मंगलवार, 30 नवंबर 2010

जाती पूछोगे और धर्म झुपाओगे...?

- अरविन्द सीसोदिया 
जाती पूछो और धर्म छिपाओ ....
सवाल यह है की सारे देश में आप ..,जाती पूछोगे और धर्म झुपाओगे .... ये कैसे चलेगा ..! इस देश में आप हिन्दू विधि और मुस्लिम पर्सनल कानून चलाते हो...! आज यह जरुरी ही गया है कि लोग किसी धर्म के होते हैं और अपने लाभ और स्वार्थ के हिसाब से शोऊ कुछ और करते हैं , पहचान छुपाने में भी इसका उपयोग हो रहा है जैसे कि हेडली नाम से इसाई लगता है मगर गए यह व्यक्ती मुस्लिम आतंकवादी  , जी मौलिक सूचनाएं हैं वे उजागर होनी चाहिए ..! उनकी स्पष्ट इन्द्राजी होनी चाहिए ..! चाहे वह धर्म हो , जाती हो , जन्म स्थान हो , मातृ  भाषा हो , इन्हें छुपाने का अधिकार क्यों दिया जाये ..?  
*** सोनिया का धर्म जानने सम्बंधी याचिका खारिज
    चण्डीगढ़ स्थित  पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के धर्म से जु़डी जानकरी के सम्बंध में दायर एक याचिका सोमवार को खारिज कर दी।
     हरियाणा पुलिस के पूर्व प्रमुख पी.सी. वाधवा द्वारा दायर याचिका को उच्च न्यायालय की एक खण्डपीठ ने खारिज कर दिया। पूर्व पुलिस प्रमुख ने सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत रजिस्ट्रार जनरल एवं भारत के जनगणना आयुक्त से सोनिया गांधी और उनके बच्चों के धर्म व आस्था के बारे में जानकारी मांगी थी। मुख्य न्यायाधीश मुकुल मुदगल और न्यायाधीश रंजन गोगोई ने वाधवा की याचिका को खारिज कर दिया और कहा कि धर्म के बारे में मांगी गई जानकारी "पूरी तरह से व्यक्तिगत" है। वाधवा ने सोनिया गांधी और उनकी बेटी प्रियंका व बेटे राहुल गांधी के धर्म के बारे में सूचना मांगी थी। उन्होंने अदालत में दलील दी थी कि कांग्रेस अध्यक्ष एक जननेता हैं लिहाजा यह जानना महत्वपूर्ण होगा कि वह किस धर्म को मानती हैं।
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उनके धर्म के बारे में विकिपीडिया ने स्पष्ट लिखा है जो निम्न  प्रकार से है ... जो नीचे दिया गया है ! लिंक  पर जाने के लिए .....
http://hi.wikipedia.org/wiki 



जन्म९ दिसंबर १९४६
लूसियानावैनेतो,इटली
राजनैतिक पार्टीभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
जीवन संगीराजीव गांधी (१९६९-१९९१)
संतानराहुल गांधीप्रियंका गांधी वड्रा
आवास१० जनपथनई दिल्लीभारत
धर्मईसाई (रोमन कैथोलिक)

भोपाल गैसत्रासदी वरसी : प्रथम दृष्टया दोषी भारत सरकार है

- अरविन्द सीसोदिया
यूनीयन कार्बाइड के जहरीले कारखानें को भोपाल में सातवाँ स्थान पर बनाए जानें की अनुमती नहीं दी जा रही थी...! मध्यप्रदेश की सरकार संभवतः भोपाल के लोगों के जीवन से खिलवाड़ नहीं करना चाहती होगी ..! मगर जा आपातकाल लगा और प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी जी सर्वे भन्तु सुखिना हुईं तो.., अमेरिकन यूनीयन कार्बाइड को साख यह मिला की उन्हें यूनीयन कार्बाइड कारखाना भोपाल में लगानें कि सुविधा मिल गई..! जो १९८४ में भोपाल में महान और अत्यंत दर्दनाक दुखान्तकी बनीं ..!
























  बात यह है की किसी भी बड़ी कंपनी को कहीं भी कोई भी इजाजत उसके श्रमिकों से जुड़े रिकार्ड को देखकर ही दी जानीं चाहिए...! इस कंपनी का यह रिकार्ड देख ही नहीं गया ..! उन्हें अनुमती नियमानुसार नहीं राजनैतिक प्रभाव में दी गई और उसे भुगता भोपाल नें ..!! यह एक बुरी कंपनी थी .., इस का रिकार्ड ठीक नहीं था..! हनन कभी भी यह ध्यान नहीं किया कि इसके ख़तरना उत्पादनों से जन सुरक्षा को कैसे सुरक्षित रखा जाए..! सच तो यह है की आज तक वह जहरीला कचरा वहीं है और हटानें तक की हिम्मत नहीं की गई ..!!












एक ब्लेक लिस्ट में डालने योग्य कंपनी को अनुमती देने की जिम्मेवारी से केंद्र सरकार मुकर नहीं सकती .., इसलिए जनता का हर्जा - खर्चा स्वंय वहन करना चाहिए और यूनीयन कार्बाइड से जो लेना देना है वह करती रहे ..!!









एक काली सूची लायक कंपनी.,




हॉक्स नेस्ट सुरंग आपदा हॉक्स नेस्ट सुरंग आपदा सन 1927 और 1932 के बीच पश्चिम वर्जीनिया सुरंग परियोजना में घटी थी, जिसे यूनियन कार्बाइड के नेतृत्व में बनाया जा रहा था। सुरंग के निर्माण के दौरान श्रमिकों को सिलिका खनिज मिला और उन्हें उसका खनन करने का आदेश मिला। इस सिलिका का प्रयोग इस्पात के वैद्युतप्रसंस्करण में होना था। खनिकों को खनन के दौरान सुरक्षा उपकरण जैसे कि नकाब (मास्क) या श्वसन यंत्र नहीं प्रदान किए गये। सिलिका की धूल के संपर्क में आने से कई खनिकों को एक कमजोर फेफड़ों की बीमारी सिलिकोसिस हो गयी। निर्माण स्थल के एक ऐतिहासिक स्मारकपट्ट के अनुसार, सिलिकोसिस 109 मौतों के लिए जिम्मेदार थी। एक कॉंग्रेशनल सुनवाई के अनुसार मरने वालों की संख्या 476 थी। सच भगवान ही जानता होगा ...!

मुश्किल है गिरफ्तारी : अरुंधति राय,सैयद अली शाह गिलानी की...

