गुरुवार, 25 नवंबर 2010

पर्याप्त नहीं है मुम्बई हमलों पर अभी तक की कार्यवाही


- अरविन्द सीसोदिया
  में दो उन घटनाओं के लिए भारतीय राजनीति से सहमत नहीं हूँ .. जिनमें देश की और से कार्यवाही पर्याप्त नहीं थी ...! पहली घटना देश की संसद पर हुआ पाकिस्तान प्रेरित आक्रमण और दूसरा मुम्बई में हुआ पाकिस्तान प्रेरित आतंकवादी हमला ....! इन दोनों घटनाओं के बाद सरकार को पाकिस्तान पर  आक्रमण करना चाहिए था ..! हमलावरों से सख्ती से निंवटना  चाहिए था ..! मगर ना पाकिस्तान से और न हमलावरों और उनके मददगारों से सरकार निंवट सकी ...!! अब एक बार फिरसे इसी तरह का कोई बड़ा हादसा होगा .. तब भारत - पाक युद्ध हो..., नहीं भी हो ..!! हमें  कायरता का नोवल जो चाहिए ..!!
आओ हम इन घटनाओं में मृत लोगों और शहीद हुए सुरक्षा कर्मियों को हार्दिक नमन करें ..!! उनके बलीदान को श्रृद्धांजली देन ...!! 
ये कर्म कांड काफी नहीं ...
* केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदम्बरम शुक्रवार को 26 नवम्बर 2008 के मुम्बई आतंकी हमले में मारे गए लोगों और शहीदों को श्रद्धांजलि देंगे। अधिकारियों ने बताया कि शुक्रवार सुबह पूर्वी बोरीवली में मेगाथाणे सीएनजी स्टेशन पर आयोजित एक कार्यक्रम में चिदम्बरम के अलावा केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री मुरली देवड़ा और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण हिस्सा लेंगे।
* 26/11 आतंकी हमले में शहीद 17 सुरक्षाकर्मियों में एक को पेट्रोल पम्प आवंटित किए जाने सम्बंधी घोषणा किए जाने की उम्मीद है।

* मुम्बई आंतकी हमले की बरसी पर शहर में कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस हमले में 166 लोग मारे गए थे।
* छत्रपति शिवाजी टर्मिनस, होटल ताज महल पैलेस एंड टावर और होटल ट्राइडेंट-ओबरॉय में भी श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
* एक सामाजिक संगठन 'निजात' आतंकी हमले में शामिल जिंदा बचे पाकिस्तानी आतंकवादी मोहम्मद अजमल आमिर कसाब को तुरंत फांसी पर लटकाए जाने की मांग को लेकर छत्रपति शिवाजी टर्मिनस पर एक हस्ताक्षर अभियान चलाएगा।
* इस मौके पर हमलों में मारे गए एनएसजी अधिकारी मेजर संदीप उन्नीकृष्णन के पिता पी उन्नीकृष्णन गेटवे आफ इंडिया पर एक शांति मार्च में शामिल होंगे।

* कालेज आफ सोशल वर्क, निर्मला निकेतन और 26/11 पीड़ितों के परिवार इस दिन कामा अस्पताल से सेंट जेवियर कालेज तक एक मौन रैली निकालेंगे।
* भारतीय अमेरिकी सोसाइटी ने भी इस मौके पर एक कार्यक्रम का आयोजन किया है। रेलवे के एक अधिकारी ने बताया कि सीएसटी रेलवे स्टेशन पर भी एक स्मृति समारोह होगा।
मुंबई हमलों की वह खौफनाक स्मृति  


