शनिवार, 5 मार्च 2011

कांग्रेस,बोफोर्स और क्वात्रोच्ची










http://www.chauthiduniya.com/2009/05/bofors-ghotale-mein-quattrrochi.html


- अरविन्द सिसोदिया 
बोफोर्स की क्रमिका.......
१- १९८४ में भारतीय सेना ने हविट्जर तोप की खरीदी के लिए टेंडर निकाला
२- अवमूल्यांकन के बाद, फ्रांस के सोफमा तोप को हर दृष्टि से उत्तम पाया गया
३- सेना को तीस किलोमीटर रेंज वाले तोप की जरूरत थी 
४- सोफमा 29.2 किलोमीटर की रेंज में सटीक था, जबकि बोफोर्स महज 21.5 किलोमीटर की रेंज में सटीक था
५- सेना प्रमुख कृष्णास्वामी सुंदरजी ने सोफमा का समर्थन किया 
६- बाद में बोफोर्स को फिर से बोली लगाने की छूट दी गई।
७- सेना और अन्य लोगों के विरोध के बावजूद ठेका बोफोर्स को मिला
८- बोफोर्स कांड का खुलासा 1987 में स्वीडिश रेडियो ने किया
९- रेडियो ने दावा किया कि बोफोर्स ने ठेका सुनिश्चित करने के लिए घूस दिया गया है 
१०- इस घोटाले से सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी 1989 में लोकसभा चुनाव हार गई
११- जुलाई 1993 में स्वीस कोर्ट ने खाता संचालक बैंक को क्यू नामक खातेदार का नाम बताने को कहा और इस तरह क्वात्रोची के नाम का खुलासा हुआ। 
१२- सीबीआई ने क्वात्रोची कोर्ट से उसके पासपोर्ट जब्त करने की अनुमति मांगी, लेकिन क्वात्रोची दिल्ली से कुआलालांपुर भाग गया
१३- स्वीस बैंक द्वारा जारी पांच दस्तावेजों के आधार पर सीबीआई ने क्वात्रोची और उसकी पत्नी मारिया, डब्ल्यू एन चड्ढा और पत्नी कांता के खिलाफ आरोपपत्र तैयार किया
१४-  चित्रा सुब्रह्मण्यम ने बतायाकि क्वात्रोची को एई सर्विसेज के जरिए सौदे का तीन प्रतिशत यानी करीब सत्तर लाख डॉलर दिए गए 
१५- जून, २००३  में स्वीस बैंक बीएसआईएजी की लंदन स्थित एक शाखा ने क्वात्रोची और उसकी पत्नी मारिया के खाते में तीस लाख और एक दस लाख यूरोप जमा होने का खुलासा किया। 
१६- सीबीआई के अनुरोध पर बैंक ने इन दोनों खातों से लेन-देन पर रोक लगा दी
१७- २२  दिसंबर, २००५  को अचानक भारत सरकार का रुख बदल गया गया, कानूनमंत्री हंसराज भारद्वाज ने इन खातों पर लगी रोक को हटाने की अपील की। इस मामले में कानून मंत्रालय ने सीबीआई को जानकारी भी नहीं दी।
१८- इंटरपोल के वारंट पर ६ फरवरी २००७ को अर्जेंटीना पुलिस ने क्वात्रोची को गिरफ्तार कर लिया
१९- आठ फरवरी २००७ को इंटरपोल ने क्वात्रोची की गिरफ्तारी के बारे में सीबीआई को जानकारी दी
२०- हालांकि सीबीआई ने क्वात्रोची की गिरफ्तारी के बारे में कोर्ट को नहीं बताया,इस मामले में सीबीआई के निदेशक विजय शंकर पर कोर्ट की अवमानना का मामला चला ..
२१- छब्बीस फरवरी २००७ को उचित दस्तावेजों के अभाव में क्वात्रोची को बरी कर दिया गया
२२- कांग्रेस की सरकार केंद्र में आते ही विधि मंत्रालय ने क्वात्रोची के खातों पर लगी रोक को हटाने का आदेश दिया
२३- कांग्रेस की  केंद्र सरकार ने ही इंटरपोल से अप्रैल २००९ में क्वात्रोची के खिलाफ जारी रेडकॉर्नर नोटिस को सीबीआई द्वारा हटा लिया
२४- अब ४ मार्च २०११ को कांग्रेस की  केंद्र सरकार ने सीबीआई द्वारा मुक़दमा भी हटा लिया 


*कांग्रेस ने जिस बेसर्मी से बोफोर्स घोटाला के मुख्य अभियुक्त ओतावियो क्वात्रोकी (Ottavio Quattrocchi) को बचाया उसने आज तक की सभी नैतिकताओं को तिलांजलि  दे दी है ..! यदि अपराधी सोनिया गांधी के देश का नहीं होता तो क्या बच पाता..? 
**उसे बचानें में  कांग्रेस की सरकार आते ही , सबूतों के ढेर पर बैठी सीबीआई ने पलटनें में देरी भी नहीं लगी..! रीड विहीन इस तंत्र ने अपने आपको सत्ता का गुलाम अपरोक्ष रूप से घोषित  कर दिया प्रतीत होता है ..! इसलिए अदालत के इस फैसले के विरुद्ध बड़ी अदालत में अपील की जानीं  चाहिए ..!
   

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें