बुधवार, 2 फ़रवरी 2011

बेरोजगारी की भयावह स्थिति



- अरविन्द सीसोदिया 
        बेरोजगारी एक आर्थिक समस्या हे किन्तु इसका मनोवैज्ञानिक प्रभाव भी युवा मस्तिष्क पर पड़ता हे !अपने लिए  आजीविका ना जुटा पाने के कारण युवक निराश हो जातें हें ! बात-बात पर क्रोध करना उनकी प्रवृत्ति बन जाती हे जिससे समाज कि शांति ही नहीं भंग होती अपितु नैतिक चरित्र का भी पतन होने लगता है, क्यूंकि निराशा ओर आक्रोश से भरा युवक कुछ भी कर गुजरने को तैयार हो जाता हे ! कहा भी  गया हे 
-बुभुक्षितः नराः किं न करोति पापं '  
अर्थात भूखा  व्यक्ति कौनसा पाप नहीं करता ! 

बेरोज़गारी कि समस्या का समाधान करके ही समाज में शांति एवं नेतिकता कायम कि जा सकती है !
          स्वतंत्रता - प्राप्ति के पश्चात जन संख्या की भारी  वृद्धि के कारण भी बेरोजगारों की संख्या  बढ़ गयी है ! हस्तकला  एवं कुटीर उद्योगों द्वारा बन्ने वाली वस्तुओं का उत्पादन मशीनों से होने लगा जिससे काम काजी हाथ बेकार हो गए, उन हाथों को अन्य कार्य तालाशने के लिए बाध्य होना पढ़ा कम्पुटर एवं स्वाचालित मशीनों के प्रयोग ने तो बेरोज़गारी की समस्या जटिल बना दिया है ! सच यह है कि अति मशीनीकरण ही बेरोजगारी का करण है | जिन्देशों में जनसँख्या का आभाव है वहां मशीनी करण लाभदायक है , जिन देशों में व्यापक जनसँख्या है वहां मशीनी करण घातक है | चीन ओर भारत में मसीनीकर्ण घातक है मगर चीन ने तो रोजगारी का ढांचा  खड़ा कर लिया है, भारत सरकार ने रोजगार की समस्या को भगवान् भरोषे छोड़ दिया है |  
    बेरोज़गारी की समस्या के पीछे हमारी दूषित शिक्षा-प्राणाली का भी हाथ है ! शिक्षा जीवन उपयोगी होनी चाहिए ! दुर्भाग्यवर्ष हमारी शिक्षा-प्रणाली प्रशिक्षित युवक-युवतियां तेयार नहीं करती, वह केवल क्लर्क या अफसर बनाती है ! उच्च डीग्री प्राप्त युवक छोटे व्यवसाय करने में हिच्कित्चाते हैं, जिससे बेरोजगारों की संख्या निरंतर बढती जा रही है !
        गाँव की बेरोजगारी को मिटने से देश को कई लाभ हैं जैसे की मुख्यतौर पर अनाज उत्पादन में  वृद्धि     मगर यह अब नदियों को आपस में जोड़े बिना संभव नहीं है ...मूर्खता पूर्ण हट नें नदियों को जोडनें के काम को बंद किया हुआ है ! एकमात्र उपाय के तौर  बेरोज़गारी की समस्या के समाधान के लिया आवश्यक है कि नदियों को जोड़ा  जाए ! 
        कृषि को व्यवसाय बनाने वालों को प्रशाक्षित किया  जाए  तथा उन्हें नवीन तकनीकों का ज्ञान कराया जाए ! गाँव में रोज़गार उपलब्ध कराने के लिए सरकार को आसान किश्तों पर लोन उपलब्ध कराने चाहिए ताकि लघु एवं कुटीर उद्योगों का विशवास  हो और ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों कि ओर आने वाले युवकों कि संख्या में ह्रास हो ! साकार को शिक्षा प्रणाली में भी सुधार करना चाहिए ! युवक-युवतियों को व्यावसायिक प्रशिक्ष्ण देकर उनके लिए रोज़गार की सुविधाएं जुटानी चाहिए ! इस प्रकार बेरोज़गारी कि समस्या के समाधान के लिए चौतरफा प्रयास करने कि आवश्यकता है !

***416 पद, सात लाख आवेदन 
बरेली। देश में बेरोजगारी का आलम यह है कि इंडो तिब्बत सीमा सुरक्षा बल बरेली केन्द्र पर धोबी, नाई, रसोईया, पानी वाला और सफाईकर्मियों के 416 पदों के लिए करीब सात लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। मंगलवार को पंजीकरण की तय तिथि से पहले ही लाखों युवक एक दिन पहले ही बरेली पहुंच गए। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस ने ट्रेड्स मैन की भर्ती के लिए 11 राज्यों से आवेदनपत्र मांगे थे। इस भर्ती के लिए एक दिन पहले सोमवार करीब 80 हजार अभ्यर्थी बरेली पहुंचे और मंगलवार को यह संख्या बढ़कर कई लाख के पार हो गई।
***उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में ट्रेन की छत पर बैठकर यात्रा कर रहे युवक रेलवे फुट ब्रिज से टकराकर नीचे गिर गए। इससे १५  युवकों की मौत हो गई जिनमें से 7 की पहचान हो गई है। लगभग दो दर्जन युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। उधर त्रिवेणी एक्सप्रेस से गिरने से हरदोई के पास बालामऊ रेलवे स्टेशन के पास भी एक युवक की मौत हो गई। गुस्साए युवाओं ने ट्रेन में आग लगा दी। इससे पहले इन्हीं युवाओं ने पूरे बरेली शहर को परेशान कर डाला। ये लोग आईटीबीपी की भर्ती में अव्यवस्थाओं से भड़क गए थे। 
*** बरेली में मचाया था उपद्रव : आईटीबीपी ने 410 जवानों की भर्ती का विज्ञापन दिया था। आवेदन करने के लिए उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, हरियाणा, पंजाब समेत 11 प्रदेशों से 2 लाख अभ्यर्थी मंगलवार को बरेली आईटीबीपी कैंप पहुंचे। जब उन्हें बताया कि आज भर्ती नहीं है, सिर्फ फार्म जमा होने हैं तो युवक भड़क गए। उन्होंने बसों को आगलगा दी। पेट्रोल पंप में तोड़-फोड़ की। उपद्रव से बरेली में अफरा-तफरी और भय के चलते बाजार बंद हो गए थे और लोग घरों में बंद हो गए थे। बाद में पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा। 

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