     २६  नवंबर २००८ की रात एकाएक मुंबई गोलियों की आवाज़ से दहल उठा. हमलावरों ने मुंबई के दो पाँच सितारा होटलों, रेलवे स्टेशनों और एक यहूदी केंद्र को निशाना बनाया. शुरू में किसी को अंदाज़ा नहीं था कि इतना बड़ा हमला हुआ है. लेकिन धीरे-धीरे इस हमले का अंदाज़ा होना शुरू हुआ. २६  नवंबर २००८  की रात में ही आतंकवाद निरोधक दस्ते के प्रमुख हेमंत करकरे समेत मुंबई पुलिस के कई बड़े  अधिकारी भी इस हमले में अपनी जान गँवा बैठे. लियोपोल्ड कैफ़े और छत्रपति शिवाजी टर्मिनस से शुरू हुआ आतंक का ये तांडव  ताजमहल होटल में जाकर ख़त्म हुआ. लेकिन इस बीच सुरक्षाकर्मियों को 60 से भी ज़्यादा घंटे लग गए. 160 से ज़्यादा लोगों ने अपनी जान गँवाई. मुंबई पुलिस और जाँच अधिकारियों की मानें तो हमलावर दो-दो के गुटों में बँटे हुए थे. लियोपोल्ड कैफ़े
इस कैफ़े में ज़्यादातर विदेशी आते हैं. विदेशी पर्यटकों के बीच यह कैफ़े काफ़ी लोकप्रिय है. इससे पहले ही वहाँ मौजूद लोग कुछ समझ पाते, हमलावरों ने जमकर गोलियाँ चलाई और वहाँ से निकलते बने. आधिकारिक आँकड़ों के मुताबिक़ लियोपोल्ड कैफ़े में हुई गोलीबारी में 10 लोग मारे गए.
छत्रपति शिवाजी टर्मिनस
सबसे ज़्यादा आतंक का तांडव इस भीड़-भाड़ वाले रेलवे स्टेशन पर मचा. देश के व्यस्तम रेलवे स्टेशनों में से एक है मुंबई का छत्रपति शिवाजी टर्मिनस.यहाँ बड़ी संख्या में रेल यात्री मौजूद थे. हमलावरों ने यहाँ अंधाधुंध गोलियाँ चलाईं. जाँच अधिकारियों की मानें तो यहाँ हुई गोलीबारी में अजमल आमिर कसाब और इस्माइल ख़ान शामिल थे. बाद में अजमल आमिर कसाब पकड़ा गया लेकिन इस्माइल ख़ान मारा गया. यहाँ की गोलीबारी में सबसे ज़्यादा 58 लोग मारे गए.
ओबेरॉय होटल
ओबेरॉय होटल व्यापारिक तबके के बीच काफ़ी लोकप्रिय है. इस होटल में भी हमलावर ढेर सारे गोला-बारूद के साथ घुसे थे. माना जाता है कि उस समय उस होटल में 350 से ज़्यादा लोग मौजूद थे. यहाँ हमलावरों ने कई लोगों को बंधक भी बना लिया. राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड के जवानों ने यहाँ दोनों हमलावरों को मार दिया. लेकिन तब तक 32 लोगों की जान जा चुकी थी.
ताजमहल होटल
ताज महल होटल के गुंबद में लगी आग आज भी लोगों के मन मस्तिष्क पर छाई हुई है. गोलीबारी और धमाकों के बीच मुंबई की आन-बान-शान ताजमहल होटल की आग लोग शायद ही भूल पाएँ. ये इमारत 105 साल पुरानी है. गेटवे ऑफ़ इंडिया के पास स्थित ताज महल होटल विदेशी पर्यटकों में काफ़ी लोकप्रिय है. यहाँ से समुद्र का नज़ारा भी दिखाई देता है. होटल पर जब हमला हुआ तो वहाँ डिनर का समय था और बहुत सारे लोग वहाँ जमा थे तभी अचानक अंधाधुंध गोलियाँ चलने लगीं. सरकारी आँकड़ों की मानें तो ताजमहल होटल में 31 लोग मारे गए और चार हमलावरों को सुरक्षाकर्मियों ने मार दिया.
कामा अस्पताल
कामा अस्पताल एक चैरिटेबल अस्पताल है, इसका निर्माण एक अमीर व्यापारी ने 1880 में कराया था. मुंबई पुलिस का मानें तो चार हमलावरों ने एक पुलिस वैन को अगवा कर लिया और उसके बाद लगातार गोलियाँ चलाते रहे.इसी क्रम में वे कामा अस्पताल में भी घुसे. कामा अस्पताल के बाहर ही मुठभेड़ के दौरान आतंकवाद निरोधक दस्ते के प्रमुख हेमंत करकरे, मुंबई पुलिस के अशोक काम्टे और विजय सालसकर मारे गए. इसके अलावा हमलावरों ने नरीमन हाउस को भी निशाना बनाया. नरीमन हाउस चबाद लुबाविच सेंटर के नाम से भी जाना जाता है. नरीमन हाउस में भी हमलावरों ने कई लोगों को बंधक बनाया था.
जिस इमारत में हमलावर घुसे थे वह यहूदियों की मदद करने के लिए बनाया गया एक सेंटर था, जहाँ यहूदी पर्यटक भी अक्सर ठहरते थे. इस सेंटर में यहूदी धर्मग्रंथों की बड़ी लाइब्रेरी और उपासनागृह भी है. यहाँ एनएसजी कमांडो को कार्रवाई करने के लिए हेलिकॉप्टर से बगल वाली इमारत में उतरना पड़ा. कार्रवाई हुई और हमलावर मारे भी गए. लेकिन किसी भी बंधक को बचाया नहीं जा सका. यहाँ सात लोग और दो हमलावर मारे गए.
