मंगलवार, 1 मार्च 2011

सोनिया जी के मायके वाले : ईसाई - कांग्रेस गठजोड़ ....


- अरविन्द सिसोदिया 

   क्वात्रोच्ची से लेकर हाल ही में सोमशेखर आयोग की रिपोर्ट तक और उसके वाद कन्नड़ के जाने-माने लेखक एम.चिदानंद मूर्ति को मानद डिग्री प्रदान करने के प्रस्ताव को रोकने तक की तमाम बातें साबित करती हैं , कांग्रेस इस हद तक बेशर्मी से इसाई मिसनारियों के गलत कामों को प्रोत्साहन दे रही है ..! संवैधानिक प्रतिष्ठा तक को ताक पर रख दिया गया है ..!
     यदी इसाई मिसनरियाँ धर्मान्तरण  नहीं करवाती हैं तो धर्म परिवर्तन के खिलाफ बनने वाले कानून का समर्थन  कर उसे पारित करवाए..! मगर इसमें सबसे पहले अडंगे देने ही ईसाई मिसनरीयाँ आगे आती  हैं ..! क्योंकि उनके पोप की ही घोषणा है कि इस सहस्त्रावदी में एशिया महाद्वीप  को ईसाई बनायेंगे ..! धर्मांतरण  तो ईसाईयों का रिकार्ड  है ,शताव्दियों से नहीं सह्स्त्रव्दियों से ...!! पहली सहस्त्रावदी में यूरोप को ईसाई बनाया , दूसरी सह्त्राव्दी में अमेरिका , अफ्रीका , आस्ट्रेलिया को ईसाई बनाया और अब एशिया पर नजर है .. जिसकी खुल कर घोषणा की जाती है ..!   

१ - ***- न्यायमूर्ति बीके सोमशेखर की अध्यक्षता वाले एक सदस्यीय न्यायिक आयोग ने अपनी रिपोर्ट 28 जनवरी 2011 को कर्नाटक की बीएस येदयुरप्पा सरकार को सौंपी दी. आयोग ने वर्ष 2008 में कर्नाटक के गिरजाघरों पर हुए सिलसिलेवार हमलों के मामले में भाजपा की बीएस येदयुरप्पा सरकार और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को निर्दोष ठहराया. आयोग ने हमलों का कारण हिंदुओं के खिलाफ गलत भाषा के इस्तेमाल, भड़काऊ साहित्य बांटे जाने और धर्मांतरण को माना. आयोग ने किसी भी तरह के धर्म परिवर्तन के खिलाफ कानून बनाये जाने की जोरदार सिफारिश की है. आयोग को लोगों, संगठनों और राज्य सरकार से एक हजार से अधिक ज्ञापन मिले थे। आयोग की तीन सौ से अधिक बैठकें हुईं और उसने आठ सौ से अधिक गवाहों के बयान दर्ज किये.
२- ***- कर्नाटक के राज्यपाल हंसराज भारद्वाज ((वरिष्ठ कांग्रेसी नेता और यू पी ए१  शासन काल में विधि और न्याय मंत्री रहे ) ने कहा कि वह राज्य में साल 2008 में गिरजाघरों पर हुए हमलों के संबंध में न्यायमूर्ति बी के सोमशेखर आयोग की रिपोर्ट से ‘विक्षुब्ध’ हैं क्योंकि समूचे ईसाई समुदाय को लगता है कि उनके साथ न्याय नहीं किया गया है। भारद्वाज ने कहा कि उन्हें रिपोर्ट का साराश मिला है और पूरी प्रति नहीं मिली है। उन्होंने यहा पत्रकारों से कहा, मैं इससे विक्षुब्ध हूं। भारद्वाज से जब बेंगलूर विश्वविद्यालय के कन्नड़ के जाने-माने लेखक एम चिदानंद मूर्ति को मानद डिग्री प्रदान करने के प्रस्ताव को रोकने के उनके कदम के बारे में पूछा गया तो उन्होंने ‘अस्थाई तौर’ पर इसे रोकने के अपने फैसले को उचित ठहराया। भारद्वाज ने कहा कि वह इस तथ्य पर कोई विवाद नहीं कर रहे हैं कि मूर्ति अच्छे लेखक, विचारक और विद्वान हो सकते हैं।

