शनिवार, 31 दिसंबर 2011

गुरु गोविंद सिंह : प्रकाश पर्व के अवसर पर




गुरु  गोविंद सिंह के 345वें जन्मदिवस  प्रकाश पर्व  के अवसर पर  
गुरु गोविंद सिंह .....
(जन्म- 22 दिसंबर सन 1666 ई. पटना, बिहार; मृत्यु- 7 अक्तूबर सन 1708 ई. नांदेड़, महाराष्ट्र) सिक्खों के दसवें व अंतिम गुरु माने जाते थे, और सिक्खों के सैनिक संगति, ख़ालसा के सृजन के लिए प्रसिद्ध थे। कुछ ज्ञानी कहते हैं कि जब-जब धर्म का ह्रास होता है, तब-तब सत्य एवं न्याय का विघटन भी होता है तथा आतंक के कारण अत्याचार, अन्याय, हिंसा और मानवता खतरे में होती है। उस समय दुष्टों का नाश एवं सत्य, न्याय और धर्म की रक्षा करने के लिए ईश्वर स्वयं इस भूतल पर अवतरित होते हैं। गुरु गोविंद सिंह जी ने भी इस तथ्य का प्रतिपादन करते हुए कहा है,
"जब-जब होत अरिस्ट अपारा।
  तब-तब देह धरत अवतारा।"
जन्म
गुरु गोविंद सिंह के जन्म के समय देश पर मुग़लों का शासन था। हिन्दुओं को मुसलमान बनाने की औरंगज़ेब ज़बरदस्ती कोशिश करता था। इसी समय 22 दिसंबर, सन 1666 को गुरु तेगबहादुर की धर्मपत्नी गूजरी देवी ने एक सुंदर बालक को जन्म दिया, जो गुरु गोविंद सिंह के नाम से विख्यात हुआ। पूरे नगर में बालक के जन्म पर उत्सव मनाया गया। बचपन में सभी लोग गोविंद जी को 'बाला प्रीतम' कहकर बुलाते थे। उनके मामा उन्हें भगवान की कृपा मानकर 'गोविंद' कहते थे। बार-बार 'गोविंद' कहने से बाला प्रीतम का नाम 'गोविंद राय' पड़ गया।
बैसाखी
सन 1699 में बैसाखी वाले दिन केशगढ़ साहब में श्री गुरु गोविन्द सिंह ने एक विचित्र नाटक किया। खुले मैदान में खडे़ होकर उन्होंने एक सिर माँगा, लोग हैरान थे कि हाथ में तलवार लेकर वह एक व्यक्ति का सिर माँग रहे हैं। यह कैसी अनोखी माँग है। बैसाख के मेले में एक सोई हुई क़ौम को जगाने का इतिहास रचा जा रहा था। लोग तब यह नहीं समझ सके। बैसाखी को कई इतिहासकार जंग-ए-आज़ादी का शंखनाद मानते हैं। ग़ुलामी की जंजीरों को काटकर गुरु गोविन्द सिंह ने हक़ हलाल की लड़ाई की शुरुआत की, वहीं जो इंसान अपने हाथों में एक लाठी भी पकड़ने में झिझकता था, उन्होंने कृपाण पकड़ने का साहस भरा। एक- एक करके पाँच जांबाज़ अपना शीश हथेली पर रख कर आगे आए और गुरु गोविन्द सिंह के उस आह्वान को चरितार्थ किया।
पंचप्यारे
वो पाँच प्यारे जो देश के विभिन्न भागों से आए थे और समाज के अलग- अलग जाति और सम्प्रदाय के लोग थे, उन्हें एक ही कटोरे में अमृत पिला कर गुरु गोविन्द सिंह ने एक बना दिया। इस प्रकार समाज में उन्होंने एक ऐसी क्रान्ति का बीज रोपा, जिसमें जाति का भेद और सम्प्रदायवाद, सब कुछ मिटा दिया। बैसाखी का एक महत्त्व यह है कि परम्परा के अनुसार पंजाब में फ़सल की कटाई पहली बैसाख को ही शुरू होती है और देश के दूसरे हिस्सों में भी आज ही के दिन फ़सल कटाई का त्योहार मनाया जाता है, जिनके नाम भले ही अलग-अलग हों।
आज के दिन यदि हम श्री गुरु गोविन्द सिंह के जीवन के आदर्शों को, देश, समाज और मानवता की भलाई के लिए उनके समर्पण को अपनी प्रेरणा का स्रोत बनाऐं और उनके बताये गए रास्ते पर निष्ठापूर्वक चलें तो कोई कारण नहीं कि देश के अन्दर अथवा बाहर से आए आतंकवादी और हमलावर हमारा कुछ भी बिगाड़ सकें।
सिक्खों में युद्ध का उत्साह
 सवा लाख से एक लड़ाऊँ चिड़ियों सों मैं बाज तड़ऊँ तबे गोबिंदसिंह नाम कहाऊँ - गुरु गोविंद सिंह
गोविद सिंह ने सिक्खों में युद्ध का उत्साह बढ़ाने के लिए हर क़दम उठाया। वीर काव्य और संगीत का सृजन उन्होंने किया था। उन्होंने अपने लोगों में कृपाण जो उनकी लौह कृपा था, के प्रति प्रेम विकसित किया। ख़ालसा को पुर्नसंगठित सिक्ख सेना का मार्गदर्शक बनाकर, उन्होंने दो मोर्चों पर सिक्खों के शत्रुओं के ख़िलाफ़ क़दम उठाये।
ख़ालसा पंथ
ख़ालसा का अर्थ है ख़ालिस अर्थात विशुद्घ, निर्मल और बिना किसी मिलावट वाला व्यक्ति। इसके अलावा हम यह कह सकते हैं कि ख़ालसा हमारी मर्यादा और भारतीय संस्कृति की एक पहचान है, जो हर हाल में प्रभु का स्मरण रखता है और अपने कर्म को अपना धर्म मान कर ज़ुल्म और ज़ालिम से लोहा भी लेता है।
गोविन्द सिंह जी ने एक नया नारा दिया है- 
वाहे गुरु जी का ख़ालसा, वाहे गुरु जी की फतेह।
गुरु जी द्वारा ख़ालसा का पहला धर्म है कि वह देश, धर्म और मानवता की रक्षा के लिए तन-मन-धन सब न्यौछावर कर दे। निर्धनों, असहायों और अनाथों की रक्षा के लिए सदा आगे रहे। जो ऐसा करता है, वह ख़लिस है, वही सच्चा ख़ालसा है। ये संस्कार अमृत पिलाकर गोविंद सिंह जी ने उन लोगों में भर दिए, जिन्होंने ख़ालसा पंथ को स्वीकार किया था।
ज़फरनामा में स्वयं गुरु गोविन्द सिंह जी ने लिखा है कि जब सारे साधन निष्फल हो जायें, तब तलवार ग्रहण करना न्यायोचित है। गुरु गोविंद सिंह ने 1699 ई. में धर्म एवं समाज की रक्षा हेतु ही ख़ालसा पंथ की स्थापना की थी। ख़ालसा यानि ख़ालिस (शुद्ध), जो मन, वचन एवं कर्म से शुद्ध हो और समाज के प्रति समर्पण का भाव रखता हो। सभी जातियों के वर्ग-विभेद को समाप्त करके उन्होंने न सिर्फ़ समानता स्थापित की बल्कि उनमें आत्म-सम्मान और प्रतिष्ठा की भावना भी पैदा की। उनका स्पष्ट मत व्यक्त है-
मानस की जात सभैएक है।
ख़ालसा पंथ की स्थापना (1699) देश के चौमुखी उत्थान की व्यापक कल्पना थी। एक बाबा द्वारा गुरु हरगोविंद को 'मीरी' और 'पीरी' दो तलवारें पहनाई गई थीं।
एक आध्यात्मिकता की प्रतीक थी।
दूसरी सांसारिकता की।
गुरु गोविन्द सिंह ने आत्मविश्वास एवं आत्मनिर्भरता का संदेश दिया था। ख़ालसा पंथ में वे सिख थे, जिन्होंने किसी युद्ध कला का कोई विशेष प्रशिक्षण नहीं लिया था। सिखों में समाज एवं धर्म के लिए स्वयं को बलिदान करने का जज़्बा था।
एक से कटाने सवा लाख शत्रुओं के सिर
गुरु गोविन्द ने बनाया पंथ खालसा
पिता और पुत्र सब देश पे शहीद हुए
नहीं रही सुख साधनों की कभी लालसा
ज़ोरावर फतेसिंह दीवारों में चुने गए
जग देखता रहा था क्रूरता का हादसा
चिड़ियों को बाज से लड़ा दिया था गुरुजी ने
मुग़लों के सर पे जो छा गया था काल सा
गुरु गोविन्द सिंह का एक और उदाहरण उनके व्यक्तित्व को अनूठा साबित करता है-
पंच पियारा बनाकर उन्हें गुरु का दर्जा देकर स्वयं उनके शिष्य बन जाते हैं और कहते हैं- ख़ालसा मेरो रूप है ख़ास, ख़ालसा में हो करो निवास।
वीरता व बलिदान की मिसालें
परदादा गुरु अर्जुन देव की शहादत।
दादा गुरु हरगोविंद द्वारा किए गए युद्ध।
पिता गुरु तेगबहादुर सिंह की शहादत।
दो पुत्रों का चमकौर के युद्ध में शहीद होना।
दो पुत्रों को ज़िंदा दीवार में चुनवा दिया जाना।
इस सारे घटनाक्रम में भी अड़िग रहकर गुरु गोविंद सिंह संघर्षरत रहे, यह कोई सामान्य बात नहीं है। यह उनके महान कर्मयोगी होने का प्रमाण है। उन्होंने ख़ालसा के सृजन का मार्ग देश की अस्मिता, भारतीय विरासत और जीवन मूल्यों की रक्षा के लिए, समाज को नए सिरे से तैयार करने के लिए अपनाया था। वे सभी प्राणियों को आध्यात्मिक स्तर पर परमात्मा का ही रूप मानते थे। 'अकाल उस्तति' में उन्होंने स्पष्ट कहा है कि जैसे एक अग्नि से करोड़ों अग्नि स्फुर्ल्लिंग उत्पन्न होकर अलग-अलग खिलते हैं, लेकिन सब अग्नि रूप हैं, उसी प्रकार सब जीवों की भी स्थिति है। उन्होंने सभी को मानव रूप में मानकर उनकी एकता में विश्वास प्रकट करते हुए कहा है कि हिन्दू तुरक कोऊ सफजी इमाम शाफी। मानस की जात सबै ऐकै पहचानबो।
मृत्यु
गुरु गोविन्द सिंह ने अपना अंतिम समय निकट जानकर अपने सभी सिखों को एकत्रित किया और उन्हें मर्यादित तथा शुभ आचरण करने, देश से प्रेम करने और सदा दीन-दुखियों की सहायता करने की सीख दी। इसके बाद यह भी कहा कि अब उनके बाद कोई देहधारी गुरु नहीं होगा और 'गुरुग्रन्थ साहिब' ही आगे गुरु के रूप में उनका मार्ग दर्शन करेंगे। गुरु गोविंदसिंह की मृत्यु 7 अक्तूबर सन 1708 ई. में नांदेड़, महाराष्ट्र में हुई थी।
आज मानवता स्वार्थ, संदेह, संघर्ष, हिंसा, आतंक, अन्याय और अत्याचार की जिन चुनौतियों से जूझ रही है, उनमें गुरु गोविंद सिंह का जीवन-दर्शन हमारा मार्गदर्शन कर सकता है।

राजनीती का यह नग्न सत्य भंवरी




- अरविन्द सिसोदिया 
राजनीती का यह नग्न सत्य भंवरी के रूप में राजस्थान की राजनीती में १ सितम्बर 2011 से छैया हुआ हे ...सत्ता का मद और सौन्दर्य की संगत कहाँ ले जाकर खड़ा कर देती हे , यह  इसका नमूना है ! कांग्रेस के विधायक और रिटायर्ड कर्नल सोना राम ने दावा किया कि सीबीआई ने भंवरी के 139 सेक्स सीडी बरामद हुई हैं। इनमें कई नेता और राजस्थान सरकार के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। भंवरी की बात तो उजागर हो गई , मगर हजारो भंवारियों की सिसकियाँ किसी ने नहीं सुनी || 
      लगता है सी बी आई भी कोंगेस के  डेमेज कंट्रोल करने में लगी हे और बांकी और लोगों को बचा कर भंबरी के भंवर को धीरे धीरे समाप्त करने की दिशा में काम कर रही है | अन्यथा १३९ कथित सीडीयों में क्या हे यह बहार क्यों नहीं आरहा ??
---------
केंद्रीय मंत्री के भी थे भंवरी से संबंध?
25 Dec 2011,एजेंसियां 
जयपुर।। भंवरी देवी मामले की लपटें अब दिल्ली तक भी पहुंचने लगी हैं। एक अंग्रेजी अखबार में छपी रिपोर्ट के मुताबिक एक केंद्रीय मंत्री के भी लापता नर्स भंवरी देवी से संबंध थे। जोधपुर में आयोजित ' किसान संभावना रैली ' में कांग्रेस के विधायक और रिटायर्ड कर्नल सोना राम ने दावा किया कि सीबीआई ने भंवरी के 139 सेक्स सीडी बरामद हुई हैं। इनमें कई नेता और राजस्थान सरकार के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। सोना राम ने दावा किया कि इन सीडी में कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता भी शामिल बताए जाते हैं। उन्होंने कहा कि उस नेता का नाम क्षेत्रीय न्यूज चैनलों पर भी आ चुका है। सोना राम ने कहा कि या तो उस नेता को चैनल पर मुकदमा करना चाहिए या सबके सामने आकर अपना पक्ष रखना चाहिए।

इसके तीन दिन पहले जाट नेता यू.आर. बेनीवाल ने भी दावा किया था कि एक केंद्रीय मंत्री के भंवरी से संबंध थे। यह मामला जोधपुर में चर्चा का विषय बना हुआ है। जोधपुर की इस रैली में बेनीवाल ने फिर अपने दावे को दोहराया और नाम लेकर उस केंद्रीय मंत्री से इस मामले में अपनी स्थिति साफ करने की मांग की। अखिल भारतीय कांग्रेस कमिटी के महासचिव जनार्दन द्विवेदी और मुकुल वासनिक जब जयपुर आए थे, तब यह मामला उनके सामने भी रखा गया था। द्विवेदी ने इसे स्थानीय मामला बताक पल्ला झाड़ लिया, जबकि वासनिक ने कहा कि इसकी जांच सीबीआई कर रही है। 

ऐसा कहा जा रहा है कि सीबीआई जांच के दौरान भी इस केंद्रीय मंत्री का नाम कई बार चर्चा में आया है, लेकिन हर बार इस पर पर्दा डालने की कोशिश की गई। यही वजह है कि सोना राम उस नेता से अपनी स्थिति साफ करने को कह रहे हैं। कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि 2003 में राजस्थान में विधानसभा चुनाव होने से पहले भंवरी टिकट के लिए मंत्री जी से दिल्ली में मिली थीं। इसके पहले भी वह पार्टी के जयपुर मुख्यालय में कई बार उनके साथ देखी गईं |

========
http://aajtak.intoday.in/story
भंवरी देवी: सत्ता, सेक्स और शोषण की दास्तां
रोहित परिहार | सौजन्‍य: इंडिया टुडे | जयपुर, 30 दिसम्बर 2011
राजस्थान में तो साल 2011 भंवरी देवी के ही नाम रहा. 36 साल की यह नर्स 1 सितंबर को लापता हो गई. अब तक भी उसका सुराग नहीं मिला है. अंदेशा यही जताया जा रहा है कि वह मर चुकी है. उसके प्रकरण ने यह साबित किया कि कांग्रेस के लोग खुद को बचाने के लिए किस हद तक जा सकते हैं. बड़े और रसूखदार समझे जाने वाले नेता किस तरह से एक जवान स्त्री का लंबे अरसे तक शोषण करते रहे. नैतिकता को उठाकर उन्होंने दूर कहीं किसी ताक पर रख दिया था. अगर कुछ नजर आ रहा था तो वह थी एक आपराधिक प्रवृत्ति.