- अरविन्द सीसोदिया
      जिस सरकार ने अपने अपने मंत्रालय की सलाह के बावजूद इन दोनों गद्दारों के खिलाफ केस दर्ज नहीं किया , उन्ही की पुलिस को अदालत के निर्देश पर रिपोर्ट दर्ज करनी पढ़ रही है .., अब यह पुलिस क्या करेगी ..., मुझे नहीं लगता की जांच से जुड़े अधिकारीयों के रीड होगी और वे कानून के हिसाब से कम करेगे..इनमें रीड होती तो सभ के समापन के साथ ही गिरफ्तारी होनी चाहिए थी ..!! न्यायालय का आदेश विफल होता नजर आता है ...! जब सरकार ही गद्दारों के साथ हो तब बचता क्या है ....!  
----दिल्ली पुलिस ने लेखिका अरुंधति राय, हुर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी और अन्य लोगों पर पिछले महीने यहां एक सेमिनार में ‘भारत विरोधी’ भाषण देने के मामले में देशद्रोह का मामला दर्ज किया है. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि सुशील पंडित नामक व्यक्ति की याचिका पर शनिवार को एक स्थानीय अदालत के दिशानिर्देश के बाद प्राथमिकी दर्ज की गयी. पंडित ने आरोप लगाया था कि गिलानी और राय ने 21 अक्तूबर को ‘आजादी-द ओनली वे’ के बैनर तले हुई एक सेमिनार में भारत विरोधी भाषण दिया था.
राय और अन्य पर धारा 124ए (देशद्रोह), 153ए (वर्गों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देना), 153बी (राष्ट्रीय अखंडता को नुकसान पहुंचाने के लिए लांछन), 504 (शांति भंग करने के इरादे से अपमान) और 505 (विद्रोह के इरादे से झूठे बयान, अफवाहें फैलाना या जन शांति के खिलाफ अपराध) के तहत मामले दर्ज किये गये हैं. अधिकारी ने कहा, ‘‘इन प्रावधानों को 1967 के गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम के प्रावधान 13 के साथ पढ़ा जाना है.’’ राय और गिलानी ने माओवादी समर्थक वारवरा तथा अन्य लोगों के साथ मंच साझा किया था.
मामला दर्ज हो जाने के बाद अब राय और अन्य लोगों को गिरफ्तार किया जा सकता है. उन पर लगाये गये प्रावधान गैर जमानती हैं और यदि गिरफ्तार कर लिया जाता है, तो उन्हें जमानत के लिए अदालत में जाना होगा. यदि उन्हें इन मामलों में दोषी साबित किया जाता है तो अधिकतम सजा उम्रकैद दी जा सकती है.आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि सरकार ने इससे पहले गिलानी और राय के खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं करने का फैसला किया था और सरकार का मानना था कि इस तरह के कदम से उन्हें अनावश्यक प्रचार मिलेगा. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस बारे में कानूनी सलाह मांगी थी, जिसने सुझाया था कि देशद्रोह का मामला दर्ज किया जा सकता है. हालांकि राजनीतिक विचार विमर्श के बाद मंत्रालय ने गिलानी और राय के खिलाफ मामला दर्ज नहीं करने का फैसला किया.
इससे पहले अदालत के आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए राय ने कहा कि उन्हें शायद ‘जवाहरलाल नेहरू के खिलाफ मरणोपरांत एक मामला दर्ज करना चाहिए.’ इसके लिए उन्होंने 14 घटनाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि देश के प्रथम प्रधानमंत्री नेहरू ने कहा था कि ‘किसी विवादित क्षेत्र या प्रदेश में शामिल करने के सवाल पर फैसला जनता की इच्छाओं के अनुरूप होना चाहिए.’

क्या जेपीसी के इटली पहुचने का डर है ...

- अरविन्द सीसोदिया
सोमवार से तीन दिवसीय यात्रा पर श्रीमति सोनिया गांधी रायवरेली की यात्रा पर हैं .., संसद में जे पी सी गठन का गतिरोध चल रहा है ..! वे उसे यथा स्थिति छोड़ कर यात्रा पर हैं जबकि वे उस गठबंधन की अध्यक्ष  हैं जो सरकार चला रहा है ..! जे पी सी से जांच होनें का इतिहास रहा है.., इस घोटाले से कम रकम कीई जांच जे पी सी ने की है ..!
  लगता है कि जे पी सी की जांच , जनता पार्टी के अध्यक्ष सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा लगाये आरोपों पर भी होगी जिसमें उन्होंने कहा है कि " पौने दो लाख करोड़ रुपये के 2-जी स्पेक्ट्रम घोटाले में 60 हजार करोड़ रुपये घूस में बांटी गई, जिसमें चार लोग हिस्सेदार थे। इस घूस में सोनिया गांधी की दो बहनों का हिस्सा 30-30 प्रतिशत है। दस जनपथ को घोटाले का केंद्र बिंदु बताते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री सब कुछ जानते हुए भी मूक दर्शक बने रहे।"
     यदी जे पी सी बनीं तो वह इन नामों से भी पूछताछ कर सकती है..! यानी इटली तक बात जा सकती है ..! प्रधान मंत्री को भी रहस्य उजागर करने को कह सकती है ..! कोई कमजोर नस  अवश्य है ..!
***** एक समाचार जो हमने देखा ...... 
http://in.jagran.yahoo.com/news/national/politics/5_2_6927406.html
       देहरादून [जागरण ब्यूरो]। जनता पार्टी के अध्यक्ष सुब्रमण्यम स्वामी अब 2 जी स्पेक्ट्रम घोटाले की जद में कांग्रेस व यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी को भी ले आए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पौने दो लाख करोड़ रुपये के 2-जी स्पेक्ट्रम घोटाले में 60 हजार करोड़ रुपये घूस में बांटी गई, जिसमें चार लोग हिस्सेदार थे। इस घूस में सोनिया गांधी की दो बहनों का हिस्सा 30-30 प्रतिशत है। दस जनपथ को घोटाले का केंद्र बिंदु बताते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री सब कुछ जानते हुए भी मूक दर्शक बने रहे।स्पेक्ट्रम मामले पर सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई से पहले अपने घर आराम करने देहरादून पहुंचे स्वामी ने पत्रकार वार्ता के दौरान 2 जी मामले में कांग्रेस नेतृत्व पर कई आरोप लगाए। स्वामी ने दावा किया इस घोटाले में घूस के तौर पर बांटे गए 60 हजार करोड़ रुपये का दस प्रतिशत हिस्सा पूर्व संचार मंत्री ए राजा को गया। तीस प्रतिशत तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम करुणानिधि और 30-30 प्रतिशत सोनिया गांधी को दो बहनों नाडिया और अनुष्का को गया है। हालांकि, इसके कोई दस्तावेजी सबूत उन्होंने उपलब्ध नहीं कराए।

