मंगलवार, 8 मार्च 2011

या देवी सर्वभुतेषू : नारी ही महाशक्ति है ...



- अरविन्द सिसोदिया 


यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता: !
यत्रेतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफला: क्रिया: !! मनु:


   भारतीय शास्त्रों का गहन अध्ययन तो यही उदघोषित करता है कि सृष्टि में प्रकृति की रचनाकार माया के रूपमें मातृसत्ता ही है ..! उसी ने व्यवस्था क्रम में पुरुष को सहभागी बनाया और दायित्व सोंपें हैं ...! यदि हम देवी भागवत पुराण का गहन अध्ययन करें तो यह बहुत ही स्पष्ट है कि अखल ब्रम्हांड में जीव सत्ता की उत्पत्ति और उसके व्यवस्थापन में मुख्य भूमिका भी महामाया शक्ती की ही है ..! इतना ही नहीं सामान्य रूपसे भी नारी शारीर ही अधिक कार्य करता है , नई पीडी के निर्माण और उसे संवार कर बड़ा करनें उसकी महती भोमोका को कोई नकार नहीं सकता ...!
हमारे सरे प्रमुख देवों के नामों में प्रथम नारी शक्ति का ही नाम है जैसे :- सीता राम . राधे श्याम , गौरीशंकर  आदि आदी ...... इसीलिए शास्त्र कहते हैं कि जहाँ नारी की पूजा होती है वहां देवता पहुचते हैं ..! एक शब्द में कहें टी नारी ही सृष्टि है .., उसके बिना गहन अँधेरा है ....!
भारतीय धर्म व्यवस्था में ....
धन का विभाग लक्ष्मी जी  को , 
बुद्धी का विभाग सरस्वती जी को . 
गृह (शक्ति) विभाग पार्वती जी को दिया गया है ..!
 ""यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमंते तत्र देवता।""

एक प्रेरक फिल्मी गीत ........
कोमल है कमजोर नहीं तू , 
शक्ति का नाम ही नारी है ! 
जग को जीवन देने बाली , 
मौत भी तुझसे हारी है ! 
सतियों के नाम पे तुझे जलाया , 
मीरा के नाम पे जहर पिलाया 
सीता जैसी अग्नि परीक्षा , 
आज भी जग में जारी है !
कोमल है कमजोर नहीं तू , शक्ति का नाम ही नारी है
इल्म , हुनर में, दिल दिमाग में , 
किसी बात में कम तो नहीं 
पुरुषों बाले सारे ही, 
अधिकारों की अधिकारी है ! 
बहुत हो चुका अब मत सहना , 
तुझे इतिहास बदलना है !
नारी को कोई कह ना पाए , 
अबला है बेचारी है !
कोमल है कमजोर नहीं तू , शक्ति का नाम ही नारी है
( यह पंक्तियाँ एक फिल्म के गीत से ली गयीं हैं )

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या देवी सर्वभुतेषू विष्णु मायेती शब्दिता
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः
या देवी सर्वभुतेषु चेतनेत्यभिधियते
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः
या देवी सर्वभुतेषु बुद्धिरुपेण संस्थिता
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः
या देवी सर्वभुतेषु निद्रारुपेण संस्थिता
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः
या देवी सर्वभुतेषु क्षुधारुपेण संस्थिता
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः

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