28 दिसम्‍बर 2011: तस्‍वीरों में देखें इंडिया टुडे


उसी महिला ने जब असहज स्थितियां पैदा करनी शुरू कर दीं तो उसे रास्ते से ही हटा दिया गया. पूर्व मंत्री महिपाल मदेरणा और मलखान सिंह, दोनों को गिरफ्तार किया जा चुका है. दोनों मौजूदा विधायक हैं. उनकी गिरफ्तारी से पूरा प्रदेश सकते में है. परंपरागत सोच वाले इस राज्‍य में जिन महिलाओं ने बाहर निकलकर तमाम तरह के कामों और नौकरियों में शिरकत करनी शुरू की थी, अब वे असुरक्षित और डरी महसूस कर रही हैं.


21 दिसम्‍बर 2011: तस्‍वीरों में देखें इंडिया टुडे


आजादी के बाद से राजस्थान में नेताओं और अपराधियों के बीच इतनी गहरी साजिश पहले कभी नहीं देखी गई. यहां तक कि पूरे देश में भी इस तरह की मिसालें कम ही हैं. 1995 में दिल्ली में सुशील शर्मा नाम के एक कांग्रेसी नेता ने अपनी पत्नी नैना साहनी को कत्ल करके उसे तंदूर में जला डाला था. इस घटना को लेकर देश भर में उपजे जनता के गुस्से को देखते हुए केंद्र सरकार को नेताओं और अपराधियों के बीच गठजोड़ की पड़ताल करने के लिए एनएन वोहरा की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाने को मजबूर होना पड़ा था.


14 दिसंबर 2011: तस्‍वीरों में देखें इंडिया टुडे


07 दिसंबर 2011: तस्‍वीरों में देखें इंडिया टुडे


भंवरी देवी का प्रकरण एक तरह से यही बताता है कि हालात बद से बदतर ही हुए हैं. यहां तक कि सिल्क स्मिता को भी सेक्स के रास्ते कॅरियर में ऊपर चढ़ने का रास्ता बनाने पर मार नहीं डाला गया. उसे अपनी मौत मरने के लिए उसके हाल पर छोड़ दिया गया. और राजस्थान में भंवरी को मार डाला जाता है. उसके अनुसूचित जाति का होने की वजह से कोई बहुत बड़ा जनाक्रोश भी नहीं पैदा होता. उसके लापता होने की जांच कर रही सीबीआइ भी अब कमोबेश इस निष्कर्ष तक आ पहुंची है कि वह मारी जा चुकी है.


30 नवंबर 2011: तस्‍वीरों में देखें इंडिया टुडे


मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कहते हैं कि भंवरी देवी जैसे मामलों की वजह से थोड़े ही कैबिनेट में फेरबदल होते हैं लेकिन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष चंद्रभान स्वीकारते हैं कि इसी वजह से मंत्रियों के सामूहिक इस्तीफे लेकर कुछ को हटाना पड़ा. भंवरी देवी प्रकरण ने कांग्रेस के बदनुमा चेहरे को सामने ला दिया है. महत्वाकांक्षी भंवरी के साथ वैसा ही हुआ, जैसा कि राजनीति फिल्म में श्रुति सेठ के साथ होता है. उसका वीडियो क्लिप उस क्लिप से मिलता-जुलता है, जिसमें मदेरणा और भंवरी एक साथ पाए गए हैं.


23 नवंबर 2011: तस्‍वीरों में देखें इंडिया टुडे
16 नवंबर 2011: तस्‍वीरों में देखें इंडिया टुडे


श्रुति कड़ी मेहनत की दुहाई देती है. भंवरी पहले मुंबई की एक यात्रा और फिर पैसे के लिए आग्रह करती है. इस बीच वह सियासत में भी घुसने की कोशिश जारी रखती है. बिलाड़ा विधानसभा क्षेत्र से टिकट की अर्जी भी लगा देती है. नौकरशाह और पुलिस अफसर भी उसके साथ रंगरेलियां मनाते हैं. इसके बाद ये लोग वही करते हैं, जो मदेरणा और मलखान सिंह उनसे करने को कहते हैं. भंवरी को ड्यूटी पर आने से ही छुट्टी दे दी जाती है.


9 नवंबर 2011: तस्‍वीरों में देखें इंडिया टुडे
2 नवंबर 201: तस्‍वीरों में देखें इंडिया टुडे


उसके कत्ल की साजिश रचने के लिए सरकारी जगहों का खुलकर इस्तेमाल किया गया. जयपुर के सिविल लाइंस के जबरदस्त सुरक्षा वाले इलाके में स्थित मदेरणा के घर में बैठकर आरोपी भगोड़ा सहीराम बिश्नोई फोन पर भंवरी को मारने की पूरी योजना बना रहा था. अपहर्ताओं ने जोधपुर के सर्किट हाउस में बैठकर सारा खाका बनाया और काम को अंजाम देने के बाद वे फिर से वहीं लौट आए.
भंवरी को अगर टिकट मिल गया होता और वह विधायक हो गई होती तब भी क्या मदेरणा की पत्नी लीला यह कहतीं कि यह तो दो वयस्क लोगों के आपसी सहमति से सेक्स करने का मामला है? कांग्रेस के वोटर समुदाय जाट, बिश्नोई और अनुसूचित जाति के वोटों का क्या होता पता नहीं, लेकिन भंवरी ने उसकी चूलें तो हिला ही दी हैं.

सुनो राहुलजी - राज्य महिमा, केन्द्र के गुलछरे राज्यों की जनता के पैसे से..





सुनो राहुलजी - राज्य महिमा..........
राज्यों की जनता के पैसे से केन्द्र की सरकार चलती है....
केन्द्र सरकार चाहे कांग्रेस नेतृत्व की हो या किसी ओर दल की, उसके खजानें में पैसा विदेशों से नहीं आता, जो उनके नेता यह कहते हें कि हम पैसा भेजते हैं और राज्य खा जाते है। सच यह है कि, यह सारा पैसा राज्यों की जनता भेजती है केन्द्र सरकार के खजानें में, एक्साइज डियूटी, कस्टम, आयकर, सेवाकर और कई अनेक प्रकार के करों और राज्यों की सम्पतियों के कारण से पैसा आता है। तब केन्द्र सरकार खर्च करती है। संघ शासित क्षैत्र हे कितना सा ..., उनमें कितनी जनसँख्या और कितने लोग हें .., उनसे कितना सा  टैक्स आपात हे | जो भी होता हे वह राज्यों की जनता के  धन से होता हे | 
राज्यों की जनता के पैसे से ही केन्द्र सरकार चलती है और उसी में से वह खुद व राज्यों पर खर्च करती है। फिर बार - बार यह कहना कि हम पैसा भेजते हैं राज्य सरकार खा जाती है। क्या औचित्य है इसका ????? राज्यों की सरकार और जन प्रतिनिधियों पर यह कैसी दादागिरी भई ? केन्द्र गुलछरे ही राज्यों की जनता के पैसे से उडा रहा है। एक दिन भी राज्यों का पैसा नहीं पहुचे तो हाहाकार मच जायेगा। और यह भी कि राज्यों की जनता से ही लोकसभा और राज्य सभा बनती है। 

कांगेसी लोकपाल बिल तो भ्रष्टाचारियों का सुरक्षा कवच



- अरविन्द सिसोदिया 


  अच्छा ही हुआ कि कांग्रेस का नकली लोकपाल बिल पास नहीं हुआ , अन्यथा लोकपाल को शिकायत करने वाले कि खैर नहीं थी ....! इसमें भरी तबदीली कि जरुरत हे .., शिकायत इस प्रकार से करने कि सुविधा हो कि उसकी जांच हो सके और साबित करने , साक्ष्य जुटाने का भार भी सरकारी जांच एजेंसी पर हो जो कि निष्पक्ष हो और लोकपाल के ही अंतर्गत हो ..!! शिकायत करता को जांच और साक्ष्य जुटाने की जवाव देहि से मुक्त रखना चाहिए , वह सूचना दे रहा हे यह भी काफी हे ...शिकायत को गुप्त  रखनें की बात रखी जा सकती हे ...!

” कांग्रेस और उसके नेता यथा सोनियाजी, राहुलजी,पवन बंसलजी, अभिषेक सिंघवी जी और कई सारे,,,,,कांगेसी लोकपाल बिल के लोकसभा मे संवैधानिक दर्जा नहीं मिलने और राज्यसभा में पास नहीं होने का ठीकरा विपक्ष और भाजपा के सिर फोड रहे है। यह गलत है, कांग्रेस के पास दोनों ही सदनों में बहूमत नहीं है। उसक खुद के सदस्यों की संख्या तो काफी कम है। इस स्थिती में सबसे सलाह मशविरा करके ही बिल आता तो पास होता । कांगेस ने एक तानाशाह की तरह हुक्म फरमाया कि हम चुनावी फायदे का बिल पेश कर रहे हैं इस पर सब मोहर लगाओं । भारतीय लोकतंत्र अभी इतना गुलाम नहीं हुआ कि इटालियन इस पर ईस्ट इण्डिया कंपनी की तरह हुक्म बजायें । संसद में सांसदों ने जो किया ठीक किया । देशहित में और राज्यों के हित में किया । कांगेसी लोकपाल बिल तो भ्रष्टाचारियों की सुरक्षा के लिये बनाया गया हैं इसमें भारी तबदीली की जरूरत है। “

सेक्स 'सर्च' : भारत भी पीछे नहीं : नैतिक पतन




- अरविन्द सिसोदिया 
इन्टरनेट........
तमाम तरीकों से समाज को लाभदायक होते हुये भी,
नैतिक पतन का दूसरा सबसे बडा कारण बन गया।
चैनलों की बेशर्मी के बाद, इन्टरनेट पर तो कोई नियंत्रण ही नहीं,
3 जी और स्मार्ट मोबाईल ने,
लगभग घर - घर को सैक्स का ग्राहक बना दिया!
सरकार अभी तक कोई प्रभावी तरीका,
नियंत्रण या व्यवस्था के लिये नहीं बना पाई!!
--------------
भारत भी पीछे नहीं,
सेक्स 'सर्च' करने में पाक आगे !
Source: dainikbhaskar.com   | 30/12/२०११
http://www.bhaskar.com
नई दिल्ली. साल 2011 में गूगल पर 'सेक्स' शब्द खोजने में रूचि रखने के मामले में पाकिस्तान दूसरे नंबर पर रहा। गूगल सर्च ट्रेंड के मुताबिक साल 2011 में इंटरनेट पर सेक्स को सर्च करने में सबसे ज्यादा रूचि श्रीलंका के लोगों ने दिखाई और उसके बाद पाकिस्तान के लोगों ने।
सेक्स को सर्च करने में एशियाई देशों में कितनी रूचि रहती है इसका अंदाजा इस बात से लग सकता है कि इंटरनेट पर सेक्स को खोजने में पाकिस्तान के बाद भारत का नंबर है। मजे की बात यह है गूगल पर सेक्स को सबसे ज्यादा सर्च करने वाले दस शहरों में से आठ भारत के हैं। भारत में सेक्स सबसे ज्यादा नई दिल्ली से सर्च किया जाता है। सूची में दिल्ली के बाद बेंगलुरु, कलकत्ता, लखनऊ, पुणे, चेन्नई, मुंबई, पटना, चंटीगढ़ और विजयवाड़ा है।
वहीं पाकिस्तान में भी सबसे ज्यादा सेक्स इस्लामाबाद में ही सर्च किया जाता है। इसके बाद लाहौर, क्वेटा, कराची, पेशावर, मुल्तान और रावलपिंडी आते हैं। लेकिन एक मजेदार तथ्य यह है कि पाकिस्तान के करीब 2 करोड़ इंटरनेट यूजर सेक्स को सर्च करने के मालमें में भारत के करीब दस करोड़ इंटरनेट यूजरों को पीछे छोड़ देते हैं।
गूगल ट्रेंड्स के नतीजे देखने पर एक और मजेदार तथ्य यह आता है कि श्रीलंका, जो सेक्स को सर्च करने के मामले में टॉप पर है, में सिर्फ राजधानी कोलंबो से ही सेक्स को सर्च किया जाता है।
सबसे ज्यादा सेक्स सर्च करने वाले देशों में श्रीलंका, पाकिस्तान और भारत के बाद पपुआ न्यू गिनी, इथिओपिया और बंग्लादेश का नंबर आता है।

शुक्रवार, 30 दिसंबर 2011

पैसे के लिए पतन : सन्नी लियोन : टीवी चैनल





- अरविन्द सिसोदिया 
२०११ में सबसे बड़ा नैतिक पतन चैनलों का देखनो को मिला ,
अश्लीलता से भरे हाश्य कार्यक्रम और विज्ञापन सरकार रोकनें में विफल रही ..
हद तो तब हो गई जब .., पोर्न फिल्मों में काम करनें वाली एक विदेशी अभिनेत्री को दम तोड़ते सीरियल को बचने के लिए बुला लिया गया ..! पैसे के लिए इससे जयादा  और क्या गिरना होगा..!!!
सार्वजानिक प्रदर्शन किसी भी तरह का हो , उसकी एक मर्यादा होनी ही चाहिए ...भारत में इतनी  स्वछंदता की फ़िल्में , चेनलों के हाश्य कार्यक्रम और विज्ञापन पोर्न नहीं तो सेमी पोर्न तो हो ही गए ..!    
-----------
सन्नी लियोन को लेकर 
कलर्स को नोटिस
December - 25 - 2011
अदिति टंडन/ट्रिब्यून न्यूज सर्विस
नयी दिल्ली, 24 दिसंबर। भारतीय मूल की कनाडाई ‘पोर्न’ कलाकार सन्नी लियोन टीवी शो ‘बिग बॉस’ के ज़रिये अपना पोर्नोग्राफी व्यवसाय को बढ़ावा नहीं दे पायेगी। उसने 21 नवंबर को इस टीवी शो में प्रवेश किया था। इंडियन ब्राडकास्टर्स फाउंडेशन द्वारा स्थापित ब्राडकास्टिंग कंटेंट कंप्लेंट्स कौंसिल ने कल ‘बिग बॉस’ प्रसारित कर रहे कलर्स चैनल को नोटिस जारी किया। कौंसिल का गठन भारतीय टीवी मीडिया द्वारा आत्म-नियमन के लिए किया गया है। उक्त फाउंडेशन के सदस्यों में कलर्स चैनल भी शामिल है। कौंसिल की बैठक में ‘बिग बॉस’ में सन्नी लियोन की मौजूदगी को लेकर 19 शिकायतों पर विचार किया गया। बाद में कौंसिल ने मनोरंजन चैनल कलर्स को निर्देश दिया कि सन्नी की अश्लील ‘साइट्स’ और वीडियो इस शो में दिखाने 26 दिसंबर से बंद कर दे। कौंसिल का कहना था कि कोई भी किसी शो में आने को स्वतंत्र है लेकिन किसी को इसके माध्यम से अपने व्यवसाय, वह भी जब वह अवैध हो, को बढ़ावा देने का अधिकार नहीं है। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष व उक्त कौंसिल के सदस्य वजाहत हबीबुल्लाह ने आज दैनिक ट्रिब्यून को बताया कि ‘हम सभी इस बात पर रजामंद हैं कि सन्नी लियोन अश्लीलता को बढ़ाने के लिए ‘बिग बॉस’ को बढ़ावा दे रही है जिसे भारत में आपराधिक गतिविधि माना जाता है। हो सकता है अमेरिका में अश्लीलता परोसना अपराध न हो लेकिन भारत में इसे आपराधिक गतिविधि ही माना जाता है। इसीलिए सन्नी लियोन को अपना व्यवसाय बढ़ाने के लिए हमारे टीवी के इस्तेमाल की इजाजत नहीं दी जा सकती। कलर्स चैनल ये निर्देश मानने और उसके द्वारा उठाये गये कदमों की जानकारी कौंसिल को देने के लिए सहमत है।’


