रविवार, 26 सितंबर 2010

कश्मीर पाकिस्तान को देने कि तैयारी

सेना हटी तो गंभीर परिणाम...
मत भूलो कारगिल को... 
- अरविन्द सीसोदिया 
        लगता है कि कांग्रेस ने कश्मीर पाकिस्तान को देने कि तैयारी कर ली है और वह अप्रत्यक्ष और प्रत्यक्ष  रूप से इस तह के कृत्य कर रही है कि पाकिस्तान कभी भी चीन कि सहायता से कश्मीर को हडप ले ..! चीन ने श्री लंका में भी लिट्टे का सफाया करवा कर भारत को एक बड़ी शिकस्त दी है !  नेपाल में उसने राजशाही को समाप्त करवा कर लगभग माओवादियों को स्थापित करवा दिया है , यह वही तरीका है  जिससे माओ ने चीन  पर कब्जा किया और तिब्बत को निंगला था ..! जनवादी सेना या लाल सेना या माओवादी या नक्सलवादी इसके विभीन्न पर्यायवाची हो सकते हैं ,मगर मकसद एक ही है .., सत्ता  पर कब्जा करना ! 
       कश्मीर में सारा तमाशा एक सोची समझी चाल के अंतर्गत हो रहा है , सेना को कम करने की कोशिश  में पाकिस्तान , चीन , आतंकवादी, उग्रवादी और कश्मीर के संतुष्ट और असंतुष्ट ..., सबके सब एक हैं ..! कश्मीर के सिर  पर और पाक कब्जे के कश्मीर में लगातार चीन की सैनिक मौजूदगी और परमाणु कार्यक्रमों पर पूरा विश्व चिंता ग्रस्त है , यह सब वही लक्ष्ण हैं जो १९४९ से प्रारंभ हो कर १९६२ में युद्ध में तब्दील हुए थे..!! भारत यह सारी जानकारी रखते हुए भी नादानी करता है तो वही परिणाम होगा जो १९६२ में चीन  से  हार के साथ हुआ था ...!!  अब होगा यह कि कश्मीर को भारत से छिना कर पाकिस्तान कि दे दिया  जाएगा  और फिर धीरे धीरे उसमें चीन जम जाएगा, उसे अरब सागर से अपनी सीमाएं मिलनी जो है..!!!! 
   केंद्र सरकार का फरमान
     प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में यहां हुई सुरक्षा संबंधी कैबिनेट समिति (सीसीएस) की बैठक के बाद केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदम्बरम ने ये घोषणाएं की। बैठक में चिदम्बरम, रक्षा मंत्री ए.के.एंटनी और केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने हिस्सा लिया। हिंसा में मारे गए लोगों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये मुआवजा दिया जाएगा और राज्य सरकार से कहा गया है कि वह घाटी में सुरक्षा बलों की तैनाती और सशस्त्र सेना विशेष शक्तियां अधिनियम (एएफएसपीए) के भविष्य पर फैसला लेने के लिए एकीकृत कमान की बैठक बुलाए।
"केंद्र राज्य सरकार को सुझाव देगी कि पथराव के लिए या इस तरह के किसी अन्य मामलों में गिरफ्तार किए गए सभी विद्यार्थियों एवं युवकों को तत्काल रिहा कर दिया जाए और उनके खिलाफ आरोप वापस ले लिया जाए। सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) के तहत सभी मामलों की तत्काल समीक्षा की जाएगी, उचित मामलों में गिरफ्तारी आदेश वापस लिए जाएंगे।"
 जम्मू- कश्मीर राज्य सरकार से कहा गया है कि वह एकीकृत कमान की तत्काल बैठक बुलाए और कश्मीर घाटी में, खासतौर से श्रीनगर में सुरक्षा बलों की तैनाती की समीक्षा करे। एकीकृत कमान में सेना, सुरक्षा बल और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा मुख्यमंत्री व राज्य के गृह मंत्री शामिल हैं। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार एकीकृत कमान को इस बात पर निर्णय लेना है कि क्या कुछ इलाकों से एएफएसपीए को हटा लिया जाए या नहीं।  मुख्यमंत्री ने कहा है कि  अब्दुल्ला ने कहा कि घाटी से सशस्त्र सेना और सुरक्षा कर्मियों की उपस्थिति घटानी है।
