बुधवार, 6 अक्तूबर 2010

आतंकवादी पाकिस्तान को अमरीकी मदद गलत

  असली सच पाक का यही है....
- अरविन्द सीसोदिया 
    जर्मन पत्रिका डेर स्पीजेल को दिए हालिया साक्षात्कार  में ; पाकिस्तान के पूर्व सैनिक तानाशाह और राष्ट्रपती परवेज मुशर्रफ ने स्वीकार किया है कि पाकिस्तान ने भारत के जम्मू और कश्मीर  राज्य में अलगाववादी घटनाओं को अंजाम देने के लिए ; आतंकवादी और उग्रवादी  प्रशिक्षित  किये थे | इसका मतलब  यह है कि भारत के विरुद्ध लड़ाके तैयार करने का काम पाकिस्तान में होता है और भारत के इस आरोप की यह स्वीकारोक्ती  है ! एक राष्ट्रपती स्तर के व्यक्ती के द्वारा यह स्वीकार करना और भी अधिक महत्व पूर्ण है जो सैनीक प्रमुख भी रहा है !  पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने उनके बयान का खण्डन किया है, कि पूर्व राष्ट्रपति का  बयान  निराधार है। यह तो एक कूटनीतिक खण्डन है जबकि सच भी सभी जानते हैं ! 
       यह कोई नई बात नहीं है, इस बात को पाकिस्तान को समझाने  की भी नहीं है , वह क्या है वह अच्छी तरह से जानता है ! यह बात तो अमरीका और उसके मित्र राष्ट्रों को समझाने की है , जो पाकिस्तान को हथियार बेंचते हैं ..! यह जानते हुए भी की इनका इस्तेमाल भारत के खिलाफ होगा ...! यही हथिया तालिवान कि भी अफगानिस्तान में अमरीका के खिलाफ लड़ाने को मिलते हैं ! यह बात तो संयुक्त राष्ट्र संघ को समझने की है जो उसे आर्थिक सहायता दिलबाने में लगा रहता है , जब कि हर मदद का उपयोग भारत के विरुद्ध ही होता है ...! शांती व्यवस्था के विरुद्ध होता है ! सच यह है की पाकिस्तान जिस स्वरूप में मदद का दुरूपयोग करता है , उससे मानवता की हानीं होती है ! बेक़सूर लोग मारे जाते हैं..!!  
      आईएसआई की तालिबान और अल कायदा के साथ नजदीकियां जगजाहिर हैं। नेशनल सेक्योरिटी आर्काइव इलेक्ट्रॉनिक ब्रीफिंग के जरिए सामने आए दस्तावेजों और हाल ही में विकीलीक्स के खुलासों से साफ है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी और आतंकवादी संगठनों के बीच गठजोड़ है, जो बरसों से काम कर रहा है।
    वाशिंगटन. 9/11 के आतंकी हमले के बाद अल कायदा और तालिबान के प्रति अमेरिका के आक्रामक रुख के बावजूद पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और वहां के तत्कालीन राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने तालिबान और अल कायदा सरगना ओसामा बिन लादेन को बचाने की पूरी कोशिश की थी। यहां तक कि आईएसआई और परवेज मुशर्रफ गुस्साए तत्‍कालीन बुश प्रशासन को तालिबान के साथ बातचीत की मेज तक लाना चाहते थे। जबकि पाकिस्तान इन्हीं ताकतों के खिलाफ लड़ने के लिए अमेरिका से अब तक आर्थिक मदद ले रहा है। मुशर्रफ का यह दोहरापन हाल ही में सार्वजनिक हुए एक दस्‍तावेज से सामने आया है।
      पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के चीफ महमूद ने अमेरिकी राजदूत से कहा था, 'आप गुस्से में आकर फैसले न लें। सच्ची जीत बातचीत के जरिए ही मिलती है। अगर तालिबान हार गया तो अफगानिस्तान में फिर से माफिया और लड़ाकों का कब्जा हो जाएगा।' पाकिस्तान ने न केवल तालिबान को अमेरिका के गुस्से से बचाने की कोशिश की बल्कि अल कायदा के खतरनाक आतंकवादी ओसामा बिन लादेन को भी सुरक्षित करने के पूरे प्रयास किए।
      मुशर्रफ ने जर्मन पत्रिका 'डेर स्पीगल' से कहा, ‘‘मिस्टर (एक्यू) खान एक चरित्रहीन व्यक्ति हैं।’’ मुशर्रफ उत्तर कोरिया और ईरान जैसे देशों को परमाणु प्रौद्योगिकियों के प्रसार के आरोपों में खान को नजरबंद किए जाने के बारे में पूछे गए सवाल का जवाब दे रहे थे। परमाणु सौदों की निगरानी और बंदोबस्त पाक सेना द्वारा किए जाने के खान के दावों पर पूर्व राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘यह गलत है, पूरी तरह गलत | यदि मैंने अपने परमाणु हथियार अमेरिका को दिए होते, तो मैं देशद्रोही होता। यही क्षमता हमारा गौरव है और इससे कभी समझौता नहीं होगा।’’
  सवाल यह नहीं है कि पाकिस्तान के  पूर्व  राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ यह बोल रहे हैं , सच यह है कि यह पाकिस्तान का सच है...! वहां जो भी सत्ता में होता है उसे वही सब कुछ करना होता है जो वहां की सेना चाहती है ! दोहरी बातें पाकिस्तान की विशेषता है..! आज वह चीन के साथ है.. और अमरीका से मदद ले रहा है...!! और हमें चीन दुश्मन के तौर पर देखता है और अमरीका पूरी तरह हमारे साथ नहीं है ..!! विश्व विरादरी जो भी साथ है उसका कारण तो हमारी जनसंख्या है जिसमें उन्हें अपना माल बेंचना है..! अन्यथा वे इतना  भी खड़े नहीं हों..!!    
  

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