रविवार, 12 दिसंबर 2010

विकास दर भ्रष्टाचार की ...

- अरविन्द सीसोदिया 
इस समय देश आर्थिक विशेषज्ञ प्रधान मंत्री के नेतृत्व में भ्रष्टाचार के क्षैत्र में आगे बढ़ रहा है ..! ये भी ए, किस्म की तरक्की है..! मीडिया का भी नाम कारण हो गया है .. मीडिया नहीं राडिया...!! टाटा की भी खीज मिटाऊ टर - टर चल रही है ..! चोरी और अफर्ण राम राज से भी होते आयें हैं .., मगर आज तक इन्हें किसी भी राज सत्ता ने जस्टीफाई नहीं किया है ...! अब इस न्यायोचित और समयोचित बताने की कोशिस हो रही है !! यह सब दुर्भाग्य पूर्ण है ...... 
*** बर्लिन। इंटरनेशनल एंटी-करप्शन डे के मौके पर जारी रिपोर्ट में पिछले साल भारत में काम करवाने के लिए 54 फीसदी लोगों ने रिश्वत दी, जबकि पूरी दुनिया की चौथाई आबादी घूस देने को मजबूर है। यह बात ट्रांसपरेंसी इंटरनेशनल की रिपोर्ट में सामने आई है। समाचार एजेंसी डीपीए के अनुसार भ्रष्टाचार विरोधी संगठन ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल (टीआई) द्वारा किए गए इस सर्वेक्षण के निष्कर्ष गुरूवार को बर्लिन में जारी किए गए। निष्कर्षो में कहा गया कि 60 प्रतिशत लोगों ने भ्रष्टाचार को गंभीर समस्या माना है। इसमें अफगानिस्तान, नाइजीरिया, इराक और भारत सबसे ज्यादा भ्रष्ट देशों की श्रेणी में शुमार किए गए है।
इन देशों में आधे से ज्यादा लोगों का मानना है कि उन्हें अपने काम कराने के लिए रिश्वत देनी पडी है। चीन, रूस और मध्यपूर्व में एक तिहाई लोगों ने कहा कि उन्हें अपना काम करवाने के लिए घूस देने के मजबूर होना पडा।
20 लाख करोड़ रुपए बाहर भेजे गए......

*** एमनेस्टी इंटरनेशनल की 191 देशो की फ़ेहरिस्त में भारत को 178वें स्थान पर रखा गया था. करेप्शन प्रेसेप्शन इंडेक्स में भारत 87 वें पायदान पर है. संसद में बैठे नेताओं में से क़रीब एक चौथाई पर भ्रष्टाचार के संगीन आरोप हैं. 1948 से 2008 तक अवैध तरीक़े से हमारे देश से क़रीब 20 लाख करोड़ रुपए बाहर भेजे गए हैं, जो देश की आर्थिक विकास दर (जीडीपी) का चालीस फ़ीसदी है.

विभिन्न संगठनों के संघर्ष के बाद भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए 12 अक्टूबर 2005 को देशभर में सूचना का अधिकार क़ानून भी लागू किया गया. इसके बावजूद रिश्वत खोरी कम नहीं हुई. अफ़सोस तो इस बात का है कि भ्रष्टाचारी ग़रीबों, बुजुर्गों और विकलांगों तक से रिश्वात मांगने से बाज़ नहीं आते. वृद्धावस्था पेंशन के मामले में भी भ्रष्ट अधिकारी लाचार बुजुर्गों के आगे  भी रिश्वत के लिए हाथ फैला देते हैं. 
भ्रष्टाचार उदय....
भारत के उदय में मैं भ्रष्टाचार को सबसे बड़ी बाधा समझता हूं। अब तो देश के सर्वोच्च और अत्यंत सम्मान की दृष्टि से देखे जाने वाले संस्थान भी इसकी लपेट में आ चुके हैं। सन् 2001 में सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एस.पी. भरूचा ने आजिज आकर वक्तव्य दिया था कि न्यायालयों के 20 प्रतिशत न्यायाधीश भ्रष्ट हो चुके हैं। अब जब हमारी न्याय व्यवस्था में भ्रष्टाचार की यह हालत है तो प्रशासन का क्या पूछना। प्रशासन में भ्रष्टाचार का फैलाव तो अत्यंत भयावह स्थिति में पहुंच चुका है। इस सन्दर्भ में पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी का वक्तव्य सभी को याद होगा। उन्होंने कहा था कि गरीबी उन्मूलन परियोजनाओं को केन्द्र द्वारा दिए जाने वाले प्रत्येक सौ करौड़ रुपए में मात्र 15 करोड़ रुपए ही मूल परियोजना में खर्च हो पाते हैं। शेष राशि बीच के सत्ता प्रतिष्ठान से जुड़े भ्रष्ट लोग खा जाते हैं। 

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