       स्वामी ने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया है कि अमेरिका से स्पेक्ट्रम मामले में हुए लेन-देन का रिकार्ड भी मंगाया जाए। साथ ही उन्होंने पूर्व मंत्री ए राजा की सुरक्षा की मांग भी प्रधानमंत्री से की है।
       उनका कहना था कि ए राजा की सबसे अच्छी सुरक्षा तभी हो सकती है जब वो जेल में हों या फिर उन्हें हाउस अरेस्ट किया जाए। स्वामी ने राजा की सुरक्षा को लेकर लिखी चिट्ठी के जवाब में प्रधानमंत्री की ओर से आए पत्र को भी सार्वजनिक किया। इस पत्र में कहा गया है कि ए राजा को उच्च स्तरीय सुरक्षा दी जा रही है और स्पेक्ट्रम डील के बैंक रिकार्ड की जानकारी के लिए अमेरिकी सरकार से कहा जा रहा है।
       ए राजा की चिंता की वजह पूछे जाने पर स्वामी ने कहा कि इस महा घोटाले की सारी जानकारी राजा के पास है। इस मामले में अरब देशों के अंडरव‌र्ल्ड के लोग भी शामिल हैं। राजा की हत्या कर वे सबूत मिटाना चाहेंगे। उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ बाबा रामदेव मुहिम में सहयोग करने पर भी खुद को तैयार बताया।
****** हालांकी में स्वामी से कोई खास सच की उम्मीद नहीं रखता मगर वे किसी न किसी लिंक से अवश्य जुड़े हैं जो उन्हें आतंरिक सच से परिचित करवा देता है.., ऐसा उनके लगाये आरोपों से प्रतीत होता है.., इस कारण आरोपों को जांचने में हमारा क्या बिगड़ता है..!
-- बोफोर्स घोटाला मामले में सबसे अधिक 45 दिन तक चले शोर शराबे और व्यवधान के बाद सरकार ने जेपीसी की घोषणा की।
-- हर्षद मेहता से जुड़े प्रतिभूति एवं बैंक घोटाला मामले में जेपीसी की मांग को लेकर 17 दिन तक संसद की कार्यवाही बाधित रही।
-- केतन पारिख से जुड़े शेयर घोटाला मामले में जेपीसी की मांग पर 15 दिन तक संसद की कार्यवाही बाधित रही थी।
-- अंतिम बार संयुक्त संसदीय समिति का गठन शीतल पेय, फलों से जुड़े पेय पदार्थो और अन्य पेय सामग्रियों में कीटानुनाशकों के अंश पाए जाने से संबंधित मामलों की जांच के लिए 2003 में किया गया था। इस मामले में जेपीसी की अध्यक्षता शरद पवार ने की थी।
-- जयललिता ने कहा, "यदि डीएमके को छोड़कर संप्रग के सभी सहयोगी पाक-साफ हैं तो वे जेपीसी की जांच से दूर क्यों भाग रहे हैं?"

सोमवार, 29 नवंबर 2010

भोपाल गैस त्रासदी वरसी : दोषी कौन ...? ज्यादा कुछ नहीं सिर्फ सात सवाल ..!

- अरविन्द सीसोदिया
भोपाल गैस त्रासदी की वरसी  . 
 ज्यादा कुछ नहीं सिर्फ सात सवाल .....
१.अमेरिका का जहरीला कारखाना भोपाल रेलवे स्टेशन के पास खोलने की अनुमति किसने दी ? भारत सरकार और मध्यप्रदेश सरकार ने ही.....
२.एंडरसन को भारत से अमेरिका भागने में किसने मदद की ?
भारत सरकार और मध्यप्रदेश सरकार ने ही.....
३.भोपाल गैस त्रासदी के जिम्मेदार लोग कोन है अमेरिका ?
भारत सरकार और मध्यप्रदेश सरकार ने ही.....
४.२५ हज़ार निर्दोस लोगो की मौत के जिम्मेदार लोगो को २५ साल बाद भी केवल २ साल की सजा वो भी जमानत पर रिहा, मतलब सजा तो हुई नहीं
क्या ये ब्रिटेन या अमेरिका में हो सकता है नहीं लेकिन भारत में हुआ है. इसे करने वाले कौन हैं ...? भारत सरकार के कानून से चलने वाला न्यायालय.....
५. भोपाल के ९ लाख लोगों के जीवन से खेलने वाला कौन ..? भारत सरकार और मध्यप्रदेश सरकार ने ही.....
६. भोपाल के ५ लाख ६० लोगों के जीवन के साथ हुए खतरनाक अत्याचार को ठीकसे.., गिनने , संभालने और उनके दुखः को प्रस्तुत करने में लापरवाह कौन ... ..? जनता को मौत के मुहं  में छोड़ कर चुनाव प्रचार में रत रहने वाले असंवेदनशील कौन ..?   भारत सरकार और मध्यप्रदेश सरकार ने ही....

७. गैस पीढ़ीतों  को सही क्षती पूर्ती , सही उपचार और सही पुनर्वास दिलाने में विफल कौन ..? भारत सरकार और मध्यप्रदेश सरकार ने ही....
 तब भारत  सरकार का मतलब   -- इजाजत प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी ने दी थी .., हादसे के समय प्रधान मंत्री राजीव गांधी और मध्य प्रदेश सरकार का मतलब अर्जुन सिंह था...!!!!!!!

मध्य प्रदेश सरकार ने नीचे वर्णित वेव साईट पर सम्पूर्ण वर्णन  डाल रख है 

http://www.mp.gov.in/bgtrrdmp/default.htm




FACTS & FIGURES


Total no wards in Bhopal M.C.(1984)56
Total no of Gas Affected wards36
Total no of Non Gas Affected wards20
Estimated Population of Bhopal M.C.(1984)8,94,539
Estimated Population of 36 wards(1984)5,59,835
Estimated Population of 20 wards(1984)3,34,704
MEDICAL REHABILITATION (As on March,2009)
  • 24 Health Institution Established.


Super-Specialty hospitals01
Specialty  hospitals02
General hospitals03
Day Care Units/Dispensaries
09
Ayurvedic Dispensaries03
Homeopathic Dispensaries03
Unani Dispensaries03
  • 634 bed facilities available in the hospitals.
  • AVERAGE DAILY ATTENDANCE IN OPD IN VARIOUS UNITS  -  3583
  •  ANNUAL INDOOR ATTENDANCE
    - 30313 (2007)
  • Door step treatment  provided to Chronically ill Gas Victim Patients.
  • Expenditure upto March,2009 -Rs.512.09 Crores
MEDICAL REHABILITATION- Expenditure UptoMarch,2009 -Rs. 366.15 Crores
ECONOMIC REHABILITATION -Expenditure UptoMarch,2009 -Rs. 27.06 Crores
SOCIAL REHABILITATION -Expenditure UptoMarch,,2009 -Rs. 45.69 Crores
ENVIRONMENTAL REHABILITATION-Expenditure Upto March,2009 -Rs. 29.39 Crores
CLAIM AND COMPENSATION (As on 30.10.2008)


Total cases registered10,29,517
Number of decided cases10,29,517
Number of awarded cases574366
Number of rejected cases455151
Total compensation awardedRs.1548.46 crores
Total compensation disbursedRs.1548.93 crores

विकिलीक्स : अमरीका का सच सामने आना चाहिए...