-------------



सन्नी लियोन के साथ 
कंफर्टेबल नहीं संजू बाबा, नहीं करेंगे... 
Source: Bhaskar network   
28/12/2011 
हाल ही में सुनने में आया था कि बॉलीवुड एक्टर और बिग बॉस होस्ट संजय दत्त पोर्न स्टार सन्नी लियोन के साथ काम करने के इच्छुक हैं| 
सन्नी इस समय बिग बॉस की प्रतिभागी है और सुनने में आया था कि संजू बाबा उनके अच्छे व्यवहार से खासे प्रभावित हैं और वह सन्नी को अपनी होम प्रोडक्शन फिल्म में कास्ट करने का मन बना रहे हैं| मगर संजय के करीबी सूत्र ने इस बात का खंडन कर दिया है और कहा है कि उनकी ऐसी कोई योजना नहीं है| 
संजय ने ऐसी कोई योजना नहीं बनाई है क्योंकि वह पोर्न स्टार के साथ काम करने को लेकर सहज ही नहीं हैं| इससे पहले इसी शो के दूसरे होस्ट सलमान खान के बारे में सुनने को आया था कि वह सन्नी के साथ अपने अगले प्रोजेक्ट में काम कर सकते हैं मगर इसकी पुष्टि अभी तक नहीं हुई है| 





--------------
सन्नी लियोन
सन्नी लियोन (जन्म केरेन मल्होत्रा​​, मई 13, 1981) भारतीय-कैनेडियन अश्लील फिल्म अभिनेत्री, बिज़नेसवुमन, और मॉडल हैं। यह 2003 में पेंटहाउस पैट आँफ द इयर के लिए नामित हुई और विविड एंटरटेनमेंट के लिए अनुबंध स्टार थीं। इन्हे मैक्सिम द्वारा 2010 में 12 शीर्ष अश्लील सितारों में नामांकित किया गया था। यह स्वतंत्र मुख्यधारा की फिल्मों और टीवी शो में भी भूमिका निभा चुकी हैं।
------------
सन्नी लियोन को लेकर कलर्स को चेतावनी
26 DECEMBER 2011
नई दिल्ली। टीवी रियलिटी शो बिग बॉस में पॉर्नस्टार सन्नी लियोन के होने को लेकर हुई शिकायतों के आलोक में ब्रॉडकास्टिंग कंटेंट कम्पलेंट कांसिल (बीसीसीसी) ने टीवी चैनल कलर्स को यह सुनिश्चित करने को कहा है कि वह कार्यक्रम का इस्तेमाल अपने ‘पॉर्न धंधे’ को चमकाने में नहीं करे।
सूत्रों ने कहा कि शुक्रवार को बीसीसीसी की बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा की गई । परिषद को सन्नी लियोन को लेकर कई शिकायतें मिली हैं । सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने भी बीसीसीसी को कुछ शिकायतें अग्रपे्रषित की थी । एक अधिकारी ने बताया, ‘‘शो में लियोन के आने को लेकर 19 शिकायतें मिली थी लेकिन उनके शो में होने से सामग्री को लेकर कोई उल्लंघन नहीं हुआ है ।’’
अधिकारियों ने कहा कि भारतीय कनाडाई पॉर्न स्टार लियोन शो में किसी भी तरह के उल्लंघन में शामिल नहीं हैं और उनका पॉर्पोग्राफी बिजनेस भारत से बाहर स्थित है जो बीसीसीसी के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। हालांकि बीसीसीसी ने लियोन द्वारा अपने बेवसाइटों में भारतीय टीवी शो में शामिल होने को प्रचार के तौर पर इस्तेमाल करने पर आपत्ति जताई।
-------------
सनी नेट की दुनिया में सबसे हॉट
Friday, December 16, 2011
ज़ी न्यूज ब्यूरो 
मुंबई: बिग बॉस-5 में एंट्री करनेवाली पोर्न स्टार सनी लियोन के सितारे बुलंद है। यह बात सभी जानते हैं कि वह अमेरिका की सबसे महंगी पोर्न स्टार में शुमार होती है लेकिन गूगल पर भी सर्च किए जाने, अपने पोर्न वीडियो देखे जाने के मामले में वह शीर्ष पर है। 
बिग बॉस में सनी लियोन की जब से एंट्री हुई है, इंटरनेट पर उन्हें सर्च कर पोर्न वीडियोज देखने वालों की बाढ़ आ गई है| सनी ने गूगल पर सर्चिंग के मामले में बॉलीवुड की खूबसूरत अदाकारा ऐश्वर्या राय और कैटरीना कैफ तक को भी पीछे छोड़ दिया है| उन्हें इंटरनेट पर फैंस ने कैटरीना और ऐश्वर्या राय से ज्यादा सर्च किया है| 
गूगल रिपोर्ट ने खुलासा किया है कि इंडिया में  लियोन के चाहनेवालों की संख्‍या सबसे ज्‍यादा संख्‍या नोएडा में है इसके बाद भुवनेश्वर,लुधियाना और भोपाल है। गूगल की सर्च रिपोर्ट कहती है कि मात्र 14 सेकेंड में 1 करोड़ 10 लाख लोगों ने सन्नी को सर्च किया है।
----
सनसनी मचाने आ गईं सन्नी लियोने
 Saturday, November 19, 2011
नई दिल्ली: गिरते टीआरपी से परेशान बिग बॉस ने शो में पॉर्न स्टार सन्नी लियोने का सहारा लिया। अब शो में शिरकत करने जा रही पॉर्न स्टार सन्नी लियोने ने भारत पहुंचते ही कहा है कि वह भारत में अपने परफॉर्मेंस को लेकर बेहद उत्साहित हैं। 
इस हफ्ते बिग बॉस के घर में एंट्री लेने वाली पॉर्न फिल्मों की भारत-कनाडाई अदाकारा सन्नी लियोने का कहना है कि यह रियलिटी शो उनके लिए भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में प्रवेश का जरिया बनेगा। 
लियोने ने कहा कि मैं हमेशा से बालीवुड में एंट्री लेना चाहती थी और बिग बॉस मेरे लिए पहला व्यावसायिक ऑफर रहा। मैं भारत के बाहर रहती हूं और मेरे लिए यह यकीनन बहुत अच्छी पेशकश है। 
कनाडा के ओंटारियो में एक सिख परिवार में पैदा हुई 30 वर्षीय लियोने अमेरिका के कई रियलिटी शोज में हिस्‍सा ले चुकी हैं। फैशन मैगजीन मैक्सिम ने उन्‍हें 2010 में विश्‍व के 12 प्रमुख पॉर्न स्‍टार की सूची में शुमार किया था। (एजेंसी)

सरकारी लोकपाल बिल : हार भी और भागना भी

- अरविन्द सिसोदिया 
सरकारी लोकपाल  बिल , कांग्रेस ही कमान के अभिमानी और अहंकारी कार्य प्रणाली के कारण लोकसभा में संवेधानिक दर्जा नहीं पा सका ,तो राज्यसभा  में हार की कगार पर पहुँच गया और सरकार ने वोटिंग के बजाये सदन को अनिश्चित काल को स्थगित किया गया | यानि हार भी और भागना भी....कोंग्रेस को अब भी सही तरीके से प्रयत्न करने चाहिए | असफलता का ठीकरा दूसरों से सर फोड़ने से कुछ नहीं होगा  ..|  कोंग्रेस को बीजेपी के माथे विफलता का ठीकरा फोड़ने के बजाये अपनी असफलता पर आत्म मंथन करना चाहिए !!!
------------------

मध्य रात्रि का ड्रामा,सबसे बड़ा धोखा: जेटली
 Friday, December 30, 2011
ज़ी न्यूज ब्यूरो 
नई दिल्ली: बीजेपी नेता अरुण जेटली ने कहा है कि लोकपाल विधेयक पर गुरुवार को मध्य रात्रि में हुआ ड्रामा सबसे बड़ा धोखा था।  जेटली ने लोकपाल बिल के मुद्दे पर कांग्रेस पर जमकर प्रहार किया है। शुक्रवार को नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों को संबोधित करते हुए जेटली ने कहा कि गुरुवार को राज्यसभा में वोटिंग से डरकर सरकार आधी रात को मैदान छोड़कर भाग गई। 
उन्होंने कहा कि कांग्रेस की यह रणनीति शाम छह बजे ही जगजाहिर हो गई थी कि वह मैदान छोड़कर भागनेवाली है। 
जेटली ने कहा कि सरकार सत्ता में रहने का नैतिक अधिकार खो चुकी है। क्योंकि उसने देश के साथ धोखा किया है। इसलिए उसे इस्तीफा दे देना चाहिए।  उन्होंने कहा तीन बुनियादी मुद्दों पर संशोधन को लेकर पूरा सदन एकमत था फिर सरकार वोटिंग के पहले ही मैदान छोड़कर क्यूं भाग खड़ी हुई। 
जेटली ने कहा कि यह दुनिया के संसदीय इतिहास की सबसे बड़ी जालसाजी है और इस बहाने सरकार ने देश को एक मजबूत लोकपाल बिल से वंचित कर दिया। उन्होंने कहा कि वोटिंग टालने के और दूसरे भी रास्ते थे |
-------------------
40 साल से लटका हुआ है लोकपाल विधेयक
 Friday, December 30, २०११


नई दिल्ली : गुरुवार दिनभर चली चर्चा के बाद भी राज्यसभा में लोकपाल विधेयक पारित नहीं होने का यह पहला मामला नहीं है। 40 वर्ष का संसद का इतिहास गवाह है कि यह विधेयक एक पहेली बना हुआ है। 
गुरुवार रात राज्यसभा की कार्यवाही बिना लोकपाल और लोकायुक्त विधेयक, 2011 पारित हुए अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गयी। रोचक संयोग यह है कि अब तक जब भी संसद में लोकपाल विधेयक पर विचार हुआ लोकसभा की कार्यवाही स्थगित हो चुकी थी। 
1968 से ऐसा ही देखने में आया है। उस साल नौ मई को लोकपाल और लोकायुक्त विधेयक पेश किया गया था। इसे संसद की स्थाई समिति को भेजा गया। 
20 अगस्त, 1969 को यह ‘लोकपाल और लोकायुक्त विधेयक, 1969’ के रूप में पारित हुआ। हालांकि राज्यसभा में यह विधेयक पारित होता उससे पहले चौथी लोकसभा की कार्यवाही स्थगित हो गयी और विधेयक लटक गया। 
इसके बाद 11 अगस्त, 1971 को एक बार फिर लोकपाल और लोकायुक्त विधेयक लाया गया। इसे ना तो किसी समिति को भेजा गया और ना ही किसी सदन ने इसे पारित किया। पांचवीं लोकसभा का कार्यकाल समाप्त होने के बाद यह निष्प्रभावी हो गया। 
उसके बाद 28 जुलाई, 1977 को लोकपाल विधेयक को लाया गया। इसे संसद के दोनों सदनों की संयुक्त समिति को भेजा गया। संयुक्त समिति की सिफारिशों पर विचार करने से पहले ही छठी लोकसभा स्थगित हो गयी और विधेयक भी लटक गया। लोकपाल विधेयक, 1985 को उस साल 28 अगस्त को पेश किया गया और संसद की संयुक्त समिति को भेजा गया। हालांकि तत्कालीन सरकार ने अनेक किस्म के हालात को कवर करने में खामियों के चलते उसे वापस ले लिया। 
विधेयक को वापस लेते हुए तत्कालीन सरकार ने कहा कि वह जनता की शिकायतों के निवारण के साथ बाद में एक व्यापक विधेयक लेकर आएगी। 
वर्ष 1989 में यह विधेयक फिर आया और 29 दिसंबर को उसे पेश किया गया। हालांकि 13 मार्च 1991 को नौवीं लोकसभा की कार्यवाही स्थगित होने के बाद विधेयक निष्प्रभावी हो गया। 
संयुक्त मोर्चा की सरकार ने भी 13 सितंबर, 1996 को एक और विधेयक पेश किया था। उसे जांच और रिपोर्ट देने के लिए विभाग से संबंधित गृह मंत्रालय की संसदीय स्थाई समिति को भेजा गया। स्थाई समिति ने नौ मई, 1997 को संसद में अपनी रिपोर्ट पेश की और इसके अनेक प्रावधानों में व्यापक संशोधन किये। 
सरकार स्थाई समिति की अनेक सिफारिशों पर अपना रुख तय करती तब तक 11वीं लोकसभा की कार्यवाही स्थगित हो गयी। 
पिछला ऐसा प्रयास 14 अगस्त, 2001 को भाजपा नीत राजग सरकार की ओर से किया गया था। उसे गृह मामलों की विभाग से संबंधित संसदीय स्थाई समिति को अध्ययन और रिपोर्ट देने के लिए भेजा गया लेकिन राजग मई 2004 में सत्ता से बाहर हो गया। (एजेंसी)

अब कांग्रेस क्या हुआ....? लोकपाल बिल .???




- अरविन्द सिसोदिया 
अब कांग्रेस क्या हुआ....?
राज्य सभा में वोटिंग से पीछे क्यों हटे ..?
भाजपा ने लाकसभा में भी कहा था,
यह बिल असंवैधानिक है और
राज्यों के अधिकार क्षैत्र मे हस्तक्षेप करता है।

--------------------
संशोधन पर सरकार ने मांगा वक्त, बीजेपी बोली-डर गई सरकार
Dec 30, 2011 
http://khabar.ibnlive.in.com
नई दिल्ली। करीब 12 घंटे तक गर्मागर्म बहस के बाद भी लोकपाल बिल राज्यसभा में पास नहीं हो पाया। देर रात करीब 12 बजे संसदीय कार्यमंत्री पवन बंसल ने खडा़ होकर सदन से और वक्त मांगा। उन्होंने तर्क दिया कि सरकार को कुल 187 संसोधन प्रस्ताव मिले हैं। जिसे गहन करने में वक्त लगेगा। जबकि राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने कहा कि वो पूरी रात बहस के लिए तैयार हैं लेकिन सरकार तैयार नहीं हुई।
विधेयक पर जारी चर्चा और उसके बाद मत विभाजन के बारे में सरकार की तरफ से कोई संतोषजनक जवाब न मिलने पर सदन में हंगामा होने लगा। जिसके बाद सभापति उप-राष्ट्रपति हामिद अंसारी ने सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी। जेटली ने कहा कि सरकार अल्पमत है इसलिए लोकपाल बिल को टालना चाहती है। जेटली ने कहा कि लोकपाल बिल को राज्यसभा में लटकाने के लिए सरकार ने पहले ही साजिश रच ली थी। इसलिए 28 तारीख को लोकपाल बिल को सदन के पटल पर नहीं रखा गया। सरकार ने जो कुछ भी राज्यसभा में किया वो उसकी रणनीति थी। जेटली ने कहा कि सरकार बिल पास कराना नहीं चाहती है। सरकार की ये राजनीतिक और नैतिक हार है। सरकार को अब बने रहने का हक नहीं है। उन्होंने कहा कि ये सरकार वोट से भागने वाली सरकार है।
वहीं सीताराम येचुरी ने कहा कि सरकार को अगर और वक्त चाहिए तो सरकार साफ बताए कितना वक्त और चाहिए। सरकार की तरफ से पवन बंसल ने कहा कि वो कोई डेडलाइट नहीं दे सकते। जिसके बाद राज्यसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई।
जिसके बाद बीजेपी प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने कहा कि सरकार ने संसदीय परंपरा की हत्या की। सरकार ने जानबूझकर को लोकपाल बिल को लटकाया है। उन्होंने कहा कि सरकार के पास बहुमत नहीं है इसलिए तुरंत सरकार को इस्तीफा दे देना चाहिए। विपक्षी सांसदों ने राज्यसभा के बाहर जोरदार नारेबाजी की।


--------------------
राज्यसभा में आंकड़ों में उलझी सरकार वोटिंग से हटी पीछे!
 Dec 30, 2011 
http://khabar.ibnlive.in.com
नई दिल्ली। लोकपाल बिल लटक गया है। आंकड़ों में बुरी तरह उलझी सरकार ने बिल पर रात 12 बजे के बाद बहस कराने से इनकार कर दिया। विपक्ष की मांग पर वोटिंग भी नहीं कराई गई। इसके बाद बिल पर बिना कोई फैसला हुए राज्यसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई।
इससे पहले बिल पर सदन के सवालों का जवाब देने खड़े हुए पीएमओ के राज्यमंत्री नारायण सामी अपना भाषण तक पूरा नहीं कर पाए। आरजेडी नेता राजनीति प्रसाद ने आगे बढ़ कर उनके हाथ से बिल छीना और फाड़ दिया। हंगामें के बीच सदन को 15 मिनट तक के लिए स्थगित करना पड़ा। सदन जब दोबारा शुरु हुआ तो संसदीय कार्यमंत्री पवन बंसल ने ढेर सारे संशोधनों का हवाला देते हुए कहा कि, अभी सरकार को इन संशोधनों के अध्ययन की जरूरत है।
बंसल ने ये भी साफ नहीं किया कि आगे इस बिल पर सदन कब चर्चा करेगा। इसके लिए उन्होने राष्ट्रपति की इजाजत का हवाला दिया। हालांकि बीजेपी नेता अरुण जेटली ने कहा कि सरकार चाहे तो वो पूरी रात सदन में बैठने को तैयार है। सरकार जानबूझ कर बिल को टाल रही है।
सदन स्थगित होने का ऐलान होते ही एनडीए के सांसद नारे लगाते हुए बाहर आ गए। विपक्ष ने इस पूरे घटना क्रम को लोकतंत्र की हत्या करार दिया। बीजेपी का आरोप है कि सरकार ने ये सारा ड्रामा खुद रचा था। पार्टी के नेताओं ने आरोप लगाया कि आखिरी क्षणों में सरकार के लोग सदन में इधर-उधर घूम रहे थे। साजिशें चल रही थीं और सरकार हार के डर से पीछे हट गई। पार्टी ने फिर दोहराया कि सरकार नैतिक अधिकार खो चुकी है और उसे इस्तीफा देना चाहिए। विपक्ष का आरोप है कि सरकार के पास बहुमत नहीं था, इसलिए वो मैदान छोड़कर भाग गई।
गौरतलब है कि गुरुवार की सुबह 11 बजे सरकार ने राज्यसभा में बिल पर बहस शुरू करवाई और रात 11 बजे वही सरकार अपने ही लोकपाल बिल की फजीहत होते देखती रही।

गुरुवार, 29 दिसंबर 2011

नेताओं पर जूते-चप्पल या थप्पड़






- अरविन्द सिसोदिया 
२०११ का हीरो 
कभी जूता तो कभी चप्पल तो कभी थप्पड़ भी रहा 


मुद्दा कोई भी हो, तकरार हुई नहीं कि मारपीट शुरू हो जाती है। नाराज नागरिक नेताओं पर जूते-चप्पल फेंकने या थप्पड़ मारने पर उतारू दिखते हैं तो सड़कों पर हर कहीं से ‘रोड रेज’ की खबरें मिल रही हैं। खबरें ही नहीं, सरकारी आंकड़े भी बयां रहे हैं कि हर कहीं ‘कोलावेरी हिंसा’ का चढ़ता ग्राफ लोगों को हल्ला बोल मुद्रा में ला रहा है। निरीह औरतों, बच्चों तथा बूढ़ों के खिलाफ तो विशेष तौर से, जो पलटवार करने में असमर्थ हैं।

नागरिकों के गुस्से पर ठंडे छींटे डालने और तटस्थता और शांति की अपील करने की उम्मीद हम किससे करें? पहले सहज जवाब होता था, गांधीवादियों या घट-घटव्यापी मीडिया से, पर इन दिनों गांधीवाद के उपासक भी नापसंद व्यवस्था के प्रतिनिधियों के खिलाफ गुस्से और मारपीट को सही ठहराने लगे हैं और मीडिया इन हिंसक छवियों और बयानों को दिनभर भुनाता हुआ हिंसा करने वालों को राज-समाज में एक तरह की सांस्कृतिक स्वीकृति और शोहरत दिला रहा है। लगता है यह लगभग मान लिया गया है कि आज जो कुछ व्यवस्था सम्मत है, वह कुचलने लायक है और उसके खिलाफ हिंसक तोड़फोड़ निंदनीय हरकत नहीं, जनता का लोकतांत्रिक हक और सराहनीय तेवर है।
---------------

 थप्पड़ के साइड इफेक्ट पर एक महत्वपूर्ण रिसर्च
20 Dec 2011,
http://navbharattimes.indiatimes.com
किशोर कुमार मालवीय॥
थप्पड़ से डर नहीं लगता साहब , प्यार से लगता है - यह रोमांटिक डायलॉग ' दबंग ' में हिट हो सकता है , पर रीयल दबंगों पर हिट नहीं हो सकता। यह अजीब संयोग है कि इस डायलॉग के हिट होते ही हर तरफ थप्पड़ों की बरसात होने लगी। जिसे देखो दबंगई दिखा रहा है , जहां - तहां थप्पड़ जमा रहा है। जिनकी डिक्शनरी में प्यार जैसे शब्द नहीं हैं , उनका पाला थप्पड़ से ज्यादा पड़ रहा है - कहीं चला रहे हैं तो कहीं खुद खा रहे हैं। थप्पड़ों का मानो अखिल भारतीय अभियान चल पड़ा हो। थप्पड़ों की बढ़ती मांग ( या फरमाइश ) या एकाएक थप्पड़ों के बढ़ते प्रचलन ने मुझे इस पर शोध करने को मजबूर कर दिया। शोध में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।

थप्पड़ दो तरह के होते हैं - एक , जिनमें आवाज नहीं होती या बहुत कम होती है। जरूरी नहीं कि इसमें चोट भी कम हो। आवाज और चोट में कोई संबंध नहीं है। ये थप्पड़ मारने या थप्पड़ खाने वाले की औकात से सीधा जुड़ा होता है। दूसरे तरह के थप्पड़ में आवाज बड़ी तेजी से होती है। इसमें भी जरूरी नहीं कि चोट ज्यादा लगे। इसमें आवाज का महत्व होता है क्योंकि इस तरह के थप्पड़ का सीधा संबंध थप्पड़ खाने वालों से जुड़ा होता है। यानी थप्पड़ खाने वाला व्यक्ति जितना बड़ा दबंग , उसकी आवाज का वॉल्यूम उतना ही ज्यादा। और कभी - कभी इसकी गूंज अति सुरक्षा वाले संसद भवन तक पहुंच जाती है।

गहन छानबीन के बाद मुझे आश्चर्यजनक जानकारियां मिलीं। कई बार कुछ थप्पड़ प्यार और आपसी मेलजोल बढ़ाते हैं। कई दिनों से संसद में कामकाज बंद था। रोज हंगामा चल रहा था और पक्ष - विपक्ष एक - दूसरे को सुनने को तैयार नहीं थे। लेकिन संसद के बाहर चले एक थप्पड़ ने कमाल कर दिया। जनता पर हर रोज पड़ रहे महंगाई और भ्रष्टाचार के चाबुक एक तरफ धरे रह गए। महंगाई पर ' आगबबूला ' विपक्ष अचानक चाबुक भूल गया और तमाम विरोध और बहिष्कार को निलंबित करते हुए एकजुट हो गया। दस दिन में केवल कुछ समय के लिए एक बार बहस हुई - महंगाई और भ्रष्टाचार पर नहीं , थप्पड़ पर। यानी एक थप्पड़ ने ' नफरत ' करने वालों के सीने में ' प्यार ' भर दिया। बड़े - बड़े नेताओं ने इसका असर कम करने के लिए और थप्पड़ खाने वाले के साथ सहानुभूति दिखाने के लिए अपने तरकश के सारे बाण छोड़ दिए। महंगाई और काले धन के लिए एक भी बचाकर नहीं रखा। पर इसमें सहानुभूति कम और डर ज्यादा था कि कहीं अगली बारी उनकी न हो।

लेकिन हर थप्पड़ एक जैसे नहीं होते। मैंने पहले ही कहा कि थप्पड़ का महत्व इस पर निर्भर करता है कि थप्पड़ मारने वाला या थप्पड़ खाने वाला कौन है। उसकी क्या औकात है। अब अगर थप्पड़ खाने वाला एक टीचर है , वह भी महिला तो उसकी आवाज नक्कारखाने में तूती की आवाज साबित होगी। पहली बात तो वह टीचर है , ऊपर से महिला। इसके बावजूद मुकाबला कर बैठी दबंगों से। उस महिला टीचर को शायद कोई गलतफहमी हो गई थी। कुछ दिन पहले उसने टीवी पर थप्पड़ के साइड इफेक्ट देखे थे। कैसे उसकी गूंज लोकसभा में सुनाई दी थी। कैसे थप्पड़ मारने वाला सलाखों के पीछे पहुंच गया। कैसे पक्ष - विपक्ष ने सदन को सर पर उठा लिया था। फिर उसके मामले में तो बवाल ज्यादा होगा। आखिर सदन की स्पीकर स्वयं एक महिला हैं , सरकारी पक्ष की नेता भी महिला हैं। और तो और विपक्ष की नेता भी एक महिला हैं। ऐसे में थप्पड़ मारने वाले सरपंच की अब खैर नहीं। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। मेरा शोध ये कहता है कि इसमें गलती उस महिला की है क्योंकि थप्पड़ के सिद्धांत के मुताबिक आवाज तभी ज्यादा होती है , जब थप्पड़ मारने वाला नहीं , थप्पड़ खाने वाला दबंग हो। अगर मारने वाला बड़ा है तो उसकी आवाज चार कदम भी नहीं जा पाएगी। मेरा शोध कहता है , थप्पड़ के साइड इफेक्ट तभी होते हैं , जब थप्पड़ मारने वाला नहीं , थप्पड़ खाने वाला मजबूत हो। तभी तो थप्पड़ मारने वाला एक आदमी आज जेल में है , जबकि बाकी थप्पड़मारू दबंग बाहर मौज कर रहे हैं।


=======

समारोह में उमर अब्‍दुल्‍ला की ओर जूता फेंका गयाआज तक ब्‍यूरो | 
श्रीनगर, 15 अगस्त 2010


जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला पर आज श्रीनगर में 15 अगस्त के कार्यक्रम के दौरान जूता फेंका गया. जूता फेंकने वाला शख्स कार्यक्रम की सुरक्षा में तैनात पुलिस इंस्पेक्टर था. बख्शी स्टेडियम में हो रहे कार्यक्रम के दौरान ये घटना हुई. जिस वक्त उमर अब्दुल्ला झंडे की सलामी ले रहे थे उसी वक्त वीआईपी लॉबी में बैठे इस पुलिस इंस्पेक्टर ने उनकी ओर निशाना करके जूता उछाल दिया. ये जूता परेड के रास्ते में जा गिरा. जूता फेंकने वाले को फौरन हिरासत में ले लिया गया है
-------

