बुधवार, 2 फ़रवरी 2011

पूर्व केंद्रीय दूरसंचार मंत्री ए राजा (A Raja) गिरफ्तार : गाड मदर और गाड फादर कहाँ गये...?


                                                             साभार -     janokti.com


- अरविन्द सीसोदिया 
    अलीबाबा चालीसा चोर में से एक चोर गिरिफ्तार हो गया , बहुत विलम्ब से ..., संभतः वे सारे सबूत जो मिटाए जा सकते थे उन्हें  मिटानें के बाद ...! मगर अभी तो बहुत से अपराधी और बहुत  से अलीबाबा तो पिक्चर से बाहर हैं ही ..! ए राजा तो बहुत मामूली चीज था .., उससे ऊपर तो उनके  दल डीएमके के सुप्रीमो करुणा निधी थे ...! फिर उनके गठबंधन यू पी ए के सुप्रीमो मैडम सोनिया जी थीं ...! जिस घोटालें में उन्हें गिरिफ्तर किया गया है वह लाख दो लाख का तो था नहीं ..! जो किसी को कुछ पता नहीं ...! ये तो एक इस तरह की राशी का है जिसमें पूरे  गठबंधन ने ही प्रशाद मिल बाँट कर खाया होगा ! फिर अपराधी और गिरफ्तारी एक की क्यों ...? गाड मदर और गाड फादर कहाँ गये...? न्याय तो तभी होता जब वे भी साथ साथ बंदी बनाये गये होते ...! 






























***   केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले के मामले में पूर्व केंद्रीय दूरसंचार मंत्री ए राजा (A Raja) को आज गिरफ्तार कर लिया। सीबीआई ने पूर्व दूरसंचार सचिव सिद्धार्थ बेहुरा (Siddharth Behura) और ए राजा के पूर्व सेक्रेटरी आर के चंदोलिया (R K Chandolia) को भी गिरफ्तार किया है। इससे पहले सीबीआई ने 2 जी स्पेक्ट्रम घोटाले के मामले में ए राजा से चौथी बार पूछताछ की। गौरतलब है कि 14 नवंबर 2010 को  विपक्षी दलों के दबाव में 2 जी स्पेक्ट्रम घोटाले के मामले में ए राजा ने दूरसंचार मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था। ए राजा पर 2008 में 2 जी स्पेक्ट्रम आवंटन में घपले का आरोप है। सीएजी की रिपोर्ट के मुताबिक 2001 के भाव पर स्पेक्ट्रम आवंटन से सरकारी खजाने को करीब 1.78 लाख करोड़ रुपये का चूना लगा।
राजा पर 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन में घोटाला करने का आरोप है.
सीबीआई के डीआईजी अनुराग ने शाम में एक प्रेस कांफ्रेंस में बयान पढ़ते हुए ये जानकारी दी. उन्होंने कहा, '' टेलीकॉम मामले में अनियमितताओं के मददेनज़र चल रही जांच के तहत पूर्व दूरसंचार मंत्री, उनके तत्कालीन सचिव और उनके निजी सचिव को गिरफ्तार किया है.''
****** सुब्रमण्‍यम स्वामी की प्रमुख भूमिका
      डीएमके नेता ए राजा के खिलाफ माहौल बनाने में जनता पार्टी अध्‍यक्ष और पूर्व कानून मंत्री सुब्रमण्‍यम स्वामी की प्रमुख भूमिका रही है। उन्‍होंने पिछले साल नवंबर में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कहा था कि वे संचार मंत्रालय में 2जी स्पैक्ट्रम घोटाले के मामले में ए राजा के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति मांग रहे हैं लेकिन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह इस पर चुप्पी साधे हुए हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिए सुब्रमण्यम स्वामी और प्रधानमंत्री के बीच हुए पत्रव्यवहार के बारे में शपथ पत्र दाखिल करे।       सुप्रीम कोर्ट ने प्रधानमंत्री की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा था कि क्या वजह थी कि मनमोहन सिंह अनुमति देने के इस आवेदन पर 11 महीनों तक चुप्पी साधे बैठे रहे। लेकिन सुब्रमण्यम स्वामी ने इसका प्रतिवाद करते हुए कहा कि उन्हें सिर्फ एक पत्र का जवाब मिला है और वे पत्र प्राप्ति की सूचना को जवाब नहीं मानते। इसके बाद अदालत ने सरकार को निर्देश दिए हैं कि वह इस मामले में प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से हुए पत्रव्यवहार को लेकर एक शपथ पत्र दाखिल करें।     स्वामी ने पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर 2 जी आवंटन को पूरी तरह निरस्त करने की मांग की। इस पर अदालत ने 2 जी घोटाला मामले में केंद्र सरकार और 11 टेलीकॉम कंपनियों को नोटिस देने का निर्णय लिया। इन कंपनियों को पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा के कार्यकाल में नियमों का उल्लंघन करते हुए 2 जी स्पेक्ट्रम आवंटन किए गए हैं।
      सिब्बल ने पिछले दिनों एक संवाददाता सम्मेलन में सीएजी के 2 जी स्पेक्ट्रम आवंटन में सरकार को हुए कुल नुकसान के आकलन पर सवाल खड़े किए। सिब्बल ने यह भी कहा कि लाइसेंस निरस्त नहीं किए जा सकते। ये लाइसेंस 2008 में आवंटित किए गए थे, जिसमें नियमों का खुले तौर पर उल्लंघन किया गया था। इस पर स्वामी ने सिब्बल पर भी निशाना साधा और कहा कि उन्हें सीएजी की आलोचना नहीं करना चाहिए था, क्योंकि मामला अभी अदालत में है।
      इस बारे में संसद में पेश सीएजी रिपोर्ट में पूरा घोटाला 1.76 लाख करोड़ रुपयों का बताया गया है। 2 जी लाइसेंस घोटाले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दो याचिकाएं दाखिल की गईं। इनमें से एक सुब्रमण्यम स्वामी की ओर से तो दूसरी याचिका सेंटर फॉर पब्लिक इंट्रेस्ट लिटिगेशन द्वारा दाखिल की गई। दोनों याचिकाओं में 2 जी स्पेक्ट्रम आवंटन को निरस्त कर नए सिरे से नीलामी करने की मांग की गई है।
क्या कहना है विपक्ष का
ए राजा पर 2008 से ही 2 जी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले में घोटाले के आरोप लगते रहे हैं लेकिन सीएजी की रिपोर्ट आने के बाद उन पर इस्तीफे़ का दबाव बढ़ गया था. आखिरकार राजा को नवंबर 2010 में इस्तीफ़ा देना पडा. इसके बाद भी राजा को गिरफ़्तार नहीं किया गया लेकिन उनके घर की तलाशी हुई और सीबीआई लगातार उनसे पूछताछ करती रही है. राजा पर आरोप है कि उन्होंने 2जी स्पेक्ट्रम का आवंटन अपनी पसंदीदा कंपनियों को किया और इनमें से कई कंपनियों के पास स्पेक्ट्रम के उपयोग के लिए नेटवर्क ही नहीं था. इन कंपनियों ने बाद में स्पेक्ट्रम अधिक क़ीमत पर अन्य मोबाइल कंपनियों को बेच दिए. इससे पहले पूरे मामले की जांच के लिए गठित जस्टिस शिवराज पाटिल आयोग ने अपनी जांच रिपोर्ट दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल को सौंपी थी.पाटिल को दिसंबर महीने में जांच कार्य सौंपा गया था और उन्हें देखना था कि 1991 के बाद दूरसंचार मंत्रालय के अधिकारियों ने स्पेक्ट्रम आवंटन मामले में सरकारी नियमों का कितना उल्लंघन किया है.जस्टिस पाटिल ने रिपोर्ट देने के बाद कहा था कि उनकी रिपोर्ट में मंत्रालय के कुछ अधिकारियों के नाम भी हैं.
           उल्लेखनीय है कि राजा के मामले में सरकार और विपक्ष के बीच भी तनाव बना हुआ है और नवंबर के बाद संसद की कार्यवाही नहीं चल सकी है.विपक्ष इस मामले में संयुक्त संसदीय समिति से जांच चाहता है जबकि कांग्रेस जेपीसी जांच के लिए तैयार नहीं है.
        राजा की गिरफ़्तारी के बाद बीजेपी नेता अरुण जेटली ने कहा कि सरकार हड़बड़ी में ये क़दम उठा रही है और सरकार को जेपीसी का गठन करना चाहिए ताकि 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले की पूरी जांच हो सके. वामपंथी नेता सीताराम येचुरी ने भी कहा कि जेपीसी जांच होनी चाहिए ताकि ये पता लग सके कि इतने उच्च स्तर पर इस तरह का भ्रष्टाचार कैसे संभव हुआ.
        येचुरी का कहना था कि जब जेपीसी जांच करेगी तो वह जांच समग्र होगी जिसमें पता चलेगा कि कैसे स्पेक्ट्रम आवंटन में गड़बड़ियां हुई जिसमें सभी की भूमिका की जांच होगी.

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