लेकिन ‘इस महत्वपूर्ण मौके पर जब समूचा ईसाई समुदाय इस बात से विक्षुब्ध है कि [आयोग की रिपोर्ट में] उनके साथ न्याय नहीं किया गया है, ऐसे में कम से कम मेरी जिम्मेदारी उनकी [ईसाइयों की] देखभाल करने की है। उन्होंने कहा कि एक समाचार पत्र की रिपोर्ट में मूर्ति ने आयोग की रिपोर्ट को उचित ठहराया और धर्मांतरण के बारे में बातचीत की। भारद्वाज ने कहा कि मैं राज्य में कोई धर्मांतरण नहीं देखता। 
         मूर्ति ने कहा कि वह राज्यपाल के फैसले से स्तब्ध हैं। मूर्ति ने कहा कि उन्होंने हमलों को कभी उचित नहीं ठहराया। उन्होंने कहा कि राज्यपाल को किसी ने गुमराह किया है कि वह आरएसएस समर्थक और भाजपा समर्थक हैं। मूर्ति ने कहा, ‘पूजा के स्थल गलत हैं। राज्य का फैसला सही नहीं है।
उन्हें यह समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि बेंगलूर विश्वविद्यालय में कन्नड़ के पूर्व प्रोफेसर और इतिहासकार ने आयोग के रिपोर्ट का समर्थन किया था और प्रदेश में धर्मातरण के बारे में भी बोला था। गौरतलब है कि लेखक को मानद डिग्री देने के प्रस्ताव को रोकने के राज्यपाल के फैसले ने विवाद को जन्म दे दिया है। राज्यपाल ने कहा कि मानद डिग्री के लिए मूर्ति के नाम को हरी झडी देने के फैसले को उनके पूर्ववृत्त की जाच करने और पुष्टि करने और इस बात को सुनिश्चित करने के लिए रोका गया कि राज्य के प्रमुख के तौर पर वह [भारद्वाज] किसी विवाद में शामिल नहीं हों। उन्होंने कहा, ‘मैंने इसे अस्थाई तौर पर रोका।

रेडियो
  वाटिकन
भारतः बैंगलोर महाधर्माध्यक्ष के अनुसार कर्नाटक में ख्रीस्तीय विरोधी हिंसा पर रिपोर्ट झूठ से भरी 
३-***- नई दिल्ली, 8 फरवरी 2011 (एशियान्यूज़): कर्नाटक के काथलिकों ने सन् 2008 एवं सन् 2009 के दौरान हुई ख्रीस्तीय विरोधी हिंसा पर न्यायमूर्ति सोमशेखर के नेतृत्व वाले जाँच आयोग की रिपोर्ट पर तीखी प्रतिक्रिया दर्शाई है। बैंगलोर के काथलिक महाधर्माध्यक्ष बर्नाड मोरस ने शनिवार को एक प्रेस सम्मेलन में कहा कि रिपोर्ट झूठ से भरी है तथा विभाजन एवं अत्याचार को प्रश्रय दे सकती है। 
    कर्नाटक काथलिक धर्माध्यक्षीय समिति के अध्यक्ष महाधर्माध्यक्ष मोरस ने रिपोर्ट को पक्षपातपूर्ण निरूपित किया क्योंकि इसमें ख्रीस्तीयों को “The others” अथवा "अन्य" नाम से पुकारा गया है। महाधर्माध्यक्ष ने कहा कि रिपोर्ट में सामान्यता भरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यद्यपि इस तथ्य को स्वीकारा गया है कि ख्रीस्तीयों पर हमलों की योजना पहले से बनाई गई थी तथापि षड़यंत्र रचनेवाले किसी भी व्यक्ति, संघ या दल का नाम नहीं लिया गया है।
    रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि विदेशों से आये धन से प्रचार किया जाता तथा लोगों को धर्मान्तरण के लिये प्रेरित किया जाता है अतः इन गतिविधियों एवं ख्रीस्तीय आराधनालयों को नियंत्रण में रखने के लिये विशेष कानूनों की ज़रूरत है, इस पर अपनी प्रतिक्रिया दर्शाते हुए महाधर्माध्यक्ष ने कहा कि इस प्रकार की टीका से यह प्रतीत होता है मानो ख्रीस्तीयों के आराधना स्थल भक्ति के स्थल न होकर असामाजिक कृत्यों का अड्डा हों।
    इसके अतिरिक्त महाधर्माध्यक्ष मोरस ने शिकायत की कि रिपोर्ट में राज्य के अधिकारियों की स्थिति को सही बताया गया जबकि उन्होंने ख्रीस्तीयों के विरुद्ध हिंसा को रोकने के कोई उपाय नहीं किये। उन्होंने इस बात की ओर भी ध्यान आकषित कराया कि रिपोर्ट में पुलिस समर्थित राज्य की वकालात की गई है जो अत्यन्त ख़तरनाक है क्योंकि धार्मिक संघर्षों को सुलझाने के लिये यदि विशिष्ट पुलिस की नियुक्ति की गई तो भारत जैसे प्रजातांत्रिक देश में बहुलता एवं विविधता का कोई स्थान नहीं रह जायेगा।
      अपने वकतव्य में महाधर्माध्यक्ष मोरस ने कर्नाटक सरकार का आह्वान किया कि वह ख्रीस्तीय विरोधी हिंसा के प्रकरण को सी.बी.आय. को सौंपे ताकि ख्रीस्तीय गिरजाघरों एवं ख्रीस्तीय जनता पर हुए हमलों के विषय में सत्य का पता लगाया जा सके तथा अपराधियों के विरुद्ध कानूनन कार्रवाई की जा सके।

1 टिप्पणी:

  1. आप अनायास ही परेशान है प्रत्येक महिला अपने मईके वालो से प्रेम ही नहीं करती बल्कि उसकी सर्बाधिक सहायता करती है तो इसमें बुराई ही क्या है [देश जाये चुल्ही भाड़ ] में..

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