मन के हारे हार है.., मनके जीते जीत...!
      --- एक कहावत है गरीब  की जोरू , जमानें  की भोजाई .., ये  शब्द  इस तरह भी कहा जा सकता है..,  निर्बल की पत्नी, जगत की भाभी..., कुल मिला कर ये कहावत यह बता रही है कि " निर्वलता दूसरों को पाप के लिए ललचाती है ! " यही तथ्य वह बिंदु है जो भारत को बार बार परेशान  कर रहा है.....! पाकिस्तान बना तब से ही आँखे तरेरता रहता है , उसे याद दिलाया जाये कि हम तुम्हे पहले भी चार बार हारा चुके हैं , अबभी जोर अजमाईस करनी है तो चलो एक बार फिर से हो जाये.., चीन से भी कहा जाये कि अब १९६२ नहीं है.., मैकमोहन रेख बहुत पुरानी है तब ठीक थी तो अब भी ठीक ही है .., नियत साफ रखो या फिर जो होना है वह हो जाये..! हुकार और फुफकार के बिना शत्रु कभी भी पीछे नहीं हटाता है ! आप कोई मक्खी मच्छर नहीं हैं आप १०० करोड़ से ज्यादा  हिन्दुस्तानियों के नेता हैं , उसी सहस और शक्ती के साथ बात करनी चाहिए...!    
        आपके पास जनसंख्या की कोई कमी नहीं है , लोग देश धर्म की रक्षा  के लिए हर बलिदान को तैयार  हैं , कुछ लोगों के मरने में आप डरते रहे और पाकिस्तान बनवा  बैठे ...? वैसे तो लाख पचास हजार मरते, मगर फिर १० लाख मरे...!! मरने से जो डर गया वह पहले मर गया, राष्ट्र रक्षा के लिए मरना धर्म है...! मरना है क्या चीज आदमी लेता नया जन्म है.., देश पूरी तरह से तैयार है.., ये बहादुरों कि संतानों का देश है.., रोम, मिश्र और यूनान कि तरह मिटा नहीं ; बल्की हिन्दोस्तान की तरह जिदा है...,   आप को तो सिर्फ निर्णय लेना है वह भी नहीं हो पाता  तो राजपाट छोड़ कर बाहर आजाओ.., येशी स्थिती अंतीम बौद्ध राजा बृहदह्स्थ  के समय में पाटलीपुत्र में हुई थी , बार बार यूनानी विदेशी आक्रान्ताओं के आगे समझोते होते थे , तब सेनापति  पुष्यमित्र ने राजा बृहदह्स्थ कि हत्या की और अपने पोते वसुमित्र के नेतृत्व में एक सेना गठित कर विदेशी आक्रमणकारियों को बाहर निकलने  का आदेश जारी किया उस युवा सेनापति वसुमित्र ने विदेशी आक्रमणकारियों को सिन्धु पार तक खदेड़ा था ...!   कुछ सीखो अपने इतिहास से.........!    

2 टिप्‍पणियां:

  1. आदरणीय सिसोदिया जी में पूरी तरह सहमत हूँ आपकी बात से
    वर्तमान शासक कायर और भ्रष्ट हैं जनता मूक है इतहास से कोइ सबक नहीं लिया न लेने को तैयार हैं कश्मीर तो कहने भर को भारत के पास है वहां पर सेना न होती तो अबतक पाकिस्तान हड़प चुका होता

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  2. क्या सिसौदिया जी किसको अपना इतिहास पढ़ा रहे है जमता ने भारत बिरोधी चर्च द्वारा प्रायोजित सोनिया को जनमत प्रदान किया है ,चर्च को इस देश से क्या मतलब चर्च तो देश तोडना चाहती है, मनमोहन,चिताम्बरम और मुखर्जी ये सभी सोनिया क़े गुलाम है देश क़ा क्या होगा सोचिये --कब कोई चाणक्य आयेगा?

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