिया गया . बताया जाता हे की १९८३ तक नियम था की फासी की सजा के २ वर्ष में मर्तुदंड नही दिया जाता तो सजा स्वत ही आजीवन कारावास में बदल जाती थी , फिर  इसमें कुछ शिथिलता देते हुए ४ साल कर दिया था , लगता हे की इसी निति का फायदा उठाने के लिए कांग्रेस सरकार दया याचिका को इधर उधर घुमाने का नाटक कर रही हे ,   

      मेरा भी स्पस्ट मानना हे की केंद्र सरकार मुस्लिम वोट बेंक की राजनीत  में उलझी हुई हे , उसके लिए देश और कानून की भावना कुछ भी नही हे , अन्यथा रास्त्रपति महोदय के यहाँ  से दया याचिका को दिल्ली सरकार के पास भेजने की जरूरत  ही क्या  थी , दिल्ली की कानून और व्यवस्था  तो स्वनाम   केंद्र सरकार के पास ही  हे यदि सुचना के अधिकार से पता नही चलता तो दया याचिका फाइल  तो दिल्ली सरकार के पास ही पड़ी रहती , पुरे ३ साल   और ४ माह के वाद यह फाइल दिल्ली के उप राज्यपाल को रवाना की गई हे . कुल मिला कर देश पर आक्रमण जेसे संसद पर हमले के दोषी को जिस तरह से मदद की जा रही हे उससे प्रतीत होता हे की वर्तमान सरकार की सह पर ही हमला हुआ था अन्यथा यह केसा प्रेम  केसा अपनापन और बचाव  की तमाम बातें क्यों .
फैक्ट फाइल - 
१- १३ दिसंम्बर  २००१ ,संसद पर आतंकवादी हमला, जवानों ने जान पर खेल कर सांसदों को बचाया 
२- अफजल गुरु को , स्थानीय अदालत ने १८-१२-२००२ को फासी की सजा सुनाई , २९-१०-२००३ को इसकी पुष्ठी दिल्ली हाईकोर्ट  ने की ,, ४-८-२००५ को सर्बोच्च अदालत ने सजा को सही माना , जिला और सेसन अदालत ने २०-१०-२००६ को तिहाड़ जेल में  फासी देना तय किया . 
३- ३-१०-२००६  को अफजल की फ़ांसी माफ़ करने की दया याचिका राष्ट्रपति ए  पी जे  अब्दुल कलम के पास दाखिल हुई , उसी दिन वह केन्द्रीय ग्रह मंत्रालय को भेज दी गई   , निर्णय यही हो जाना चाहिए था , मगर जान बुझ कर इसे दिल्ली सरकार को भेजा गया ,
४- दिल्ली सरकार को जान बुझ कर भेजी थी सो उन्हों ने आला कमान की इच्झा का पालन किया , ४-१०-२००६ को प्राप्त फाइल ,१९-५-२०१० को तब भेजी गई, जब एक सुचना के अधिकार की सुचना पर यह पता चल गया की , केंद्र सरकार के १६ ओपचारिक रिमेनडर आ चुके हे , मिडिया और विपक्ष के कारण उप राज्यपाल को फाइल  भेजी गई . यह भी गलत भेजी गई , दिल्ली अन्य राज्यों से भिन्न हे और उसकी कानून व्यवस्था केंद्र ही देखता हे . यह फाइल केंद्र को ही जानी चाहिए थी . अब यही कहा जा सकता हे की , क्या मिलिए येसे लोगों से जिन की असली सूरत छिपी रहे , नकली चेहरा सामने आये . कुल मिला कर अफजल गुरु की फ़ांसी की सजा को आजीवन कारावास में बदलने की साजिस हे . यूं पी ए सरकार की यही चाल हे .          ,  .  
अरविन्द सिसोदिया
राधाकृष्ण मंदिर रोड ,
ददवारा , कोटा
राजस्थान . .....

रविवार, 30 मई 2010

डॉ केतन देसाई,उच्च स्तरीय राजनीती और प्रशासन,चोर-चोर मोसेरे भाई

क्या अपने सुना हे की १८०१.५करोड़ रुपया और १.५ टन   स्वर्ण आभूषण किसी पर पकडे गये हें , हाँ, यह अकूत धन दोलत विश्व मेडिकल एसोसिएसन के १८ मई २०१० को बनाने वाले अध्यक्ष डॉ केतन देसाई से पकड़ी गई हे , यही असली चेहरा भारत के उच्च स्तरीय राजनीती और प्रशासन का हे , इतनी कमाई बिना सत्ता को खुश रखे हो ही नही सकती , और पकडे भी इस लिए गये की , कोई न कोई आप से चिड गया था . अब ये तिहाड़ जेल में हें , इनका बड़ा भरी धन बिल्डर के रूप में भी इन्वेस्ट हे ,     
यूरोलोजिस्ट   डॉ केतन देसाई के पिता जी मुम्बई में साधारण   शिक्षक थे . देसी ने जो कुछ भी किया वह कांग्रेस में अच्छी पकड़ के द्वारा  ही किया ,  इसमें उनके शातिर दिमाग ने भी बहुत साथ दिया , केतन अपने कॉलेज  के दिनों में युवक कांग्रेस में  बड़े  सक्रिय थे व तत्कालीन मुख्य मंत्री चिमनभाई पटेल के ख़ासम खास थे , वे कब अहमदावाद मेडिकल कोलेज में रेजिडेंस ही थे तब १९८९ में मेडिकल कौंसिल ऑफ़ इंडिया के सदस्य बन गये थे , और कार्यकारी समिति का चुनाव भी लड़ा था , तब से राजनेतिक सहयोग से जो मेडिकल लाइन की की-पोस्ट पर कब्ज़ा किया  तो लगातार एक क्षत्र राज बनाये रखा ,
- 2001 में ही दिल्ली उच्च न्यायालय ने देसाई को 56 लाख रुपए की रिश्वत लेने के आरोप में उन्हें पद से हटाने और उन पर मुकदमा चलाने का आदेश दे दिया था। बाद में देसाई इसलिए बच गए क्योंकि आयकर विभाग यह साबित नहीं कर पाया कि जिसने पैसा दिया था देसाई ने उसका कोई किया था या नहीं।

- कांग्रेस राज में , 2009 में देसाई वापस मेडीकल काउंसिल के अध्यक्ष निर्वाचित हुए जिसमें देश भर में मेडीकल कॉलेज चलाने वालों में दिल खोल कर पैसा लुटाया। अब भी सर्वोच्च न्यायालय में इस आदेश के खिलाफ मुकदमा चल रहा है। मुकदमा अदालत में गया यहां तक तो ठीक है मगर भारत सरकार की एक संस्था के अध्यक्ष को रिश्वतखोरी में पकड़ा गया तो इसकी जांच भी सरकार ने नहीं की।
- देसाई का लगभग १९-२० साल से एम् सी आइ पर कब्ज़ा सा हे , इस दोरान पाँच प्रधान मंत्री और १० स्वस्थ्य मंत्री बदल चुके  हें , किसी ने भी निगाह डालने की जरूरत   नही समझी ,  कोई एसा सिस्टम जरुर रहा हे जो किसी न किसी  रूप में राजनेतिक सत्ता को संतुस्ट रखा रहा था , चोर चोर  मोसेरे भाई वाली कहावत की तरफ उगली उठाती हे .
- डॉ अजय  कुमार जो की इंडियन मेडिकल एसोसिएसन के पूर्व अद्यक्ष ने सवाल उठाया हे की जब एम् सी आई  का एक व्यक्ति ब्रष्ट हे तो उसके विरुध कानून अपना काम करे, पुरे   एम् सी आई को भंग क्यों किया , कोई जज या कोई सी बी आई अधिकारी रिश्वत लेते हुए पकड़ा जाये तो संस्था थड़े ही बंद हो जाती हे , उनकी बात में दम हे , उनका आरोप भी हे एम् सी आई के निरिक्षण की वजह से दक्षिण के ५० निजी मेडिकल कालेज बंद किये जा सकते हें , ये अधिकतर राजनेताओ के हें , इस लिए एम् सी आई को भंग कर के नोकर्शाहों के कब्जे में मेडिकल दे दिया ताकि राजनेता अपनी मन मानि कर सकें , इस तथ्य की भी जाँच हो ,
खेर इतना तो तय हे की इन भ्रष्ट लोगों की जड़ें सरकार के आंगन में हे .

अरविन्द सिसोदिया
राधा क्रिशन मन्दिर रोड , वार्ड ५९ ,
 ददवारा , कोटा
राजस्थान .



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शनिवार, 29 मई 2010

नक्सलवाद - य़ूपीए की मनमोहन सरकार त्यागपत्र दे

मनमोहन सिंह जी य़ू भी कमजोर और छाया प्रधान मंत्री ही कहलाते हें .अब यह बात और ज्यादा प्रमाणित हो रही हे . की वे नाकाबिल हें उनमें कोई क्षमता नही हे , हर मामला इसका गवाह हे . 
नक्सलवाद के उग्र तेवरों ने एक बार फिर, अपने निर्मम तेवर दिखाते ही ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस को उड़ा दिया ,६५ यात्री मरे और २५० से ज्यादा घायल हुए यह संख्या और ज्यादा  हो जाएगी .
सवाल यही हे की गत एक माह में , नक्सलियों ने एक के वाद एक चुनोती दी और केंद्र सरकार असाह हे , कारण  की वे बहुत मजबूत हो चुके हें , वे यह भी जानते हें की गुडों की गुलामी आप की  विशेसता हे , राजीव के हत्यारों के साथ आप सरकार चला रहे हें , जिस  करुणानिधि को आप ने राजीव हत्या के लिए तमिलनाडू  सरकार से बर्खास्त किया था और उसके साथ मिल कर चल  रही गुजराल की सरकार को गिराया था , अब आप उसके साथ सरकार चला रहे हें ,कांग्रेस के लिए राजीव से बड़ी केंद्र सरकार हे , यह तो साबित होही गया हे ,  चन्द्र बाबु नायडू की आंध्र प्रदेश सरकार के खिलाफ  आप ने इनसे ही हाथ मिलाया था ,
वे आप की नस नस जानते हें , वे आप से नही डरते , आप उनका कुछ भी नही बिगाड सकते , इसलिए  रास्ता एक ही हे की आप सरकार चलाना छोड़ें ,य़ू  पी ए की मनमोहन सरकार त्यागपत्र दे कर मजबूत हाथों को सरकार चलाने दे ,
प्रवक्‍ता डॉट कॉम का मानना है की -
नक्सली आतंकवाद की भयानक तस्वीर:

• 2009 के आंकड़ों के अनुसार नक्सलवाद देश के 20 राज्यों की 220 जिलों में फैल चुका हैं।
• पिछले तीन साल (2007-08 तथा 2009) में देश में नक्सली हिंसा के कारण 1405 लोग मारे गए जबकि 754 सुरक्षाकर्मी शहीद हो गए।
• भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ के मुताबिक देश में 20,000 नक्सली काम कर रहे हैं।
• लगभग 10,000 सशस्त्र नक्सली कैडर बुरी तरह प्रेरित और प्रशिक्षित हैं।
• आज देश में 56 नक्सल गुट मौजूद हैं।
• करीब 40 हजार वर्ग किलोमीटर इलाका नक्सलियों के कब्जे में हैं।
• नक्सली करीब 1400 करोड़ रुपए हर साल रंगदारी के जरिए वसूलते हैं।
• नक्सली भारतीय राज्य को सशस्त्र विद्रोह के जरिए वर्ष 2050 तक उखाड़ फेंकना चाहते हैं।
मेरा मानना हे की नक्सलवाद पर काबू पाने के लिए  सबसे पहले राजनेतिक मदद बंद हो , शास्त्र  आपूर्ति पर प्रभावी रोक लगे , विदेशी धन और शस्त्र  नही मिलने दिए जाएँ , गुप्त निति से काम हो और , जो राज्य सरकार साथ नही दे उसका ग्रह   विभाग  केंद्र अपने हाथ में ले ले , जो भी दल इन देश द्रोहियों को मदद दे उसकी मान्यता रद्द करो , लगता हे की रास्त्रपति महोदया की चीन यात्रा में चीन  ने भारत में अपनी ताकत  का अहसास दिलाने के लिए यह काम किया हे , येशी ओछी हरकतें पाकिस्तान भी कई बार कर चूका हे ,     

अरविन्द सिसोदिया
राधा क्रिशन मंदिर रोड ,
ददवाद्र , वार्ड ५९ ,
कोटा , राजस्थान . 
     
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शुक्रवार, 28 मई 2010

नाकाम राजनेता , नोकरशाह और उधोगपति के चुगुल से खेल संगठन मुक्त हो

खेल संघों के अध्यक्षों व सचिवों के पदों के कार्यकाल को लेकर खेल मंत्रालय ने १९७५ के नियम के हवाले से संसोधन किये हें . जो देश के शीर्स ३६ फेड्रेसनों और एसोसियेसनो पर लागु होगा , इसके पीछे कारण  यह हे की , लगभग १८-२० संगठनो  पर राजनेता , नोकरशाह और उधोगपति काबिज हें और एक प्रकार से यह संगठन उनकी जागीर हो गए हें , सबसे बड़ा सच यह हे की इन लोगों को इन खेलों से कोई लेनादेना नही हे . इसे लोकतंत्र का मजाक ही कहा जायेगा , अब सरकार ने उच्चतम सीमा लागु की हे , नये नियमो के तहत कोई एक व्यक्ति १२ साल से ज्यादा फेडरेशन का अध्यक्ष एवं ८ साल से अधिक सचिव पद पर नही रह सकेगा , मुझे लगता हे की यह कदम खेल हित में न होकर इन गेर बाजिव कविज राजनेता , नोकरशाह और उधोगपति को संरक्षण देने का ही रास्ता हे .
स्वतन्त्रता के वाद १६ ओलंपिक खेलो में भारत ने भाग लिया हे , जिनमें २००८ में मात्र ३ पदक १९५२ में २ पदक और १९४८, १९५६, १९६०, १९६४, १९६८, १९७२ ,१९८०,१९९६, २०००, २००४ में सिर्फ १-१ पदक ही मिल पाए थे,   की बार ० पदक भी रहा हे . ओलम्पिक के ११३ वर्षो के इतिहास में भारत के नाम कुल २० पदक हाथ लगे , जिनमे ११ सकेले हाकी के हें , हम हर खेल में बहुत पिछड़े हें , सब कुछ होते हुए भी यह इसलिए हे की गलत लोगों के हाथ में खेल संगठन हें ,
ज्यादातर बड़े बड़े टुरनामेंतो   में हमारी नाक कट जाती हे और न कुछ देश हमसे आगे होते हें , यह तब और दुखद होता हे जब हम देखते हें की जन संख्या में दूसरी सबसे बड़ी शक्ति हो कर भी नाकाम और निक्क्म्मे सावित होते हें , कही न कही बड़ी कमी तो हे उसे दूर करना चाहिए था , दूर नही कर पाने  की जवावदेही  से सरकार भी बच नही सकती .  
मेरा मानन हे की -
१- खेल संघो में स्वयत्ता तो हो मगर , नेत्रत्व और निर्णय शक्ति उसी  खेल से जुड़े अनुभबी खिलाडियों के हाथ हो ,
२- खेल संगठनों  के पंजीयन अधर हेतु एक मोडल कोड या नियमावली हो जिस में यह स्पस्ट हो की उस संगठन में खेल के लिए धन , संसाधन और अन्य जरूरतों  की आपूर्ति की व्यवस्था क्या हे , उसकी निरन्तरता  क्या हे ., 
३- प्रत्येक संगठन में यदि सरकार स्तर का सहयोग हे तो सरकारी स्तर का एक जिम्मेवार अधिकारी हो , अर्थार्त जबाब देह व्यवस्था हो .
४- जिनका किसी खेल से कोई वास्तविक रिश्ता नही रहा हो , तो वह भामाशाह की भूमिका तो निभा सकता हे मगर महाराणा प्रताप की भूमिका अनुभवी खिलाडियों को ही निभाने  दे .

मुझे नही लगता की नासमझ और नाकाम राजनेता , नोकरशाह और उधोगपति के चुगुल से खेल संगठन मुक्त हो पाएंगे , यह अंदेसा भी हे की यह स्थिति एसी ही बनी रहने वाली हे .इस को सुधार ने के लिए तो खेल संगठनो के प्रारूप पर खुली चर्चा संसद में हो .  
अरविन्द सिसोदिया 
राधा क्रिशन मंदिर रोड ,
ददवारा वार्ड ५९
कोटा , राजस्थान .   .    ....

बुधवार, 26 मई 2010

गरीव कि परिभाषा और उसकी गणना पर पहले संसद में बहस होनी चाहिए

कांग्रेस सरकार देश के साथ कितने झूठ बोल सकती हे वह उतने से भी ज्यादा झूठ बोलती हे . इसका सबसे जोरदार नमूना गरीवों की गणना में देखने को मिल सकता हे . योजना आयोग ने गरीव लागों की गड़ना के नियम इस तरह के बनाये की ज्यादातर उससे बहार  ही रह गये क्यों की वह विश्व  को समर्द्ध और विकसित देश दिखाना चाहता था . उसने इस तरह का गणना प्रारूप बनाया की गरीवी काम दिखे . सो हुआ भी यही की उनके अनुसार की गी गणना सिर्फ २७.५ प्रतिसत ही रही . देश के लगभग सभी राज्य इस गणना से अस्न्तुस्ट थे , मगर योजना योग की दादागिरी को कोंन रोक सकता हे .
बाद में अर्जुन सेनगुप्ता समिति ने जब यह घोषणा की कि देश कि ७७ प्रतिशत आबादी गरीब हे तो यह चर्चित विषय बन गया , संसद में बात बात में यह उदाहरन आने लगा कि ७७ प्रतिशत लोग २० रूपये से भी काम में प्रतिदिन गुजर बसर करते हें . यह एक क्ररुर सच भी हे. भारत कि शांति प्रिय  जनता कि सहन शक्ति कि कटिन परीक्षा भी थी .
योजना अयोग़ के पूर्व सदस्य एन सी सक्सेना के नेत्रत्व वाली एक एनी समिति का भी आकलन हे कि देश में ५० फीसदी लग गरीव हें .
एक और समिति गठित हुई नाम सुरेश तेंदुलकर समिति , क्यों कि विश्व बैंक ने भी २ डालर से कम व्यय क्षमता में ७५.६ प्रतिशत भारतियों को माना था और उसके अनुसार भी १ डालर से कम व्यय क्षमता में ४१.६ प्रतिशत लोगों को माना हे तेदुलकर समिति ने भी यह माना कि वर्तमान बी पी एल कार्ड जिस प्रारूप के अधर पर बने हें उसका एक मानक तो १९७३-७४ के दोरान कि किम्तोई के अधर पर  बना हे दुसरे शिक्षा और स्वास्थ्य के खर्च को खी जोड़ा ही नही गया हे . जो कि पेट भरने से कही ज्यादा हे . इस तरह से अब योजना अयोग़ ने २७.५ के बजे ३७.२ प्रतिशत गरीव लोग हें मान लिया हे . सवाल यह नही हे कि आपने १०-११ करोड़ और लोगों को गरीव मान लिया हे .सवाल यह हे कि जो गरीव गे उसे गरीव मान ने में आपत्ति क्यों हे .गरीव को गरीव मानों और उसके जीवन को ऊँचा उठाने कि योजनायें लागू करो .
खाद्ध सुरक्षा कानून  बना कर कोई उपकार तो कर नही रहे , भूख से कोई नही मरे यह  जिम्मेवारी तो केंद्र सरकार कि हे ही . यह एक राजनेतिक तमाशा या वोट लूटने का  कोई तरीका हो सकता हे .कानून आता भी हे तो विरोध कि कोई बात नही हे , मगर   गरीव कि परिभाषा  और उसकी गणना पर पहले संसद में  बहस  होनी चाहिए .   .

अरविन्द सीसोदिया
राधा क्रिशन मंदिर रोड ,
ददवारा , वार्ड ५९ ,  कोटा
राजस्थान . .. .          .

शनिवार, 22 मई 2010

एक ही उपलब्धी - तरसती जनता और तरसता गरीव


अब जोर से नारा लगाओ ,
सी बी आई  हमारी  हे हमको वोट दिलाती हे .
सी बी आई  जिन्दावाद कांग्रेस पार्टी जिदावाद .
य़ू पी ए कई सरकार कई दूसरी पारी का एक साल बीत गया हे . २१ मई २०१० को उसकी वर्षगांठ  थी
इस एक साल क़ी सबसे चर्चित उपलब्धी यही हे क़ी कांग्रेस के हाथ एक येशा मन्त्र लगा हे क़ी उसकी अल्पमत सरकार पूरे ५ साल चलेगी , क्यों क़ी भगबान क़ी दया से ज्यादातर प्रदेश स्तरीय दल और उनके नेता जी भ्रस्ट हें . सब पर आय से अधिक धन या सम्पत्ति हे . सबके  सब सी बी आई के दायरे में हें . सो हमारी सम्पत्ति हमें दो हमारा धन हमें दो और हमसे समर्थन ले लो , फायदा तो यह हे क़ी अब कांग्रेस को बिना मंत्री पद क़ी इक्षा  के भी वोट मिल रहे हें . खेर गत सरकार को नोटों से बचाने वाली कांग्रेस को यह तो फायदा ही हे क़ी अब बिना पैसा सरकार चलेगी .
- इस सरकार क़ी सबसे बड़ी कामयाबी यह हे क़ी सीना ठोक कर मन्हगाई बड़ी , सरकार रोज रोज मंहगाई बड़ ने से खुश हुई . उन्हें शर्म्म नही आई . सरकार के मंत्रियों ने बयाँ दे कर इसका स्वागत किया . जायज बताया . और भी बदने क़ी कामना क़ी . जेसे क़ी इन मंत्रियों को मन्हगाई में से कमीसन मिल रहा हो .वह रे मंत्रियों तुमने बहुत लुटवाया जनता को .
- भ्रस्टाचार
- आतंकवाद
- नक्सलवाद 
- बेरोजगारी 
- गरीवी
- बी पी एल को कार्ड नही 
- इलाज अमीरों का मोत गरिवो क़ी  
वर्शोएँ से यह मुद्दे जनता के हें . यथावत बने हुए हें . कांग्रेस हमेशा गरिवो क़ी बात करती हे मगर भूल कर भी गरिवो दो जून क़ी रोटी भरपेट नही खा ले यह द्यान रखती हे . गरीवी के नारे कई दसको  से गुज रहे हें मगर गरिवो क़ी संखया में निरंतर बडोतरी हुई हे
- योजना आयोग भूखे पेट पर लत मरने वाले पापी कहें जायेंगे .इन्होने गरिवो को गरीव शब्द  से भी बहर कर दिया ये स्टेट क़ी सरकारों को भी पहले से गिनती तय कर के देते हें क़ी आप के यहाँ इतनी संख्या में बी पी एल कार्ड बनेंगे . राजस्थान क़ी सरकार को तो मजबूर हो कर स्टेट बी पी एल बनाने पद रहे हें . भगबान योजना आयोग को गरीव क़ी रोटी छीन  ने के पाप से कभी मुक्त नही करेगा . अवश्य इन्हें दंड मिलेगा .
कुल मिला कर इन ६ सालों  क़ी एक ही उपलब्धी हे तरसती जनता और तरसता गरीव
अरविन्द सीसोदिया
राधा क्रिशन मंदिर रोड ;
ददवारा , कोटा .
राजस्थान . . .. .      .  

राजीव गाधी को , कांग्रेस की श्रधान्जली झूठी.....

राजीव गाधी की दुखद हत्या २१ मई १९९१ में हुई थी . तब यह सामने आया था की हत्या के लिए एल टी टी ई जिम्मेवार  हे उसकी सुबह चिन्तक ड़ी एम् के की करुनानिधि सरकार को १९९१ में बर्खास्त कर दिया गया था, तब कांग्रेस की १ नम्वर दुश्मन करुनानिधि की पार्टी थी . केंद्र में गुजराल सरकार का हिस्स भी ड़ी एम् के थी और जेन आयोग  ने भी इस की भूमिका को संदिग्ध ठहराते हुए टिप्पणी की थी . तब कांग्रेस ने गुजराल सरकार से समर्थन वापिस  ले लिया था . और सरकार को गिरा दिया था .तब तक कांग्रेस को और सोनिया जी को राजीव बड़े थे , दुश्मन दुश्मन था . मगर सत्ता का सुख बहुत बुरा होता हे सब कुछ भुला देता हे . आज जब भारत सरकार कांग्रेस चला रही हे तब कुराना निधि को गले लगाया जा चूका हे . कांग्रेस और करुणानिधि आब एक हें . कुछ साल पहले शत्रु थे , स्वार्थ की दोस्ती हे , राजीव की जाँच कर रहे, जेन  आयोग ने हत्या के लिए करुणानिधि के सामने ऊँगली उठाई थी . मगर सत्ता की लिए सब भूल गये .  .
प्रश्न यह हे की सोनिया के होते हुए भी जब स्वर्थ बड़ा हे तो फिर राजीव क्या हें . उनके तो वे पति थे और की बात छोडो मगर उन्हें तो यह नही कर्ण चाहिए था . अब उन्हें भी सतत की स्वर्थी खा जाये तो आपत्ति नही होनी चाहिए .
राजीव को पुरे देश ने श्रधान्नजली  दी हे , मगर कांग्रेस की श्रधान्जली झूठी मणि जाएगी . क्यों की वे करुणानिधि की गोदी में बेठी हे . उनके सहयोगी हें. उनको एक पूरा मंत्रालय लुटवा रहे हें .
यूँ तो विदेशों में , राजीव की हत्या के लिए कुआत्रोची  को जिम्मेव्र मन जा रहा हे . उसने एल टी टी ई का इस्तेमाल किया बताया जा रहा हे . पूर्व में कांग्रेस के भी उनसे आछे सम्बन्ध थे .करुणानिधि तो उनके कर्ण ही सत्ता में हे . अभी जब एल टी टी ई का जब लंका में सफाया हो रहा था तब भी करुणानिधि ने कांग्रेस को मजबूर कर दिया की वह एल टी टी ई के पक्ष में बोले .और वह बोली थी .
हम तो यहाँ यही कहेगे , कांग्रेस ने सत्ता  के   लिए सभी मर्यादाएं तोड़ डाली

अरविन्द सिसोदिया
राधा क्रिशन मंदिर रोड .
ददवारा , कोटा
राजस्थान . . . .  . .

शुक्रवार, 21 मई 2010

भारत संचार निगम - मुझे बचाव मुझे बचाव

भारत संचार निगम कुछ समय में घाटे में आकर डूब जायेगा और फिर इस बीमार सार्वजनिक उपक्रम कहलाने लगेगा , क्यों की गठबधन सरकार की सोदे बाज़ी में,.यह मॉल कमाऊ विभाग DMK  दल पर हे . यह दल is  विभाग से खूब पैसा बना रहा हे . इसमें सरकार की भी रजामंदी हे . क्यों की उन्हें सरकार चलानी हे .समर्थन चाहिए .
में खुद भी एक संसद सदस्य के निकट रहा हु और टी ए सी का भी सदस्य रहा हूँ . मेरा अनुभव  हे की जानबुझ कर भारत संचार निगम को  डुबोया जा रहा हे . इस निगम को बचने के लिए इसके कर्मचारियों ने प्रदर्सन किये हें . उन्होंने बहुत साफ साफ आरोप भी लगाये हें की भारत सरकार, प्राईवेट टेलिकॉम कंपनियों को लाभ पहुचने के लिए यह कर  रही हे यह सच हे की भारत संचार निगम के लिए जितने उपकरण चाहिए उसे खरीदने की अनुमति नही मिल रही हे . उसे मंत्रालय जानबुझ  कर vilnmv  दर विलम करता जा रहा हे ताकि प्रिवेट कंपनियों को लाभ हो जाये और बी एस एन  एल की गुणवत्ता खराब हो जाये . यह कृत्य लंबे सालों  से चल  रहा हे , anekon bar prsn snsad ke sadnon men uth chuke hen .  प्रधान मंत्री को जानकारी में हे . गठ बंधन  की कीमत हे . केंद्र सरकार नें आँख मुद ली , विज्ञापन  के कारण मिडिया भी मोन हे .
२ जी स्पेक्ट्रम की नीलामी ही नही हुई  . पहले आओ और पहले  पाओ के आधार पर आबंटन कर के खूब मॉल बटोर , इतना बटोर की कोई भी इसका अंदाजा ही नही लगा सकता . आभी हो हल्ले के कारण ३ जी की नीलामी बोली के आधार पर हुई ६७,७१० करोड़ रूपये की राशी सरकार को मिली  . यदि यही तरीका २ जी में रखा होता तो , इस राशी से की गुना ज्यादा राशी सरकार को मिलती , इसका कारण यह हे की उपभोक्ता बाजार २ जी का ज्यादा हे . kii  गुना हे . mgar use phle aao or phle pao ke aadhar par matr 1651 carod rupye men 2007-08 men de diya .is men bhri brshtachar huaa he . vah aabntan rdd ho kar fir se nilami honi chahiye .
भारत सचार निगम को बचना हे तो इसे डी एम् के से लेना  होगा और किसी दुसरे जिम्मेवार मंत्री  को देना चाहिए . ए राजा से पहले भी यह मंत्रालय डी एम् के कोटे के मंत्री पर ही था और तब से ही इसका गला दबाया जा रहा हे . सच यह हे की यह निगम चिल्ला कर कह रहा हे की मुझे बचाव मुझे बचाव , sch yah he ki  
सच यह हे की २ जी स्पेक्ट्रम की पूर्व आबंटन रद्द कर , दुबारा हो तो दूध का दूध और पानी पानी हो  जायेगा
अरविन्द सीसोदिया 
राधा क्रिशन मंदिर रोड ,
ददवारा कोटा . 
राजस्थान .    