विकिलीक्स को लेकर अमरीका में फिर हड़कम्प
- अरविन्द सीसोदिया
    अमेरिका सच का सामना करने घबरा रहा है .., यही नही दुनिया के बहुतसे देश इस तरह के सच से घाबरते हैं .., क्यों कि यह तो कहने की बातें हैं कि हम यह हैं..! मगर जो हम हैं वह बहुतसी बातें छुपी रहती हैं...! पूरी दुनिया को अपने हितों के हिसाब से चलाने के लिए अमरीका ने सब कुछ किया ..! जापान के दो शहरों पर परमाणु बम गिरा कर लाखों लोगों को मौत के मुंह में धकेलने के अमानवीय कार्य में भी वह संलग्न रहा ..!  मेरी व्यक्तीगत मान्यता यही है कि आज विश्व में सर्वाधिक अमानवीय और क्रूर देश अमरीका है ..! उसका सच सामने आना चाहिए..! भारतवासी उस सच को  समझें और हित - अहित को तौल कर अपना फैसला लें..!!
--- विकिलीक्स वेबसाइट के नए संभावित रहस्योदघाटन को लेकर अमरीका में बौखलाहट  है। अमरीका ने भारत सहित अपने वर्त्तमान कुछ घटक देशों को चेतावनी दी है कि इस रहस्योदघाटन के बाद उनके द्विपक्षीय संबंधों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकते हैं। ( भला क्यों..? आपने जरुर कुछ गलत किया होगा )   एसे समाचार मिल रहे हैं कि विकिलीक्स जल्द ही 40 लाख पृष्ठों के गोपनीय दस्तावेज सार्वजनिक करने वाली है। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि ये दस्तावेज किस संबंध में हैं।
    अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता पी.जे. क्राउले ने कहा कि हम ठीक से नहीं जानते कि विकिलीक्स के पास कौन से दस्तावेज हैं और उसकी योजना क्या है, हम चाहते हैं कि इन दस्तावेजों को सार्वजनिक न किया जाए। ट्विटर पर क्राउले ने कहा कि अमेरिकी विदेश विभाग जर्मनी, सऊदी अरब, संयुक्त अरब इमारात, फ्रांस और अफगानिस्तान के नेताओं के संपर्क में है। अमेरिका के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी एडमिरल माइक मुलेन ने भी चेतावनी दी है कि यदि विकीलीक्स और दस्तावेज लीक करता है तो अमेरिकी सेना और उसके साथ काम कर चुके लोगों पर हमले हो सकते हैं। इससे पहले, अक्टूबर में विकिलीक्स ने इराक में अमेरिकी युद्ध से संबंधित चार लाख गोपनीय दस्तावेज पोस्ट किए थे। वेबसाइट अफगानिस्तान युद्ध से संबंधित हजारों गोपनीय दस्तावेज भी सामने ला चुकी है।
गोपनीय सामग्री लौटाए विकिलीक्स : अमेरिका
न्यूयॉर्क, रविवार, नवंबर 28, 2010
---- अमेरिका ने ‘व्हिसलब्लोअर’ वेबसाइट विकिलीक्स के साथ किसी भी तरह की बातचीत करने से इनकार कर दिया है और उससे ‘गैर-कानूनी तरीके से हासिल किए गए’ सभी दस्तावेज लौटाने को कहा है, जिनके खुलासे के चलते ‘असंख्य लोगों की जान खतरे में पड़ सकती है।’ विकिलीक्स की लाखों गोपनीय दस्तावेज जारी करने की योजना है।---- अमेरिका ने ‘व्हिसलब्लोअर’ वेबसाइट विकिलीक्स के साथ किसी भी तरह की बातचीत करने से इनकार कर दिया है और उससे ‘गैर-कानूनी तरीके से हासिल किए गए’ सभी दस्तावेज लौटाने को कहा है, जिनके खुलासे के चलते ‘असंख्य लोगों की जान खतरे में पड़ सकती है।’ विकिलीक्स की लाखों गोपनीय दस्तावेज जारी करने की योजना है।
     अमेरिकी विदेश मंत्रालय के कानूनी सलाहकार हेरल्ड होंग्जू कोह ने विकिलीक्स के संस्थापक जूलियन एसेन्जे को लिखे पत्र में कहा, ‘‘हम अवैध तरीके से हासिल की गई अमेरिकी सरकार की गोपनीय सामग्री को आगे भी जारी करने या उसका प्रसार करने के बारे में कोई भी बातचीत नहीं करेंगे।’’ यह पत्र विकिलीक्स की ओर से एक दिन पहले किए गए संपर्क के जवाब में लिखा गया है। विकिलीक्स ने अमेरिका को सूचित किया था कि उसका लाखों गोपनीय दस्तावेजों का प्रकाशन करने का इरादा है।
    कोह ने शनिवार देर रात प्रेस के समक्ष जारी इस पत्र में कहा कि लोगों की जान बचाने की आपकी इच्छा के बावजूद आपने इसके एकदम उलट काम किया और असंख्य लोगों की जान खतरे में डाल दी। आपने बिना संपादन के और सुरक्षा तथा लोगों की जान की परवाह किए बगैर व्यापक तौर पर इस सामग्री का प्रसार कर अपने उद्देश्य के महत्व को कम किया है। पत्र में कहा गया है, ‘‘जैसा कि आप जानते हैं कि आप जिस सामग्री को प्रकाशित करने का इरादा रखते हैं, अगर वह आपको किसी सरकारी अधिकारी ने या किसी मध्यस्थ ने अनाधिकृत तरीके से मुहैया कराई है, तो ऐसा अमेरिकी कानून के उल्लंघन में हुआ है और इससे हो सकने वाले गंभीर परिणामों की परवाह नहीं की गई है।’’
       पत्र के मुताबिक, ‘‘जब तक विकिलीक्स के पास इस तरह की सामग्री है, तब तक कानून का उल्लंघन जारी रहेगा। ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’, ‘द गार्डियन’ और ‘डेर स्पीगल’ के प्रतिनिधियों के साथ हुई बातचीत के आधार पर हमारी समझ यह है कि विकिलीक्स ने करीब 2,50,000 दस्तावेज उन्हें (अखबारों को) प्रकाशन के लिए मुहैया कराए हैं। यह गोपनीय दस्तावेजों का अवैध प्रसार है।’’
   अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह अमेरिकी सरकार के गोपनीय दस्तावेजों को आगे भी जारी किए जाने या उनका प्रसार होने के बारे में किसी भी तरह की बातचीत विकिलीक्स से नहीं करेगा। मंत्रालय के कानूनी सलाहकार कोह ने कहा कि अगर आप आपके कदमों के चलते हुए नुकसान को रोकने में वास्तव में दिलचस्पी रखते हैं, तो आपको यह सुनिश्चित कराना चाहिए कि विकिलीक्स इस तरह की सामग्री का प्रकाशन बंद करे, विकिलीक्स अपने कब्जे में मौजूद इस तरह के सभी गोपनीय दस्तावेज अमेरिकी सरकार को लौटाए और अपने डाटाबेस से सभी रिकॉर्ड नष्ट करे।
ब्रिटेन को विकिलीक्स खुलासे से मुस्लिम आक्रोश भड़कने की आशंका
---- लंदन : ब्रितानी सरकार ने अपने नागरिकों को आगाह किया है कि विकिलीक्स जिन गोपनीय राजनयिक दस्तावेजों को इस हफ्ते जारी कर रहा है, उनमें जाहिर होने वाले‘इस्लाम विरोधी’विचारों की वजह से पाकिस्तान, इराक, ईरान और मुस्लिम जगत के अन्य हिस्सों में उन्हें हिंसा का निशाना बनाया जा सकता है.
      ऐसी रिपोर्ट है कि अमेरिकी राजनयिकों की फ़ाइलों में विश्व के जिन नेताओं के बारे में आलोचनात्मक टिप्पणियां हैं उनमें दक्षिण अफ़्रीका के पूर्व राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला, अफ़गानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करजई, लीबिया के कर्नल गद्दाफ़ी और जिम्बाब्वे के रॉबर्ट मुगावे समेत कई विश्व नेता शामिल हैं. ‘संडे टाइम्स’ की खबर के मुताबिक, विकिलीक्स वेबसाइट लगभग तीस लाख गोपनीय दस्तावेज इंटरनेट पर जारी करने जा रहा है जिनमें लंदन स्थित अमेरिकी दूतावास से वाशिंगटन भेजे गए बेहद संवेदनशील गोपनीय संदेश भी शामिल हैं.
     इसमें कहा गया है कि ब्रितानी सरकार ने पाकिस्तान, इराक, ईरान और मुस्लिम जगत के दूसरे हिस्सों में रहने वाले अपने नागरिकों को आगाह किया है कि इन राजनयिक दस्तावेजों में जाहिर ‘इस्लाम विरोधी’ विचारों की वजह से उन्हें हिंसा का निशाना बनाया जा सकता है

रविवार, 28 नवंबर 2010

खारिज : राहुल गांधी

- अरविन्द सीसोदिया 
बिहार में जो भी परिणाम आये उनके कई अर्थ हैं .., पहला तो यह कांग्रेस के द्वारा जो राहुल को देश  पर थोपने की साजिश  हो रही थी  वह जनता ने नकार दी ...! साथ ही यह भी सन्देश दे दिया की केंद्र के पैसे की बात अस्वीकार्य है ..., कांग्रेस इस देश के लोगों को शायद कम बुद्धी समझती है .., अन्यथा केंद्र  के पास पैसा जा कहाँ से रहा है ...!! सोनिया जी भूल जातीं हैं कि एक एक पाई राज्यों में रहने वाले आम नागरिकों का है .., उनके द्वारा दिए जारहे टेक्स का है , उनके राज्य की सम्पत्ति का है , उनके संसाधनों को गिरवी रख आकर हंफ्स्ल किये जाने वाके उधार का है ...! एक भी पाई कांग्रेस नामक दल से नही आई है .., बिहार क्या किसी भी राज्य में किसी भी व्यक्ती का एक रुपया पर्सनल खाते से नहीं लगा है ...! चाहे योजना आयोग हो चाहे कोई अन्य केन्द्रीय योजना .., खर्च होने वाला धन इस देश के नागरिकों का है , उनके टैक्स और उन्हें गिरवी रख कर उठाये उधर से है ..! उनके उत्पादन और संसाधनों से है ..! यह कांग्रेस का झूठ बिहार में नहीं चला ..! 
 * बिहार को १७  मुख्य मंत्री देने वाली कांग्रेस दयनीय स्थिति में है , राहुल ने १७ और सोनिया जी नें ५ आम सभाएं कीं थी ..!! कांग्रेसके प्रदेश अध्यक्ष चौधरी महबूब अली केसर चुनाव हार गये ....!! 
 - इस चुनाव में कांग्रेस महज चार सीटों तक ही सिमट कर रह गई। चार में से उसके तीन उम्मीदवार अल्पसंख्यक हैं जबकि एक सीट पर पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सदानंद सिंह ने कहलगांव से कब्जा जमाया| 
कांग्रेस का प्रदर्शन विगत विधानसभा चुनाव से भी खराब रहा। गत विधानसभा चुनाव में लालू प्रसाद यादव की 'बैशाखी' के सहारे कांग्रेस 10 सीटें जीतने में कामयाब रही थी | 
इस बार अकेले चुनाव लड़ने की राहुल की रणनीति ने सीटों का आंकड़ा डबल करने के पार्टी नेताओं के सपने को चकनाचूर कर दिया। 
राहुल ने विधानसभा चुनाव के पहले चरण में कटिहार, अररिया और सुपौल में सभाएं की। कटिहार में कांग्रेस पांचवें स्थान पर रही। यहां से कांग्रेस प्रत्याशी विनोद कुमार यादव को महज 2570 वोट ही मिल सके। अररिया और सुपौल में कांग्रेस उम्मीदवारों को तीसरे स्थान पर संतोष करना पड़ा। 
दूसरे चरण में राहुल ने सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर और समस्तीपुर में सभाएं की। सीतामढ़ी और मुजफ्फरपुर में कांग्रेस चौथे स्थान पर रही जबकि समस्तीपुर में उसके उम्मीदवार को 10,938 वोट मिले और वह तीसरे स्थान पर रहे। 
तीसरे चरण में राहुल ने रामनगर, कुचायकोट और मांझी में पार्टी उम्मीदवारों के पक्ष में प्रचार किया लेकिन यहां के चुनावी नतीजों में उनका यही करिश्मा दिखा कि रामनगर में कांग्रेस दूसरे स्थान पर पहुंच गई तो कुचायकोट से कांग्रेस उम्मीदवार चौथे स्थान पर रहे। मांझी में तो कांग्रेस का और बुरा हाल रहा। कांग्रेस उम्मीदवार यहां पांचवें स्थान पर रहे।
चौथे चरण में राहुल ने बेगूसराय, मुंगेर और भागलपुर में सभाएं की। भागलपुर में कांग्रेस उम्मीदवार अजीत शर्मा ने बीजेपी के अश्विनी चौबे को अच्छी टक्कर दी। हालांकि वह चौबे को हराने में नाकाम रहे। चौबे को मिले 49,164 वोटों के मुकाबले कांग्रेस उम्मीदवार शर्मा को 38,104 वोट मिले। बेगूसराय और मुंगेर में कांग्रेस चौथे स्थान पर रही। 
राहुल ने पांचवें चरण में राज्य की शेखपुरा और नवादा तथा छठे चरण में सासाराम और औरंगाबाद में चुनावी सभाएं की लेकिन इन क्षेत्रों में भी कांग्रेस को कोई खास सफलता नहीं मिली। सासाराम में तो वह छठे स्थान पर पहुंच गई। लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार सासाराम से ही कांग्रेस की सांसद हैं। औरंगाबाद में कांग्रेस पांचवें स्थान पर रही।
- गत लोकसभा चुनाव से कम रहा है कांग्रेस का मत प्रतिशत (८.४ प्रतिशत), जबकि आम तौर पर यह विधान सभा चुनावों में बढता है ..!
- कांग्रेस नें सभी २४३ सीटों पर चुनाव लड़ा और सोनिया जी तथा राहुल ने ही धुआंधार प्रचार किया .. सीटें मिलीं चार ...!!
- यूं तो आर जे डी , लो ज पा और कांग्रेस का कुल मिला कर मत प्रतिशत ३४ है जबकी एन डी ए का मत प्रतिशत इस सारे योग से ५.२ प्रतिशत अधिक हो कर ३९.२ प्रतिशत है, इसी कारण से वह २४३ में से २०६ पर जीत हांसिल कर सकी  ..!!
**** बिहार की जनता ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को विधानसभा चुनाव, 2010 में अभूतपूर्व सफलता दी है l 243 सदस्यों के सदन में जद (यू) को 115 सीटें एवं भाजपा को 91 सीटें; अर्थात राजग को कुल 206 सीटें प्राप्त हुई हैं l राजग तीन-चौथाई के बहुमत से आगामी पांच वर्षों के लिए बिहार पर राज करेगा l
**** बिहार के विधानसभा चुनाव में विपक्ष का सफाया हो गया है l राष्ट्रीय जनता दल (राजद) बमुश्किल 22 सीटें जीत पाया है l राजद का सहयोगी दल लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) मात्र 3 सीट पाकर अस्तित्व के संकट से गुजर रहा है l केंद्र में सत्तासीन एवं देश की सबसे पुरानी एवं बड़ी पार्टी कांग्रेस 4 सीट पाकर शर्मसार है l वामपंथ को इस चुनाव में सिर्फ़ 1 सीट मिला है l पूरे सदन में विपक्ष के मात्र 37 सदस्य बैठेंगे ल 




- ब स पा और वाम दलों का तो सूफडा  ही साफ हो गया .., १ सीट वामदल पर गिनने है ..!
दंभ ने किया सत्यानाश.... 
==बिहार के चुनाव परिणाम ने कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी के मिथक को तोड़ कर रख दिया है l उनका करिश्मा नीतीश कुमार के काम के आगे दम तोड़ चुका है l इस चुनाव ने कांग्रेस को यह सबक जरुर दिया होगा कि जमीनी संगठन के आभाव में, नेहरु-गांधी परिवार का करिश्मा किसी काम का नहीं है l दूसरी गलती जो कांग्रेस ने की, वह यह थी कि कांगेस के सभी नेताओं ने ‘हमने केंद्र से पैसा दिया’ का दंभ भरा बयान बार-बार चुनावी सभाओं में दिया l उनके भाषणों से ऐसा लगता था मानो कांगेस अपने निजी खाते से बिहार को खैरात दे रहा हो l लोगों को कांग्रेस का यह रवैया रास नहीं आया l सबको यही लगा कि अगर राजग हारा तो लालू राज की वापसी हो जायेगी और यह बिहार के जनमानस को  मंजूर नहीं था l फलस्वरूप कांग्रेस राजग की लहर में उड़ गई l सच यही है की बिहार ने कांग्रेस को " मूषकः भवः " की स्थिति में ला दिया है उसे अब फिर से शून्य से अपनी गिनती शुरू करनी पड़ेगी l

शनिवार, 27 नवंबर 2010

बिहार : इस भयावह जीत को संभालना होगा ..!

- अरविन्द सीसोदिया 
 बिहार के जनता दल यू के  नीतीश कुमार एक बार फिर राज्‍य के मुख्‍यमंत्री बने गए हैं। भाजपा के सुशील कुमार मोदी उप मुख्यमंत्री बनेंगे ,  पिछले विधानसभा चुनाव यानी 2005 में जिस प्रकार नीतीश - मोदी  की जीत हुई थी, वो सिर्फ इसलिए क्‍योंकि उससे पहले बिहार का शासन ' जंगल राज ' के समान था। वहां  लोगों की उम्‍मीदों पर पूरी तरह खरे उतरे नीतीश-मोदी जोडी ने  और ज्‍यादा सीटों पर कब्‍जा किया है। वहीं लालू यादव की पार्टी राजद और कांग्रेस की सीटें आधी से भी कम हो गईं। राम विलाश पासवान की पार्टी भी हंसिये पर आगई ..! वहां विपक्ष का नेता बनने की हैसियत तक किसी में नहीं बची ...!हारने वाली पार्टियों में सबसे ऊपर नाम है लालू की राष्‍ट्रीय जनता दल और रामविलास पासवान की लोकजनशक्ति पार्टी। राजद ने 2005 में जहां 54 सीटें जीती थीं, वहीं इस बार वो 22 पर ही सिमट गई। वहीं लोजपा का स्‍कोर 10 से गिरकर 3 हो गया। कांग्रेस जो 2005 में 9 रन पर आउट हुई थी, इस बार मात्र 4 रन बना सकी। वाम दलों को भी जबर्दस्‍त नुकसान हुआ। वाम दलों को आठ सीटों का नुकसान हुआ और वो सिर्फ एक सीट जीत सके।
  विपक्षी  दल न नेता बनने के लिए १० प्रतिशत सीटें न्यूनतम चाहिए ...जो किसी विपक्षी दल पर नहीं है .., लालू जी की पार्टी पर २ सीटें कम हैं .., मगर उनकी पत्नीं राबड़ी देवी और दोनों साले चुनाव हार गये हैं .!  इनके ही गठबंधन को यह पद मिलेगा .... येसी संभावना है ..! फैसला विधानसभा के अध्यक्ष को लेना होगा ! 


भयावह बहुमत 
   यूं तो एन ड़ी ए को खुश होना चाहिए कि उन्होंने सूफडा साफ़ जीत हांसिल की है ..! येशी जीतें पहले भी आती रहीं हैं .., तमिलनाडू में भी इस तरह के परिणाम कई वार दिखें हैं मगर इस तरह की जीत दूसरी वार हार में तब्दील हो जातीं हैं ..!  इसी कारण यह बहुमत भयाबह है ...?  इस भयावह  जीत को संभालना होगा ..! यूं तो आजकल सामान्य तौर पर सरकारें रिपीट हो  रहीं हैं ..! मगर इस जीत को संभालना होगा यह तय है .. लालू जी की सीटें भलेही बहुत कम हों मगर उनका प्रतिशत तो इस बात का सबूत है कि लालू जी कांग्रेस की पिछलग्गू बनने के बजाये .., उसका विकल्प बनने पर ध्यान दें तो जनता उन्हें स्वीकार कर लेगी ..!१   




पार्टी20052010
जनता दल (यूनाइटेड)88115
भारतीय जनता पार्टी5591
राष्‍ट्रीय जनता दल5422
लोक जनशक्ति पार्टी103
कांग्रेस94
भारतीय कम्‍युनिस्‍ट पार्टी91
निर्दलीय व अन्‍य पार्टियां187

सावधान कांग्रेस : जो बिहार में हुआ वह आगे देश में होने वाला है

- अरविन्द सीसोदिया 
  अजी भत्ता तो बहुत छोटी चीज है ... इसे छोड़ने  में क्या जाता है .., हजार दो हजार का क्या .., आपकी सरकार पर तो लाखों  करोड़ डकारने  के आरोप हैं ..! उसमें से हिस्सा आ जाएगा साहब ..! आपको चिता कहाँ है देश के  गरीव व्यक्ती की ...! देश के साथ इमानदार होते तो सबसे पहले .., नरेगा के मजदूर की मजदूरी ३०० रूपए प्रति दिन करते ..! न्यूनतम मजदूरी ३०० रूपये प्रति दिन करते और इसके बाद खुद के वेतन भत्ते बढ़ाते ...! जो मंहगाई  भुगत रहा है उस वर्ग को क्या दिया महाशय .. यह तो बताओ..! डकेता   और लुटेरों के सिपहसालारों को जनता माफ़ नहीं करती .. जो बिहार में हुआ वह आगे देश में होने वाला  है ..! सावधान हो जाओ कांग्रेस और उनके सहयोगी ..! 
  देश  में तो एक आम व्यक्ती को उसकी भाषा में न्याय तक नहीं मिलता .., इस संसद के चलने और न चलने से क्या फर्क पढता है ..! सामान नागरिक संहिता की संवैधानिक बात लागू नहीं होती है ..! आम व्यक्ती को हर तरह से मोहताज बना कर उसे परिजीवी बना दिया गया ...! उसे बी पी एल के दल दल में धकेल दिया गया ..! कौन है एक आम आदमी को गरीवी के दल दल में गिराने वाला ..! महंगाई से लुटवाने वाला ..! उस पर खर्च होने वाले पैसे को घोटालों में चोरी करवा देने वाला ..!! और फिर मजाक की हम दैनिक  भत्ता नहीं लेंगे ..!!   

