गुरुवार, 30 सितंबर 2010

चीनी सैनिकों की गिलगित व बल्तिस्तान में मौजूदगी


गिलगिट और बल्तिस्तान में चीन., 
भारत ने क्या किया..?  
- अरविन्द सीसोदिया  
मनमोहन सिंह सरकार यह न भूले कि इतिहास याद नहीं रखता और समय के साथ सब कुछ लोग भूल जाते हैं, वे जिस पद पर हैं और चीन जैसा विषय है, वह हजारों साल के इतिहास में जाएगा , पंडित जवाहर लाल नेहरु के नाम दो पराजय दर्ज हैं .., पाकिस्तान से १९४७-४९ युद्ध में  अपनी भूमि वापस नहीं लेने की और १९६२ में  चीन से हार की...! तब भी यही; देखते हुए भी खामोश रहने की नीति; पर भारत चला था..! चीन की १९४९ से ही बाद नियत सामने आगई थी मगर हम अपने तिब्बत पर जारी अधिकार उसे देते  हुए सन्तुष्ट करने में लगे रहे, नतीजा यह हुआ कि वह उसी दिन से हम पर सवार हो गया , हमारा कैलाश - मानसरोवर सहित तमाम चंडी पहाड़ियों आदि  अनेकों स्थानों पर उसने  कब्जा कर लिया..! अंततः १९६२ में युद्ध भी हुआ और शर्मनाक पराजय हुई..! अगर हमारी रक्षा तैयारियों में यही ढील रही तो आगे आने वाले परिणाम भी भिन्न नहीं होंगे ...!! यह समयोचित चेतावनीं है..! संभाल जाओ ..!!   
   पाकिस्तान चुपके-चुपके अपने कब्जे वाले कश्मीर में सामरिक रूप से महत्वपूर्ण गिलगिट बल्टिस्तान का वास्तविक नियंत्रण चीन के हाथों में सौंप रहा है जहां पाकिस्तानी शासन के खिलाफ विद्रोह सुलग रहा है।
    ‘न्यूयार्क टाइम्स’ में प्रकाशित उस रिपोर्ट के बारे में, जिसमें इस बात का जिक्र किया गया  कि चीन की ‘पीपुल्स लिबरेशन आर्मी’ के करीब 7,000 से 11,000 सैनिक पाक अधिकृत कश्मीर के सामरिक महत्व के  गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र में मौजूद हैं।  इस क्षेत्र को विश्व जगत की आवाजाही के लिए बंद करके रखा गया है। गौरतलब है कि न्यूयॉर्क टाइम्स की में कहा गया था कि चीन ने वास्तविक सीमा-रेखा के पास अपनी विमानन गतिविधियां शुरू की हैं और इस क्षेत्र में सेना की मौजूदगी तथा उसकी क्षमता बढ़ाई है।
    भारत ने कहा है कि वह पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर के गिलगिट और बल्तिस्तान में चीनी सेना की मौजूदगी की खबरों की जांच कर रहा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विष्णु प्रकाश ने कहा कि भारत अपने सुरक्षा के लिए हर संभव उपाए करेगा। हमने इस संदर्भ में मीडिया की रिपोट देखी हैं और स्वतंत्र रूप से इन रिपोर्टों की जांच कर रहे हैं और अगर इनमें सच्चाई है तो यह चिंता का विषय है। यदि यह सच निकला, तो यह गंभीर चिंता का विषय होगा और राष्ट्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जो जरूरी होगा हम सब करेंगे।’