पत्रकार ने गृहमंत्री चिदंबरम पर जूता फेंका


7 Apr 2009, 1240 hrs IST,नवभारतटाइम्स.कॉम 
http://navbharattimes.indiatimes.com


पत्रकार ने गृहमंत्री चिदंबरम पर जूता फेंका : पत्रकार जनरैल सिंह ने 
नई दिल्ली ।। गृहमंत्री पी . चिदंबरम पर ' दैनिक जागरण ' अख़बार के वरिष्ठ पत्रकार जरनैल सिंह ने 24 , अकबर रोड पर मौजूद कांग्रेस हेड क्वार्टर में प्रेस कॉन्फ्रेन्स के दौरान जूता फेंक दिया। ख़बरों के मुताबिक जरनैल सिंह 1984 के सिख विरोधी दंगों के मामले में जगदीश टाइटलर को सीबीआई द्वारा क्लीन चिट दिए जाने से नाराज थे। 
इसी मुद्दे पर जरनैल सिंह ने गृहमंत्री से सवाल पूछा। लेकिन जवाब से संतुष्ट नहीं होने पर पत्रकार ने चिदंबरम पर जूता फेंक दिया। इस घटना के बाद जरनैल सिंह ने कहा कि हो सकता है कि उनका तरीका ग़लत हो , लेकिन वह इसके लिए माफी नहीं मांगेंगे। जरनैल सिंह ने यह भी कहा कि मुझे अफसोस है कि ऐसा हुआ , ऐसा नहीं होना चाहिए। जरनैल सिंह ने कहा कि उन्हें चिदंबरम से गिला नहीं है। इस घटना के बाद जरनैल सिंह को तुगलक रोड थाने की पुलिस ने हिरासत में ले लिया। लेकिन करीब एक घंटे की पूछताछ करने के बाद पुलिस ने उन्हें छोड़ दिया। कुछ महीनों पहले अमेरिका के पूर्व प्रेज़िडंट जॉर्ज बुश पर इराक में एक पत्रकार मुंतजर अल जैदी ने जूते फेंके थे।
=====
http://sharadshuklafaizabad.jagranjunction.com
29 Apr, 2011
जूते चप्पलों का तिलिस्म
मेरे जानने में न जाने कितनी राजनैतिक हस्तियों को चप्पल जूतों का स्वाद चखने को मिला है| पर मैंने सबसे पहले जूता खाते हुए जोर्ज बुश को देखा था,पर बुश जी इस जूते का शिकार होते होते बाल-बाल बचे थे| पर महाशक्ति अमेरिका के रास्ट्रपति के ऊपर कोई जूता फेंके यही काफी था| ये जूता एक पत्रकार ने फेंका था, जो शायद बुश महाशय के व्यवहार से संतुष्ट नहीं था| ये बात जूता बुश तक ही सीमित नहीं था, हर सभ्यता की तरह जूता फेंकना भी भारत में पश्चिम देश से आ गया| अब इसके बाद पी.चिदंबरम, सुरेश कलमाड़ी और इसके अलावा कई प्रसिद्द नेताओं को भी जूते चप्पल का सामना करना पड़ा है| खुद को युवा कहने वाले जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के ऊपर भी जूता फेंका गया था| इसके बाद ये सिलसिला चलता ही रहा|
पर इन सब घटनाओं में एक चीज़ समान थी, इनमे किसी को जूते से चोट नहीं लगी और न ही फेंके गए चप्पलों से इनके गाल लाल हुए| ध्यान देने की बात है की जो व्यक्ति किसी व्यक्ति पर चप्पल-जूते फेंक सकता है तो वह जूते-चप्पलों के जगह पर बम और पत्थर भी फेंक सकता है, पर ऐसा कभी नहीं हुआ| पर ऐसा क्यों नहीं हुआ ये विचारणीय है, मैंने इसपर कई लोगो से बात की तो मैंने पाया की जूते फेंकने वाले लोगों का उद्देश्य बस अपने को मशहूर करना होता है| अगर हम कुछ साल पीछे जाए उस समय और स्थान पर बुश जूते का शिकार हुए, उस पत्रकार द्वारा जूते मारने के बाद वो पत्रकार तो रातों-रात एक मशहूर हस्ती बन गया| अगर ऐसा करने वाले लोगों के नाम और पता गुप्त रख कर उन पर सख्त कार्यवाही की जाए तो मुझे ये विश्वास है की इस तरह की बचकानी हरकत का सिलसिला अवश्य ही थम जाएगा| जिस वक़्त पर बुश को जूता पड़ा था अगर प्रशासन उस पत्रकार का नाम और पता गुप्त रखकर उस पर कार्यवाही करता तो शायद पी. चिदंबरम, सुरेश कलमाड़ी जैसे लोग इसके शिकार न होते| पर मीडिया इस बात को नहीं समझती, अगर मीडिया भी ऐसी हरकत करने वालों के नाम टी.वी. चेन्नलों पर इतना न उछाले तो आगे से ऐसा कभी नहीं होगा| और अंत में मुझे ये कहने भी कोई अतिश्योक्ति नहीं है की अगर इस “जूताबाजों” का के नामों प्रचार अगर आगे भी होता रहेगा तो ऐसी बचकानी हरकतों को आगे भी होने से कोई नहीं रोक पायेगा| उम्मीद है की मेरी इस बात को लग समझे और इस जूता चप्पल फेंकने वालों के नाम का ज्यादा प्रचार न करे, क्योकि “जूतेबाज़” ऐसा सिर्फ अपने “पब्लिसिटी” (प्रचार) के लिए करते है| और वो ऐसा इसलिए करते है क्योकि कम समय में चर्चित होने का नया फैशन जो है|
————-शरद शुक्ला, फैज़ाबाद

--------------------------------------

जूते चप्पलों की राजनीति
Tuesday, July 12th, 2011 
कॉमनवेल्थ गेम्स के घोटालों की ख़बरें के साथ ही देश की करोड़ों जनता जो सिर्फ सोचती होगी, उसे आखिरकार एक व्यक्ति ने अंजाम दे ही दिया।
ये बिल्कुल बेमानी है कि उस शख्सका नाम कपिल ठाकुर है या वो मध्य प्रदेश का रहने वाला है, मायने तो सिर्फ इतने का है कि उसने उस आक्रोश को आवाज़ और रुप दिया, जिसकी ताक में तो लाखों लोग थे, लेकिन या तो मौका नहीं मिल रहा था या फिर हिम्मत नहीं थी।
दरअसल ये कहानी सिर्फ कलमाडी और कलमाडी पर पड़े जूते की नहीं है। ये कहानी है जनता के उस बेबस आक्रोश की, जिसे हम सब चुपचाप खून की घूंट की तरह पीते रहते हैं।
जूते और चप्पल की ये कहानी की शुरूआत सबसे बड़े रुप में सद्दाम हुसैन से होती है… जिसे बड़े तौर पर दुनिया ने देखा। जिस सद्दाम हुसैन से इराक कांपता था, जिसकी इजाज़त के बिना वहां की हवा भी चलने से इंकार करती थी, उसी इराक में सद्दाम के पतन के बाद उसकी आदम कद मूर्ति को लोगों ने न सिर्फ गिरा दिया, बल्कि उसपरजूतों-चप्पलों की बौछार करते रहे।
14दिसंबर 2008 को पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जार्ज बुश पर इराक में प्रेस कॉन्फ़्रेंस के दौरान वरिष्ठ पत्रकार ने जूताफेंका। फिर 2 फरवरी 2009 ब्रिटेन में कैंब्रिज विश्वविद्यालय गए चीनी प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ के ऊपर 27 वर्षीय नौजवान ने जूता फेंककर विरोध जताया। उसके बाद भारत में 7 अप्रैल 2009 को नई दिल्ली में प्रेस काँफ़्रेंस के दौरान एक पत्रकार जरनैल सिंह ने गृह मंत्री पी. चिदंबरम की ओर जूता उछाल कर विरोध जताया। इतना ही उसके बाद तो राज्यों में भी जूता फेंककर विरोध जताने की प्रक्रिया शुरू हो गई। 16 अप्रैल 2009 को मध्य प्रदेश के कटनी में चुनावी रैली के दौरान एक भाजपा कार्यकर्ता ने अपनी ही पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी पर खड़ाऊ फेंक दी।26 अप्रैल 2009 को अहमदाबाद में चुनावी रैली के दौरान एक युवा इंजीनियर ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की ओरजूता फेंका। इस मामले में युवाओं के साथ ही एक किसान ने भी नवीन जिंदल पर चप्पल फेंकी। उसके बाद तो यासीन मलिक, उमर अब्दुल्ला और भी ना जाने किस- किस छोटे बड़े नेताओं पर जूता फेंकने का कार्यक्रम चलता रहा।
जिस तरह आजादी के समय अंग्रेजों से लोहा लेने वाले आजादी के परवानों ने मशाल का उपयोग कर क्रांति की शुरूआत की थी, और मशाल को क्रांति का प्रतीक बन गई थी उसी तरह आजादी के 61 वर्ष बाद 21वीं सदी की के भारत देश में वर्तमान में जिस तरह लोग जूते चप्पल फेंककर अपना विरोध जता रहे हैं उससे तो ऐसा लगता है कि आने वाले कुछ सालों बाद जूते- चप्पलों को क्रांति का प्रतीक माना जाएगा।
नेताओं को जनता के इन जूतेचप्पलों को चेतावनी के तौर पर लेना चाहिए। जो उन्हें ये संदेश दे रहे हैं कि अभी भी कुछ नहीं बिगड़ा है आप लोग सुधर जाओ वरना अंजाम भुगतने को तैयार हो जाओ।
वर्तमान में जिस तरह से भ्रष्टाचार, घुंसखोरी,लूटपाट चरम पर है उससे तो यही लगता है कि देश गर्त में गिरता जा रहा है। ऐसे में अन्ना हज़ारे ने एक किरण दिखा कर लोगों के आक्रोश को और अधिक बढ़ा दिया है। और आम आदमी को जूते चप्पल के रूप में एक हथियार मिल गया है।
देश में जिस भी नेता पर जूते चप्पल चले हैं उसकी छवि पर कहीं ना कहीं कोई दाग ऐसा लग गया था जिससे कि आम आदमी आक्रोश से भर गया था। जैसे जरनैल सिंह के उस जूते ने वो कर दिखाया जो होना शायद मुश्किल था। वो उसके जूते का ही कमाल था कि कांग्रेस को अपने दो बड़े नेताओं की टिकट काटनी पड़ी थी।
इतना ही नहीं देश के नेताओं के साथ ही और भी कई जानी मानी हस्तियों पर भी जूते चप्पलों ने अपनी कृपा दिखाई है। अभिनेता जितेंद्र की रैली में, सोनू निगम के एक प्रोग्राम में भी जूते चले हैं। देश में अपराध के विरोध में भी लोगों ने अपने चप्पल उठाए हैं। और अपना विरोध जताया है। रूचिका मर्डर केस में एसपी राठौर पर एक व्यक्ति ने ब्लेड से वार कर अपना आक्रोश जताया था, हर कोई जानता था कि राठौर आरोपी है लेकिन किसी को भी हिम्मत नहीं थी कि कुछ बोले लेकिन उस युवक का क्रोध इस हद तक बढ गया था कि उसे ब्लेड चलानी पड़ी।
इतना ही न ही आरूषि हत्याकांड के संदिग्ध आरोपी तलवार पर भी ब्लेड से वार हुआ था। देश में ऐसे और भी कई लोग हैं जिन पर जूते चप्पलों की बरसात होना जरूरी है। वो कौन हो सकते हैं? और कौन-कौन है? वो भी जानते हैं और हम भी, इसलिए जरूरी है कि वे अब चेत जाएं।
नेताओं के साथ ही अपराधियों के लिए भी ये एक चेतावनी है आम जनता का आक्रोश है। जिसे लोग जूते चप्पलब्लेड से दर्शा रहे हैं। आने वाले वर्षों में यदि देश और नेताओं का यही हाल रहा तो जूते चप्पलों में इज़ाफा होगा और लाज़मी है कि इस आक्रोश और इजाफे का बहुत बड़ा दंश नेताओं को झेलना पड़ेगा।
अमांद्रा सनवाल
Short URL: http://www.wisdomblow.com/hi/?p=604



मुलायम , मायावती , लालू और कांग्रेस की सांठगांठ




- अरविन्द सिसोदिया
मुलायम , मायावती , लालू और कांग्रेस  की सांठगांठ से,
राज्य सभा में भी नकली लोकपाल पास हो जायेगा ।
जनता को इस सांठगांठ को समझना चाहिये।
---------
राज्यसभा में लोकपाल पर सरकार की अग्निपरीक्षा आज!
Dec 29, 2011
नई दिल्ली। लोकसभा में पास हो चुके लोकपाल बिल की आज राज्यसभा में अग्निपरीक्षा है। लोकपाल बिल को आज राज्यसभा में पेश किया जाएगा। लेकिन इसके पास होने को लेकर सवाल खड़ा हो गया है। एक तो सदन में सरकार का बहुमत नहीं है, ऊपर से सहयोगी टीएमसी ने बिल में संशोधन पेश कर दिया है। उधर, विपक्ष भी बिल को लेकर अपना कड़ा रुख छोड़ने को तैयार नहीं है।
गौरतलब हैकि कुल 243 सांसदों की राज्यसभा में यूपीए के 99 सांसद हैं। अगर बीएसपी (18) और समाजवादी पार्टी (5) के 23 सांसद लोकसभा की ही तरह वॉकआउट करते हैं तो संसद में मौजूदगी रहेगी 220 सांसदों की। ऐसी सूरत में उसे बहुमत के लिए 111 सांसदों की दरकार होगी। अगर 8 मनोनीत सांसदों और 6 निर्दलियों को सरकार साध ले तो उसकी तादाद 113 हो जाएगी यानी बहुमत से 2 ज्यादा|
दूसरी तरफ प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने राज्य सभा में लोकपाल बिल के पास होने का भरोसा जताया है। लेकिन, ममता बनर्जी ने एक बार फिर निगाहें टेढ़ी कर ली हैं। लोकसभा में बिल का समर्थन करने वाली उनकी टीएमसी ने राज्यसभा में संशोधन का पेच फंसा दिया है। वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने टीएमसी नेता सुदीप बंदोपाध्याय और मुकुल रॉय के साथ बैठक भी की, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। टीएमसी सरकार के राज्यों के अधिकार को लेकर सशंकित है।
राज्यसभा में यूपीए के 99 सासंदों में 6 टीएमसी के हैं। अगर वो छिटक गए तो तमाम कोशिशों के बावजूद सरकार के पक्ष में 107 वोट ही रह जाएंगे जो बहुमत से 4 कम है। सरकार के लिए टीएमसी की उपेक्षा करना आसान नहीं है। लेकिन समस्या ये भी है कि अगर टीएमसी का संशोधन स्वीकार कर लिया जाता है तो बिल को वापस लोकसभा में भेजना पड़ेगा या फिर दोनों सदनों का संयुक्त सत्र बुलाकर बिल पास कराना पड़ेगा।
उधर, सरकार ने बुधवार को बीजेपी को भी मनाने की कोशिश की। प्रणव मुखर्जी ने राज्यसभा में नेता विपक्ष अरुण जेटली से मुलाकात भी की, लेकिन पार्टी के तेवर कड़े हैं। ऊपरी सदन में नेता विपक्ष अरुण जेटली ने कहा कि हमारी तीन मांगों पर कोई समझौता मुमकिन नहीं है। आगे सरकार को तय करना है।


भाजपा और संसद सोनिया की बंधुआ मजदूर नहीं.........


