रविवार, 12 दिसंबर 2010

कांग्रेस : करकरे शहादत पर साम्प्रदायिकता ....

- अरविन्द सीसोदिया 
हिन्दू विरोधी बयान देने में कांग्रेस के महासचिव दिग्विजय सिंह जी को , कांग्रेस अध्यक्षा श्रीमति सोनिया जी के अलावा कौन नियुक्त कर सकता है ...? यदि उनकी सहमति या पार्टी गाइड लाइन के खिलाफ कोई शब्द हों तो, उन्हें हटाया जानें के लिए तीन लाइन के एक प्रेशनोट  की जरुरत होती है ! मगर सिंह के किसी भी बयान के वाद इस तरह का कोई निर्णय नहीं आया की उन्हें पद से हटा दिया गया है ! इसका मतलव कांग्रेस उनके वक्तव्यों से जुड़ी है ! राजनीति  में कुछ सीधे और कुछ परोक्ष में वक्तव्य दिए जाते हैं ..!! इस खेल को कांग्रेस सिंह के जर्ये लम्बे समय से खेल रही है , अनेक उदाहरण भी हैं ! सिंह लगातार कांग्रेस को मुस्लिम हितचिन्तक पार्टी दिखाने के लिए, हिन्दूओं बदनाम करने में लगी है .! पहले इसाई अंग्रेजों ने हिन्दू - मुस्लिम को आपस में मुर्गों कि तरह लड़ा कर अपना राजकाज चलाया ..! यही कांग्रेस की सरकारों ने किये यही वाम पंथियों ने किया और अब यही सब कुछ ज्यादाही इसाई नेतृत्व के कारण हो रहा है !  इनमें यह ताजा कड़ी है ..! 
पाकिस्तान का कुछ नहीं बिगाड़ सकते . शान्ति प्रिय हिन्दुओं को कोसे जाओ ...! कांग्रेस असंभव को संभव बनने कि लाख कोशिशें करे इसे कोई नहीं मानने वाला ! कांग्रेस की यह नीति उसे चुनावों में भी मंहगी पढेगी ! १७ प्रतिशत मुस्लिम वाला  बिहार गवाह है !    
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आपको बता दें कि दिग्विजय सिंह ने बयान दिया था कि 26/11 के हमले से ढाई-तीन घंटे पहले करकरे ने उन्हें फोन कर मालेगांव विस्फोट की जांच को लेकर कुछ हिंदू आतंकी तत्वों से जान का खतरा होने की बात बताई थी। हालांकि दिग्गी राजा ने भी यह माना है कि करकरे से उनकी खास पहचान नहीं थी। हालांकि दिग्विजय के दावे को करकरे की विधवा ने दो टूक खारिज कर दिया। गौरतलब है कि मुंबई हमले के महीने भर बाद ही तत्कालीन अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री एआर अंतुले ने भी कुछ इसी तरह के सवाल उठाए थे।
बयान पर आलोचनाओं और कविता करकरे के दिग्विजय पर प्रहार के बाद  कांग्रेस ने ( बाहरी दिखावे के लिए )बिना देरी किए दिग्विजय के बयान से किनारा कर लिया। पार्टी महासचिव और मीडिया विभाग के अध्यक्ष जनार्दन द्विवेदी ने  कहा कि दो लोगों की निजी बातचीत है और कांग्रेस का इससे सहमत या असहमत होने का सवाल ही नहीं होता। वहीं, इस बयान से आग बबूला भाजपा ने दिग्विजय की कड़ी आलोचना की और पार्टी ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी से इस पर सफाई देने की मांग की है। सिंह के इस बयान की जदयू और शिवसेना ने भी कड़ी आलोचना की।

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