   चीन सैनिकों की गिलगित व बल्तिस्तान क्षेत्र में घुसपैठ पर चीन सरकार ने शुरू में इनकार कर दिया था, लेकिन जब भारत के राजदूत एसजे शंकर ने चीन के उप- विदेश मंत्री से भेंट करके भारत की गम्भीर आपत्ति और चिंता जताते हुए उपग्रह से लिए गए फोटो दिखाए और इस क्षेत्र में चीनी सैनिकों की मौजूदगी के तौर पर पेश किया, तो तुरन्त पासा पलटते हुए उन्होंने माना कि चीन के सैनिक इस क्षेत्र में मौजूद हैं, मगर वे बाढ़ प्रभावित लोगों को मानवीय सहायता पहुँचाने के लिए काम कर रहे हैं। सच तो यह है कि इस क्षेत्र में चीनी सैनिक तैनात हैं और वे वहां कई तरह के सामरिक रूप से महत्वपूर्ण निर्माण व ढाँचागत कार्यों में जुटे हुए हैं।
     चीन सुरंगें, सड़कें, रेलमार्ग व डैम बनाने के नाम पर भारत के उत्तरी पश्चिमी क्षेत्र को घेरने की खतरनाक रणनीति पर काम कर रहा है।  अरुणाचल के मुद्दे पर बुरी तरह असफल रहने के बाद वह पाक अधिकृत कश्मीर में अपनी सेना को तैनात करके इस महत्वपूर्ण सामरिक क्षेत्र के जरिये भारत पर दबाव बनाये रखना चाहता है। यही कारण है कि वह कश्मीर को विवादित क्षेत्र कहते थकता नहीं।
     दूसरा रेल व सड़क मार्ग बन जाने से पाक में चीन द्वारा निर्मित ग्वादर बन्दरगाह, पासनी, ओरमारा जैसे नौसैनिक अड्डे तक जल्दी से जल्दी पहुँचा जा चुका है। चीन को तेल लेने के लिए खाड़ी के देशों तक पहुँचने में फिलहाल 16 से 25 दिन का समय लगता है, लेकिन परिवहन का पूरा होने पर यह समय केवल 48 घंटे का रह जाएगा। इससे पाक जलसेना भारत के खिलाफ मजबूती भी हासिल कर लेगी।
   गिलगित और बल्तिस्तान क्षेत्र की जनता में पाक शासन के खिलाफ एक लम्बे समय से रोष है। अब इसने एक विद्रोह की शक्ल ले ली है। ये इलाका 31 अक्टूबर 1947 से पाक के गैर कानूनी कब्जे में है, जबकि जम्मू और कश्मीर के महाराजा हरि सिंह ने इसे भारत के साथ जोड़ दिया था। पाक इस क्षेत्र का इस्तेमाल एक राजनीतिक हथियार के तौर पर कर रहा है।
   1947 में जब पाक ने इस क्षेत्र पर कब्जा जमाया था, उस दिन से व 1970 तक दुनिया में बदनाम फ्रंटियर क्राइम रेगुलेश्न एक्ट के तहत इस क्षेत्र पर शासन करता रहा। बाद में शासन का कार्यभार पाक सरकार के कश्मीर मामलों के मंत्रालय के सचिव ने संभाल लिया। इस क्षेत्र के लिए 28 निर्वाचित सदस्यों की उत्तरी क्षेत्र विधान परिषद अधिकारविहीन रही। इसलिए सभी राजनीतिक उद्देश्यों के लिए इसका सीधा शासन इस्लामाबाद से चलता रहा। पाक की संसद में इसका कोई प्रतिनिधि नहीं था।
    इस क्षेत्र की आबादी लगभग 25 लाख है। इसमें शिया, सुन्नी और नूरबख्शी मुस्लमान रहते हैं। शिया की आबादी सबसे ज्यादा है। जब भी शिया पाकिस्तान के शिकंजे से निकलने के लिए आन्दोलन करते हैं, पाक की खुफिया एजेंसी शिया व सुन्नियों में फसाद कराकर आन्दोलन को दबा देती है। इस क्षेत्र में दूसरे प्रान्तों के लोगों को, विशेष तौर पर पंजाबियों और पठानों को लाकर बसा दिया गया है ताकि यहां के लोग अल्पसंख्यक हो जाएं। जबकि कानून के अनुसार इस क्षेत्र में कोई भी बाहरी आदमी आकर बस नहीं सकता और न ही मकान-जायदाद खरीद सकता है।
घुसपैठ  दर घुसपैठ 
-भारत- चीन सीमा की वास्तविक नियंत्रण रेखा में 2008 में 270 बार चीनी घुसपैठ की घटनाएं हुई थीं। 2009 में घुसपैठ की घटनाएं बढ़ीं। 2008 के पहले छह महीने में चीन ने सिक्किम में कुल 71 बार भारतीय इलाके में चीन ने घुसपैठ की।
-जून, 2008 में चीन के सैनिक वाहनों के काफिले भारतीय सीमा से एक किलोमीटर भीतर तक आ गए। इसके एक महीने पहले चीनी सैनिकों ने इसी इलाके में स्थित कुछ पत्थर के ढांचे तोड़ने की धमकी भी दी, जिस धमकी को बाद में चीनी अधिकारियों ने दोहराया भी था।
-सितंबर 2008 में लद्दाख में सीमा पर स्थित पांगोंग त्सो झील  पर चीनी सैनिकों का मोटर बोट से भारतीय सीमा में अतिक्रमण तो नियमित रूप से चलता आ रहा है और आज तक जारी भी है। 135 किमी लंबी इस झील का दो तिहाई हिस्सा चीन के पास है और शेष एक तिहाई भारत के पास है।
-कारगिल युद्घ के दौरान चीन ने इस झील  के साथ-साथ पांच किमी का एक पक्का रास्ता बना लिया है, जो झील  के दक्षिणी छोर तक है। यह इलाका जो भारतीय सीमा के भीतर आता है।
-जून 2009 में जम्मू- कश्मीर में मौजूद वास्तविक नियंत्रण रेखा पर स्थित देमचोक (लद्दाख क्षेत्र) में दो चीनी सैनिक हेलीकप्टर भारतीय सीमा में नीचे उड़ते हुए घुसे। इन हेलीकप्टरों से डिब्बाबंद भोजन गिराए गए। जुलाई, 2009 में हिमाचल प्रदेश के स्पीति, जम्मू -कश्मीर के लद्दाख और तिब्बत के त्रिसंगम में स्थित ‘माउंट ग्या’ के पास चीनी फौज  भारतीय सीमा से करीब 1.5 किलो मीटर भीतर तक आ गई। इन चीनी सैनिकों ने पत्थरों पर लाल रंग से ‘चीन’ भी लिखा।
-31 जुलाई 2009 को भारत के सीमा गश्ती दल ने ‘जुलुंग ला दर्रे’  के पास लाल रंग में चीन-चीन के निशान भी लिखे देखे।  सितंबर, 2009 में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल ने केंद्र सरकार को चमोली जिले के रिमखिम इलाके के स्थानीय लोगों से मिली चीनी घुसपैठ की जानकारी दी। इस जानकारी के अनुसार पांच सितंबर, 2009 को चीनी सैनिक भारतीय सीमा के भीतर दाखिल हुए।
अरुणाचल प्रदेश का मसला
अरुणाचल प्रदेश को लेकर चीन लगातार बयानबाजी करता रहा है। चीन ने अरुणाचल प्रदेश के तवांग इलाके को ‘दक्षिण तिब्बत’ का नाम दिया है। इसके अलावा वह अरुणाचल प्रदेश को चीन के नक्शे पर दिखाता है। चीन का दावा है कि अरुणाचल प्रदेश चीन का हिस्सा है। यही वजह है कि चीन अरुणाचल प्रदेश के लोगों को वीजा नहीं देता है क्योंकि चीन का तर्क है कि अरुणाचल प्रदेश के निवासी चीन के नागरिक हैं। भारत चीन के इन कदमों का विरोध करता रहा है। कुछ साल पहले चीनी सैनिकों ने बुद्घ की एक प्रतिमा को तबाह कर दिया था। इस प्रतिमा को भारत-चीन सीमा पर मौजूद बुमला नाम की जगह पर बनाया गया था। भारत के प्रधानमंत्री डा मनमोहन सिंह के अरुणाचल प्रदेश दौरे का भी चीन ने विरोध किया था। इसके अलावा तिब्बती धर्म गुरु दलाई लामा की भी अरुणाचल यात्रा का चीन ने विरोध किया था। गौरतलब है कि दलाई लामा ने अरुणाचल प्रदेश की यात्रा के दौरान इसे भारत का हिस्सा बताया था।
कश्मीर का मुद्दा 