भाजपा और संसद 
सोनिया की बंधुआ मजदूर नहीं......... 
सरकारी लोकपाल बिल को वोट नहीं मिलने से,
संवैधानिक दर्जा नहीं मिल पाया,
लोकसभा में करारी हार से तिलमिलाये 
सोनिया - राहुल इस तरह आग उगल रहे हैं जैसेः- 
भारतीय जनता पार्टी या संसद उनकी बंधुआ मजदूर हो।
अपने ही गिरेवान में झांके कांग्रेस
उनके सहयोगी दल और उनके ही सांसदों ने धोका दिया। 
---------------------
क्या सांसद सोनिया के बंधुआ मजदूर हैं?
केजरीवाल और किरण बेदी ने कांग्रेस अध्यक्ष पर हमला
नई दिल्ली, बुधवार, 28 दिसंबर 2011
अन्ना हजारे की मजबूत लोकपाल की जंग में कांग्रेस को निशाना बनाने की घोषणा के बाद हजारे पक्ष के प्रमुख सदस्य अरविंद केजरीवाल और किरण बेदी ने बुधवार को सोनिया गांधी पर हमला बोलते हुए कहा कि क्या सांसद पार्टी आलाकमान के बंधुआ मजदूर हैं?
बेदी ने ट्वीट किया कि जनलोकपाल शासन में बदलाव के बगैर नहीं मिलेगा, केवल समय बताएगा कि ऐसा कब होगा। सोनिया पर निशाना साधते हुए केजरीवाल ने ट्विटर पर लिखा कि सांसदों को पार्टी आलाकमान की इच्छाओं के खिलाफ मतदान करने या बोलने की आजादी नहीं है। क्या सांसद पार्टी आलाकमान के बंधुआ मजदूर हैं?
बेदी ने कहा कि हमने आलाकमान की तानाशाही देखी है। क्या हम सांसदों को अपने क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते देख रहे हैं जिन्हें हमने संसद में भेजा। उन्होंने कहा कि विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र की सत्तारूढ़ पार्टी का आलाकमान। आप अगली बार जब मतदान करें तो याद रखें कि आप क्या और किसे चाहते हैं। इन ट्वीटों से पहले हजारे ने कांग्रेस पर धोखा देने का आरोप लगाते हुए उसके खिलाफ अभियान छेड़ने की बात कही। (भाषा)


कांग्रेस : अपने ही गिरेवान में झांके



अपने ही गिरेवान में झांके कांग्रेस
उनके सहयोगी दल और उनके ही सांसदों ने धोका दिया।
-----------------
 लोकपाल को संवैधानिक दर्जा दिए जाने को लेकर संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में गिरने पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी बहुत नाराज हैं। कांग्रेस सरकार अब उन सांसदों के खिलाफ कार्रवाई का मन बना रही है, जो वोटिंग के दौरान गायब थे।
प्राप्त जानकारी के अनुसार सोनिया गांधी ने वोटिंग के दौरान अनुपस्थित रहे पार्टी के 16 सांसदों की सूची भी मंगवाई है। जबकि इनमें से 6 सांसद तो सिर्फ गुजरात के ही हैं।
गुजरात के इन सांसदों के नाम हैं...
1. दिनशा पटेल 2. बिठ्ठल रादडिया 3. जगदीश ठाकोर 4. विक्रम माडम 5. किशन पटेल 6. कुंवरजी बावडिया लोकसभा में बिल पेश करने वाले नारायण सामी ने बताया कि एसएमएस और फोन द्वारा इस संबंध में सभी सांसदांे को जानकारी दे दी गई थी। लेकिन फिर भी ये लोग अनुपस्थित रहे। सामी के अनुसार अनुपस्थित सांसदों को जल्द ही शो कॉज नोटिस भेजा जाएगा।
उल्लेखनीय है कि मंगलवार को लोकपाल और लोकायुक्त को संवैधानिक दर्जा दिए जाने वाला संविधान संशोधन विधेयक दो तिहाई बहुमत के अभाव में गिर गया, जिससे यूपीए सरकार को गहरा झटका लगा है।


बुधवार, 28 दिसंबर 2011

सोनिया : भड़ास भाजपा पर



सोनिया : भड़ास  भाजपा पर
संसदीय समिति में लोकपाल बिल में धर्म आधारित आरक्षण का प्रावधान नहीं था..कांग्रेस ने यू पी चुनाव में फायदा उठाने के लिए धर्म आधारित आरक्षण कर वायदा खिलाफी की और लोकपाल को वोटपाल  बना दिया | विश्वाषघात तो कांग्रेस ने किया , धोका तो कांग्रेस ने दिया | संविधान सभा की बहस के पन्ने देखलो , कहाँ लिखा हे  धर्म आधारित आरक्षण दिया जा सकता हे |  यदि संविधान विरोधी प्रावधान कांग्रेस ले कर आई हे तो उसे रोकना ही भाजपा का कर्तव्य हे |
अरुण जेतली - सरकार को समर्थन दे रहे समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल, तृणमूल कांग्रेस और द्रविड मुनेत्र कषगम (द्रमुक) जैसे दलों पर कटाक्ष किया कि राज्यसभा में लोकपाल एवं लोकायुक्त विधेयक पारित कराने का प्रयास होगा तब ऎसे दलों के लिये परीक्षा की घड़ी होगी. वे सिर्फ प्रवचन करना ही जानते हैं या प्रहार करना भी जानते हैं.    
 ------------------
http://in.jagran.yahoo.कॉम


भाजपा पर बरसीं सोनिया, अपने सांसदों से नाराज
Dec 28, 2011

नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। लोकपाल पर लोकसभा में फजीहत के बाद कांग्रेस आलाकमान की अपने सांसदों पर नजरें टेढ़ी हैं। भाजपा के ऐन वक्त पर पलटने पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी समेत पूरी पार्टी ने भड़ास तो निकाली, लेकिन उनकी असली नाराजगी संविधान संशोधन के समय सदन से गैर हाजिर सांसदों से है। उन्होंने पूर्व केंद्रीय मंत्री गिरिजा व्यास और सांसद संदीप दीक्षित से सदन में अनुपस्थित रहे सांसदों की सूची बनाकर देने को कहा है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के रिपोर्ट तलब करने के बाद पूरी पार्टी में हड़कंप मचा हुआ है।
कांग्रेस के स्थापना दिवस पर पार्टी मुख्यालय में आईं सोनिया ने लोकपाल को संवैधानिक दर्जा न मिल पाने के लिए भाजपा पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि 'संसदीय समिति में भाजपा ने लोकपाल को संवैधानिक दर्जा देने पर सहमति जताई थी, लेकिन उसका असली चेहरा कल संसद में सबके सामने आ गया। हम संवैधानिक दर्जा देकर लोकपाल को मजबूती देना चाहते थे, जो भाजपा ने नहीं होने दिया।' राहुल गांधी और पार्टी के दूसरे नेताओं ने भी भाजपा पर भड़ास निकाली।
कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी की इच्छा के मुताबिक संवैधानिक दर्जा दिलाने की सरकारी कोशिशों को लगे बड़े झटके का खामियाजा पार्टी सांसदों को भी भुगतना पड़ेगा। सूत्रों के मुताबिक, संसदीय कार्यमंत्री व्हिप के बावजूद सदन में मौजूद न रहने वाले सांसदों को कारण बताओ नोटिस भेजा जाएगा। शुरुआती गणना के मुताबिक, 16 सांसद अनुपस्थित पाए गए। इनमें दो तृणमूल कांग्रेस के हैं, जबकि एक दर्जन से ज्यादा सांसद खुद कांग्रेस के हैं।
सोनिया के कड़े तेवरों से घबराए केंद्रीय मंत्री दिनशा पटेल ने तो तुरंत सफाई भी दी कि वह घर में शादी कार्यक्रम में थे और पहले से नेतृत्व को बता दिया था। एम राजमोहन रेड्डी, विक्रमभाई अरजनभाई, मदन अहीर, किशन बी पटेल, केआरजी रेड्डी, हर्षव‌र्द्धन, हमीदुल्लाह सईद जैसे नाम पहली नजर में सामने आए हैं।
इन सबको कारण बताओ नोटिस देने के साथ गुरुवार को राज्यसभा में सारे कांग्रेस सांसदों की उपस्थिति सुनिश्चित करने को भी कहा गया है।
-------

गैरहाजिर रहने वाले सांसदों को कारण बताओ नोटिस
http://www.bhaskar.com
नई दिल्‍ली. लोकपाल बिल पर वोटिंग के दौरान अनुपस्थित रहने वाले सांसदों के खिलाफ कांग्रेस ने कार्रवाई करने का मन बना लिया है। सूत्रों के हवाले से आ रही खबर के मुताबिक कांग्रेस अध्‍यक्ष सोनिया गांधी ने अपनी पार्टी के उन सांसदों की लिस्‍ट मांगी है जो कल लोकसभा में लोकपाल बिल को संवैधानिक दर्जा दिए जाने के प्रस्‍ताव पर वोटिंग के दौरान गैर हाजिर रहे।
 केंद्रीय मंत्री वी नारायणसामी ने कहा कि ऐसे सांसदों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी। पार्टी ने अपने ऐसे सांसदों को कारण बताओ नोटिस भेज जारी किया है जिन्‍होंने लोकसभा में वोटिंग में हिस्‍सा नहीं लिया। हालांकि ऐसे सांसदों को माफ किया जा सकता है जो किसी जरूरी वजह से गैरहाजिर रहे।
सदन से गैरहाजिर रहे सदस्‍यों में गुजरात के छह कांग्रेसी सांसद भी शामिल हैं। केंद्रीय मंत्री और गुजरात में खेड़ा से सांसद दिनशा पटेल ने अपनी गैरहाजिरी पर सफाई भी दी है। उन्‍होंने कहा है कि बेटी की रिसेप्‍शन होने की वजह से वह मंगलवार को संसद में  हाजिर  नहीं हो सके। पाटन से सांसद जगदीश ठाकुर के करीबी रिश्‍तेदार का निधन हो गया था।  गौरतलब है कि कांग्रेस ने ह्विप जारी कर अपने सभी सांसदों को सदन में मौजूद करने को कहा था। पार्टी ह्विप का उल्‍लंघन करने पर सांसदों को पार्टी की सदस्‍यता से भी हाथ धोना पड़ सकता है।
लोकपाल को संवैधानिक दर्जा देने का प्रस्ताव लोकसभा में गिर गया। उपधारा-दो में संशोधन प्रस्ताव पर पक्ष में 247 और विरोध में 171 वोट पड़े। चूंकि यह संविधान संशोधन है इसलिए 543 सदस्‍यों वाले सदन में पक्ष में दो तिहाई बहुमत यानी 272 से कम वोट नहीं होने चाहिए। इसके बाद एक-एक करके सरकार के संवैधानिक संशोधन गिरते गए। सोनिया गांधी ने लोकपाल को संवैधानिक दर्जा दिए जाने को लेकर संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में गिरने के लिए बीजेपी को जमकर कोसा। उन्होंने कहा कि बीजेपी का असली चेहरा सामने आ गया है।
भाजपा नेता यशवंत सिन्‍हा ने कहा कि राहुल गांधी ने कांग्रेसियों को जो सपना दिखाया था वो चकनाचूर हो गया है। राहुल ने यूपी चुनावों में जो सपना दिखाया, वो भी चकनाचूर हो जाएगा। वहीं बीजेपी नेता आरती मेहरा ने संविधान संशोधन का विरोध करते हुए कहा, 'हमने राहुल के सपने पूरे करने का ठेका नहीं लिया है।' 
कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी को अपने इस सपने का टूट जाना भी बुरा लगा है। उन्‍होंने बुधवार को यूपी में एक रैली के दौरान भाजपा पर संसद में मजबूत लोकपाल का विरोध करने का आरोप लगाया। उन्‍होंने कहा, 'विपक्ष ने लोकपाल को लेकर बहुत बहस की, भ्रष्‍टाचार को लेकर बड़ी बड़ी बातें की लेकिन जब लोकपाल को मजबूत बनाने की बारी आई तो पलट गए। भाजपा के सांसदों ने अपने आला नेताओं के कहने पर बटन नहीं दबाया। भाजपा के लाल कृष्‍ण आडवाणी, सुषमा स्‍वराज सब वोटिंग के समय सदन में बैठे थे। इन्‍होंने संसद के बाहर भ्रष्‍टाचार की बात लेकिन जब मजबूत लोकपाल की बात आई तो बटन नहीं दबाया। लेकिन कांग्रेस पार्टी ने बटन दबाया।'
सोनिया बोलीं- भाजपा ने वादा कर दिया धोखा
------

जेटली ने कहा कि भाजपा लोकपाल को संवैधानिक दर्जा देना चाहती है लेकिन सरकार तो इसे खोखला कानून बनाना चाहती है. उन्होंने कहा कि भाजपा ऎसे विधेयक को पारित नहीं करायेगी जो महत्वहीन और कमजोर हो.
उन्होंने सरकार को समर्थन दे रहे समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल, तृणमूल कांग्रेस और द्रविड मुनेत्र कषगम (द्रमुक) जैसे दलों पर कटाक्ष किया कि राज्यसभा में लोकपाल एवं लोकायुक्त विधेयक पारित कराने का प्रयास होगा तब ऎसे दलों के लिये परीक्षा की घड़ी होगी. वे सिर्फ प्रवचन करना ही जानते हैं या प्रहार करना भी जानते हैं. 
जेटली ने कहा कि आज सभी राजनीतिक दल कसौटी पर हैं कि हम कितना मजबूत लोकपाल कानून बना रहे हैं.




नकली लोकपाल : भाजपा कांग्रेस की गुलाम नहीं उसके लिए पहले देशहित हे ... ,




नकली लोकपाल 
भाजपा कांग्रेस की गुलाम नहीं उसके लिए पहले देशहित हे ... , 
न ही उसकी जिम्मेवारी कांग्रेस के लिये बहुमत जुटाना है।
कांग्रेस के सांसद अनुपस्थित थे,
भाजपा ने सही किया कि नकली लोकपाल का साथ नहीं दिया, 
असली लोकपाल तो जन लोकपाल है।
जब तक जन लोकपाल जैसा बिल न बनें तब तक संर्घष जारी रहे।
सूत्रों के मुताबिक, संसदीय कार्यमंत्री व्हिप के बावजूद सदन में मौजूद न रहने वाले सांसदों को कारण बताओ नोटिस भेजा जाएगा। शुरुआती गणना के मुताबिक, 16 सांसद अनुपस्थित पाए गए। इनमें दो तृणमूल कांग्रेस के हैं, जबकि एक दर्जन से ज्यादा सांसद खुद कांग्रेस के हैं।
सोनिया के कड़े तेवरों से घबराए केंद्रीय मंत्री दिनशा पटेल ने तो तुरंत सफाई भी दी कि वह घर में शादी कार्यक्रम में थे और पहले से नेतृत्व को बता दिया था। एम राजमोहन रेड्डी, विक्रमभाई अरजनभाई, मदन अहीर, किशन बी पटेल, केआरजी रेड्डी, हर्षव‌र्द्धन, हमीदुल्लाह सईद जैसे नाम पहली नजर में सामने आए हैं। इन सबको कारण बताओ नोटिस देने के साथ गुरुवार को राज्यसभा में सारे कांग्रेस सांसदों की उपस्थिति सुनिश्चित करने को भी कहा गया है।

रूस में गीता पर नहीं लगेगा प्रतिबंध : इसाई चर्च की साजिस विफल




- अरविन्द सिसोदिया 
दुनिया भर में ईसाईयों ने हिंसा और प्रलोभन के आधार पर अपना विस्तार किया ...इस हेतु गैर इसाई देशों में किसी न किसी तरह के कार्यों में लिप्त हें ..इसी तरह का एक कार्य रूस में सर्बिया के एक ईसाई चर्च ने गीता को कट्टरपंथी ग्रंथ बताते हुए इस पर रोक लगाने की मांग की थी | इसाई चर्च की साजिस विफल  

