गुरुवार, 16 दिसंबर 2010

संयुक्त वक्तव्य भारत के लिए निराशाजनक .....

- अरविन्द सीसोदिया
चीन और भारत के प्रधानमंत्रीयों के संयुक्त वक्तव्य भारत के लिए निराशाजनक ही है , आशाजनक होने की आशा भी नहीं थी और  आगे भी रखनीं  नहीं चाहिए ..!  क्यों कि चीन का  छुकाव पाकिस्तान के प्रति अत्यंत  ज्यादा है ! इस यात्रा में भी वे इसके बाद पाकिस्तान जायेंगे ! इसलिए तय है की वे भारत के साथ वह कुछ नहीं करेंगे जिससे पाकिस्तान नाराज हो ..!  
उनका  दौरा महज भारत में अपना माल खपाने के मकसद का ही ज्यादा रहा है और वे उसमें सफल भी हुए ..! हम एक बार फिर लूटे  हैं , ब्रिटेन ,अमरीका , फ्रांस  और अब चीन नें हमसे माल कमानें कि ही बातें कीं हैं और हमारे आर्थिक विशेषज्ञ  प्रधानमंत्री ने देश को बचाने के लिए कुछ नहीं किया है ! सच यह है कि जो जिस माल को बेंचने  में माहिर था उसने वह यहाँ बेंचा है ! हम उन्हें लाभ पहुचने भर के साधन बनें हैं ! 
हमारे चीन से मुख्य विवाद हैं 
१- सीमा विवाद 
२- भारतीय  भूमी पर कब्जे 
३- चीन का अरुणाचल पर दावा करना  
४- जम्मू - कश्मीर के लोगों कि यात्रा पर स्टेपल  वीजा देना
५- पाकिस्तान को मदद देते हुए भारत को परेशानिंयां बढ़ाना
६- पाकिस्तान द्वारा कब्जे किये भारतीय भू भाग में अवैध्य सिविल एवं सैन्य गतिविधियों में लिप्तता 
७- चीन का माल भारत में अवैध्य रूप से डंप करना / सस्ते में बेंच कर यहाँ का उत्पान प्रणाली समाप्त करने का षड्यंत्र करना और अंततः भारतीय गरीव वर्ग के हाथ से रोजी रोटी छिनना ..!
८- पाक प्रेरित आतंकवाद का ठोस विरोध नहीं किया
  इन में से एक भी मुद्दे पर उसने सार्थक बात नहीं की है ..! बल्की उसने हमारे देश के कुटीर और छोटे उद्योगों कि अंतिम रूपसे कमर तोड्नें के लिए व्यापार बढानें कि ही बात की ..! 
कुल मिला कर यह यात्रा मात्र इसलिए थी कि पश्चिमी देश भारत से स्व- मुनाफे के सौदे कर गये तो चीन क्यों पीछे रहे ...! विश्व व्यापार के नाम पर दुनिया के अक्षम देशों को लूटने बाले अलीबाबा और चालीस चोर की तरह ही ....एक साहब ओर आये और कुछ लिया और चले  गये.....! 

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