बुधवार, 9 जून 2010

भोपाल गैस त्रासदी - अर्जुन सिंह रहस्य बता दो, कोंन था जनसंहार का सोदागर !

  भोपाल गैस त्रासदी , एक नरसंहार था, इस नरसंहार को इसी रूप में प्रस्तुत नही करने से सारी समस्या ने जन्म लिया हे , तब जो भी सत्ता में थे , उन लोगों का यह कम था कि सही विवेचना करते और सही ढंग से न्याय हो जाये यह सोचते , भोपाल पुलिस ने कम्पनी चेयरमेन को गिरिफ्तर किया ही था , बाद में ऊची राजनीती ने , लगता हे कि अन्याय करना शिरू कर दिया और इस विकराल महा अपराध को एक मामूली कर के एक्सीडेंट में बदल दिया . प्रशासन का दोष यह हे  कि उसने कानून  और देश के बजाये कुछ गलत लोगों के दवाव में काम किया , निश्चित रूप से कांग्रेस ही रही होगी , क्यों कि बाद में यह मामला सी बी आई को चला जाना भी तो इसी का सबूत हे , जरूरत तो अब फिर से सही जाँच  और सही न्याय दिलाने क़ी हे ,
सरकार क़ी दो प्रतिकियायें सामने हें - 
१- भोपाल गैस हादसे से जुड़े मामले में अदालत के फैसले से असंतुष्ट मप्र सरकार अब इसे हाईकोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार सुबह मुख्यमंत्री निवास पर पत्रकारों से चर्चा में कहा कि इस मामले में हस्तक्षेपकर्ता के रूप में सरकार हाईकोर्ट जाएगी। इसके लिए सरकार ने विधि विशेषज्ञों की एक कमेटी भी गठित की है।   कमेटी में भारत के एडीशनल सालीसिटर जनरल विवेक तनखा, प्रदेश के महाधिवक्ता आर डी जैन, पूर्व महाधिवक्ता आनंद मोहन माथुर, भाजपा विधि प्रकोष्ठ से जुड़े रहे शांतिलाल लोढा और प्रमुख सचिव विधि एके मिश्रा शामिल हैं। मिश्रा कमेटी के संयोजक हैं। श्री चौहान ने कहा कि कमेटी अपनी प्रारंभिक अनुशंसा दस दिन के भीतर और एक माह में अंतिम प्रतिवेदन सौंपेगी। सरकार 90 दिन के भीतर अधीनस्थ न्यायालय के निर्णय के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील कर सकती है। उन्होंने कहा कि अपील में गैस त्रासदी से जुड़े सभी पहलुओं, मुआवजा , पुनर्वास और उपचार आदि से जुड़े बिंदु भी शामिल किए जाएंगे।
२- वीरप्पा मोइली चाहे जितने वीरोचित बयान देते रहे मगर सच यही है कि वारेन एंडरसन को भारत नहीं लाया जाएगा। एंडरसन अगर भारत आ गया तो सबसे पहले तो यही पोल खुलेगी कि भोपाल में जमानत मिलने के बाद उसे अमेरिका जाने कैसे दिया गया? अमेरिका सरकार तो पहले ही इनकार कर चुकी है, कह चुकी है कि एंडरसन एक सम्मानित अमेरिकी नागरिक हैं और उन्हें प्रत्यर्पित नहीं किया जा सकता।
    इस सवाल का जवाब सिर्फ कांग्रेस नेता अर्जुन सिंह दे सकते हैं जो गैस हादसे के समय मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। खुलासा किया गया है कि अर्जुन सिंह एक सभा को संबोधित कर रहे थे और तभी मंच के पास मुख्यमंत्री के लिए लगाए गए फोन पर दिल्ली से एक फोन आया और इसके तीन घंटे के भीतर एंडरसन को रिहा करने के आदेश भी दे दिए गए और उसे दिल्ली पहुंचाने के लिए एक विशेष विमान का इंतजाम भी कर दिया गया।
   भोपाल में भी 7 से 11 दिसंबर 1984 तक एंडरसन सिर्फ तकनीकी रूप से गिरफ्तार था। हजारों लोगो के इस कातिल को हवालात में नहीं रखा गया बल्कि गेस्ट हाउस में वातानुकूलित और शानदार माहौल में वह आराम करता रहा। सिर्फ 25 हजार रुपए की जमानत पर उसे छोड़ दिया गया जबकि उस समय तक उस पर धारा 304 ही लगी थी जिसमें उम्र कैद तक का प्रावधान हैं। ऐसे मामलों में आसानी से जमानत नहीं मिलती। सवाल यही हेै कि अर्जुन सिंह के पास दिल्ली से जो फोन आया था वह किसका था? शायद अर्जुन सिंह अपनी जो आत्मकथा लिख रहे हैं उसमें इस सवाल का जवाब भी मिल जाए।
अर्थार्त अर्जुन सिंह ही बता सकते हें क़ी उनके पास किस नेता का देलीह से टेलीफोन आया था, किसी बी जे पी वाले का तो होगा नही, आयेगा तो कांग्रेस के ही अक का , अर्जुन सिंह रहस्य बता दो ,कोंन था जनसंहार का सोदागर , मरते वक्त आत्मा नही ताड्फेगी

अरविन्द सीसोदिया
राधा क्रिशन मंदिर रोड ,
ददवारा  वार्ड  ५९ , कोटा २
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