शुक्रवार, 11 फ़रवरी 2011

चमचावाद जिन्दावाद ...!


- अरविन्द सीसोदिया 
    वरिष्ठ कांग्रेसी नेता और राजस्थान सरकार में पंचायती राज और वक्फ राज्यमंत्री अमीन खां ने कांग्रेस कि एक संगठनात्मक बैठक में , मंत्रियों से नाराज कार्यकर्ताओं को तसल्ली देनें के लिए , बिना किसी दुर्भावना के एक सच क्या कह दिया ..., उनकी बली ले ली गई !! बिचारा बिना मौत मारा गया !! चापलूसी का अथाह सागर लगभग हर दल में है , योग्यता राजनीती में व्यक्ती की दुश्मन है ..! राजनैतिक योग्यता में पैसा और प्यार ( वफादारी )ही प्रमुख है ..! प्यार की उदेश्य परख अति ही चमचावाद है ..! 
     मगर क्या यह कांग्रेस के अन्दर का सच नहीं है..? इससे पहले वंशवाद कि वफादारी की नसीहत राहुल गांधी ने भी दी थी..! सवाल यही है की इतना बड़ा पद , बिना ठोस व्यवस्था के चुन लिया जाता है..??   कहीं न कहीं इस महत्व पूर्ण पद की निर्वाचन व्यवस्था परिपक्व होनी चाहिए ..!!
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सम्पूर्ण विवरण 
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जयपुर. राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील के बारे में विवादास्पद बयान देने वाले पंचायतीराज एवं वक्फ राज्यमंत्री अमीन खां ने आखिरकार गुरुवार को इस्तीफा दे दिया है। खां ने गुरुवार सुबह नाथद्वारा से जयपुर पहुंचते ही अपना इस्तीफा मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को दिल्ली भिजवा दिया। मुख्यमंत्री ने बुधवार रात ही खां से इस्तीफा देने को कह दिया था।
       मुख्यमंत्री ने सुबह दिल्ली में ही अमीन खां के इस्तीफे की पुष्टि कर दी। वे दोपहर में दिल्ली से जयपुर पहुंचे और शाम को राज्यपाल से मुलाकात की। उधर, बुधवार रात को दिल्ली में मुख्यमंत्री ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, उनके राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल और राजस्थान के प्रभारी महामंत्री मुकुल वासनिक से मुलाकात कर मामले पर विस्तार से चर्चा की। राष्ट्रपति भवन ने बुधवार को इस मामले में राज्यपाल और मुख्यमंत्री से मामले की रिपोर्ट मांगी थी। इसके बाद गहलोत ने खुद फोन कर राष्ट्रपति से खेद प्रकट किया था।

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अमीन खां द्वारा राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल के बारे में दिए गए बयान के बाद कांग्रेस में हड़कंप मच गया। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अमीन खां से फोन पर जवाब तलब किया। उन्होंने राष्ट्रपति से भी बात की और पूरे मामले में खेद जताया। बुधवार शाम को वे दिल्ली पहुंचे। दिल्ली में उन्होंने सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल और प्रभारी महामंत्री मुकुल वासनिक के साथ चर्चा की। विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक इस चर्चा के बाद अमीन खां से इस्तीफा देने को कहा गया। उन्होंने गहलोत को इस्तीफा भिजवा दिया, जो उन्होंने अपनी सिफारिश के साथ राज्यपाल के पास भेज दिया। 
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http://www.bhaskar.com/article/RAJ-JAI-gehlot-asks-minister-to-quit%E2%80%8E-1837109.html


पाली और उदयपुर में जो कहा, हूबहू..


पाली में मंगलवार को मंच से मंत्री ने कहा था, 'अपनी जो राष्ट्रपति है उसको आप जानते हो। वो भारत की राष्ट्रपति है। जिस समय इंदिरा गांधी सत्ता से हार गई, उसकी पूरी पार्टी हार गई। उस समय ये उनके किचन में रसोई करती थीं। इसको खुद को कोई पता नहीं था, मैं कुछ बन जाऊंगी। लेकिन उस रसोई और बर्तन मांजने की वजह से आज भारत की राष्ट्रपति बन गईं। (..तालियां..) उसने मांगा नहीं था सोनिया गांधी से जाके, कि मुझे ये बनाओ। पहले वो राज्यपाल बनीं और आज भारत की राष्ट्रपति है।'
बुधवार को उदयपुर में बोले
कांग्रेस पार्टी में हमेशा से जो फैसले हुए हैं वो मांगने से नहीं हुए हैं। और मांगने पर किसी को पद नहीं मिले हैं। इसके संदर्भ में उदाहरण के तौर पर मैंने राष्ट्रपति का नाम लिया था। राष्ट्रपति जो इस वक्त है वो इंदिरा गांधी जिस समय सत्ता में नहीं थी तब भी उनके घर के परिवार के रूप में खाने पीने के साथ वफादारी के साथ रही और यही वफादारी उसके काम आई और उसको राष्ट्रपति बनाया गया। उसने सोनिया गांधी से पद नहीं मांगा था। ये सर्वोच्च पद उसको भाषण बर्तन मांजने के कारण से मिला, ऐसा राज्य मंत्री ने कहा, ऐसा सवाल ही नहीं उठता।

(यानी स्पष्टीकरण में भी कहा वही, सिर्फ नहीं शब्द जोड़ दिया।और देर शाम मंत्री की ओर से जारी हुआ माफीनामा।)

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केके तिवारी को भी महंगी पड़ी थी ज्ञानी जैल सिंह पर टिप्पणी

पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी के कार्यकाल में सूचना एवं प्रसारण मंत्री रहे केके तिवारी ने भी 1988 में तत्कालीन राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह के खिलाफ अनर्गल टिप्पणी की थी। इससे नाराज जैल सिंह ने राजीव गांधी को उन्हें बर्खास्त करने को कहा। लेकिन राजीव गांधी ऐसा करने को तैयार नहीं थे। परिस्थिति इतनी बिगड़ गई थीं कि राष्ट्रपति ने अपने विशेषाधिकारों का इस्तेमाल करते हुए खुद मंत्री पर कार्रवाई की धमकी दी। राजीव गांधी ने इसके बाद तिवारी को मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर दिया।
अमीन खां के बयान को सभी ने बताया शर्मनाक
देश का अपमान
इस सरकार के मंत्री बेलगाम हो गए हैं। राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील के बारे में सरकार के मंत्री की टिप्पणी पूरे देश का, खासकर महिला जगत का अपमान है। इसके लिए पूरी सरकार दोषी है। -वसुंधरा राजे, पूर्व मुख्यमंत्री
स्तरहीन टिप्पणी
राष्ट्रपति पर ऐसी स्तरहीन टिप्पणी गंभीर मामला है। प्रतिभा पाटील अपनी योग्यता से इस सर्वोच्च पद तक पहुंची हैं। यह बयान राष्ट्रपति का तो अपमान है ही, यह इंदिरा और सोनिया का भी अपमान है।-कर्नल सोनाराम चौधरी, कांग्रेस विधायक
‘सत्यता का पता लगाएं’
‘राष्ट्रपति के सचिव ने इस मसले पर राज्यपाल और मुख्यमंत्री से सत्यता जानने को कहा है। अगर बयान में सत्यता है तो उचित कार्रवाई होनी चाहिए।’-अर्चना दत्ता,प्रवक्ता, राष्ट्रपति भवन

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'पाटिल को राष्‍ट्रपति बना सोनिया ने दिया इंदिरा जी की रसोई संभालने का ईनाम
http://www.bhaskar.com/article/RAJ-JOD-pratibha-makes-kitchen-of-indira-and-now-president-1831311.html


पाली. देश के सर्वोच्च पद पर आसीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल किसी जमाने में पूर्व प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी के घर में रसोई बनाती थीं। इसी वफादारी के नतीजे में कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी ने उन्हें राष्ट्रपति बना दिया। यह चौंकाने वाला बयान राजस्‍थान के पंचायती राज और वक्फ राज्यमंत्री आमीन खां ने मंगलवार को दिया। वे मानपुरा भाखरी पर स्थित जगदंबा माता मंदिर में आयोजित जिला कांग्रेस कमेटी की बैठक में बोल रहे थे। कांग्रेस नेताओं ने आलाकमान तथा कुछ पदाधिकारियों द्वारा कार्यकर्ताओं को तवज्जो नहीं देने के आरोप लगाए। इस पर आमीन खां ने यह कहते हुए कार्यकर्ताओं को संबल दिया कि आपातकाल के दौरान प्रतिभा पाटील पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी के घर में रसोई बनाया करती थीं।
 उनकी वफादारी का नतीजा देर से ही सही, पर मिला जरूर। जब राष्ट्रपति के चयन की बात आई तो सोनिया गांधी ने पाटिल की उसी वफादारी को देखते हुए उनका नाम लिया। खां ने कहा कि पाटील की तरह सभी कार्यकर्ता निस्वार्थ भावना से कार्य करते रहें। ना मालूम कब किसी के घर फोन आ जाए कि आपको एमएलए या एमपी का चुनाव लड़ना है।
 

मंत्री के बयान का विरोध
' संवैधानिक पद पर बैठी हस्ती के लिए अशोभनीय टिप्पणी करना उचित नहीं है। खां को राष्ट्रपति की मर्यादा का खयाल रखना चाहिए।'
- राजेंद्र राठौड़, सचेतक, भाजपा विधायक दल

' पाटिल की योग्यता पर सवाल कैसे उठाया जा सकता है। मंत्री को ऐसे बयान नहीं देने चाहिए। उन्हें मर्यादा में रहना चाहिए। '
प्रतापसिंह खाचरियावास, विधायक, कांग्रेस

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