मंगलवार, 18 मई 2010

अफजल गुरु जेसे आतंकवादी कांग्रेस के घरजमाई


न्यू देहली , संसद भवन पर १३ दिसम्बर २००१ को हमला हुआ था , उस का मास्टर माईंड अफजल गुरु को स्थानीय अदालत २००२ में , उच्च न्यायलय २००३ में और सर्वोच्च न्यायाके २००५ में फांशी की सजा सुना चूका हे , अब किस बात का इंतजार हो रहा हे । संसद पर हमला देश के मष्तिष्क पर हमला था , सिपाहियों की सूझ बुझ से सांसद बच गये तो आप खामोश ही हो गये ।


यह मामला और अन्य मामले भिन्न हें , यह मामला देश की सम्प्रभुता की गिरेवान पर हाथ डालना हे। इस तरह के मामले में , कोई क्रम बाध्यता नही देखि जाती । इंदिरा जी के हत्यारों ने भी बचाव का यह रास्ता चुना था मगर उसका निव्टारा तुरंत कर दिया गया था । कोई कानून नही हे क्रम का । जब तय हे की दया याचिका का कोई महत्व ही नही हे तो विल्म्वित करने का क्या ओचित्य हे ।


सामान्य प्रकरणों में दया याचिका का पश्न हे । मगर देश के साथ युद्ध जेसे विषयों पर जब यह तय हे की माफ़ी होही नही सकती तो लम्बित करने का मतलब क्या हे . कांग्रेस के प्रवक्ता कह रहे हें की अभी तक राजीव गाँधी के हत्यारों को फंशी नही दी गई हे . बुरा न मने विदेशों में तो राजीव जी की हत्या के लिए कुँत्रोची को जिम्मेवार ठहराया जा रहा हे . आप राजीव गाँधी के हत्यारों को क्यों बचा रहे हो यह तो तुम से ज्यादा कोन जान सकता हे ।

अरविन्द सीसोदिया

राधा krshan   मंदिर रोड ,

ददवारा , कोटा ।


रविवार, 16 मई 2010

शेखावत - एक जीवन परिचय


राजस्थान का एक ही सिंह, भेंरोसिंह..... , भेंरोसिंह..... ,

यह नारा बहुत सालों से गूजता रहा , अब यह नारा नही लगेगा , क्यों की शेखावत साहव नही रहे । १६ मई २०१० को उनकी अंतिम यात्रा निकली जिसमें जयपुर सहित राजस्थान से भारी संखया में लोग पहुचे । देश की जानी मानी हस्तियआं समिलित हुई ।
यात्रा मार्ग में रह रह कर बार बार गूजता रहा ......
जब तक सूरज चाँद रहेगा , शेखावत तेरा नाम रहेगा।
वे सचमुच राजस्थान की शान थे ।

उनका जन्म धनतेरस, २३ अक्तूबर १९२३ को हुआ था ।
पिता देवीसिंह अध्यापक और माता बन्ने कंवर , मध्यम वर्गीय राजपूत परिवार था ।
शेखावत सूर्यवंशी कछवाह राजपूत होते हें ।
उनके तीन भाई विशन सिंह , गोर्धन सिंह, लक्ष्मण सिंह ।
शिक्षाफर्स्ट इयर ,
विवाह १९४१ में सूरज कंवर से विवाह कर दिया गया .इसी वर्ष पिता जी का देहांत हो गया । सो उन्हें पुलिस की नोकरी करनी पड़ी मगर १९४८ में पुलिस छोड़ दी। तब राजस्थान की गठन प्रक्रिया चल रही थी ।
वे जनसंघ के संस्थापक काल से ही जुड़ गये और जनता पार्टी तथा भा ज पा की स्थापना में भी सक्रिय रहे ।
१९५२ में वे १० रूपये उधर ले कर दाता रामगढ से दीपक चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़े और जीते । तब से उनका सफर लगातार चलता रहा वे 1० वार विधायक , १९७४ से १९७७ तक राज्य सभा के सदस्य रहे ।
तीन वार मुख्य मंत्री बने।
पहली वार २२ जून १९७७ से १५ फरवरी १९८० तक ।
दूसरी वार ४ मार्च १९९० से १५ दिसम्बर १९९२ तक । और
तीसरी वार १५ दिसम्बर १९९२से ३१ दिसम्बर १९९८ तक ।
और तिन बार वे नेता प्रति पक्ष भी रहे,
पहली वक्र १५ जुले १९८० से १० मर्च १९८५ तक
दूसरी वार २८ मार्च १९८५ से ३० दिसम्बर १९८९ तक ,
तीसरी वार ०८ जनवरी १९९९ से १८ अगस्त २००२ तक ।
उनके एक पुत्री रतन कंवर हें । दामाद नरपत सिंह राजवी भी मंत्री रहे हें । शेखावत के दो दोहते और एक दोहिति हे , मूमल दोहिति और विक्रमादित्य तथा अभिमन्यु दोहिता ।
१२ अगस्त २००२ को देश के ११ वें उप राष्ट्रपति बने।कार्यकाल १९ अगस्त २००२ से २१ जुलाई २००७ तक ।
वे एक जन नेता थे ,उन्हों ने राजस्थान के १० अलग अलग स्थानों से विधान सभा चुनाव लड़े और उनमें से ८ में विजय प्राप्त की । वे १ से ११ तक की राजस्थान विधान सभों में से मात्र ५वि में नही थे । अर्थार्त १० विधान सभा चुनवों में वे जित कर गये थे ।
अपत कल में १९ माह जेल में रहे । विधायक दल के नेता भी अनेक वार रहे ।
वे पार्टी में अनेकों पदों पर रहते हुए,प्रदेश अध्यक्ष , राष्ट्रिय उपाध्यक्ष और किसान मोर्च के राष्ट्रिय अध्यक्ष बने।
अरविन्द सिसोदिया
राधा क्रिशन मंदिर रोड ,
ददवारा , कोटा। राजस्थान ।

शनिवार, 15 मई 2010

शेखावत - एक जन नेता का जाना


१५ मई २०१० को उप राष्ट्रपति रहे भैरो सिंह शेखावत का निधन हो गया । पूरी आयु पा कर वे गए । काफी दिन से केंसर के बीमार थे । उनकी मुक्ति पर शोक का कोई कारन नही हे । वे महान नेता थे । बहुत लम्बे राजनेतिक जीवन में उन पर कभी कोई लांछन नही लगा । नही कभी ओछी राजनीती का आरोप आया । राष्र्टवादी राजनीती के शीर्ष पुरुष थे । अटल जी और अडवानी जी के समान उनका नाम भी , गेर कांग्रेसी दिग्गजों में सुमार होता हे ।
यु तो बहत सी बातें हें जिन्हें गिनाया जा सकता हे । मगर एक बात ही सबसे बड़ी हे की ,१९७७ तक आम तोर पर सरकार जनता पर बड़ी धन राशी खर्च नही करती थी । अन्त्योदय योजना के द्वारा उन्हों ने सबसे पहले गरीव आदमी को , पिछड़े आदमी को धन उपलध करवा कर , उसके जीवन स्तर को ऊँचा उतने का काम प्रारंभ किया था । उही की योजनाओं के कारन आज , बहुतसी योजनायें गरीबों के पक्ष में बनी और लागु हुई ।
उन्हें ही ओ बी सी वर्ग को सब से पहले राजस्थान में अरकक्ष्ण देने का shrey जाता हे।
वे एक आम आदमी के नेतृत्व करता थे । उन्होंने हमेसा एक आम आदमी की हिमाकत की । इतिहाश में उनकी राजनेतिक शेली पर लम्बे समय तक शोध होते रहेंगे ।

अरविन्द सीसोदिया
राधा क्रिशन मंदिर रोड , ददवारा ,कोटा
राजस्थान ।
dadawara , kota .