-- न्यू यॉर्क की अदालत
अमेरिका की एक अदालत ने मुंबई के आतंकवादी हमलों के आरोपी और लश्कर ए तैयबा के संस्थापक हाफिज सईद और पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के प्रमुख अहमद शुजा पाशा सहित कुछ लोगों के खिलाफ समन जारी किया है.26/11 के आतंकवादी हमले में मारे गए अमेरिकी नागरिकों के रिश्तेदारों ने हाफिज सईद, पाशा और जकीउर रहमान लकवी जैसे लोगों पर दहशत फैलाने के लिए हथियार मुहैया कराने के आरोप लगाए हैं.
    रबी गैबरियल नोआ होल्ट्जबर्ग और उनकी पत्नी रिवका के रिश्तेदारों ने 19 नवंबर को न्यू यॉर्क की अदालत में यह मामला दाखिल किया. दो साल पहले मुंबई में हुए आतंकवादी हमले में रबी और उनकी पत्नी की छाबड़ हाउस में मौत हो गई थी. उनके बेटे मोशे को उसकी भारतीय आया ने बचा लिया था. इसमें पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई पर लश्कर की सहायता करने और हमले में मदद करने का आरोप लगाया गया है. इसके बाद ब्रुकलिन कोर्ट ने मेजर समीर अली, आजम चीमा, मेजर इकबाल लकवी, साजिद माजिद, पाशा, सईद और नदीम ताज के खिलाफ समन जारी किया.
छह अमेरिकियों की मौत
--अमेरिका में जारी इस रिपोर्ट में अधिकारियों के हवाले से कहा गया है, "मुंबई हमलों के कम से कम आधा दर्जन संदिग्ध मास्टरमाइंड खुले आम घूम रहे हैं. इनके खिलाफ सबूतों में डेविड हेडली के बयान भी शामिल हैं जिसने लश्कर ए तैयबा के साथ साथ पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई को इन हमलों में शामिल बताया है."
वॉशिंगटन पोस्ट और प्रोपब्लिका डॉट कॉम पर प्रकाशित खोजी पत्रकार सेबेस्टियन रोटेला की रिपोर्ट के मुताबिक, "इस मामले में वास्तविक सबूत भी हैं." रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान हमलों के दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने में आनाकानी कर रहा है जो अमेरिका और पाकिस्तान के बीच टकराव की वजह भी बन सकती है. इन हमलों में 166 लोग मारे गए जिनमें छह अमेरिकी भी शामिल थे.इस बीच अमेरिकी अटॉर्नी जनरल एरिक एच होल्डर ने कहा है कि छह अमेरिकियों की मौत के सिलसिले में कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी. शिकागो में अमेरिकी अटॉर्नी पैट्रिक जे फित्सगेराल्ड मुंबई हमलों और डेनमार्क में आंतकी साजिश से जुड़े मुकदमे में पैरवी कर रहे हैं. लेकिन अधिकारियों को इस बात की संभावना बेहद कम लगती है कि पाकिस्तान संदिग्धों को अमेरिका प्रत्यर्पित करेगा.
उधर एफबीआई ने एक फोन नंबर की पहचान की है जो मुंबई हमलों के एक मास्टरमाइंड सज्जाद, डेविड हेडली और पाकिस्तानी खुफिया आधिकारियों से जुड़ा बताया जा रहा है. लश्कर ए तैयबा के लिए काम करने के दौरान हेडली ने इसी नंबर से पाकिस्तानी खुफिया अधिकारियों को फोन किया. जांच अधिकारियों के हवाले से रिपोर्ट कहती है कि 2005 में मीर के साथ खुफिया मिशन पर भारत जाने वाले आईएसआई के एक अधिकारी से भी इसी नंबर पर बात की गई.हालांकि रोटेला कहते हैं कि इस हमले में पाकिस्तान सरकार के शामिल होने के सवाल पर तीखी बहस छिड़ी है और इसके साथ बहुत कुछ दांव पर लगा है. आतंकवाद विरोधी मुहिम से जुड़े पश्चिमी जगत के कुछ जानकार मानते हैं कि पाकिस्तानी अधिकारियों ने मुंबई के आतंकवादी हमलों में कुछ हद तक तो सरकारी मदद मुहैया कराई ही थी. रिपोर्ट के मुताबिक, "एक वरिष्ठ अमेरिकी आतंकवाद निरोधी अधिकारी का मानना है कि मध्यम स्तर के कुछ पाकिस्तानी अधिकारी हमलों की साजिश से जुड़े थे."

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें