मंगलवार, 8 मार्च 2011

लगता है;सीबीआई के बल पर डी एम् के को गठबंधन पर मजबूर कर दिया


- अरविन्द सिसोदिया 
*-६ मार्च की रात को मिडिया में  यह खबर डाली गई....
**-७ मार्च को नवभारत टाइम्स व अन्य समाचार पत्रों में छपी थी ....
***-और .. कमाल देखिये की ८ मार्च को डी एम् के ने जो नाता तोडा था वह वापस जोड़ लिया ...
जिस तरह  से मुलायम सिंह , मायावती और लालू प्रशाद  को सी बी आई के बल पर सर्थन से जोड़े रखा है , उसी प्रकार से अब कांग्रेस ने सीबीआई के बल पर डी एम के  को गठबंधन को मजबूर कर दिया है ..!
कनिमोझी - राडिया से सीबीआई जल्द कर सकती है पूछताछ 
 नई दिल्ली ६ मार्च । 2जी स्पेक्ट्रम मामले में चार्जशीट दाखिल करने की समयसीमा पास आने से संभावना है कि सीबीआई जल्द ही डीएमके सांसद के. कनिमोझी और कॉरपोरेट लॉबीस्ट नीरा राडिया से पूछताछ कर सकती है। टाटा रीयल्टी और यूनिटेक के बीच सौदे में राडिया की क्या भूमिका रही, इस बारे में उनसे पूछताछ की जा सकती है। 
सीबीआई के सूत्रों ने बताया कि ऐसी सभी अयोग्य दूरसंचार कंपनियों की लिस्ट तैयार की जा रही है, जिन्होंने 2008 में लाइसेंस मिले थे। इसके अलावा, टाटा रीयल्टी और यूनिटेक के बीच हुए सौदे के दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है। सीबीआई यूनिटेक की उन आठ विभिन्न कंपनियों के विलय के मामलों की छानबीन कर रही है, जिनके शेयरों की बिक्री के लिए उनके सभी लाइसेंसों का कथित तौर पर विलय कर आवश्यक तीन वर्ष के लॉक-इन पीरियड को खत्म कराया गया था।
सूत्रों का कहना है कि डीएमके सुप्रीमो और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि की बेटी कनिमोझी से सीबीआई जल्द ही पूछताछ करेगी। सीबीआई ने दावा किया था कि उसे डीबी रिएलिटी द्वारा कलैगनार टीवी चैनल को 214 करोड़ रुपये की फंडिंग का पता चला है। तमिलनाडु का इस रीजनल चैनल में करुणानिधि के पारिवारिक सदस्यांें का हिस्सेदारी है। कनिमोझी का रिएक्शन जानने के लिए उन्हें एसएमएस भेजे गए, लेकिन उनकी तरफ से जवाब नहीं मिला।
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इससे पहले .....
५ मार्च को
डी एम् के का यूं पी ए सरकार से बहार होने का फैसला  
नई दिल्ली। तमिलनाडु में सत्ताधारी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) ने कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकार से समर्थन वापस ले लिया है। डीएमके के सभी मंत्री सरकार से इस्तीफा देंगे। हालांकि पार्टी ने साफ किया है कि वो सरकार को मुद्दों पर आधारित समर्थन देती रहेगी। कांग्रेस और डीएमके के बीच आने वाले विधानसभा चुनावों में सीटों के बंटवारे को लेकर मतभेद पैदा हो गए हैं। यूपीए के कुल 18 सांसद हैं जिनमें से छह मंत्री हैं।
इससे पहले डीएमके नेता एवं मुख्यमंत्री एम.करुणानिधि, उप मुख्यमंत्री एम.के.स्टालिन वरिष्ठ सहयोगियों के साथ चर्चा करने के लिए पार्टी मुख्यालय पहुंचे कि आखिर राज्य विधानसभा की 234 सीटों में से 63 सीटों की कांग्रेस की मांग को कैसे पूरा किया जाए। बैठक के बाद डीएमके ने एक बयान जारी कर कहा कि कांग्रेस को 60 सीटें दी जा रही हैं लेकिन वह 63 सीटों की मांग कर रही है जो बताता है कि उसे गठबंधन में हमारी जरूरत नहीं है। ऐसी स्थिति में डीएमके केंद्रीय कैबिनेट में नहीं बने रहता चाहती। हमने सरकार से बाहर होने का फैसला किया है। हालांकि हम मुद्दों पर आधारित समर्थन देते रहेंगे।
शुक्रवार की आधी रात को एक बयान में मुख्यमंत्री एम.करुणानिधि ने कहा था कि कांग्रेस के साथ गठबंधन करने या न करने पर निर्णय शनिवार को लिया जाएगा। डीएमके ने कांग्रेस की मांग को अनुचित करार दिया है। करुणानिधि ने कहा था कि क्या 63 सीटें मांगना और मिलने की उम्मीद रखना कांग्रेस के लिए व्यावहारिक है? इस मुद्दे पर शनिवार को चर्चा की जाएगी और कोई उचित निर्णय लिया जाएगा। छोटी पार्टियां पहले से ही कांग्रेस के खिलाफ बोल रही हैं।
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अब यूं टर्न
डीएमके और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे
८ मार्च को 
तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव के लिए सीट बंटवारे को लेकर तीन दिन से चल रहे राजनीतिक घटनाक्रम को विराम देते हुए डीएमके और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे को लेकर समझौता हो गया है और इसके अनुसार कांग्रेस को 63 सीटे मिलेंगी। डीएमके और कांग्रेस के आला नेताओं ने अंतत: इस बात का फैसला कर लिया कि कांग्रेस 63 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के आवास के बाहर पार्टी नेता गुलाम नवी आजाद ने संवाददाताओं को इस बारे में जानकारी दी।
     कांग्रेस की सीटों की मांग में इस बार 15 का इजाफा हुआ है। 2006 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने 48 सीटों पर किस्मत आजमाई थी।समझौते की घोषणा से पहले डीएमके नेता और केंद्रीय मंत्री दयानिधि मारन ने संसद में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रणब मुखर्जी से दो दौर में बातचीत की, जिसमें आजाद तथा सोनिया के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल भी मौजूद थे। समझौते के बाद सोनिया को धन्यवाद देने के लिए मारन और केंद्रीय मंत्री एमके अलागिरी कांग्रेस नेताओं के साथ कांग्रेस अध्यक्ष के आवास पहुंचे।
  इस सारे घटना क्रम से लगता है कि समझौता करने  के लिए भी अब कांग्रेस ने सीबीआई  का ही दुरूपयोग किया है , अन्यथा समर्थ वापसी के तुरंत बाद ही यह खबर मिडिया में क्यों आई कि सीबीआई जल्द ही डीएमके सांसद के. कनिमोझी और कॉरपोरेट लॉबीस्ट नीरा राडिया से पूछताछ कर सकती है। 

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