कश्मीर को लेकर चीन का रवैया पाकिस्तान को खुश करने वाला है। चीन ने कई मौकों पर जम्मू-कश्मीर को विवादित इलाका बताकर भारत से खटास बढ़ाई है। जम्मू-कश्मीर के लोगों को वीजा जारी करते समय चीन वीजा को पासपोर्ट के साथ चिपकाने की बजाय नत्थी कर देता है। भारत नत्थी किए गए वीजा को मान्यता नहीं देता है। ऐसे में जम्मू-कश्मीर के निवासी चीन की यात्रा नहीं कर पा रहे हैं। अपने इस कदम के पीटे चीन का तर्क है कि जम्मू-कश्मीर एक विवादित इलाका है।
कर्ज में अड़ंगा 
चीन ने अरुणाचल प्रदेश को लेकर भारत और चीन के बीच चल रहे विवाद को तीसरे मंच पर उठाने की कोशिश के तहत एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) के सामने यह मुद्दा उठाया था। भारत ने 88 अरब रुपये के लोन के लिए आवेदन किया था, जिसका इस्तेमाल अरुणाचल प्रदेश में पीने के पानी के इंतजाम के लिए किया जाना था। चीन का तर्क था कि चूंकि अरुणाचल प्रदेश एक विवादास्पद क्षेत्र है इसलिए यहां किसी योजना के लिए लोन नहीं दिया जाना चाहिए।
लेफ्टि. जनरल को वीजा नहीं ....
चीन ने भारत के लेफ्टि. जनरल बीएस जायसवाल को विज़ा देने से इंकार कर दिया है. चीन का कहना है कि बीएस जायसवाल को विज़ा इसलिए नहीं दिया गया क्योंकि वह कश्मीर के विवादित क्षेत्र को नियंत्रित करते है. चीन की इस हरकत के जवाब में भारत ने भी अपना रुख कड़ा अपनाते हुए चीन के दो सेना अधिकारियों को वीजा देने से इंकार कर दिया है.गौरतलब है कि नॉर्दन एरिया कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल बीएस जायसवाल को रक्षा संबंधों के तहत अगस्त के महीने में चीन की यात्रा पर जाना था. भारतीय सेना ने इस यात्रा के लिए जून के महीने में ही तैयारी शुरू कर दी गई थी लेकिन चीन ने ये कहकर मना कर दिया कि वह जम्मू कश्मीर के विवादित क्षेत्र में तैनात हैं. चीन के इस कदम पर भारत ने कड़ा ऐजराज जताया है और विदेश मंत्रालय इस मुद्दे पर चीन से बात कर रहा है.

चीन के कारनामों की अनेकों दस्ताने हैं....
खबर दर ख़बरें हजारों ख़बरों का पुलंदा देश के सामने है...!! 
* चीन की घुसपैठ मामूली, मीडिया दे रहा बेवजह तूल
* चीन पर नजर: नयोमा में उतरा हवा का प्रहरी
* पड़ोसियों से परेशानीः चीन कर रहा रेल लाइन की तैयारी
* सिक्किम में चीन की ओर से फायरिंग
* चीन से सटी सीमा पर बढ़ाई जा रही सैन्य क्षमता
* काराकोरम में धीरे-धीरे जमीन हथिया रहा है चीन
* पाकिस्तान ने सीमा पार से फिर शुरू की घुसपैठ
* पाकिस्तान  ने भारतीय इलाकों में रॉकेट दागे
  • पीओके के इलाके चीन को सौंप रहा है पाक
  • ड्रैगन के पैंतरे का सख्त जवाब दिया भारत ने
  • भारतीय आर्मी ऑफिसर को चीन ने रोका
  • चीन के साथ रिश्तों में बढ़ सकती है दरार
  • 'वीसा मसले पर चीन का रवैया गैर दोस्ताना'
  • ज्यादातर चीनी भारत को दुश्मन मानते हैं
  • चीन को अपना दोस्त नहीं मानते 52 पर्सेंट भारतीय
  • ड्रैगन पचाता गया हमारी जमीन
  • पूर्वोत्तर में मिसाइल की तैनात पर विचार

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