शुक्रवार, 4 मार्च 2011

" भारत में भय हो... , स्विस बैंकों की जय हो... "

- अरविन्द सिसोदिया 
 हमारे देश में कई तरह के नारे चुनावों के दौरान लगते हैं , हाल ही में चुनाव आयोग नें पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों का कार्यक्रम घोषित किया है ..! पिछले चुनाव में कांग्रेस ने एक नारा लगाया था "जय हो !" तब भाजपा ने भी एक नारा दिया था "भय हो !" अब इस नारे का मतलब तो मेरी समझ में यह आरहा है की ..
" भारत में भय हो... , स्विस बैंकों की जय हो... "
क्यों की भारत में तो भयानक  भ्रष्टाचार की लूट मची है, लूट की रकम में कितनी बिंदियाँ लगी हैं यह भी ठीक से कहना मुस्किल होता है ..! इस तरह की लूट ईस्ट इण्डिया कंपनी ने भी क्या की होगी ..! हर लूट पर स्विस बैंक  खुश होते हैं .., उन्हें मालूम है की यह पैसा उनके यहाँ या उन जैसे ही किसी दुसरे देश में जमा होने वाला है ..! 
  भारत में भय इस लिए व्याप्त है की रोज रोज मंहगाई बढती है , बेरोएजगार रेलों से गिर कर मर रहे हैं , किसान आत्महत्याएं कर रहे हैं ..!!
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DW-World.de: Deutsche Welle


http://www.dw-world.de/dw/article/0,,14774034,00.html

19.01.2011

विकीलीक्स की सूची में भारतीयों जैसे नाम


एक टेलीविजन चैनल ने दावा किया है कि विकीलीक्स को मिली स्विस बैंक खातों की सूची में भारतीयों जैसे सुनाई देने वाले नाम भी हैं. स्विस बैंक के एक पूर्व अधिकारी ने विकीलीक्स को बैंक के खाताधारकों की एक सूची सौंपी है.

भारतीय अंग्रेजी समाचार चैनल हेडलाइंस टुडे ने दावा किया है कि इस सूची में भारतीयों के नाम भी शामिल हो सकते हैं. चैनल ने एक सूची दिखाई जिसमें स्विट्जरलैंड के जूलियस बाएर बैंक एंड ट्रस्ट लिमिटेड नामक बैंक के खाताधारकों के नाम हैं. यह सूची बैंक के पूर्व अधिकारी रूडोल्फ एलमर ने विकीलीक्स के संस्थापक जूलियन अंसाज को दी है.
चैनल ने दिखाया कि इस सूची में ऐसे नाम भी हैं जो सुनने में भारतीय लगते हैं. हालांकि चैनल ने साफ कहा कि वह इस बात की पुष्टि नहीं कर सकता कि यह सूची सच्ची है या नहीं या फिर इसमें दिए गए खाताधारकों के नाम सही हैं या नहीं. चैनल ने कहा कि उसे नहीं पता कि ये भारतीय जैसे सुनाई देने वाले नाम वाकई भारतीय लोगों के हैं या नहीं.
इस सूची के मुताबिक दो खातों में 432 करोड़ रुपये जमा हैं. इस बारे में एलमर ने चैनल से बातचीत के दौरान कहा कि जूलियस बाएर बैंक का भारत में बड़ा कारोबार है. उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि जूलियस बाएर के मालिक का भारत में अच्छा खासा कारोबार है. उन्होंने तो असल में भारत में कुछ निवेश मैनेजर भी नियुक्त किए हैं जिनका मकसद भारत से पैसा जुटाना है."
जब से विकीलीक्स के हाथ स्विस बैंक की सूची लगने की खबर आई है, भारत के राजनीतिक हलकों में खासी हलचल है. मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी और भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी ने सरकार से मांग की कि स्विस बैंकों में पैसा जमा कराने वाले सभी लोगों के नाम उजागर किए जाएं. गुजरात के आणंद में बीजेपी नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने उम्मीद जताई कि इस बारे में सुप्रीम में याचिका की सुनवाई के बाद सरकार को स्विस बैंकों से पैसा वापस लाना होगा.
सीपीएम ने भी एक बयान जारी कर खाता धारकों के नाम उजागर करने की मांग की. इस बयान में कहा गया, "ये सभी खाते जब्त कर लिए जाने चाहिए और इनमें जमा पैसा देश के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए. भारत सरकार को फौरन यह मामला स्विट्जरलैंड की सरकार और स्विस बैंक असोसिएशन के सामने उठाना चाहिए."
माना जा रहा है कि विकीलीक्स के पास जो सूची है उसमें कम से कम दो हजार लोगों के नाम हैं. इनमें अमेरिका, ब्रिटेन और एशिया के काफी लोगों के नाम हैं.
रिपोर्टः एजेंसियां/वी कुमार
संपादनः एस गौड़
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18/11/2010   स्विस बैंक में सबसे ज्यादा पैसा इंडियंस का
नई दिल्ली ।। कहा जाता है कि 'भारत गरीबों का देश है, मगर यहां दुनिया के बड़े अमीर बसते हैं।' 
नई दिल्ली ।। कहा जाता है कि 'भारत गरीबों का देश है, मगर यहां दुनिया के बड़े अमीर बसते हैं।' यह बात स्विस  बैंक की एक चिट्ठी ने साबित कर दी है। काफी गुजारिश के बाद स्विस बैंक असोसिएशन ने इस बात का खुलासा किया है कि उसके बैंकों में किस देश के लोगों का कितना धन जमा है। इसमें भारतीयों ने बाजी मारी है। इस मामले में भारतीय अव्वल हैं। भारतीयों के कुल 65,223 अरब रुपये जमा है। दूसरे नंबर पर रूस है जिनके लोगों के करीब 21,235 अरब रुपये जमा है। हमारा पड़ोसी चीन पांचवें स्थान हैं, उसके मात्र 2154 अरब रुपये जमा है। 

भारतीयों का जितना धन स्विस बैंक में जमा है, तकनीकी रूप से वह हमारे जीडीपी का 6 गुना है। सरकार पर दबाव है और कोशिशें भी जारी है कि इस धन को वापस देश में लाया जाए। तकनीकी रूप से यह ब्लैक मनी है। अगर यह धन देश में वापस आ गया तो देश की इकोनॉमी और आम आदमी की बल्ले-बल्ले हो सकती है।
कर्ज नहीं लेना पड़ेगा 
प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक भारत को अपने देश के लोगों का पेट भरने और देश को चलाने के लिए 3 लाख करोड़ रुपये का कर्ज लेना पड़ता है। यही कारण है कि जहां एक तरफ प्रति व्यक्ति आय बढ़ रही है, वही दूसरी तरफ प्रति भारतीय पर कर्ज भी बढ़ता है। अगर स्विस बैंकों में जमा ब्लैक मनी का पहले चरण में 30 से 40 पर्सेंट भी देश में आ गया तो हमें कर्ज के लिए आईएमएफ या विश्व बैंक के सामने हाथ नहीं फैलाने पड़ेंगे। धन की कमी स्विस बैंक में जमा धन पूरा करेगा।

30 साल का बजट बिना टैक्स के 
स्विस बैंकों में भारतीयों का जितना ब्लैक मनी जमा है, अगर वह सारी राशि भारत को मिल जाती है तो भारत देश को चलाने के लिए बनाया जाने वाला बजट बिना टैक्स के 30 साल के लिए बना सकता है। यानी बजट ऐसा होगा कि जिसमें कोई टैक्स नहीं होगा। आम आदमी को इनकम टैक्स नहीं देना होगा और किसी भी वस्तु पर कस्टम या सेल टैक्स नहीं देना होगा।

सभी गांव जुड़ेंगे सड़कों से 
सरकार सभी गांवों को सड़कों से जोड़ना चाहती है। इसके लिए 40 लाख करोड़ रुपये की जरूरत है। मगर सरकार के पास इतना धन कहां हैं। अगर स्विस बैंक से ब्लैक मनी वापस आ गया तो हर गांव के पास एक ही चार लेन की सड़क बन सकती है।

कोई बेरोजगार नहीं 
देश में कोई भी बेरोजगार नहीं रहेगा। जितना धन स्विस बैंक में भारतीयों का जमा है, उससे उसका 30 पर्सेंट भी देश को मिल जाए तो करीब 20 करोड़ नई नौकरियां पैदा की जा सकती है। 50 पर्सेंट धन मिलेगा तो 30 करोड़ नौकरियां मार्केट में आ सकती हैं।

देश से गरीबी गायब 
अमेरिकी एक्सपर्ट का अनुमान है कि स्विस बैंकों में भारतीयों का जितना धन जमा है, अगर वह उसका 50 पर्सेंट भी भारत को मिल गया तो हर साल प्रत्येक भारतीय को 2000 रुपये मुफ्त में दिए जा सकते हैं। यह सिलसिला 30 साल तक जारी रहा सकता है। यानी देश में गरीबी दूर हो जाएगी।

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