रविवार, 20 जून 2010

हरभजन नही हनुमान कहो, भारत की शान कहो !

हरभजन नही हनुमान कहो, भारत की शान कहो !
- अरविन्द सिसोदिया   
अंतिम ओवर में भारत को जीत के लिए सात रनों की जरूरत थी और उस वक्त रैना और हरभजन मैदान पर थे और पाकिस्तानी कप्तान शाहिद अफरीदी ने तेज गेंदबाज मोहम्मद आमेर को मोर्चे पर लगाया। पहली गेंद पर रैना ने एक रन लिया। दूसरी गेंद हरभजन चूक गए पर रन लेने के चक्कर में रैना रन आउट हो गए। रैना के आउट होने के बाद भारत की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा।
चार गेंदों पर छह रन चाहिए थे. पुछल्ले बल्लेबाज प्रवीण कुमार ने दो और फिर एक रन लिया. आखिर की दो गेंदों में टीम इंडिया को तीन रन बनाने थे.बेहद रोमाचंक और दवाब वाली इस स्थिति में मोहम्मद आमेर के सामने स्ट्राइक पर हरभजन सिंह थे. युवा गेंदबाज आमेर ने जैसे ही गेंद फेंकी, हरभजन सिंह ने उसे सीधे मिड विकेट के ऊपर हवा में उठाते हुए सीमा रेखा के पार पहुंचा दिया.इस जीत के साथ ही भारत ने बीते साल चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान मिली हार का हिसाब चुकता हुआ   और पाकिस्तानी टीम को एशिया कप से बाहर का रास्ता दिखाया.
    हलांकि  गोतम   गंभीर मेन  ऑफ़ द मैच रहे , लेकिन जीत के लिए हरभजन सिंह को ही याद किया जाएगा. भज्जी ने 11 गेंदों पर दो छक्के जड़कर 15 रन बनाए और टीम को जीत के दर्शन कराए. इस जीत के साथ ही अब भारत एशिया कप के फाइनल में पहुंच गया है. यह तो भगवन ही जानता होगा की पाकिस्तान में कितने टी वी सेट फूटे  होंगे !  पुरानी बात हे जब जाबेद मियादाद ने आखरी गेंद पर छक्का मार कर भारत को हराया था .शरजाह कप में चेतन शर्मा की उस आखिरी गेंद का आज तक नहीं भूला पाया हूं, जिस पर कि जावेद मियांदाद ने छक्का मारा था। उस आखिरी गेंद को टीवी पर करते देखना मेरे भाग्य में नहीं था। हुआ था यूं कि एक बॉल पर शायद छह रन बनाने में थे, मैं भारत की जीत को सुनिश्चित मान पानी पीने चला गया और सोचा सेलिब्रेट करेंगे, इतने में फिर लौटकर आने के बाद पूरी सीन ही बदली मिली थी। पाकिस्तानी खिलाड़ी ऊपरवाले को शुक्रिया अदा कर रहे थे।  सोचा क्या बात हो गयी और जब रिप्ले देखा, तो धत, तेरे की। 
दाम्बुला (श्री लंका ) एशिया कप 2010 में शनिवार को खेले गए एक रोमांचक मुकाबले में भारत ने पाकिस्तान को तीन विकेट से करारी शिकस्त दी। पाकिस्तान की ओर से जीत के लिए रखे गए 268 रनों के लक्ष्य का पीछ करते हुए भारतीय टीम ने 50वें ओवर में सिर्फ एक गेंद शेष रहते जीत दर्ज की। अंतिम ओवर में भारत को जीत के लिए सात रनों की जरूरत थी और उस वक्त रैना और हरभजन मैदान पर थे और पाकिस्तानी कप्तान शाहिद अफरीदी ने तेज गेंदबाज मोहम्मद आमेर को मोर्चे पर लगाया। पहली गेंद पर रैना ने एक रन लिया। दूसरी गेंद हरभजन चूक गए पर रन लेने के चक्कर में रैना रन आउट हो गए। रैना के आउट होने के बाद भारत की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा। लेकिन सरदार हरभजन सिंह ने जो कुछ किया वह हनुमानजी के द्वारा लंका दहन  से कम  नही था , लग यह रहा था की अब  नही जीत सकते , मगर हरभजन ने छक्का मार कर पूरे देश का दिल जीत लिया . १९ जून २०१० के तो हीरो वे ही हें  .
- राधा कृष्ण मन्दिर रोड ,
डडवाडा , कोटा २ . राजस्थान .

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें