शनिवार, 30 अप्रैल 2011

लोक लेखा समिति के काम में बाधा पहुचाना आपराधिक कृत्य


- अरविन्द सिसोदिया  
       भारतीय संसद अपना बहुत सा कार्य समितियों के माध्यम से करती है | इन समितियों की नियुक्ति ;कार्य की कुछ ऐसी विशेष मद निपटान   के लिए की जाती है ,जिन पर विशेष गहराई से विचार किये जानें की आवश्यकता होती है | संसदीय समितियों का गठन लोक सभा और राज्य सभा अलग अलग करतीं हैं | बहु चर्चित लोक लेखा समिति लोकसभा की समिति है , इसमें राज्य सभा की सहमति से राज्यसभा से भी कुछ सदस्य सम्मिलित किये जाते हैं |
         लोकलेखा समिति का भी अन्य समितियों की भांति प्रति वर्ष चुनाव लोकसभा सदस्यों के द्वारा किया  जाता  है | यह लोकसभा के अध्यक्ष के प्रति जबावदेह रहती है | 
अतः -
१- कांग्रेस , डी एम् के,समाजवादी पार्टी और बसपा  के द्वारा मुरली मनोहर जोशी की जगह राज्यसभा के सैफुद्दीन सोज को सभापति बिना प्रक्रिया के चुना जाना , स्वतः गलत है और संसदीय नियम व पद्धति से यह अस्वीकार्य है | जो बर्ताव कांग्रेस के नेतृत्व में लोकलेखा समिति के दौरान किया गया ,वह एक सोची समझी साजिस के तहत किया गया अपराध मात्र है |
          लोक सभा देशवाशियों के पैसे की बहुत बड़ी धनराशी के व्यय किये जानें की मंजूरी देने के बाद देश हित में ,इस बात की आशा करती है की उचित समय पर ब्यौरेवार यह हिसाब दिया जाये की वह पैसा किस प्रकार खर्च किया गया है |  लोकसभा इस बारे में अपना समाधान करती है की उसनें जिन धनराशियों के व्यय की मंजूरी दी थी ;क्या वे उन्ही प्रयोजनों के लिए और मितव्ययता से तथा विवेकशीलता से खर्च हुई हैं , जिनके लिए मंजूरी दी गई थी |
          नियंत्रक तथा महा लेखा परीक्षक सरकार के वार्षिक लेखाओं की जाँच करता है और जांच करनें के बाद लेखाओं का प्रमाण पत्र देता है और संबंध में जो राय उचित समझता है , देता है | वह अपना प्रतिवेदन राष्ट्रपति को देता है ,जो उन्हें संसद के सामनें रखवा देता है | लोक सभा के लिए इन लेखाओं की विस्तृत जाँच करना असम्भव नहीं तो कठिन अवश्य है ,क्योंकि वे बड़े जटिल और तकनीकी ढंग के होते हैं और फिर, उसके पास इस प्रकार  इस प्रकार की विस्तृत जाँच के लिए समय नहीं होता है | इस लिए लोक सभा में एक समिति बने गई जिसे लोक लेखा  समिति कहा जाता  हैं| इन लेखों का ब्यौरे वार जांच का काम लोक लेखा समिति को सौंपा गया  है |  
 २- लोक सभा में लोक लेखा समिति का अध्यक्ष मुख्य विपक्षी दल के लोकसभा सांसद को बनाने की परंपरा इसी लिए है की लेखों की बारीकी से जाँच हो जाये और सरकार पर मितव्ययता का दबाव बना रहे |  मुरलीमनोहर जोशी भी इसी क्रम से अध्यक्ष हैं |
     भारत के नियंत्रक तथा महा लेखा परीक्षक ( कैग ) ने २ - जी स्पेक्ट्रम आवंटन के सन्दर्भ  में अपनी रिपोर्ट में १.७६ लाख करोड़ रूपये की देश को हानि पहचानें का अनुमान लगाया है |  इसी रिपोर्ट के सार्वजानिक होनें के बाद विपक्ष ने जे पी सी की मांग की तत्कालीन दूर संचार मंत्री ए. राजा  जेल में हैं , सर्वोच्च न्यायलय की देखरेख में सी बी आई जाँच कर रही है , अनेकों नामी गिरामी भ्रष्टाचार के आरोपी जेलों में बंद हो चुके हैं , पूरा देश इस नंगे सच को देख और जान चुका है | इस स्थिति में कांग्रेस की भ्रष्ट सरकार और आय से अधिक सम्पत्ति के मामले में फंसे मुलायम व मायावती की पार्टी सही रिपोर्ट पेश करनें में हंगामे के द्वारा बाधा डालते हैं और सचको , जिन्दा मक्खी की तरह निंगल जाना चाहते हैं | यह अब तो  संभव नहीं है ! उनके इस कुकृत्य से उनकी मुर्खता ही झलकी है !! जनता ने इस कृत्य को अच्छी नजर से नहीं देखा है | आजतक की परंपरा यह है की किसी को रिपोर्ट से असहमति है  वह अपनी टिप्पण अंकित करदे ..! तथ्यात्मक स्वरूप से छेड़छाड़ कोई नहीं करता ! 

ज्ञातव्य रहे  :-
        2जी स्पेक्ट्रम घोटाले पर संसद की लोक लेखा समिति (पीएसी) की बैठक में स्थिति तब बेकाबू हो गई जब सत्ता और विपक्षी सदस्यों के बीच हाथापाई की नौबत आ गई। पीएसी के अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी बैठक छोड़कर चले गए।
        जोशी के जाने के बाद कांग्रेस के सदस्यों ने सैफुद्दीन सोज को पीएसी का नया अध्यक्ष बना दिया।
इससे पहले 2जी स्पेक्ट्रम रिपोर्ट पर पीएसी बैठक में सदस्य दो धड़ों में बंट गए। गुरुवार को बैठक शुरू होने के बाद समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के नेताओं ने कांग्रेस व द्रमुक का साथ देने का फैसला किया। कांग्रेस व द्रमुक समेत सपा और बसपा के सदस्य पीएसी रिपोर्ट पर वोटिंग की मांग कर रहे थे। शाम चार बजे जैसे ही दोबारा बैठक शुरू हुई तो महज ढाई मिनट में ही पीएसी अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी बैठक छोड़कर चले गए।
            कांग्रेस व द्रमुक रिपोर्ट पर वोटिंग के लिए जोर डाल रहे थे। कांग्रेस व द्रमुक के साथ सपा और बसपा के आने से रिपोर्ट के विपक्ष में कुल 11 सदस्य हो गए थे, जबकि पक्ष में सिर्फ 10 ही रह गए थे। 21 सदस्यीय समिति में दोनों पक्षों का संतुलित प्रतिनिधित्व है और सपा तथा बसपा के एक-एक सदस्य की भूमिका अहम होगी। पीएसी में कांग्रेस के सात सदस्य, भाजपा के चार, अन्नाद्रमुक तथा द्रमुक के दो-दो और शिवसेना, बीजद, जदयू, सपा, बसपा व माकपा के एक-एक सदस्य हैं।
        

शुक्रवार, 29 अप्रैल 2011

चोर चोर , मौसेरे भाई: प्रधानमंत्री भ्रष्टाचार के पितामह हैं ..!











- अरविन्द सिसोदिया 
  जिस तरह से लोक लेखा समिति के द्वारा दी जा रही सही जानकारी को रोकनें के लिए कांग्रेस ने जो  तमाशा किया गया वह संसदीय लोकतंत्र में शर्मनाक है | सत्य तो साफ है की प्रधानमंत्री भ्रष्टाचार के पितामह हैं ..! एक नहीं अनेक मामलों में साफतौर पर प्रधानमंत्री कार्यालय की संलिप्तता भ्रष्टाचार के लिए जिम्मेवार है | इसमें आग में पेट्रोल का काम आय से अधिक सम्पत्ति जुटा लेने वाले मुलायम सिंह और मायावती ने उन पर चल रहे सी बी आई के प्रकरणों के दवाब में , कांग्रेस की हांजी हांजी कर एक गुलाम के रूपमें प्रस्तुत किया है | अपने को दम हिलाऊ .. की तरह ही निन्दा का पात्र बना लिया है | इससे यह तो साबित हो गया की चोर चोर मौसेरे भाई.....


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पीएसी की गुरुवार २८.०४.२०११ को हुई हंगामेदार बैठक के बाद इसके अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी भाजपा, अन्नाद्रमुक, बीजद और वाम सदस्यों के सहयोग से 2जी स्पेक्ट्रम पर तैयार विवादास्पद मसौदा रिपोर्ट को शनिवार को समिति का कार्यकाल समाप्त होने से पहले लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार को पेश करने की संभावना पर गौर कर रहे हैं।
बताया जाता है कि जोशी ने शुक्रवार की सुबह पीएसी में शामिल सरकार विरोधी दलों के सदस्यों से इस बारे में विचार-विमर्श किया। उन्होंने इस संदर्भ में पीएसी अध्यक्ष के रूप में अपने अधिकारों के कानूनी पहलुओं पर भी राय ली।
सूत्रों ने बताया कि लोकसभा अध्यक्ष को मसौदा रिपोर्ट पेश किए जाने का फैसला करने से पहले वह पीएसी की कार्यप्रणाली से संबंधित सभी नियमों का अध्ययन कर रहे हैं।
लोकसभा अध्यक्ष इन दिनों अरुणाचल प्रदेश के दौरे पर हैं। समिति के एक सदस्य ने कहा कि मीरा कुमार की अनुपस्थिति में भी जोशी रिपोर्ट को अध्यक्ष के कार्यालय को सौंप सकते हैं।
जोशी रिपोर्ट को लेकर संप्रग और सपा बसपा सदस्यों की आपत्तियों पर भी गौर कर रहे हैं। पीएसी के 21 में से 11 सदस्य इस रिपोर्ट को गुरुवार को अस्वीकार कर चुके हैं।
कांग्रेस, द्रमुक, बसपा और सपा के इन सदस्यों का आरोप है कि जोशी ने सरकार को अस्थिर करने के गलत इरादे से एक तरफा रिपोर्ट तैयार की है। इसके लिए उन्होंने जोशी से पीएसी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने की मांग की।
 

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नई दिल्ली । 
भ्रष्टाचार के मामले में , बीजेपी ने कहा है कि 2जी स्पेक्ट्रम समेत भ्रष्टाचार के मामलों में प्रधानमंत्री सह-अपराधी हैं। बीजेपी ने प्रधानमंत्री के बारे में कहा कि वह हर कीमत पर गद्दी से चिपके रहने वाले शख्स हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा ने बीजेपी मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ' स्पेक्ट्रम घोटाले से संबंधित तत्कालीन दूरसंचार मंत्री ए राजा ने जो फैसले किए उनमें 10 में से 9 की जानकारी प्रधानमंत्री को थी। भ्रष्टाचार को रोकने के मामलों में सिंह ने प्रधानमंत्री पद की अपनी जिम्मेदारियों को जिस हद तक नकारा है , वह भारत के इतिहास में अभूतपूर्व है।'
        सिंह के प्रति बहुत ही तल्ख रवैया अपनाते हुए सिन्हा ने कहा, ' प्रधानमंत्री को बहुत ही ईमानदार व्यक्ति कहा जाता है, लेकिन जो मनमोहन सिंह को जानते हैं, उन्हें मालूम है कि वह किसी कीमत पर गद्दी छोड़ने वाले नहीं हैं। मैं उन्हें बहुत अच्छी तरह जानता हूं। ' बीजेपी नेता ने कहा, ' प्रधानमंत्री पर आरोप लगाता हूं कि 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में वह सह-अपराधी हैं। तत्कालीन वित्त मंत्री पी. चिदंबरम की भी इस मामले में सीधी सह-अपराधिता है।'
       उन्होंने कहा कि 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले की जांच कर रही पीएसी की गुरुवार की बैठक में जिस तरह एसपी और बीएसपी को मिला कर सत्तारूढ़ दल के सदस्यों ने मसौदा रिपोर्ट को पारित नहीं होने दिया वह भ्रष्टाचार के मामलों में प्रधानमंत्री की पर पर्दा डालने के सुनियोजित कोशिश का हिस्सा थी।