संसद में 2जी स्पेक्ट्रम मामले की जेपीसी से जांच की मांग पर पिछले कई  दिनों से चले आ रहे गतिरोध के चलते कांग्रेस ने घोषणा की है कि उसके सांसद में कोई काम नहीं होने के कारण इस सत्र का भत्ता नहीं लेंगे। मगर भाजपा सहित विपक्षी दलों ने इसे यह कहते हुए खारिज कर दिया कि कांग्रेस की यह मुद्दे से ध्यान हटाने की चाल है। 

गुरुवार, 25 नवंबर 2010

पर्याप्त नहीं है मुम्बई हमलों पर अभी तक की कार्यवाही


- अरविन्द सीसोदिया
  में दो उन घटनाओं के लिए भारतीय राजनीति से सहमत नहीं हूँ .. जिनमें देश की और से कार्यवाही पर्याप्त नहीं थी ...! पहली घटना देश की संसद पर हुआ पाकिस्तान प्रेरित आक्रमण और दूसरा मुम्बई में हुआ पाकिस्तान प्रेरित आतंकवादी हमला ....! इन दोनों घटनाओं के बाद सरकार को पाकिस्तान पर  आक्रमण करना चाहिए था ..! हमलावरों से सख्ती से निंवटना  चाहिए था ..! मगर ना पाकिस्तान से और न हमलावरों और उनके मददगारों से सरकार निंवट सकी ...!! अब एक बार फिरसे इसी तरह का कोई बड़ा हादसा होगा .. तब भारत - पाक युद्ध हो..., नहीं भी हो ..!! हमें  कायरता का नोवल जो चाहिए ..!!
आओ हम इन घटनाओं में मृत लोगों और शहीद हुए सुरक्षा कर्मियों को हार्दिक नमन करें ..!! उनके बलीदान को श्रृद्धांजली देन ...!! 
ये कर्म कांड काफी नहीं ...
* केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदम्बरम शुक्रवार को 26 नवम्बर 2008 के मुम्बई आतंकी हमले में मारे गए लोगों और शहीदों को श्रद्धांजलि देंगे। अधिकारियों ने बताया कि शुक्रवार सुबह पूर्वी बोरीवली में मेगाथाणे सीएनजी स्टेशन पर आयोजित एक कार्यक्रम में चिदम्बरम के अलावा केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री मुरली देवड़ा और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण हिस्सा लेंगे।
* 26/11 आतंकी हमले में शहीद 17 सुरक्षाकर्मियों में एक को पेट्रोल पम्प आवंटित किए जाने सम्बंधी घोषणा किए जाने की उम्मीद है।

* मुम्बई आंतकी हमले की बरसी पर शहर में कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस हमले में 166 लोग मारे गए थे।
* छत्रपति शिवाजी टर्मिनस, होटल ताज महल पैलेस एंड टावर और होटल ट्राइडेंट-ओबरॉय में भी श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
* एक सामाजिक संगठन 'निजात' आतंकी हमले में शामिल जिंदा बचे पाकिस्तानी आतंकवादी मोहम्मद अजमल आमिर कसाब को तुरंत फांसी पर लटकाए जाने की मांग को लेकर छत्रपति शिवाजी टर्मिनस पर एक हस्ताक्षर अभियान चलाएगा।
* इस मौके पर हमलों में मारे गए एनएसजी अधिकारी मेजर संदीप उन्नीकृष्णन के पिता पी उन्नीकृष्णन गेटवे आफ इंडिया पर एक शांति मार्च में शामिल होंगे।

* कालेज आफ सोशल वर्क, निर्मला निकेतन और 26/11 पीड़ितों के परिवार इस दिन कामा अस्पताल से सेंट जेवियर कालेज तक एक मौन रैली निकालेंगे।
* भारतीय अमेरिकी सोसाइटी ने भी इस मौके पर एक कार्यक्रम का आयोजन किया है। रेलवे के एक अधिकारी ने बताया कि सीएसटी रेलवे स्टेशन पर भी एक स्मृति समारोह होगा।
मुंबई हमलों की वह खौफनाक स्मृति  


