शुक्रवार, 11 मार्च 2011

प्रातः स्मरणीय क्रांतिकारियों को आतंकवादी कहनें से रोका न्यायालय नें ..




- अरविन्द सिसोदिया 
  विदेशी महीला सोनिया गांधी के नेतृत्त्व में चल रहे यूपीए सरकार के राज में क्या हो सकता है इसका यह उदहारण है कि हमारे प्रातः स्मरणीय स्वतंत्रता सेनानियों , शहीदों और क्रांतिकारियों को आतंकवादी बताया जा कर पढाया जा रहा है ..! सरकारों कि नजर में मामला आने के वावजूद कुछ  नहीं किया गया , आजकल तो अदालत ही गलतियों पर कान मरोड़ रही है ...! इस मामले में भी अदालत नें सम्मान सूचक शब्दों का प्रयोग करने का आदेश दिया है ..! 

  एक समाचार ........
      आईसीएसई ने शहिद भगत सिंह को 'आतंकवादी', बताया, अदालत ने आपत्ति जताई
दिल्ली की एक अदालत ने माध्यमिक शिक्षा (आईसीएसई) के भारतीय सर्टिफिकेट संस्थान को निर्देश दिया है कि अगले शैक्षिक सत्र से इतिहास व समाज शास्त्र की पुस्तकों में स्वतंत्रता सैनानियों के लिए अपमानसूचक संदर्भों को हटा दें. आतंकवाद के पुनरुद्धार - - गोयल ब्रदर्स प्रकाशन द्वारा प्रकाशित और डी.एन. कुंद्रा द्वारा लिखित पुस्तक में एक अध्याय है जिसमें बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय, विपिन चन्द्र पाल को "आतंकवादियों और चरमपंथियों" के रूप में दर्शाया गया है, जब कि भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को "आतंकवादियों" के रूप में . कोर्ट चाहता है इन नेताओं को राष्ट्रवादियों और क्रांतिकारियों बुलाया जाना चाहिए. अतिरिक्त जिला न्यायाधीश इंदरजीत सिंह ने भी गलत जानकारी के साथ पुस्तक प्रकाशित करने से आईसीएसई को रोका. जबकि महाराष्ट्र में 118 आईसीएसई स्कूल हैं, मुंबई और दिल्ली में 60 , तथा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में 30 है. महाराष्ट्र से 1 लाख से अधिक छात्र आईसीएसई बोर्ड को चुनते हैं. 
       अदालत का आदेश, दीनानाथ बत्रा, शिक्षा बचाओ आंदोलन समिति के राष्ट्रीय संयोजक और अन्य की एक याचिका में, कक्षा 10 इतिहास और नागरिक शास्त्र भाग-II में दी गई अपमानसूचक जानकारी हटाने की मांग पर आया था. याचिकाकर्ताओं ने आईसीएसई को तत्काल प्रभाव से पुस्तकों से भ्रामक जानकारी के रूप में युवाओं के मन को विषाक्त करती शिक्षण को रोकने के लिए अदालत का प्रत्यक्ष अनुरोध किया था. जिन्होंने हमारे देश और लोगों के लिए अपने प्राणों कि आहुति देदी जब उन स्वतंत्रता सेनानियों के लिए अपमानसूचक, अपमानजनक, अपमान और आपत्तिजनक उल्लेख किया जाता, उसकी भाषा से "हम गहराई से व्यथित हैं. , उनकी याचिका पढ़ता है यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि 1947 में स्वतंत्रता प्राप्त होने के बाद भी, पाठ्यक्रम सामग्री से हमारे ऐतिहासिक अतीत के बारे में इस तरह के आपत्तिजनक और अपमान के अंश को हटाया नहीं गया है ".
हमें यह मैकाले की नहीं, विश्वगुरु की शिक्षा चाहिए!.

भास्कर . कॉम 
नई दिल्ली/चंडीगढ़। इंडियन सर्टिफिकेट ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (आईसीएसई) की कक्षा 10 की इतिहास व सिविक्स विषय की किताब के अनुसार भगत सिंह अमर शहीद नहीं ‘आतंकी’ हैं। राजगुरु और सुखदेव भी आतंकी हैं। यही नहीं किताब में स्वतंत्रता सेनानी बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय और बिपिन चंद्र पाल को भी ‘चरमपंथी और लड़ाकू’ माना गया है। दिल्ली की एक अदालत ने इस मसले पर कड़ी आपत्ति लेते हुए आईसीएसई बोर्ड को संशोधन करने को कहा है। संशोधन अगले शिक्षा सत्र से लागू होगा।

यह निर्णय दिल्ली के अतिरिक्त जिला जज इंदरजीत सिंह ने दिया है। उन्होंने आईसीएसई को यह सावधानी बरतने का निर्देश दिया है कि स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में गलत तथ्य किताबों में प्रकाशित नहीं हो। यह मुद्दा शिक्षा बचाओ आंदोलन समिति के राष्ट्रीय समन्वयक दीनानाथ बत्रा ने उठाया था। उन्होंने याचिका दायर कर कोर्ट से अपील की थी कि देशभक्तों के बारे में ऐसी गलत बातें पढ़ाने से रोकने के निर्देश आईसीएसई बोर्ड को दिए जाएं। 

याचिका में उन्होंने कहा था ,‘जिन स्वतंत्रता सेनानियों ने देश के लिए अपनी जान न्योछावर कर दी उनके लिए अपमानजनक, निंदनीय और आपत्तिजनक शब्दों को देखकर हमें दुख पहुंचा है। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। कि अभी तक इन आपत्तिजनक बातों को पाठ्यक्रम से हटाया नहीं गया है। जबकि 1947 में आजादी मिले 63 साल से ज्यादा का समय हो गया है।’
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चंडीगढ़, 9 मार्च (हप्र)। हरियाणा विधानसभा में बजट सत्र के दौरान शून्यकाल में मुख्यमंत्री एवं सदन के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने एक समाचार पत्र में इंडियन सर्टिफिकेट आफ सेकेंडरी एजुकेशन (आईसीएसई) के पाठ्यक्रम में शहीद भगत सिंह को आतंकवादी बताये जाने संबंध में प्रकाशित समाचार की निंदा की। हरियाणा विधानसभा में चल रहे बजट सत्र में प्रश्नकाल के बाद शून्यकाल में इंडियन नेशनल लोकदल के रामपाल माजरा एवं अशोक अरोड़ा द्वारा आईसीएससी पाठ्यक्रम में शहीद भगत सिंह को आतंकवादी बताये जाने संबंध में प्रकाशित समाचार पर सदन का ध्यान आकर्षित करवाया।
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Mar 9, 2011, 3:20 IST 
By Kanu Sarda | Place: New Delhi | Agency: DNA

ICSE calls Shahid Bhagat Singh ‘terrorist’, court says change it



A Delhi court has directed Indian Certificate of Secondary Education (ICSE) to remove defamatory references to freedom-fighters in its history and civic book from the next academic session.
The book published by Goyal Brothers Prakashan and written by DN Kundra has a chapter — Revival of Terrorism — in which Bal Gangadhar Tilak, Lala Lajpat Rai, Bipin Chandra Pal have been referred to as “militants and extremists”, while Bhagat Singh, Rajguru and Sukhdev as “terrorists”.
The court wants these leaders to be called nationalists and revolutionaries.
Additional district judge Inderjeet Singh also restrained ICSE from publishing the book with the wrong information.
While Maharashtra has 118 ICSE schools, Mumbai and Delhi have 60, NCR 30. Over 1 lakh students from Maharashtra opt for ICSE board.
The court’s order came on a petition by Dina Nath Batra, national convenor of Shiksha Bachao Andolan Samiti and others seeking deletion of defamatory passagesin the Std-X history and civics Part-II book.
The petitioners had requested the court to direct ICSE to stop teaching from the books with immediate effect as misleading information could poison the minds of youth.
“We are deeply aggrieved by the defamatory, derogatory, insulting and objectionable language used to refer to freedom-fighters who laid down their lives for our country and the people. It is unfortunate that despite getting freedom in 1947, such objectionable and insulting portions regarding our historical past have not been removed from the course material,” their petition reads.

1 टिप्पणी:

  1. सर कांग्रेस के राज में ना जाने क्या क्या हुआ था हो रहा है और आगे भी वही होगा जो पीछे हो चुका है, ये ना जाने कैसे कैसे इतिहास को तोड़ मरोड़ कर हमारी आने वाली नौजवान पीढ़ी को बहला रहे हैं इस षड्यंत्र पर अतिशिग्र रोक लगानी होगी वरना हमारे भारत का आजाद होने का और हमारे क्रांतिवीरों का सपना अधूरा ही रह जाएगा मतलब कहीं खो ही जाएगा !
    जय हिंद जय भारत

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