कांग्रेस गुंडागर्दी का बेनकाव चेहरा : पीएसी में उपद्रव

- अरविन्द सिसोदिया 
      २८ अप्रेल २०११ को एक सुनियोजित तरीके से , निहित स्वार्थ हेतु ,संसद की गरिमा पर ,कांग्रेस के नेतृत्व में यू पी ए ने हमला किया ..! प्रधान मंत्री अपने को लाख पाक साफ बताते हों .., असल में ये ही  देश के लुटेरों का दलाल है ! चाहे २ जी का मामला हो ,चाहे  एस बैंड स्पेक्ट्रम का मामला हो ,  चाहे सुरेश कलमाड़ी की लूट में मणिशंकर अय्यर का प्रधानमंत्री को पत्र द्वारा सचेत करने का मामला हो या थामस साहब की गलत नियुक्त का मामला हो ..!! प्रधानमंत्री जी  स्वंय और उनका कार्यालय पाप का स्थापक रहा है | वे करें भी तो क्या ..? वे तो रिमोट प्रधान मंत्री हैं ..!!! लूट की हो या पी ए सी में हंगामें की बात हो .., असल कर्ता धर्ता तो कांग्रेस और यू पी ए का नेतृत्व है जिसके इशारे के बिना यह संभव ही नहीं !!!!! इस नेतृत्व को कांग्रेस के राष्ट्रिय अध्यक्ष सीताराम केसरी को लात मार कर हटाने का अनुभव है !!! यह फासिस्ट मानसिकता भी इटली में ही जन्मी है , फासिस्ट गतिविधियों का अनुभव भी वहीं से आया है !!!  यह इतिहास है जब जब कांग्रेस पर बात आती है तब तब वह आक्रमण पर उतर आती है , विपक्ष की आवाज बंद करने के लिए आपातकाल  लगा निर्दोषों को १८ - १८ महीनें जेल में दल चुकी है यह कांग्रेस ! इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हजारों सिखों का नरसंहार करने वालो यह कांग्रेस देश को अपनी लूट की जागीर समझती है !! 

सम्बन्धित समाचार ......

          नई दिल्ली। पब्लिक एकाउंट्स कमेटी (पीएसी) की बैठक में गुरुवार को हुए बवाल पर बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी ने कहा है कि ये बवाल प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के इशारे पर हुआ। गड़करी ने कहा कि चार मंत्रियों ने संसद में बैठकर पीएसी की बैठक में उपद्रव करवाया। जबकि कांग्रेस का कहना है कि सदस्यों का बहुमत मुरली मनोहर जोशी की रिपोर्ट के खिलाफ था।  मुरली मनोहर जोशी के पक्ष में मजबूती से उतरी बीजेपी के अध्यक्ष नितिन गड़करी ने पीएसी में तख्ता पलट के मुद्दे पर आरोप लगाते हुए कहा कि सारा हंगामा प्रधानमंत्री की शह पर हुआ है। जब तक पीएसी ने प्रधानमंत्री कार्यालय पर हाथ नहीं डाला था, तब तक सब ठीक था। लेकिन पीएमओ पर उंगली उठते ही कांग्रेस आलाकमान की बौखलाहट सामने आ गई।गड़करी का कहना था कि जेपीसी न बने इस कोशिश में कांग्रेस पीएसी की तारीफों के पुल बंधा रही थी। प्रधानमंत्री खुद जोशी को गुणी और अनुभवी बताकर उनके सामने पेशी को तैयार थे। लेकिन जब पीएसी ने सचमुच पीएमओ की पोल खोल दी तो कांग्रेस से लेकर प्रधानमंत्री तक को मिर्ची लग गई। हालांकि गड़करी के इन आरोपों के जवाब में कांग्रेस ने साफ कर दिया कि इस रिपोर्ट से ज्यादतर सदस्य सहमत नहीं थे।
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नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव और बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती भले ही कांग्रेस को पानी पी-पीकर कोसें लेकिन जब भी कांग्रेस संकट में फंसती है दोनों पार्टियां उसकी संकटमोचक बनकर सामने आ जाती हैं। गुरुवार को भी ऐसा ही हुआ जब पीएसी की बैठक में 2जी घोटाले में कांग्रेस और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की भद्द पिटने से बच गई क्योंकि समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के सांसद इस मसले पर ऐन वक्त पर केंद्र की यूपीए सरकार के समर्थन में आ गए।
गौरतलब है कि पीएसी ने 2जी घोटाले में न सिर्फ पीएमओ बल्कि तत्कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम की भूमिका पर सवाल उठाए थे। पीएसी ने अपनी अंतरिम रिपोर्ट में ये भी कहा कि पीएम को इस मामले में पूरी तरह से अंधेरे में रखा गया। अगर ये रिपोर्ट पास हो जाती तो न सिर्फ कांग्रेस बल्कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के लिए काफी असहज स्थिति पैदा हो जाती। ऐसे मौके पर संकटमोचक बनकर सामने आए सपा और बसपा के पीएसी में मौजूद एक-एक सदस्य।
पीएसी में कुल 21 सदस्य हैं। इनमें से कांग्रेस के सात और डीएमके के 2 सदस्य तो पहले से ही पीएसी रिपोर्ट के विरोध में थे। गुरुवार को सपा और बसपा के एक-एक सदस्य भी रिपोर्ट के विरोध में आ गए। नतीजतन 21 सदस्यों में से बहुमत यानी 11 सदस्य रिपोर्ट के विरोध में आ गए। इन 11 सदस्यों ने पहले तो समिति के अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी पर अपनी भड़ास निकाली। जब जोशी बैठक छोड़कर चले गए तो इन सदस्यों ने बहुमत से सैफुद्दीन सोज को अपना नया अध्यक्ष चुन लिया। नए अध्यक्ष ने पीएसी की रिपोर्ट खारिज कर दी।हालांकि, पीएसी का नया अध्यक्ष चुना जाना वैधानिक रूप से कितना सही है इसपर विशेषज्ञों की राय अलग है क्योंकि पीएसी का चेयरमैन लोकसभा अध्यक्ष द्वारा नियुक्त किया जाता है लेकिन फिलहाल रिपोर्ट पर विवाद पैदा कर कांग्रेस ने खुद पर लगे दाग धुंधले करने में तो कामयाबी पा ही ली है।
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नई दिल्ली | संसद व विधानसभाओं के बाद संसद की प्रतिष्ठित लोकलेखा समिति (पीएसी) में भी गुरुवार को संसदीय नियमों की धज्जियां उड़ती नजर आईं। यूपीए के सदस्यों ने 2-जी घोटाले की मसौदा रिपोर्ट को 11 मतों से खारिज कर दिया। रिपोर्ट में पीएम व उनके कार्यालय को 2-जी घोटाले के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है। कांग्रेस ने रिपोर्ट खारिज करने के लिए अलग से बैठक की। इसमें कांग्रेस नेता सैफुद्दीन सोज को तत्काल अध्यक्ष चुन लिया गया। तब मुरली मनोहर जोशी बैठक को स्थगित कर एनडीए व कुछ अन्य पार्टी सदस्यों समेत बैठक से बाहर जा चुके थे। कांग्रेस-द्रमुक की मुहिम में उनका साथ दिया मुलायम सिंह की पार्टी सपा और मायावती की बसपा ने।

गुरुवार के घटनाक्रम से 2-जी मामले की रिपोर्ट का भविष्य सवालों में है। हालांकि जोशी की चली तो वह लोकसभा स्पीकर को रिपोर्ट जरूर सौंपेंगे। उनके पास दो दिन का समय है, क्योंकि पीएसी का कार्यकाल 30 अप्रैल तक है। फिलहाल जोशी ने पत्ते नहीं खोले हैं, लेकिन सूत्रों के मुताबिक वह रिपोर्ट देने को अडिग हैं। इससे पहले पीएसी की बैठक में जमकर हो-हल्ला हुआ। सदस्य एक-दूसरे की ओर लपकते नजर आए। यूपीए सदस्यों का आरोप था कि पहले मसौदा रिपोर्ट लीक होने की जांच हो। उसके बाद रिपोर्ट पर मतदान कराया जाए, ताकि साबित हो सके कि बहुमत रिपोर्ट के खिलाफ है। उन्होंने रिपोर्ट आउटसोर्स कर लिखाने का भी आरोप लगाया। आरोप कांग्रेस के सात व दो द्रमुक सदस्यों द्वारा लगाए गए।

अब क्या कर सकते हैं जोशी ?

संसदीय नियमों व परंपरा पर गौर करें तो पीएसी प्रमुख जोशी के पास तीन विकल्प हैं। 
पहली - २-जी मामले पर सदस्यों का बहुमत मसौदा रिपोर्ट के खिलाफ होने के मद्देनजर यह रिपोर्ट खारिज मान ली जाए। 
दूसरा - विकल्प है कि रिपोर्ट का मसौदा यथावत रहे और
तीसरा - मौजूदा कार्यकाल के बाद नए सिरे से गौर किया जाए। 
 भाजपा आगामी कार्यकाल में भी जोशी को अध्यक्ष बनाए रखने की बात साफ कह चुकी है। मगर उस स्थिति में नई समिति में मुद्दे पर चर्चा का प्रस्ताव लाना होगा। 

तीसरा - विकल्प यह है कि जोशी अध्यक्ष के अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए तमाम घटनाक्रम को दरकिनार कर दें और रिपोर्ट स्पीकर को सौंप दें। फिलहाल, तीसरे विकल्प की संभावना मजबूत है।

 ये विरोध में

कांग्रेस (7), डीएमके (2), सपा (1), बसपा (1)

पक्ष में भाजपा (4), शिवसेना (1), जेडी-यू (1), माकपा (1), बीजेडी (1) एआईएडीएमके (2)।

गुरुवार, 28 अप्रैल 2011

२ जी - खिसयानी बिल्ली खंभा नोंचे .....


- अरविन्द सिसोदिया 
    २ जी स्पेक्ट्रम घोटाले में प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह का परोक्ष अपरोक्ष सहयोग से पूरा देश सहमत है ..., देश को लूटनें वाले दल और लोग (इनमें कांग्रेस के 7 और द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (द्रमुक) के 2 सदस्यों के अलावा समाजवादी पार्टी (सपा) के रेवती रमण सिंह तथा बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के बलिराम कश्यप भी शामिल थे। )..,लोक लेखा समिति (पीएसी) में  सबूतों के बजाये बहुमत के आधार पर जिन्दा मक्खी निगलनें में लगे हैं ..,हाला गुल्ला निर्ल्लज हरकतों की  इस पूरी नौटंकी से देश में आक्रोश  ही व्याप्त होगा ..! कांग्रेस सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली जैसा बर्ताव देश के साथ कर रही है ! 

स्पेक्ट्रम आवंटन मामले में प्रधानमंत्री कार्यालय को आड़े हाथों लेने और प्रधानमंत्री पर परोक्ष आक्षेप करने वाली लोक लेखा समिति (पीएसी) की रिपोर्ट पर आज जमकर हंगामा हुआ और समिति की बैठक में नाटकीय घटनाक्रम के बाद उसे स्वीकार नहीं किया जा सका। केंद्र में सत्तारूढ़ संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) के खेमे का दावा है कि रिपोर्ट के मसौदे को बहुमत से खारिज कर दिया गया। लेकिन विपक्षी खेमे के मुताबिक मसौदा समिति के अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी के पास है बैठक में इस पर आधिकारिक रूप से मतदान नहीं किया गया।

समिति में विपक्ष के सदस्यों ने जोशी को यह रिपोर्ट लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय में पेश करने का मशविरा दिया है। संसदीय कार्यवाही के मुताबिक यदि सदन का सत्र नहीं चलता है तो समिति की रिपोर्ट लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष प्रस्तुत की जा सकती है।

पीएसी की बैठक में आज दो धड़ों के बीच गंभीर आरोप प्रत्यारोप और बहस मुबाहिसे के दौर चलते रहे। लेकिन नाटक चरम पर तब पहुंचा, जब जोशी ने बैठक को खत्म घोषित कर दिया। उसके बाद भी संप्रग के सदस्य वहां रुके रहे और उन्होंने कांग्रेस के राज्य सभा सदस्य सैफुद्दीन सोज को पीएसी का 'नया अध्यक्ष' चुन लिया और उसके फौरन बाद रिपोर्ट के मसौदे को 'खारिज' करने का प्रस्ताव भी पारित कर लिया।

हालांकि इस बात का इल्म तो पहले से था कि पीएसी की बैठक में जमकर ताल ठोकी जाएगी क्योंकि उसमें शामिल कांग्रेसी सदस्य जोशी के इस्तीफे की मांग कर चुके थे। उनका कहना था कि रिपोर्ट 'पक्षपात' और 'दुर्भावना' से भरी है।

सुबह जैसे ही बैठक शुरू हुई, संप्रग सदस्यों ने शोर मचाया और रिपोर्ट को खारिज करने की मांग की। पीएसी के 21 सदस्यों में से 11 इसे खारिज करने के पक्ष में थे। इनमें कांग्रेस के 7 और द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (द्रमुक) के 2 सदस्यों के अलावा समाजवादी पार्टी (सपा) के रेवती रमण सिंह तथा बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के बलिराम कश्यप भी शामिल थे। जोशी को केवल 9 सदस्यों का साथ मिला। एक पद अभी खाली है।