     २६  नवंबर २००८ की रात एकाएक मुंबई गोलियों की आवाज़ से दहल उठा. हमलावरों ने मुंबई के दो पाँच सितारा होटलों, रेलवे स्टेशनों और एक यहूदी केंद्र को निशाना बनाया. शुरू में किसी को अंदाज़ा नहीं था कि इतना बड़ा हमला हुआ है. लेकिन धीरे-धीरे इस हमले का अंदाज़ा होना शुरू हुआ. २६  नवंबर २००८  की रात में ही आतंकवाद निरोधक दस्ते के प्रमुख हेमंत करकरे समेत मुंबई पुलिस के कई बड़े  अधिकारी भी इस हमले में अपनी जान गँवा बैठे. लियोपोल्ड कैफ़े और छत्रपति शिवाजी टर्मिनस से शुरू हुआ आतंक का ये तांडव  ताजमहल होटल में जाकर ख़त्म हुआ. लेकिन इस बीच सुरक्षाकर्मियों को 60 से भी ज़्यादा घंटे लग गए. 160 से ज़्यादा लोगों ने अपनी जान गँवाई. मुंबई पुलिस और जाँच अधिकारियों की मानें तो हमलावर दो-दो के गुटों में बँटे हुए थे. लियोपोल्ड कैफ़े
इस कैफ़े में ज़्यादातर विदेशी आते हैं. विदेशी पर्यटकों के बीच यह कैफ़े काफ़ी लोकप्रिय है. इससे पहले ही वहाँ मौजूद लोग कुछ समझ पाते, हमलावरों ने जमकर गोलियाँ चलाई और वहाँ से निकलते बने. आधिकारिक आँकड़ों के मुताबिक़ लियोपोल्ड कैफ़े में हुई गोलीबारी में 10 लोग मारे गए.
छत्रपति शिवाजी टर्मिनस
सबसे ज़्यादा आतंक का तांडव इस भीड़-भाड़ वाले रेलवे स्टेशन पर मचा. देश के व्यस्तम रेलवे स्टेशनों में से एक है मुंबई का छत्रपति शिवाजी टर्मिनस.यहाँ बड़ी संख्या में रेल यात्री मौजूद थे. हमलावरों ने यहाँ अंधाधुंध गोलियाँ चलाईं. जाँच अधिकारियों की मानें तो यहाँ हुई गोलीबारी में अजमल आमिर कसाब और इस्माइल ख़ान शामिल थे. बाद में अजमल आमिर कसाब पकड़ा गया लेकिन इस्माइल ख़ान मारा गया. यहाँ की गोलीबारी में सबसे ज़्यादा 58 लोग मारे गए.
ओबेरॉय होटल
ओबेरॉय होटल व्यापारिक तबके के बीच काफ़ी लोकप्रिय है. इस होटल में भी हमलावर ढेर सारे गोला-बारूद के साथ घुसे थे. माना जाता है कि उस समय उस होटल में 350 से ज़्यादा लोग मौजूद थे. यहाँ हमलावरों ने कई लोगों को बंधक भी बना लिया. राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड के जवानों ने यहाँ दोनों हमलावरों को मार दिया. लेकिन तब तक 32 लोगों की जान जा चुकी थी.
ताजमहल होटल
ताज महल होटल के गुंबद में लगी आग आज भी लोगों के मन मस्तिष्क पर छाई हुई है. गोलीबारी और धमाकों के बीच मुंबई की आन-बान-शान ताजमहल होटल की आग लोग शायद ही भूल पाएँ. ये इमारत 105 साल पुरानी है. गेटवे ऑफ़ इंडिया के पास स्थित ताज महल होटल विदेशी पर्यटकों में काफ़ी लोकप्रिय है. यहाँ से समुद्र का नज़ारा भी दिखाई देता है. होटल पर जब हमला हुआ तो वहाँ डिनर का समय था और बहुत सारे लोग वहाँ जमा थे तभी अचानक अंधाधुंध गोलियाँ चलने लगीं. सरकारी आँकड़ों की मानें तो ताजमहल होटल में 31 लोग मारे गए और चार हमलावरों को सुरक्षाकर्मियों ने मार दिया.
कामा अस्पताल
कामा अस्पताल एक चैरिटेबल अस्पताल है, इसका निर्माण एक अमीर व्यापारी ने 1880 में कराया था. मुंबई पुलिस का मानें तो चार हमलावरों ने एक पुलिस वैन को अगवा कर लिया और उसके बाद लगातार गोलियाँ चलाते रहे.इसी क्रम में वे कामा अस्पताल में भी घुसे. कामा अस्पताल के बाहर ही मुठभेड़ के दौरान आतंकवाद निरोधक दस्ते के प्रमुख हेमंत करकरे, मुंबई पुलिस के अशोक काम्टे और विजय सालसकर मारे गए. इसके अलावा हमलावरों ने नरीमन हाउस को भी निशाना बनाया. नरीमन हाउस चबाद लुबाविच सेंटर के नाम से भी जाना जाता है. नरीमन हाउस में भी हमलावरों ने कई लोगों को बंधक बनाया था.
जिस इमारत में हमलावर घुसे थे वह यहूदियों की मदद करने के लिए बनाया गया एक सेंटर था, जहाँ यहूदी पर्यटक भी अक्सर ठहरते थे. इस सेंटर में यहूदी धर्मग्रंथों की बड़ी लाइब्रेरी और उपासनागृह भी है. यहाँ एनएसजी कमांडो को कार्रवाई करने के लिए हेलिकॉप्टर से बगल वाली इमारत में उतरना पड़ा. कार्रवाई हुई और हमलावर मारे भी गए. लेकिन किसी भी बंधक को बचाया नहीं जा सका. यहाँ सात लोग और दो हमलावर मारे गए.
-- न्यू यॉर्क की अदालत
अमेरिका की एक अदालत ने मुंबई के आतंकवादी हमलों के आरोपी और लश्कर ए तैयबा के संस्थापक हाफिज सईद और पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के प्रमुख अहमद शुजा पाशा सहित कुछ लोगों के खिलाफ समन जारी किया है.26/11 के आतंकवादी हमले में मारे गए अमेरिकी नागरिकों के रिश्तेदारों ने हाफिज सईद, पाशा और जकीउर रहमान लकवी जैसे लोगों पर दहशत फैलाने के लिए हथियार मुहैया कराने के आरोप लगाए हैं.
    रबी गैबरियल नोआ होल्ट्जबर्ग और उनकी पत्नी रिवका के रिश्तेदारों ने 19 नवंबर को न्यू यॉर्क की अदालत में यह मामला दाखिल किया. दो साल पहले मुंबई में हुए आतंकवादी हमले में रबी और उनकी पत्नी की छाबड़ हाउस में मौत हो गई थी. उनके बेटे मोशे को उसकी भारतीय आया ने बचा लिया था. इसमें पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई पर लश्कर की सहायता करने और हमले में मदद करने का आरोप लगाया गया है. इसके बाद ब्रुकलिन कोर्ट ने मेजर समीर अली, आजम चीमा, मेजर इकबाल लकवी, साजिद माजिद, पाशा, सईद और नदीम ताज के खिलाफ समन जारी किया.
छह अमेरिकियों की मौत
--अमेरिका में जारी इस रिपोर्ट में अधिकारियों के हवाले से कहा गया है, "मुंबई हमलों के कम से कम आधा दर्जन संदिग्ध मास्टरमाइंड खुले आम घूम रहे हैं. इनके खिलाफ सबूतों में डेविड हेडली के बयान भी शामिल हैं जिसने लश्कर ए तैयबा के साथ साथ पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई को इन हमलों में शामिल बताया है."
वॉशिंगटन पोस्ट और प्रोपब्लिका डॉट कॉम पर प्रकाशित खोजी पत्रकार सेबेस्टियन रोटेला की रिपोर्ट के मुताबिक, "इस मामले में वास्तविक सबूत भी हैं." रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान हमलों के दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने में आनाकानी कर रहा है जो अमेरिका और पाकिस्तान के बीच टकराव की वजह भी बन सकती है. इन हमलों में 166 लोग मारे गए जिनमें छह अमेरिकी भी शामिल थे.इस बीच अमेरिकी अटॉर्नी जनरल एरिक एच होल्डर ने कहा है कि छह अमेरिकियों की मौत के सिलसिले में कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी. शिकागो में अमेरिकी अटॉर्नी पैट्रिक जे फित्सगेराल्ड मुंबई हमलों और डेनमार्क में आंतकी साजिश से जुड़े मुकदमे में पैरवी कर रहे हैं. लेकिन अधिकारियों को इस बात की संभावना बेहद कम लगती है कि पाकिस्तान संदिग्धों को अमेरिका प्रत्यर्पित करेगा.
उधर एफबीआई ने एक फोन नंबर की पहचान की है जो मुंबई हमलों के एक मास्टरमाइंड सज्जाद, डेविड हेडली और पाकिस्तानी खुफिया आधिकारियों से जुड़ा बताया जा रहा है. लश्कर ए तैयबा के लिए काम करने के दौरान हेडली ने इसी नंबर से पाकिस्तानी खुफिया अधिकारियों को फोन किया. जांच अधिकारियों के हवाले से रिपोर्ट कहती है कि 2005 में मीर के साथ खुफिया मिशन पर भारत जाने वाले आईएसआई के एक अधिकारी से भी इसी नंबर पर बात की गई.हालांकि रोटेला कहते हैं कि इस हमले में पाकिस्तान सरकार के शामिल होने के सवाल पर तीखी बहस छिड़ी है और इसके साथ बहुत कुछ दांव पर लगा है. आतंकवाद विरोधी मुहिम से जुड़े पश्चिमी जगत के कुछ जानकार मानते हैं कि पाकिस्तानी अधिकारियों ने मुंबई के आतंकवादी हमलों में कुछ हद तक तो सरकारी मदद मुहैया कराई ही थी. रिपोर्ट के मुताबिक, "एक वरिष्ठ अमेरिकी आतंकवाद निरोधी अधिकारी का मानना है कि मध्यम स्तर के कुछ पाकिस्तानी अधिकारी हमलों की साजिश से जुड़े थे."