रूस में गीता पर नहीं लगेगा प्रतिबंध
Wednesday, December 28, 2011,17:01
नई दिल्ली : अब रूस में भारतीय महाकाव्‍य श्रीमदभागवत गीता पर प्रतिबंध नहीं लगेगा। रूस की अदालत में इस संबंध में दायर याचिका बुधवार को खारिज हो गई। रूस के कोर्ट के यह फैसला आज इस संबंध में अंतिम सुनवाई के बाद आया। सर्बिया के एक ईसाई चर्च ने गीता को कट्टरपंथी ग्रंथ बताते हुए इस पर रोक लगाने की मांग की थी, जिसका रूस के कई इलाकों के साथ भारत में भी जमकर विरोध हुआ था। यह मुद्दा भारतीय संसद में भी उठाया गया था।
रूस की एक अदालत में बुधवार को हिंदुओं के धार्मिक ग्रंथ भगवद् गीता पर प्रतिबंध लगाए जाने और उसे चरमपंथी साहित्य घोषित करने के मामले पर अंतिम सुनवाई शुरू हो गई।
रूस के तोमस्क शहर से हिंदू याचिकाकर्ताओं ने फोन पर बताया कि साइबेरियाई अदालत को अपना फैसला सुनाने से पहले भगवद् गीता और अल्पसंख्य हिंदुओं के अधिकारों की रक्षा पर रूसी मानवाधिकार जांच अधिकारी के विचार सुनने थे।
हिदुओं ने अपील की थी कि पहले देश की मानवाधिकार समिति मामले में सुनवाई करे। इसके बाद अदालत ने 19 दिसम्बर को सुनवाई बुधवार  28 दिसम्बर तक स्थगित कर दी थी। वहीं गीता पर रोक लगाने की मांग के विरोध में दिल्ली में विश्व हिन्दू परिषद के कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन करते हुए रैली भी निकाली।

कोंग्रेस सरकार को शासन का अधिकार नहीं हे




- अरविन्द सिसोदिया
कोंग्रेस सरकार को शासन का अधिकार नहीं हे 
विपक्षी पार्टियों ने कॉपरेरेट्स, मीडिया और विदेशी चंदा प्राप्त करने वाले एनजीओ को इसके दायरे में लाने की मांग करते हुए संशोधन प्रस्तुत किए थे। ये अस्वीकृत हो गए। सी बी आई को भी सरकार ने अपने पास रखा हे |  कुछ भी नहीं हे इस लोकपाल में ....एक कडवा सच यह हे कि  लोकसभा में सरकार को बनें रहने के लिए २७२ सांसदों कि जरूरत हे ..मगर सरकार को लोकपाल बिल पर मात्र २५० ही सांसदों का समर्थन मिला , एक प्रकार से सरकार को शासन का अधिकार नहीं हे ... यह अल्पमत सरकार हे ..
संविधान संशोधन बिल पर गच्चा खा गई कांग्रेस
Story Update : Wednesday, December 28, 2011    4:15 AM
लोकपाल को संवैधानिक दर्जा देने की राहुल गांधी की पहल आखिरी वक्त पर कांग्रेस के फ्लोर मैनेंजमेंट की कमी की वजह से धरी की धरी रह गई। लोकपाल बिल को ध्वनि मत से पास करा लेने के बाद यूपीए संविधान संशोधन बिल के तीन प्रावधानों पर दो तिहाई बहुमत जुटाने में कामयाब नहीं हो पाई। इसके साथ ही संविधान में 116वां संशोधन नहीं हो सका। राजीव गांधी भी 22 साल पहले पंचायती राज विधेयक को संसद से संवैधानिक दर्जा नहीं दिला सके थे। हालांकि बाद में कांग्रेस की अगली सरकार ने इसे संवैधानिक दर्जा दिला लिया था।
संवैधानिक लोकतंत्र के लिए निराशाजनक दिन
जानकार इसे कांग्रेस की ओर से फ्लोर मैनेजमेंट में जुटे पवन बंसल और नारायण सामी जैसे मंत्रियों की नाकामी बता रहे हैं। लेकिन सदन के नेता प्रणव मुखर्जी ने इसका पूरा ठीकरा मुख्य विपक्षी दल भाजपा पर फोड़ दिया। संशोधन बिल गिर जाने के बाद प्रणव मुखर्जी ने कहा कि लोकपाल को संवैधानिक दर्जा दिया जाना देश हित में था। लेकिन विपक्ष ने सहयोग नहीं दे कर गलत किया है। यह संवैधानिक लोकतंत्र के लिए निराशाजनक दिन है।
तीन प्रस्ताव दो तिहाई बहुमत नहीं पा सके
उधर, भाजपा नेता यशवंत सिन्हा ने इस आरोप के जवाब में कहा कि सरकार ने इस मामले में भाजपा से कोई मदद नहीं मांगी थी। बिल पास कराना सरकार की जिम्मेदारी है और अगर सरकार ने उनसे पहले कहा होता कि उनके सहयोग के बिना संशोधन बिल पास नहीं हो पाएगा तो पार्टी उसपर जरूर विचार करती। संवैधानिक संशोधन के प्रावधानों पर वोटिंग शुरू हुई तो चार में तीन प्रस्ताव दो तिहाई बहुमत नहीं पा सके। जानकारों के मुताबिक लोकपाल बिल पर ध्वनिमत के दौरान सदन छोड़ कर चले गए बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी के 42 सांसदों को कांग्रेस संवैधानिक संशोधन बिल पर वोटिंग के लिए राजी कर सकती थी। क्योंकि इन दोनों पार्टियों को लोकपाल के कुछ प्रावधानों पर आपत्ति थी। लेकिन संशोधन बिल पर इन दोनों पार्टियों ने कोई विरोध नहीं जताया था। मालूम हो कि 1989 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी भी पंचायती राज विधेयक को काननी दर्जा दिलाने में नाकाम रहे थे। इसके बाद उन्होंने लोकसभा भंग कर दी थी। हालांकि बाद में आई कांग्रेस सरकार ने पंचायती राज विधेयक को संवैधानिक दर्जा दिलाया था।

BJP demands resignation of the UPA government


Manchanda 60th b'day party

28 DEC, 2011, 12.32AM IST, PTI
BJP demands resignation of the UPA government
NEW DELHI: With the Constitution Amendment Bill on Lokpal failing in Lok Sabha, BJP tonight demanded resignation of the UPA government on moral grounds.
"Government should resign on moral grounds. Prime Minister Manmohan Singh has no moral right to continue in office," BJP leader Yashwant Sinha told reporters after the embarassing development for the government.
He noted that the government could not muster even simple majority of 273 votes in favour as it managed only 250 votes on the crucial legislation.
"Rahul Gandhi's dream has been shattered. This shows the monumental inefficiency of this government.
"I had said during my speech that Prime Minister spoke as if he was making his farewell speech. If any morality left is left in them, they should quit," Sinha said.
On the attack by Leader of the House Pranab Mukherjee for the defeat of the bill, he said he was indulging in politics.
Sinha said it was the government's responsibility to ensure the requisite numbers in the House and not that of the Opposition.
CPI leader Gurudas Dasgupta said the government should "look into the mirror" as it could not mobilise the required strength for the Constitution Amendment Bill.
He said the Lokpal was no more a Lokpal "but only its caricature".

लोकपाल बिल पास, संवैधानिक दर्जा नहीं




लोकपाल बिल पास, 
संवैधानिक दर्जा नहीं दिला पाई सरकार
----
सरकार ने लोकसभा में 
लोकपाल बिल पास कराया
27 Dec 2011, 2348 hrs
नई दिल्ली।। सरकार ने लोकसभा में लोकपाल बिल पास करवा लिया है। लेफ्ट, बीएसपी और एसपी के सांसदों के वॉकआउट के बाद सरकार का लोकपाल बिल पास कराना तय माना जा रहा था। अब बुधवार को राज्यसभा में लोकपाल बिल पेश किया जाएगा। सरकार के लिए राज्य सभा से इस बिल को पास करवा पाना इतना आसान नहीं माना जा रहा है।
लोकसभा में पास करवाने के बावजूद सरकार लोकपाल को संवैधानिक दर्जा नहीं दिला पाई है। संवैधानिक दर्जा दिलाने के लिए कुल सांसदों के कम से कम 50 फीसदी और उपस्थित सांसदों के 2 / 3 बहुमत की जरूरत थी। संवैधानिक दर्जे पर सरकार 2 / 3 वोट नहीं जुटा पाई। हालांकि पहले कहा गया कि संवैधानिक दर्जा मिल गया है लेकिन इस तरफ सरकार की हार के बारे में सुषमा स्वराज ने ध्यान दिलाया। बाद में प्रणब मुखर्जी ने इसे लोकतंत्र के लिए दुखद बताते हुए कहा कि उनके पास बहुमत नहीं था। गौरतलब है कि राहुल गांधी ने लोकपाल को संवैधानिक दर्जा देने की बात उठाई थी।
संविधान संशोधन पर 394 सांसदों ने वोट दिया। 321 सांसदों ने संशोधन के पक्ष में , जबकि 71 ने विरोध में वोट दिया। दो सांसद 2 गैरहाजिर रहे। दिन भर की बहस के बाद सरकार ने 10 संशोधन प्रस्ताव पास किए जिसमें विपक्ष के सारे प्रस्ताव गिर गए|
चैनल टाइम्स नाउ के मुताबिक लोकपाल बिल में सरकार ने कुछ बदलाव किए हैं... 
1-कॉर्पोरेट , मीडिया संबंधी लेफ्ट का संशोधन गिरा। 
2-पीएम पर केस चलाने के लिए अब लोकपाल बेंच का 2/3 बहुमत काफी होगा। इस पर बीजेपी की मांग मानी गई। 
3-लोकपाल के दायरे से सेना बाहर। 
4-लोकपाल की नियुक्ति के लिए पैनल में अब राज्यसभा में विपक्ष का नेता शामिल होगा। 
5-अल्पसंख्यक आरक्षण पर बीजेपी की मांग ठुकराई। अल्पसंख्यकों को आरक्षण जैसा का तैसा। 
बीच बहस में मनमोहन बोले... 
इससे पहले सुषमा स्वराज, मुलायम सिंह यादव, शरद यादव, कपिल सिब्बल आदि प्रमुख नेताओं की ' गर्मागर्म ' बहस के बाद शाम को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बिल पर बयान दिया। मनमोहन सिंह ने बिल पर विपक्ष की तमाम आपत्तियों को खारिज करते हुए कहा कि सरकार अपने वायदे के मुताबिक मजबूत लोकपाल बिल लेकर आई है। उन्होंने सभी पार्टियों से लोकपाल बिल को पास कराने के लिए सहयोग मांगा।
मनमोहन सिंह ने कहा कि सरकार का लोकपाल बिल संसद की भावना के अनुरूप है और कानून बनाने का अधिकार केवल संसद के पास है। बाकी लोग केवल अपनी राय दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि बिल को तैयार करने में हर वर्ग की राय ली गई। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार का मानना है कि सीबीआई को लोकपाल के तहत काम करने की अनुमति नहीं दी जा सकती , क्योंकि यह संविधान के दायरे से बाहर होगा। उन्होंने कहा कि देश की हर इकाई को संविधान के तहत ही काम करना होगा और उसे संसद के प्रति अपनी जवाबदेही रखनी होगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार राज्यों के स्तर पर है और बिना लोकायुक्त के भ्रष्टाचार देश से पूरी तरह खत्म नहीं होगा।
ब्लॉगः नेता तेरा कैसे करें भरोसा 


बहस की शुरुआत में विपक्ष की नेता सुषमा स्‍वराज ने अपनी पार्टी का पक्ष रखा। बीजेपी ने कहा कि यह बिल खामियों से भरा है। उन्होंने कहा कि सरकार इस बिल को स्टैंडिंग कमिटी को फिर से वापस भेजे और दो-तीन महीने बाद इसे दोबारा पेश किया जाए। दूसरी ओर केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा कि अगर लोकपाल बिल पास नहीं हुआ, तो देश बीजेपी को माफ नहीं करेगा। बिल के लटकने पर बीजेपी ही विलन बनेगी। इससे पहले सुबह केंद्रीय मंत्री वी नारायणसामी ने बहस के लिए लोकपाल बिल सदन के पटल पर रखते हुए सरकार का पक्ष रखा। 


बिल पर बीजेपी के संशोधन माने सरकार 
समाजवादी पार्टी अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव और जेडीयू नेता शरद यादव ने सरकार के लोकपाल बिल को ' कमजोर ' बताया। उन्होंने कहा कि सरकार को बीजेपी के संशोधनों को मान लेना चाहिए। मुलायम सिंह यादव ने कपिल सिब्बल के बयान की ओर इशारा करते हुए कहा कि सरकार को विपक्ष की आलोचनाओं पर नाराज होने के बजाय उचित राय मान लेनी चाहिए। मुलायम ने सरकार पर बिल का मसौदा अपने मनमाफिक बनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि सीबीआई के संबंध में जो संशोधन लाया गया है सरकार को उसे मान लेना चाहिए, अन्यथा जांच एजेंसी जैसे ही आरोप लोकपाल पर लगने लगेंगे। इसके अलावा विपक्ष के अच्छे सुझावों को मान लेना चाहिए।
नीचे पढ़ें, लोकसभा में लोकपाल बिल पर बहस के दौरान किसने क्या कहा और क्या रहा पार्टियों का स्टैंड। 
यशवंत सिन्हा, बीजेपी 
बीजेपी नेता यशवंत सिन्हा ने कहा कि सरकार ने लोकपाल बिल में जानबूझकर कर ऐसी चीजें रखी हैं जिससे यह संसद में लटक जाए या फिर बाद में कानूनी अड़चन आ जाए। उन्होंने कहा कि विवाद बढ़ाने के लिए लोकपाल बिल के ड्राफ्ट में अल्पसंख्यक आरक्षण जानबूझ कर डाला गया है।


लालू प्रसाद यादव, आरजेडी 
पार्टी का स्टैंडः बिल का विरोध 
लालू ने लोकपाल बिल का विरोध किया है। उन्होंने सीबीआई को लोकपाल के तहत लाने पर सख्त आपत्ति जताई। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा , ' द्रौपदी के पांच पति थे , सीबीआई के नौ पति होने जा रहे हैं। ' उन्होंने कहा कि इससे पूरा तंत्र अस्त-व्यस्त हो जाएगा। उन्होंने लोकपाल बिल की धाराओं को खतरनाक बताया। लालू ने कहा कि पूर्व सांसद को सात साल के बाद लोकपाल के दायरे में लाने की धाराएं बेहद खतरनाक है। उन्होंने अपने भाषण में अन्ना हजारे , अरविंद केजरीवाल और किरन बेदी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें आंदोलन के पीछे अंतरराष्ट्रीय साजिश नजर आ रही है।


तृणमूल कांग्रेस 
पार्टी का स्टैंडः राज्यों के अधिकार में दखल, बिल का विरोध 
लोकपाल बिल पर सरकार को विपक्ष ही नहीं अपने सहयोगी दलों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। बिल पर बहस के दौरान तृणमूल कांग्रेस ने सरकार के मौजूदा लोकपाल बिल का विरोध किया। तृणमूल कांग्रेस ने कहा कि राज्य की शक्तियों को कम करने वाले बिल के ड्राफ्ट का वह विरोध करते हैं। 