सपा और बसपा के सदस्यों को कांग्रेस नेताओं ने चि_िïयां दीं, जो उन्होंने जोशी को सौंप दीं। इन चि_िïयों में मसौदे को खारिज करने की बात थी और आरोप लगाया गया था कि रिपोर्ट को जोशी ने अपने मन से बाहरी इशारे पर बनाया है। संप्रग सदस्यों का आरोप था कि रिपोर्ट में जगह-जगह पर विसंगतियां हैं। उनका यह भी कहना था कि 270 पन्नों की रिपोर्ट पढऩे के लिए उन्हें पूरा समय नहीं दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व संचार मंत्री ए राजा की पेशी की उनकी मांग को भी नकार दिया गया। संप्रग सदस्यों ने यह सवाल भी उठाया कि आखिर पीएसी की रिपोर्टको हड़बड़ी में पेश क्यों किया गया।

विपक्षी खेमे ने भी रियायत नहीं बरती और उसने मीडिया में रिपोर्ट लीक होने पर सवाल उठाया। उसने यह भी पूछा कि रिपोर्ट के बारे में कांग्रेस सांसद के एस राव ने संवाददता सम्मेलन कैसे किया और कांग्रेस के ही सांसद नवीन जिंदल एक टीवी चैनल में इस गोपनीय रिपोर्ट पर चर्चा करते कैसे दिखे। संप्रग सदस्यों ने दलील दी कि 2जी की जांच अभी पूरी नहीं हुई है, लेकिन विपक्ष ने कहा कि रिपोर्ट का मसौदा बांट दिया गया है यानी जांच पूरी हो गई है।

जब नेता बेईमान हो जाता है .....



- अरविन्द सिसोदिया 
कविता भी है व्यंग भी है ........
जब नेता बेईमान हो जाता है .....
==१==
जब नेता बेईमान हो जाता है ,
निति मर जाती है न्याय मर जाता है ,
जिधर  देखो ; उधर शैतान नजर आता है ,
विश्वाश में विष ;आशीर्वाद में आघात ,
हमदर्दी में दर्द ही दर्द ; मिठास में मधुमेह ,
पावनता में पाप ही पाप ,और...
इमानदारी में महा बेईमान घटित हो जाता है ..!
==२==
भगवान भी जिसके भय से कांपने लगता है ,
राष्ट्र धर्म भी प्राण बचा कर भागनें लगता है ,
सूरज भी पश्चिम से उगता है यारों ..,
जब राज सिंहासन बेईमान हो जाता है ..!
लोगों का जीवन नर्क बन जाता है ,
बातों की नकाबों में ,इन शैतानों में ,
सम्पत्ति की होड़ में - धन की लूट में  ..,
बीस साल पहले जिस पर कौड़ी भी नहीं ..?
वह करोड़ पतियों में भी सिरमौर नजर आता है ..!
==३==
गले में महानता के उसूल टांगे,
वाणी में संतों के स्वर साधे,
जो मिले उसे लूट लेना है मकशद ,
लगे हैं अपनी हवस मिटानें ,
असल इंतजाम तो ...,
अगली अस्सी पीढ़ी का कर के जाना है यारों ...!!
==४==
जो मिले..,जितना मिले.., जहाँ मिले ..,
सब स्वीकार है ,
भिष्ठा  में मिले , मदिरा में मिले , मन्दिर से मिले ..,
किसी की घर गृहस्थी और जायदाद से मिले ..,
किसी की सुख सुविधा छीन कर मिले ..,
किसी के सकून को छीन कर मिले ..,
किसी की संतान को विमुख कर मिले., 
वह सब हमें मिले .., 
यही प्रार्थना यही कमाना ..,
यही सुन्दरकाण्ड, यही हुनमान चालीसा ..,
बस  अब सब कुछ मुझे मिल जाये ..!!!
==५==
गद्दार ये वतन को तो फांसी दे सकते हो यारों ,
मक्कार  को मुसीबत खड़ी कर सकते हो यारों ,
जो बेईमानी पर चले उस पर हंस सकते हो यारों ,
मगर क्या करें इन नेताओं के प्रभुत्व का ..,
इनके खिलाफ कानून दुम दवा कर भाग जाता है ,
कितना भी बड़ा भ्रष्टाचार हो वह शिष्टाचार है .., 
कितनी भी बड़ी रकम हो वहां बहुत कम है ..,
कितनें भी महल फैक्ट्रियां धंधे हों , पेट भरता नहीं ,
इनके आगे कानून .., जी हजुरी करता हो ..!!!
==६==
अमरीका से आयत होता नहीं ,
चीनी सामान में मिलाता नहीं ..,
इन्हें सुधारे कौन सा यंत्र ..,
कहाँ से मंगाएं.., 
इनका नाप तौल कौन करे .., 
हर धर्म हर मजहब में टटोला ,
नेताजी सुधर जाएँ येसी इबारत नहीं ..!!
क्यों की ये तो आदर्श पुरुष हैं.,
महान हैं; शक्तिमान है ...,
सामने खड़े ये स्वंय प्रभु ..,
ये इवादत हैं , धर्मप्राण हैं ..,
तंत्र - मन्त्र हैं , अनुष्ठान हैं ,
इनसे संसद चलती है ...,
उठती गिरती है ..,
इनसे विधानसभाएं बनती बिगडती हैं ,
जिला परिषद,पंचायत समितियां ,
नगर पालिकाएं ..,
संगठन से सरपंच तक इनका ही बोलबाला है ..!
इसलिए यारों आजकल इनका ही महा प्रभुत्व है ..!
इनकी जिंदाबाद में ही , भला है ..!
जय जय बोलते चलो इनकी कृपा बटोरते चलो ..!!!
==७==
अभी ये पूरी नहीं हुई है .....एक दो दिन में इसे पूरा कर लिया जायेगा .....
पैसा पैसा क्या करता है ..
पैसे की लगादू झड़ी ..
एकवार नेता बन जाऊ ..,
सात पीढ़ी हो जाएँगी खड़ी ..!

बुधवार, 27 अप्रैल 2011

नेताजी सुभाषचन्द्र बोस


- अरविन्द सिसोदिया 

   नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के जीवन से जुड़े रहस्य को उजागर करते मेरे चार  लेखों की लिंक .....


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सोमवार, २५ अक्तूबर २०१०


नेताजी सुभाषचन्द्र बोस , मास्को जेल में..?

http://arvindsisodiakota.blogspot.com/2010/10/blog-post_25.html

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सोमवार, १७ जनवरी २०११


सुभाष जिनकी मृत्यु भी रहस्यमय है ..

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शनिवार, २२ जनवरी २०११

सुभाष जी का सच, सामने आना चाहिए ....!!

http://arvindsisodiakota.blogspot.com/2011/01/blog-post_22.html 

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रविवार, २३ जनवरी २०११

किन किन भारतीय नेताओं ने सुभाष बाबू को सोंपनें का सौदा किया थाhttp://arvindsisodiakota.blogspot.com/2011/01/blog-post_23.html

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर भ्रष्टाचार के आरोप....



- अरविन्द  सिसोदिया  
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की पोजीसन का फायदा , उनके  पुत्र और पुत्री ने उठाया है | यह आरोप भाजपा ने लगाया है | इसका खंडन भी मुख्यमंत्री गहलोत ने किया मगर .., वे जबाव भी उन आरोपों की पुष्ठी ही करते प्रतीत हो रहे हैं ..!! इस हफ्ते के इडिया टुडे ( ४ मई २०११ ) के मुख्य पृष्ठ पर अशोक गहलोत का चित्र छपा है , " घोटालों का अशोक चक्र " शीर्षक दिया गया है | नीचे लिखा है 'राजस्थान सरकार से बड़े ठेके हथियाने वाली तीन कंपनियों से गहलोत की संतानों के आर्थिक रिश्ते उजागर ' इस आवरण कथा को रोहित परिहार और शफी रहमान ने लिखा है |
इस संदर्भ में कुछ विवरण नीचे है जो विषय पर रोशनी डालनें के लिए पर्याप्त है ----
बहुजन समाज पार्टी 
      कांग्रेस के एक मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। एक तरफ जहां अपने बेटे के हित साधने के चक्कर में निजी निवेशकर्ताओं को फायदा पहुंचाने के आरोप लग रहे है। वहीं दूसरी तरफ अजमेर संभाग में करीब दो सौ करोड़ रुपयेके भूमि घोटाले की लपटें गहलोत सरकार तक पहुंच रही हैं। आरोप कि जयपुर की ओम मेटल्स को गहलोत सरकार ने 457 करोड़ रुपए के ठेके राजस्थान प्रदेश में कालीसिंध नदी पर बांध बनाने का दिया।
इस ओम मेटल्स में गहलोत के बेटे वैभव गहलोत लीगल कंसलटेंट के रूप में कार्यरत हैं और कंपनी को यह ठेका केवल मुख्य मंत्री  गहलोत के प्रभाव के कारण मिला है। ठेका देने में नियमों को दरकिनार किया गया। उन्होंने कहा, वैभव ने 2009 के जुलाई में ट्रिटन होटल्स में 50 हजार रुपये मासिक वेतन पर लीगल कंसल्टेंट के रूप में काम करना शुरू किया और इसके बाद सरकार ने दिल्ली रोड पर दस हजार वर्ग मीटर जमीन को कमर्शियल यूज के लिए स्वीकृति दे दी। अजमेर में दीपदर्शन हाउसिंग सोसायटी को राज्य सरकार ने 123 रुपये वर्गगज के हिसाब से बेशकीमती जमीन सौंप दी।
जबकि इसका वास्तविक बाजार मूल्य 14 हजार 900 रुपये प्रतिवर्ग मीटर है। इसी तरह से भीलवाड़ा में मेवाड़ मिल की जमीन का घोटाला किया गया। इसमें करीब एक हजार करोड़ रुपये का फायदा सरकार ने अपने चहेतों को पहुंचाया। सौमैया ने मामले की जांच सीबीआइ से कराने की मांग करते हुए कहा कि इस भूमि घोटाले की तथ्यात्मक रिपोर्ट शीघ्र राष्ट्रपति का सौंपी जाएगी।
मुख्यमंत्री गहलोत ने दिए आरोपों के जवाब
        विपक्षी नेताओं ने बिना आधार के आरोप लगाए हैं।
१-  जल महल का काम देखने वाली कंपनी की तरफ से मेरी बेटी को मुंबई में फ्लैट देने का आरोप झूठा है। जिस परिवार को लेकर आरोप लग रहे हैं, उससे हमारे 32 साल पुराने संबंध हैं। 
२-  मेरी बेटी आर्किटेक्ट है और उसने किसी के साथ कंपनी खोली है तो इसमें क्या बुरा है। उसमें मेरी बेटी के सिर्फ पांच लाख के शेयर हैं। 
३- अपना फ्लैट खरीदना कोई गलत बात नहीं है।
४-  बेटा कुछ कंपनियों में कंसल्टेंट है, पहले उसे 20,000 रु. मिलते थे और अब 30,000 रु. मिलते हैं। क्या 30,000 रु. के लिए करोड़ों के ठेके दे दिए जाएंगे?
किरन महेश्वरी , भाजपा की राष्टीय महामंत्री 

भाजपा की राष्ट्रीय महामंत्री किरण माहेश्वरी ने सरकार पर लगाए भ्रष्टाचार के आरोप, केंद्रीय मंत्री सीपी जोशी पर लगाए मेवाड़ मिल की जमीन सस्ते में खरीदने के आरोप 
जयपुर। भाजपा की राष्ट्रीय महामंत्री किरण माहेश्वरी ने सरकार पर माथुर आयोग के नाम पर भ्रष्टाचार फैलाने का आरोप लगाया है। भाजपा कार्यालय में सोमवार को मीडिया से बातचीत में किरण माहेश्वरी ने कहा कि जो मुख्यमंत्री अशोक गहलोत दूसरों पर आरोप लगाते रहते हैं हाल ही में उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। माथुर आयोग की संवैधानिकता नहीं थी। इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने उसे भंग कर दिया। 
गहलोत सरकार ने माथुर आयोग के नाम पर भ्रष्टाचार फैलाया। माथुर आयोग के नाम पर जिन फाइलों को रोक कर रखा गया। जो लोग पैसा लेकर जयपुर पहुंच गए उनकी फाइलें क्लियर कर दी गईं। अगर इनसे हिसाब लिया जाए तो जितनी फाइलें रोकी गईं उनमें से 60 प्रतिशत फाइलों को पैसा लेकर निकाला गया और यह सब मुख्यमंत्री के नाक नीचे हुआ है।
गहलोत सरकार में जमीनों के कई बड़े घोटाले हुए हैं। भीलवाड़ा में मेवाड़ मिल की जमीन की नीलामी की सरकारी दर 1.44 करोड़ तय हो जाने के बावजूद उसे 1.25 करोड़ रुपए में नीलाम कर दिया गया। माहेश्वरी ने आरोप लगाया कि मेवाड़ मिल की जमीन खरीदने के मामले में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री सीपी जोशी की भूमिका रही है। इन घोटालों पर सरकार को जवाब देना होगा। मुख्यमंत्री दूसरों पर आरोप लगाकर खुद को ईमानदार साबित नहीं कर सकते।