शुक्रवार, 14 मई 2010

मुलायम,मायाबती,लालू और शोरेन - गरिवों के वोट से आमिरी का आनंद

राजनीती में अपनी पोजीसन से अकूत कमाने वाले नेताओं में चर्चित मुलायम , मायाबती , लालू और शोरेन सहित बहुत से नाम हें । इनकी शिरू आती पोजीशन की भी पड़ताल होनी चाहिए ।
१ -मायाबती - दिल्ली के करोल बाग़ स्थित संत नगर स्लम बस्ती में एक कमरे में रहती थी। इनके पिताजी प्रभुदयाल जी गोलडाक घर में मामूली पेकर थे , ये खुद नगर निगम के प्रैमरी स्कूल में नोकरी करती थी। इनके पास कितनी सम्पत्ति हे यह इन्हें खुद ही पता नही हे । सभी अंदाजों से कही ज्यादा । २ -मुलायम - आगरा के एक स्कूल में ७० रूपये मासिक के मामूली अध्यापक थे , १५०० करोड़ की सम्पत्ति बताई जाती हे। उच्च तम न्यायलय ने जाँच के आदेस दिए थे । मजबूत मुकदमा था । जब भी कांग्रेस कहती हे ये तमाम तमासें के बाद भी वोट उशी को देते हे ।
३- लालू प्रशाद - गोपाल गंज , बिहार में बहुत ही मामूली परिवार में जन्मे , जयप्रकाश जी के आन्दोलन में राजनीती में आये , पहले संसद बने, फिर विधायक और बिहार के मुख्य मंत्री , चारा घोटाले में जेल गये , पत्नी को मुख्य मंत्री बनाया , अमीरी की पो बहार हे । कोन नही जनता की यह कहाँ से आई हे ।
४- शिबू शोरेन - झारखंड के आदिवासी नेता हें , नरसिह राव सरकार में , सरकार बचने के लिए धन लेने वाले नेताओं में इनका दल था । धन लेना प्रमाणित भी हुआ था , नरसिह राव जी को एक अदालत में सजा भी हो गी थी । ये बिकाऊ नेता जी सभी सरकारों में जुगाड़ बिठा लेते हें । खूब कमाया हे , निजी सहायक की हत्या में भी इनका नाम आया था ।
ये वे नेता हें जो कांग्रेस का विरोध कर के प्रांतीय राजनीती में जमे हें । लोगो ने इन्हें वोट इसलिए दिया की ये कांग्रेस के कुशासन से मुक्ति दाता के रूप में उभरे थे । मगर जेसे जेसे इन्होनें पोजीसन से फायदा उठाया और धन दोलत बनाने के चक्कर में फंसे उलझते चले गए ।
ये जितना कांग्रेस से डरेगें उतना निबट जायेंगे , क्योंकी इनका मूल वोट तो कांगेस विरोधी हे , ये जितना ज्यादा कांग्रेस के साथ होगे उतना ज्यादा इनका वोट कांग्रेस में सिफ्ट हो जायेगा । जेसा लालू भुगत चुके हे ।
खेर आसल बात तो यह हे की इन नेताओं को यह तो सोचना चाहिए की जिन गरीव से वोट लेते हें , जिन का प्रतिनिधित्व करते हें , उनके मसलों पर तो उनके साथ रहे । ये जिस मसले पर बीके हें वह तो गरीव का ही था । वोट गरीव से लो और उसे अपना मॉल बनाने के लिए बेंच दो, यह तो ठीक नही हे। मंहगाई तो गरीव का मुद्दा था । पुरे देश में तुमारी ही पार्टी महंगाई का विरोध कर रही थी । और सदन में तुम बिक रहे थे । तुमें तो चुलू भर पानी में डूब मरना चाहिए । बड़ी बड़ी बातों से डींग मारना और पुस हो जाना कोई तुम से सीखे ।

अरविन्द सीसोदिया ,
राधा क्रिशन मंदिर रोड
ददवारा , वार्ड ५९ , कोटा ।
राजस्थान।
arvind sisodia
radha kishan mandir road
dadawar, kota ।

बुधवार, 12 मई 2010

सीबीआई - सोनिया जी की बाई .....


भा ज पा ने संसद में सी बी आई के चाल चलन को ले कर बहस करना चाहती थी मगर वह नही हो सकी । तब उन्होंने महामहिम से मिलने का और देश भर में १२ मई २०१० को धरना करने का कम किया । इस से जन जागरण तो हुआ हे मगर यह विषय अभी भी एक दम से समझ में नही आ रहा हे और ज्यादा आच्छे डंग से समझाना होगा ।
कांग्रेश ने तो आपना हित इसलिए साध लिया की लालू मुलायम माया सिबू और न जाने कितनी लम्बी कतार हे राजनीती में जिन्होनें सात सात पीढ़ी का इंतजाम कर लिया हे । पोजीसन के प्रभाव से पैसा बनाने में सभी ने कांग्रेश की नक़ल की हे । यह तो आच्छा हे की उनकी पहुच बड़ी बड़ी मछ्लीयें पर ही हे अन्यथा हजारों की संखया में छुट भेइया नेता भी फंसे होते । देश में भक्त कुछ भगबान भरोसे चल रहा हे उसमें न्याय भी हे । कांग्रेस ने सी बी आई का दूर उपयोग तो जम कर किया हे , क्वात्र्ची को बचाने में क्या कुछ नही किया , समझ से परे तो उन नमक हरामों की हे जो तनखाह तो जनता के टेक्स से लेते हें और बजाते भ्रष्ट नेताओं की हे , इससे भी शर्मनाक सिख विरोधी १९८४ के दंगों के मास्टर माइंड कांग्रेस के दिग्गज नेता जगदीश टाईटलर को अदालत से बरी करबाने में किया गया । हजारों सिख सरे आम कांग्रेस के लोगों नें nrr sans डंग से मर डाले और सजा किसी को नही ...
पेट्रोल पम्प आबंटन में सतीश शर्मा के विरुद्ध चल रहे १५ केस बंद करवा दिए । इसी तरह छतीस गड़ के पूर्व मुख्य मंत्री अजित जोगी के बचाया ।
कांग्रेस को समर्थन देने वाले लालू और मुलायम के अकूत धन से जुड़े मामले कभी डिले कभी खीचें रख कर उसको कांग्रेस के पक्ष में वोट डालने के लिए मजबूर करती हे । ये कागजी शेर एक संदेश पर पेरों में आ गिरते हें । जय जय सोनिया जी और जय जयकांगेरस बोलने लगते हें । यही हाल माया बती का हे , २७ अप्रेल २०१० को जब केंद्र sarkar गिरने बाली थी तब बसपा के २१ सांसदों की मदद ली गई । यही डर लालू मुलायम को सदन के बहार रखने में सफल हुआ हे । कुल मिला कर सी बी आई कांग्रेस की नही बल्कि सोनिया जी की बाई कह लाने लायक हे । कांग्रेस ने कई संस्थानों का जम कर उपयोग किया हे , देश का अरबों खरबों लुटा हे यदि दम हे तो स्विस बेंको में जमा १४५६ अरब अमेरिकी डालर का काला धन किन किन भारतीयन का हे , उनके नाम सी बी आई बताये
सी बी आई तीन काम कर रही हे ,
१- कांग्रेस से जुड़े लोगों के केस ख़त्म कर बाना। जेसे क्वात्रोची , टाईटलर, सतीश शर्मा और अजित जोगी ।
२- कांग्रेस को समर्थन दे रहे एनी दलों के नेताओं को , सी बी आई के प्रकरणों से दवाव में रखना और वक्त जरूरत उनसे अपने पक्ष में मत प्राप्त करना । मुलायम सिंह यादव , लालू प्रशाद यादव , मायावती , शिबू सोरेन , करुना निधि , शरद पंवार और आन्य ।
३- जो दल कभी साथ नही दे सकते उनको सी बी आई के द्वारा खूब परेसान करना जेसे गुजरात सरकार और उसके अधिकारी गन । बीजेपी के अडवाणी पर , नरेन्द्र मोदी पर , शिव सेना पर, हिन्दू संगठनों पर ।
सी बी आई के क्रिया कलापों पर न्यायालयों को कड़ी नजर रखनी चाहिए , उनके किसी भी आरोप पर उनसे प्रतिबधता लेनी चाहिए और फिर पलटने की इजाजत नही देनी चाहिए । जहाँ कोई न नुकुर करे वही उस पर कड़ी टिपणी भी करनी चाहिए और उसे गेर जिम्मेवार करार देना चाहिए ।

अरविन्द सीसोदिया
राधा क्रिशन मंदिर रोड ,
ददवारा वार्ड ५९ ; कोटा ।
राजस्थान .

शनिवार, 8 मई 2010

विदेसीकरण का बड़ता प्रभाव

एक तरफ भारत आजाद हो रहा , दूसरी और कोमनवेल्थ की इतनी जल्दी थी की ,संविधान सभा में तक बहस नही चाहते थे , वह तो राजेन्द्र प्रशाद जी का भला हो कि उन्होंने सदस्यों को बोलने कि इजाजत दे दी ।
नेहरु जी ने देश को स्वभाविक रूप से स्वतंत्र नहीं होने दिया । वे विदेश में पड़े लिखे । उन्हें विदेशी विचार और चाल चलन कुछ अधिक ही पसंद थे । फिर उनका रूस प्रेम सबने देखा हे । उनका काम्नुज्म प्रेम तो इतना अधिक था कि उन्होंने चीन कि मदद करने के लिए तिब्बत पर जो भारत के अधिकार थे वे भी चीन के कारण छोड़ दिए । चीन को इक रास्ट्र का दर्जा दिया और उसके लिए संयुक्त रास्ट्र संघ में गये । चीन ने काम निकलते ही भारत को हडपने का काम शिरू कर दिया । नतीजा १९६२ का युध और इसके वाद से लगातार अघोसित युध । पाकिस्तान ने चीन की ही सह पर भारत से युद्ध लड़े और आतंकवादी लड़ाई लड़ रहा हे ।
बहुत सी कहानियां हें जो विदेशी प्रेम के कारण हुए नुकसान कि गवाही देती हें ।
मगर यह सब जान कर भी हाल ही में , विदेसी विश्व विद्यालयों के भारत में प्रवेश का रास्ता साफ कर दिया और अमेरिका के साथ परमाणु संधि का कानून बिना बहस के पास कर दिया, इतनी भी क्या जल्दी हे , आप सरकार भारत की हें या अमेरिका की । आप का विदेस प्रेम कुछ गलत होने की बू दे रहा हे । kisi विदेशी अजेंडे के तहत तो आप काम नही कर रहे हो । सच क्या हे बता भी दो ।
जब इक विदेशी महिला के हाथ में देश कि सरकार हो तो उससे तो यही होना तय हे मगर अफ़सोस तो यह हे कि बाकी संसद सदस्यों का जमीर भी मर गया क्यासब के सब गुलाम हो गये क्या.
arvind sisodia
radha krishna mandir road
dadwara kota jn.

शुक्रवार, 7 मई 2010

माओबाद की तारीफ करता को जेल होनी ही चाहिए

केन्द्रीय ग्रह मंत्री पी चिदम्बरम खुद तो माओबाद और नक्सलबाद के प्रति कट्टर नजर आ रहे हें । यह बात दूसरी हे की कांग्रेस और उसके कुछ साथी उनसे सहमत नही हें । कांगेस महा सचिव दिग्विजय सिंह ने कांग्रेस की अंदरूनी सच्चाई को एक लेख के जरिये भले ही उजागर कर दिया हो मगर पार्टी के रूप में कांग्रेस सिंह का समर्थन खुल कर नही कर सकती हे । लेकिन सच यही हे की कांग्रेस सत्ता के लिए अन्दर से हाथ मिलाये हुए हे । उसका साथी दल ममता जी तो खुले आम पश्चिमी बंगाल में माओबाद का साथ ले रही हें ; आन्ध्र में कांग्रेस ने साथ लिया था । कहाँ कहाँ हाथ मिले हें यह तो कांग्रेस और उसके साथी ही जाने मगर अब यह समझ जाना चाहिए की ये देश के दुश्मन हें । कहा जाता हे की भारत की पूरा संपदा को कभी की लित्ते के जरिये ही चोरी छुपे इटली भेजा जाता था , सोनिया जी के रिश्ते की दुकान में बाद में उसी ने राजीव को मार डाला । शेतन की दोस्ती भी बुरी और दुश्मनी भी बुरी , इसलिए माओबाद और उसके हिन्दुस्तानी रूप नक्सलबाद से रास्ते तोड़ो ।

संसद में भले ही चिदम्बरम ने पोटा और टाडा की आवश्यकता नकार दी हो , वे विपक्ष के नेता अरुण jethali की बात का खुले में सर्थन नही करना चाहते होंगे मगर उनके ही मंत्रालय ने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से यह स्पस्ट कर अचछा किया की माओबाद की प्रशंसा १० वर्ष की सजा का अपराध हे । क्यों की एक तरफ तो ये हथियार के बल पर गरीबों को विकास और मानवीय सुविधों से दूर रखा रहें हें और किराये के बुधीजीवियों से अपने फेवर में लेख लिखवाते हें । अवेध गति विधि अधिनियम १९६७ के खंड ३९ की प्रति मिडिया को ही भिजबानी जरूरी हे । क्यों की आज मीडिया में न्यूज और विचार बिकते हें । व्यापारी करण की ओट में रास्ट्रहित भी तक पर रखे जा रहे हें ।

अरविन्द सीसोदिया

राधा क्रिशन मंदिर रोड ,

ददवारा , वार्ड ५९ , कोटा २

राजस्थान ।

गुरुवार, 6 मई 2010

सुनो लालू जी तुम गद्दार - अनंत तुम शावास


प्रत्येक जनगणना में यह प्रश्न उभरता हे की , कुछ मामलों में जनसंख्या अविश्वसनीय प्रक्रति से बड रही हें और इसका कारन सामन्य जन्म दर नही हे । विशेषग्य मानते हें की इसके मूल में घुसपेठ ही हे । बंगला देस की करोड़ो की आबादी हर वर्ष भारत में घुस आती हे । इन्हें बंगला देसी कहते हें । ये योजना पूर्वक भारत में घुस पेठ कर मतदाता सूचि में अपना नाम जुड़ बाते हें । रासन कार्ड सहित सारी सुबिधायें प्राप्त कर लेते हें । क्यों की हम बहुत भ्रष्ट हें । असम में इनकी संख्या हार जीत का निर्णय करती हे । पश्चिमी बंगाल और बिहार के कई जिलों पर इनका प्रभत्व हो गया हे । कई चुनाव क्षेत्र इनके समर्थन से जीते जाते हें । कुल मिला कर मुस्लिम बहुलता लेन के सभी तरीके चल रहे हें उनमें से एक घुस पेठ भी हे। यह जग जाहिर और खुले आम हे।
यह भारत को मुस्लिम जनसंख्या को बढ़ा कर इस्लाम के नियन्त्रण में लेने की साजिस हे ।
१९४७ का १४ अगस्त इस बात का गवाह हे की जब मुस्लिम बलसाली हुआ , तब उसने कांग्रेश के ही छति पर पैर रख कर पाकिस्तान बना लिया । कश्मीर में अलगाव की यही बहुसंख्य समस्या हे । जहँ भी हिदू कम हुआ वहीं देश से अलग होने की बात उठने लगती हे । तथा कथित सेकुलर मुर्ख हें । उनके सेकुलिरिज्म में सिर्फ वोट का लोभ समिलित हे । इसके पीछे छिपे बहुत बड़े नुकसान को वे नजर अंदाज कर रहे हें । जब नुकसान अपने मुकाम पर पहुच जाएगा , तब वे इन सेकुलिरिज्म धारकों को कचरे डिब्बे में डाल देंगे , फिर इक नया पाकिस्तान माँगा जायेगा ।
जनगणना में हर किसी का नाम नही लिखा जाना चाहिये, शुद्ध रूप से देखन होगा की वह व्यक्ति हमारे देश का हें की नही । तमासे करने बाले जोकरों के भरोसे देश की अस्मिता खतरे में नही डाली जा सकती । लोक सभा में लालू का तमाशा गलत था और अनंत कुमार सही थे ।
अरविन्द सीसोदिया
राधा क्रिशन मंदिर रोड ,
ददवारा ; कोटा २ ।

मंगलवार, 4 मई 2010

हिंदुत्व- कुंडलनिया जाग्रत हो गई प्रहलाद जानी की


प्रहलाद जानी अहमदावाद के एक अस्पताल में आइसोलेसन वार्ड में रखे गये हें । जहाँ भारतीय रक्षा अनुसन्धान संस्थान विभाग उन पर निकट से निगरानी रख रहा हे । संस्थान का मानना हे कि जानी में कोई नैसर्गिक गुण हे , जिसकी मदद से वो जीवन बचा सकता हे , जानी अनेकानेक वर्षों से बिना अन्न जल के जीवित हें। उनकी उम्र ८१ वर्ष की हे और ७० वर्ष से उन्होंने अन्न जल ग्रहण नही किया हे ।

निगरानी कर रहे डॉक्टरों का कहना हे कि भूख और प्यास का इनके शरीर पर कोई विपरीत असर नही हे। वैज्ञानिको का कहना हे कि जानी किस तरह से भूख पर विजय पाए हुए हें यह रहस्य पता लग जाये तो आपदा , सेना और अन्तरिक्ष यात्रा में भारी मदद मिलेगी ।

डिफेंस इंस्टीटुट आफ फिजियोलाजी एंड एलायड साइंस के निदेसक डॉ जी इलावघागन के साथ ३५ विशेषज्ञ कि टीम आश्चर्य में हे कि , बिना अन्न जल के ही जानी के संस्त अंग सही सही कम कर रहे हें ।

अन्न बिना कुक्ष भी सम्भब नही हे , एक्सज जल के बिना तो किडनी काम ही नही कर सकती , जानी के शरीर में बिना जल पिए पेसाब बन रहा हे और शरीर में ही अवशोषित हो रहा हे । किडनी सही काम कर रही हे और रक्त प्रणाली पूरी तरह सही हे । उनकी सभी आधुनिक जाचें निरंतर हो रही हें , विज्ञानं स्तब्ध हे । माजरा क्या हे। उनकी एम् आर आई कि गई तो वह २५ वर्ष के नव युवक के सामान थी ।

जानी कि ७\८ वर्ष कि आयु में ही कुंडलनिया जाग्रत हो गई थी । तब से उन्होंने अन्न जल त्याग दिया था । वे माता के पुजारी हें । अन्म्बा जी के निकट गब्बर पर्वत के पास माता जी के मंदिर में उनका निवास हे , वे सुबह ३ बजे उठा कर मन्दिर कि सफाई कर पूजा करते हें । वे अपने ध्यान वाले कक्ष में अकेले रहते हें ।

सबसे बड़ा विज्ञानं तो इस्वर का ज्ञान ही हे , हम उसकी व्यवस्था को जन कर समझ कर ज्ञानी हो जाते हें । मगर हम भूल जाते हें कि सब कुछ इश्वर के द्वरा स्थापित हे। हम तो उस में से कुछ को समझ कर अपना काम हल कर लेते हें । और अपने को ज्ञानी मन ने लगते हें ।

अरविन्द सीसोदिया

राधा क्रिशन मंदिर रोड ,

ददवारा , वार्ड ५९ ,

कोटा २ , राजस्थान ।

सोमवार, 3 मई 2010

खेलसघ का पदाधिकारी खिलाडी क्यों नही

हम आज तक नही समझ सके की खिलाडी को खेल संघ का अध्यछ या पदाधिकारी बनाना अनिवार्य क्यों नही होता । नियम तो सरकार बनाती हे । अभी एक पदाधिकारी को दो वार पद पर रहने का नियम बनाना भी एक प्रकार से राजनेतिक लोगों के लिए फायदा पहुचाना हे । खेल मंत्री जगे तो सही मगर अधूरी ईमानदारी से ... , वर्तमान खेल संघों से खेल की दुर्दसा का कारन पूछा जाना चाहिए ।
लालू का शरद का या सी पी जोशी का क्रिकेट से क्या लेना देना । मगर पदाधिकारी ये हें । जो क्रिकेट खिलाडी हें उनकी स्थिति तो कर्मचारी जेसी हे । येसा सभी जगह हे । सभी खेल संघों में हे । सभी खेल संघों में सही पदाधिकारी नही हें । कहीं धना सेठ या कही राजनेता इन पदों पर बेठे हे । क्रिकेट में भी काफी समय तक दुर्दशा रही हे । खिलाडियों की म्हणत पर पूजीपति मजे कर रहे हें । सबाल यह हे की इनका इसमें सहयोगी योगदान भी नही रहा , आज खेल की दुर्दशा इन्ही के द्वारा हुई हे ।
विश्व में भारत का नाम इन्ही के कारन कलंकित हुआ हे । सच यह हे की अगर खेल संघ सही बन जाए तो देश का नाम कलंकित होना बंद हो जाय । हमारी विश्व प्रतियोगिता में नाम रोशन होनें लगे , मगर in bich के दलालों नें कभी इस बात पर नही सोचा । सच यह हे की खेल के सही विकास के लिए , राज्य स्तर पर विधयलयीं व्यवस्था को मजबूत किया जाना जरूरी , इनमें खेलों को प्रोत्साहन देना जरूरी हे । इन्ही टीमों को मान्यता दें । २० \ २० स्कूल स्थर पर क्यों नही हो सकता । सवाल सर्कार के द्वरा सही कदम उठने की हे ।
अरविन्द सीसोदिया ,
राधा क्रिशन मंदिर रोड ,
वार्ड ५९ , कोटा २,
राजस्थान ।
arvind sisodia
radha krisan mandir road ,
dadwara , ward 59 , kota 2
rajsthan .