अनंत गीते, शिवसेना सांसद 
पार्टी का स्टैंडः लोकपाल बिल संविधान के खिलाफ, सरकार वापस ले 
शिवसेना ने संसद में पेश लोकपाल बिल का विरोध किया है। शिवसेना नेता अनंत गीते ने बिल पर बहस के दौरान कहा कि लोकतंत्र के चारों स्तंभ अभी सुरक्षित हैं, ऐसे में लोकतंत्र के पांचवें स्तंभ (लोकपाल) की जरूरत नहीं है। उन्होंने लोकपाल के दायरे में पीएम को लाने और लोकसभा के स्पीकर को लोकपाल के प्रति जवाबदेह बनाने पर सख्त ऐतराज जताया। उन्होंने कहा कि सरकार मौजूदा लोकपाल बिल को वापस ले और स्टैंडिंग कमिटी में भेजे। 


सुषमा स्वराज , बीजेपी 
पार्टी का स्टैंडः सरकार बिल में संशोधन करे 
नेता विपक्ष और बीजेपी लीडर सुषमा स्वराज ने कहा कि यह सरकारी लोकपाल बिल भारतीय संविधान के मुताबिक नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार बिल को लेकर कन्फ्यूज है। उन्होंने कहा कि यह कानून अनुच्छेद 253 के तहत लाया गया है , जो देश के संघीय ढांचे पर चोट है। सुषमा ने कहा कि अगर यह बिल इसी स्वरूप में पास हो गया तो राज्यों के अधिकार में दखल होगा। उन्होंने कहा सरकार राज्यों पर लोकायुक्त थोप रही है। सुषमा स्वराज ने कहा हमें इसमें आरक्षण पर भी ऐतराज है। 


उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी लोकपाल में 50 फीसदी आरक्षण के खिलाफ है। उन्होंने कहा सांविधानिक संस्थाओं में देश में आरक्षण की व्यवस्था लागू नहीं है। उन्होंने कहा की लोकपाल में 5 से अधिक सदस्यों पर आरक्षण के हम खिलाफ है। उन्होंने कहा कि हमारे यहां धर्म के आधार पर आरक्षण की व्यवस्था नहीं है। अल्पसंख्यक आरक्षण से देश बंट जाएगा। इतिहास बताता है कि बिना आरक्षण के भी हमारें यहां अल्पसंख्यकों उच्च पदों पर पहुंचे हैं। पीएम मनमोहन सिंह भी अल्पसंख्यक ही है। 


लालू पर ली चुटकी : सुषमा स्वराज ने अपने संबोधन के दौरान लालू यादव पर चुटकी लेते हुए कहा कि सरकार ने 4.5 फीसदी आरक्षण के मुद्दे पर उन्हें मूर्ख बनाया है। 


सीबीआई के चार बॉस होंगे : सुषमा ने कहा कि सीबीआई को सरकारी नियंत्रण से मुक्त तो किया नहीं गया, पर उस पर अब लोकपाल का शिकंजा भी डाल दिया गया है। उन्होंने कहा कि अब सीबीआई के चार बॉस हो जाएंगे। 


पीएम पर निशाना : उन्होंने कहा कि पीएम के खिलाफ कार्यवाही गुप्त रखने का नियम क्यों बनाया गया है ? उन्होंने कहा कि पीएम को लोकपाल के दायरे में लाने के बाद सरकार इतनी बंदिशें क्यों चाहती है ? 


सुषमा ने कहा कि सरकार का लोकपाल बिल विकृति के साथ-साथ विसंगतियों से भी भरा है। उन्होंने कहा कि इसमें सेक्शन 24 के तहत प्रावधान है कि सांसदों के खिलाफ चार्जशीट दायर भर होने से लोकपाल पीठासीन अधिकारी (लोकसभा स्पीकर/ राज्यसभा सभापति) से कार्रवाई करने को कह सकता है। सुषमा ने कहा कि पीठासीन अधिकारी को लोकपाल को ऐक्शन टेकन रिपोर्ट लोकपाल को भेजना होगा। विपक्ष की नेता ने कहा कि इस देश में संसद सर्वोच्च है और सदन के भीतर जिस पीठासीनधिकारी के फैसले को सुप्रीम कोर्ट तक में चुनौती नहीं दी जा सकती , उसे लोकपाल के प्रति जवाबदेह होना होगा 


लालू यादव , नेता , आरजेडी 
पार्टी का स्टैंडः बिल खतरनाक है 
आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने भी बिल को वापस लेने की बात कही है। उन्होंने कहा कि या तो हमारे सुझाए संशोधन माने जाएं या फिर इसे वापस लिया जाए। 


कपिल सिब्बल, कांग्रेस 
पार्टी का स्टैंडः सरकार का लोकपाल बिल मजबूत 
कपिल सिब्बल ने चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा कि अगर बिल पास नहीं होता है, तो देश बीजेपी को माफ नहीं करेगा। उन्होने कहा कि बीजेपी चाहती है कि बिल कभी पास ही न हो। उन्होंने कहा कि जब पहले लोकायुक्त पर आम सहमति बनी थी, तो अब क्यों विरोध हो रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्र में नहीं राज्यों में करप्शन अधिक है। केंद्र सरकार की सेवाओं में तो व्यापक सुधार हुआ है। 


सुषमा के वार का सरकार की ओर से जवाब देते हुए टेलिकॉम मिनिस्टर कपिल सिब्बल ने कहा कि विपक्ष साजिश के तहत अनुच्छेद- 252 के तहत बिल लाने की मांग इसलिए कर रहा है ताकि राज्यों में लोकायुक्त न बनाना पड़े। उन्होंने कहा कि असली विपक्ष राज्यों सरकार की सेवाओं में है। सिब्बल ने कहा कि बिना घूस के लोगों को राशन नहीं मिलता , अस्पतालों में बेड नहीं मिलता। उन्होंने कहा कि 9 साल से गुजरात में लोकायुक्त क्यों नहीं है। कपिल सिब्बल ने कहा कि लोकपाल में धर्म के आधार पर आरक्षण असंवैधानिक नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी नहीं चाहती कि इस देश के 16 करोड़ अल्पसंख्यकों में से कोई लोकपाल समिति में शामिल हो। 


उन्होंने कहा कि बीजेपी केंद्र में तो करप्शन के खिलाफ है, पर राज्यों में करप्शन उसे दिखाई नहीं देता। 


मुलायम सिंह यादव, नेता, समाजवादी पार्टी 
पार्टी का स्टैंडः बिल में कई खामियां, विरोध किया 
एसपी सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने कहा कि इस बिल से करप्शन खत्म नहीं होगा। सरकारी बिल में कमी है। एसपी पीएम को लोकपाल के दायरे में लाने के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि हम अल्पसंख्यकों को आरक्षण देने के पक्ष में है। सीबीआई को लोकपाल के दायरे में लाने के खिलाफ है हमारी पार्टी। उन्होंन कहा कि लोकपाल की नियुक्ति की प्रक्रिया सरकार ने अपनी मन मुताबिक बनाई है। सीबीआई की ही तरह लोकपाल पर भी पक्षपात के आरोप लगेंगे।  


दारा सिंह चौहान , बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) 
पार्टी का स्टैंडः सीबीआई लोकपाल के दायरे में हो 
बीएसपी ने कहा कि चुनावी चश्मे से लोकपाल बिल को नहीं देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकपाल में अल्पसंख्यक आरक्षण होना चाहिए। उन्होंने कहा कि बीएसपी लोकपाल के दायरे में पीएम और सीबीआई को लाने के पक्ष में है। 


शरद यादव, नेता, जेडीयू 
पार्टी का स्टैंडः लोकपाल बिल का विरोध 
लोकपाल बिल पर जेडीयू नेता शरद यादव ने कहा कि लोकायुक्त पर राज्य के अधिकार में दखल दे रही हैं सरकार। 


टी . के . एस . इलनगोवन , डीएमके 
पार्टी का स्टैंडः बिल राज्यों की ताकत कम करता है 
डीएमके के टी . के . एस . इलनगोवन ने कहा , ' लोकायुक्त के गठन का विषय राज्यों का है। राज्यों को प्रदान किए गए अधिकारों को संरक्षण प्रदान किया जाना चाहिए। ' 


बासुदेव आचार्य , सीपीएम 
पार्टी का स्टैंडः और मजूबत हो लोकपाल बिल 
सीपीएम के बासुदेव आचार्य ने कहा , ' भ्रष्टाचार आज देश के सामने सबसे गंभीर और विकट समस्या है। इस संदर्भ में एक सशक्त लोकपाल का गठन किया जाना चाहिए और राज्यों के अधिकारों को संरक्षण प्रदान किया जाना चाहिए , क्योंकि लोकायुक्त के गठन का प्रस्ताव संघीय ढांचे पर प्रहार है। ' उन्होंने कहा कि लोकपाल की अपनी जांच एजेंसी होनी चाहिए अन्यथा यह बेअसर हो जाएगा। सरकार को इस बारे में खुले मन से विचार करना चाहिए। आचार्य ने कहा कि 1991 में देश में आर्थिक सुधार लागू किए जाने के बाद भ्रष्टाचार में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई है। इसको ध्यान में रखते हुए कॉर्पोरेट घरानों को लोकपाल के दायरे में लाया जाना चाहिए। इसके साथ ही सीबीआई को सरकारी प्रभाव से मुक्त बनाए जाने की जरूरत है। 


भृतुहरि माहताब , बीजेडी 
पार्टी का स्टैंडः राज्यों के अधिकार में दखल देता है लोकपाल 
बीजेडी के भृतुहरि माहताब ने कहा कि इस बिल में लोकपाल कितना मजबूत है , यह सवालों के घेरे में है। यह बिल करप्शन को मिटाने की इच्छा रखने वाले सभी लोगों की उम्मीदों से परे है। उन्होंने कहा कि लोकायुक्त का विषय राज्यों का अधिकार है , लेकिन इस संबंध में विधेयक में जो प्रावधान किया गया है वह राज्यों की स्वायत्ता पर चोट करता है। हालांकि ओडि़शा सरकार तीन महीने के भीतर राज्य में सशक्त लोकायुक्त के गठन की प्रतिबद्धता व्यक्त करती है।
-----
लोकसभा में बहस की झलकियां
रात्रि करीब 12:00 बजे: लोकसभा बुधवार 11 बजे तक के लिए स्थगित।
रात्रि 11:40 बजे: प्रणब मुखर्जी बोले आज का दिन लोकतंत्र के लिए दुखद।
रात्रि 11:30 बजे: संवैधानिक दर्जा देने का गिरा।
रात्रि 10:45 बजे: लेफ्ट और बीजेडी ने भी वॉकआउट किया।
रात्रि 10:40 बजे: लोकसभा में लोकपाल बिल पास।
रात्रि 10:20 बजे: विपक्ष के प्रस्ताव गिरे।
रात्रि 10:00 बजे: बीएसपी-सपा का सदन से वॉकआउट।
रात्रि 9:50 बजे: विपक्ष के भारी विरोध के बीच लोकपाल पर मतदान शुरू किया गया।
रात्रि 8:30 बजे: लोकसभा में केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने लोकसभा को संबोधित किया।
शाम 6:20 बजे: भाजपा के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा ने कहा कि कजोर लोकपाल बिल को वापस किया जाना चाहिए।
शाम 6:00 बजेः लालू यादव ने कहा कि अन्ना के स्वास्‍थ्‍य की हमें चिंता हैं। उन्‍होंने कहा कि सरकार को लोकपाल बिल वापस लेना चाहिए। इसमें संशोधन होना जरूरी है। बिल को दोबारा स्‍थायी समिति में भेजा जाना चाहिए।
शाम 4:41 बजे: लोकपाल बिल के मुद्दे पर संसद में प्रधानमंत्री ने कहा कि लोकपाल बिल जनता को भ्रष्टाचार से मुक्ति दिलाएगा।
शाम 4:25 बजे- लोकसभा में बहस में शामिल होते हुए शिव सेना के नेता अनंत गंगाराम गीते ने कहा कि प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे से बाहर रखा जाना चाहिए। गीते ने कहा कि शिवसेना लोकपाल बिल के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि क्या देश में कोई ईमानदार नेता नहीं बचा है?
शाम 4:00-दिल्ली के रामलीला मैदान में अन्ना हजारे के सहयोगी शांति भूषण ने कहा कि सीबीआई को सरकार के नियंत्रण से स्वतंत्र करने का तरीका उसे लोकपाल के तहत लाना ही है।
दोपहर 3:00-अन्ना हजारे ने कहा कि हमारा देश त्याग करने वालों का देश है।
दोपहर 2:56- जे‌डीयू अध्यक्ष शरद यादव ने कहा कि भ्रष्टाचार देश में एक बड़ी बीमारी है। लोकायुक्त पर राज्य के अधिकार में सरकार दखल दे रही है। लेकिन जनता सब समझती है। यादव ने कहा कि ग्रुप सी और ग्रुप डी के कर्मचारी लोकपाल के दायरे में आने चाहिए।
दोपहर 2:45- बसपा का कहना है कि लोकपाल बिल को चुनावी चश्मे से न देखा जाए। लोकपाल में अल्पसंख्यक आरक्षण होना चाहिए। बसपा सीबीआई और प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे में रखना चाहती है।
दोपहर 2:24-मुलायम सिंह ने कहा सरकार का लोकपाल बिल कमजोर है। उन्होंने कहा कि सरकार ने अपनी मर्जी का लोकपाल बिल बनाया है। बिल ने जनता को निराश किया। बिल में बड़ी खामियां हैं। 
दोपहर 1:30- सिब्बल ने कहा, चुनाव में फायदे के लिए लोकपाल बिल का विरोध कर रही है भाजपा।
दोपहर 1:00- सिब्बल बोले असली भ्रष्टाचार राज्य सरकारों की सेवाओं में।
दोपहर 12:52- कपिल सिब्बल ने कहा, बिल वापस लिया तो देश माफ नहीं करेगा।
दोपहर 12:45 लालू यादव ने भी लोकपाल बिल को वापस लेने की मांग की।
दोपहर 12:44 सरकार लोकपाल बिल को वापस लेः सुषमा स्वराज
दोपहर 12:35 अन्ना हजारे अनशन स्‍थल मरदा मैदान पहुंचे।
दोपहर 12:02 : सुषमा स्वराज ने लोकपाल समिति में आरक्षण के प्रावधानों का विरोध किया। उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं में तो आरक्षण का सवाल ही पैदा नहीं होता। सुषमा ने कहा कि धर्म आधारित आरक्षण के प्रस्ताव संविधान सम्मत नहीं हैं।
सुबह 11:48-विपक्ष की नेता सुषमा स्‍वराज ने अपनी पार्टी का पक्ष रखते हुए कहा कि सरकार जो बिल लेकर आई है उसमें बहुत खामियां है। बिल ने हम सभी की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। उन्होंने कहा‌ कि यह बिल संधीय ढांचे पर प्रहार करता है।
सुबह 11:40-नारायणसामी ने बहस के दौरान कहा कि सरकार मजबूत लोकपाल चाहती है। उन्होंने लोकपाल बिल के खास प्रावधानों का जिक्र किय। जिनमें लोकपाल समिति में एससी-एसटी, पिछड़े, महिला और अल्पसंख्यक वर्ग के लिए आरक्षण शामिल हैं।
सुबह 11:25-लोकपाल पर बहस के दौरान विपक्ष का हंगामा।
सुबह 11:20-लोकपाल पर लोकसभा में बहस शुरू।