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मुख्य मंत्री अशोक गहलोत की प्रतिक्रिया ......
- अगर आप यह कहो कि अशोक गहलोत की जो सुपुत्री है बम्बई में, उनको 9 करोड का फलेट मिल गया, उसके बदले में जलमहल प्रोजेक्ट दे दिया। तो कम से कम इतना तो कॉमनसेंस होना चाहिये, जो काम हम खुद के हाथों से कर रहे हों, वो फैसले खुद ने किये। आरोप तो उनके ऊपर हो कि आपने उनको फलेट दे दिया, फलेट कौनसा दे दिया ? अगर यह फलेट की बात वह सिद्ध कर दे तो मैं एक सैकण्ड भी इस पद पर रहना पसन्द नहीं करूंगा। 

- इनके एक आरोप में भी सच्चाई नहीं है। शरारतपूर्ण, मिसचिवियस, मनगंढत, कपोल-कल्पित, जिस रूप में लगाये गये हैं वो बडे अनफोर्चुनेट है, क्योंकि कोई दम तो है नहीं।  
      जब मैं दिल्ली के अंदर इंदिरा गांधीजी के साथ में डिप्टी मिनिस्टर था, तब से लगाकर आज तक मैंने सरकारी कार का उपयोग मैंने मेरे परिवार के लोगों को नहीं करने दिया। हम उस रूप में चलने वाले लोग हैं। खुद परिवार का सदस्य कार लेगा तो हमने नियम बनवाये थे कि पर किलोमीटर पैसे जमा कराना है, वह जमा कराना जरूरी होगा। मुख्य मंत्री बनने के बाद भी, इतना तो ख्याल रखता हूं इस बात का। क्योंकि हम पब्लिक के ट्रस्टी हैं।
-    पर आप हमारे परिवार के लोगों को जोड दो। मान लो कोई काम कर रहा है, पांच-पांच हजार रूपये अगर एक कम्पनी दे रही है, चार कम्पनियां हैं, उसमें बीस हजार रूपये और ढाई साल के बाद में बीस हजार से तीस हजार करे तो मेरे मुख्य मंत्री बनने से पहले अगर बेटा कोई काम करे, उसको आप इससे जोड रहे हो कि इन्हीं कम्पनियों को ठेके मिलने लग गये। क्या कोई मुख्य मंत्री तीस हजार रूपये के लिये करोडों के ठेका दे देगा किसी को ? वह ठेके मिले ही नहीं। वह कह रहे हैं वह तो उनके पार्टनर बने हुए हैं। आप अगर विस्तार में जो डिटेल चाहेंगे, आपको बकायदा विभाग से मिलेगी, मैं आपको दिलवाऊंगा।
 -  अगर करप्शन पर नैतिक अधिकार है, करप्शन तो पूरी दुनिया के हर मुल्क में होता है, हिन्दुस्तान में भी है। अगर करप्शन हटाने का प्रयास किया गया है तो कांग्रेस शासन में किया गया है।
 - मैं तो कहूंगा राहुल गांधी ने जो बात कही, वह सटीक बात थी कि जब तक सिस्टम से करप्शन नहीं हटेगा, यह सिस्टम चेंज नहीं होगा तब तक आप भले ही कितने लोकपाल बना लीजिये, लोकायुक्त बना हुआ है 28 साल पहले का। आफ पास केस बाई केस आते जायेंगे और आप उम्मीद करो कि वह करप्शन हट जायेगा तो इम्पोसिबल बात है। लोकपाल से आप एक संदेश दे सकते हो, अंकुश लगाने की दिशा में एक कदम आगे बढ सकते हो, एक कदम सिर्फ। बाकी आप हटा नहीं सकते, क्योंकि वह तो केस बाई केस बात होगी। जब तक पूरे मुल्क के सिस्टम में चेंज नहीं होगा, तब तक यह संभव नहीं है।
      माथुर आयोग के बारे में सवाल पर कहा, “अभी हमने सोचा नहीं। देखिये, मैंने पहले शुरू में ही कहा था माथुर कमीशन बना तब भी, उनको वैलकम करना चाहिये था। अगर हमारी नियत तंग करने की होती तो कमीशन ऑफ इंक्वायरी एक्ट के अन्तर्गत हम बनाते। उसमें फिर कई तरह के नोटिसेज और कई लम्बी प्रक्रिया होती। हमने बकायदा यह सोच-समझकर कहा कि प्रशासनिक आदेश से बनाते हैं और चूंकि इतने आरोप लग चुके हैं, आरोपों की अगर जांच होगी तो कम से कम प्रक्रिया में या और जगह क्या गडबडी हुई है, वह सामने आयेगी तो हमारी सरकार के वक्त में भी हम खुद भी, चाहे मुख्य मंत्री हो, चाहे मंत्री हों, वह बचकर चलेंगे कि कहीं हमारे ऊपर कोई आरोप नहीं लग जाये। आने वाली सरकारें भी ध्यान रखेंगी कि यह माथुर कमीशन ने रिकमण्डेशन दी थी तो पब्लिक इंटरेस्ट के अंदर बचकर चलो। इससे ज्यादा फेयर बात कोई कर सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने जहां तक एस एल पी को स्वीकार नहीं किया, वह टैक्नीकली मामला है। जब लोकायुक्त वहां बना हुआ है, वह तो कानून के अन्तर्गत बना हुआ है तो प्रशासनिक आदेश से क्या यह कमीशन बना रहे हो ? जहां तक मैं सुनता हूं, कोई टैक्नीकली आधार पर उन्होंने उसको नहीं माना है।“
परिवार पर लगाए आरोप के सवाल पर कहा, ''नहीं, हमारा तो यही कहना है कि जो आरोप उन्होंने लगाये सी.एम. के सन काम कर रहे हैं लीगल एडवाइजर के रूप में और उनके बदले में आप उनको फायदा पहुंचा रहे हो। एक काम को भी प्रमाणित कर दें। या डॉटर वहां आर्किटेक्ट है मान लें और वह कम्पनी में डायरेक्टर रह रही है। मैं सत्ता में नहीं था तब भी रह रही थी। जब मैं पहली बार मुख्य मंत्री नहीं बना, उसके पहले से रह रही थी, चाहे पूना में, चाहे बोम्बे में, फिर आप पारिवारिक मैम्बर के फ्लेट में रहते हो, आपको तकलीफ क्या हो रही है ? अगर वह कम्पनी जो पांच लाख की कम्पनी है, पांच लाख की कम्पनी या छह लाख की कम्पनी में आप शेयर खरीदते भी हो मान लीजिये, आपको तकलीफ क्या होती है ? अगर फ्लेट मान लो कम्पनी का है, कर्जा लिया हुआ है तो फ्लेट कभी आप लेओगे मान लो तो आपको पैसा चुकाना पड़ेगा। 80 लाख का फ्लेट जहां वह रह रहे हैं मान लीजिये और वह उसके पहले दूसरे फ्लेट में रहते थे। उसके पहले पूना में रहते थे तो मैंने कहा, जब आप के कोई पारिवारिक मित्र हैं और कम्पनी बनाकर आर्किटेक्ट का कोई काम शुरू करना चाहते हैं, सर्विस छोड़कर प्रयास करते हैं, कभी कामयाब होते हैं, कभी कामयाब नहीं होते। मान लीजिये, वैभव पहले वकालत करता था और ट्रेवल एजेन्सी खोली मान लो, यहां पर तीन कारें खरीदीं, 22 लाख का लोन लिया। 6 लाख दिये, उसने और उसके पार्टनर ने तीन-तीन लाख रूपये दिये। इनके लिये वह ही पाइंट हो गया। तो थोड़ा बहुत तो सोचना चाहिये आरोप लगाने के पहले कि हम क्या आरोप लगा रहे हैं। और कौनसा 8 करोड़, 9 करोड़ का फ्लेट, मालामाल पुत्री और उसके बदले में आपको वह काम दिया गया, जो अभी वसुन्धरा जी ने दिया। तो वसुन्धरा जी मेरी बेटी का बहुत ख्याल रखती हैं, इसलिये उन्होंने पहले एडवांस में ही देखा कि कभी न कभी बेटी को फायदा मिलेगा, इसलिये मेरी बेटी का ख्याल रखा उन्होंने, और अपने हाथों से, अपने साइन से उन्होंने पूरा जलमहल उस कम्पनी को सुपुर्द कर दिया, इतना ध्यान रखती हैं।
अब देखिये, इनकी तो दुर्गति यह है, आमेर की दो हवेलियां हैं, जो इनके वक्त में बिक गयी थीं। हवेलियां कई बिकी हैं पर ललित मोदी जी और उनकी पत्नी के नाम से जो हवेली ली गयी है और एक हवेली दूसरी है, दोनों का कब्जा सरकार ने ले लिया है। कोई कहने वाला नहीं आ रहा है कि यह हवेली हमारी है, आप क्यों ले रहे हो ? इससे बडा प्रूफ क्या होगा इनके जमाने म करप्शन का। जो इनके खास चहेते थे, जिसने चीफ मिनिस्टर के बिहाफ पर ब्रोकर का काम किया हो, और वह आदमी हवेली खरीद रहा है अपनी पत्नी के नाम से, अपने खुद के नाम से, वह हवेली गवर्नमेंट ले रही है, कोई कहने वाला सामने नहीं आ रहा है।

