बुधवार, 24 नवंबर 2010

पाकिस्तानी मंत्री ने अमरीकी सच उगला

पाकिस्तान : तालिबान की स्तुती 
अमेरिका : तालिवान से युद्ध भी , आत्म समर्पण भी ....
- अरविन्द सीसोदिया
  अमरीका पाकिस्तान को यह कह कर सहायता देता है कि वह उससे आतंवादियों , तलिवानियों का खात्मा करवाएगा ..! यह  मदद इसीलिए की जा रही है ..., सच अब सामनें है ....! प्रश्न वाचक भी है ...! अमरीकी नीति को पाकिस्तान के ही एक मंत्री ने ही अपरोक्ष रूप से उजागर करते हुए बताया कि वह अन्य धर्मों को आपस में लडवा कर अपना हित साधता है ...!! मेरी भी यही मान्यता है की भारत में पाकिस्तान प्रेरित आतंकवाद प्रारंभ करवाने का मुख्य सूत्रधार अमरीका ही है .....! जब हमारे देश में अंग्रेज राज करते थे तब भी इसी नीति से वे काम करते थे .., उन्होंने हिन्दुओं ओर मुसलमानों को आपस में खूब लड़वाया .., जिन्ना  ओर फारख अब्दुल्ला को इग्लैंड से वापस भारत हिन्दुओं के खिलाफ एक प्रकार से लड़ने ही भेजा ...!! यूं भी हिन्दू ओर मुसलमान आपस में लड़ते रहेंगे  तो  ही  इसाई राज करेंगे .., यह हो भी रहा है ...!!
सच यह है की भारत के प्रती अमरीकी नीति अभी भी भ्रमित है .., उसमें  सुधार नहीं हुआ तो , भारत से ज्यादा नुकसान अमरीका को होगा ..!!         एक खबर .......       पाकिस्तान के पर्यटन मंत्री मौलाना अताउर रहमान के अनुसार, ""उलेमा और तालिबान इस्लामी विचारधारा के सच्चे अनुयायी हैं और अमेरिका दुनिया का सबसे ब़डा आतंकवादी है, जो उनके खिलाफ वैमनस्य पैदा कर रहा है।""
        "डॉन" के अनुसार रहमान ने खौबर पख्तूनख्वा के अलाइ क्षेत्र में जनसभा को सम्बोधित करते हुए २३ नवम्बर २०१०  को कहा कि आतंकवाद तब तक मिटाया नहीं जा सकता जब तक अमेरिका और विश्व मुसलमानों को समान अधिकार और सम्मान नहीं देते। रहमान ने कहा, ""यह गलतफहमी है कि उलेमा और तालिबान विभिन्न धर्मावलम्बियों के सह-अस्तित्व के खिलाफ हैं। दरअसल वह अमेरिका है, जो दुनिया में अपना प्रभुत्व बरकरार रखने के लिए विभिन्न धर्मो में सौहार्द नहीं चाहता।"" पाकिस्तानी सेना ने उत्तरी वजीरिस्तान में तालिबानियों के खिलाफ अभियान छे़ड रखा है।


एक अन्य विश्लेषण ......
अमेरिका अवश्य ही यह महसूस कर रहा होगा कि जिन तालिबानियों को अमेरिका ने जन्म दिया, पाला-पोसा, हथियार और पैसा दिया वही तालिबानी आज अमेरिका के लिए सबसे बड़ा सरदर्द बन गए हैं। अमेरिका ने तालिबानियों का उपयोग अफगानिस्तान में मौजूद सोवियत सेना के खिलाफ किया था वही तालिबानी अब उसके लिए मुसीबत बन गए हैं। सच पूछा जाए तो तालिबानी अब अमेरिका के लिए भस्मासुर सिध्द हो रहे हैं।

दूसरी खबर ......
 (भाषा) नाटो और अफगान नेता यह जानकर दंग रह गए हैं कि अफगान युद्ध को खत्म करने के लिए वह महीनों तक एक गुप्त उच्च स्तरीय वार्ता में जिस व्यक्ति के साथ सौदेबाजी करते रहें, वह कोई बहरूपिया था। तालिबान का एक वरिष्ठ कमांडर मुल्ला अख्तर मुहम्मद मसूंर उस बात से पलट गया है, जो उसके हवाले सेन्यूयॉर्क टाइम्स में प्रकाशित किया गया था। इसके साथ अफगान नेताओं ने महीनों तक वार्ता की थी। अमेरिकी और अफगान नेताओं ने अब बताया है कि अफगानिस्तान का यह व्यक्ति एक बहरूपिया था और नाटो की सहायता से हुई इस चर्चा से बहुत कम मात्रा में उपलब्धि दिखाई पड़ती है। अब, अमेरिकी अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है कि मुल्ला मंसूर का दावा करने वाला व्यक्ति कभी तालिबान नेतृत्व का सदस्य रहा होगा। नाटो और अफगान अधिकारियों ने बताया कि इस व्यक्ति के साथ उनकी तीन बैठकें हुई। टाइम्स अखबार ने बताया कि तालिबान के इस बहुरूपिया कमांडर को राष्ट्रपति हामिद करजई से मिलाने के लिए ले जाया गया। अखबार ने बताया कि यह प्रकरण उस अनिश्चित और अजीबो गरीब माहौल एवं हालात को बयां करता है, जिसमें अफगान और अमेरिकी नेता इस नौ साल पुराने युद्ध को समाप्त करने की राह ढूँढ रहे हैं। इस बहुरूपिया कमांडर की अफगान अधिकारियों के साथ कंधार में तीसरी बैठक होने के बाद इस व्यक्ति की पहचान के बारे में शक पैदा हुआ।

तीसरी खबर ........
अमेरिका का अफगानिस्तान में तालिबान के साथ किस तरह का संबंध है और कैसे अमेरिकी प्रशासन तालिबान कमांडरों की मदद कर रहा है इसका रहस्योदघाटन आज हुआ है। आज ही अमेरिका के प्रसिद्ध अखबार ‘दि नेशन’ में कांग्रेसनल कमेटी की रिपोर्ट छपी है जिसमें कहा गया है अमेरिकी सेना के लिए अफगानिस्तान में रसद की सप्लाई बनाए रखने के लिए अमेरिकी प्रशासन बड़ी मात्रा में प्रोटेक्शन मनी या रंगदारी टैक्स दे रहा है। यह बात अमेरिका की कांग्रेसनल रिपोर्ट में स्वीकार की गई है। इस रिपोर्ट के प्रेस में लीक होने से अमेरिकी प्रशासन परेशान है। अमेरिका के अखबार ‘दि नेशन’ ने इस रिपोर्ट का रहस्योदघाटन किया है। रिपोर्ट का नाम है “Warlord, Inc,” इस रिपोर्ट में बताया गया है कि सेना पर होने वाले खर्चे का एक हिस्सा कैसे तालिबान के हाथों पहुँच रहा है। यह पैसा रंगदारी टैक्स के रूप में तालिबान के सैनिकों को दिया जा रहा है। जिससे अमेरिकी सेना के लिए रसद की अबाधित सप्लाई बरकरार रखी जाए।

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