मंगलवार, 26 अप्रैल 2011

सुनील जोशी हत्याकाड की साजिश में दिग्विजय सिंह की भूमिका है-साध्वी प्रज्ञा



खुद को बेकसूर बताया साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर नें 
26 अप्रेल 2011  
इंदौर। मालेगांव बम धमाके और पूर्व संघ प्रचारक सुनील जोशी हत्याकांड में संगीन आरोपों का सामना कर रही मंगलवार को और दावा किया कि उन्हें विधर्मियों ने साजिश के तहत फंसाया है।
साध्वी ने कथित साजिश के संबंध में काग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, पार्टी महासचिव दिग्विजय सिंह, मुंबई आतंकी हमले में शहीद एटीएस प्रमुख हेमंत करकरे और केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार का नाम लिया। प्रज्ञा को जोशी हत्याकाड में पेशी के लिए सोमवार को मुंबई से देवास लाया गया था। पीठ दर्द के चलते उन्हें सोमवार को इंदौर के महाराजा यशवंतराव अस्पताल भेज दिया गया। उन्हें मंगलवार सुबह अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
38 वर्षीय साध्वी ने मालेगाव बम विस्फोट और जोशी हत्याकाड में उनकी कथित संलिप्तता पर कहा कि यह विधर्मियों की चाल है और इसमें हमारे तथाकथित सत्ताधारी शामिल हैंउन्होंने कहा कि मैं संन्यासिन हूं और मैंने कोई साजिश नहीं की। मैं राष्ट्रप्रेमी और राष्ट्रभक्त हूं, देश के लिए जीना और मरना जानती हूं। । इस बात के जिक्र पर कि मध्यप्रदेश पुलिस ने सुनील जोशी हत्याकाड में उन पर साजिश रचने समेत विभिन्न आरोप लगाए हैं, उन्होंने कहा कि यह इनकी [पुलिस की] नादानी है और यहा की [प्रदेश] सरकार का निकम्मापन है। वह सच्चाई पता नहीं कर सकी और सीधे-सादे साधु-संतों को पकड़ लिया गया। वर्ष 2008 के मालेगाव धमाके में उनकी कथित भूमिका के बारे में पूछे जाने पर प्रज्ञा ने कहा कि यह सवाल आप सोनिया गाधी, शरद पवार और महाराष्ट्र सरकार से पूछिए।
साध्वी ने आरोप लगाया कि मुझे षड़यंत्रपूर्वक फंसाया गया, जिसमें सोनिया गाधी, दिग्विजय सिंह, हेमंत करकरे और शरद पवार का हाथ है। इन लोगों पर 120 बी [आपराधिक साजिश से संबंध आईपीसी धारा] लगाकर इन्हें अंदर [गिरफ्तार] किया जाना चाहिए। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि सुनील जोशी हत्याकाड की साजिश में दिग्विजय सिंह की भूमिका है। हालाकि, कुछ देर बाद जब साध्वी से इस संबंध में सवाल किया गया तो उन्होंने काग्रेस महासचिव को 'डरपोक' बताते हुए चुप्पी साध ली।

Pressnote
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 हंगामा 
 

इंदौर। देवास न्यायालय में पेशी के बाद स्वास्थ्य परीक्षण के लिए साध्वी प्रज्ञा सिंह सोमवार दोपहर 3.45 बजे इंदौर के एमवायएच पहुंची। यहां अलग-अलग समय पर पहुंचे 10 डॉक्टरों की टीम ने परीक्षण किया। जांच के बाद डॉक्टरों के दल ने उन्हें मंुबई जाने के लिए फिट पाया। इस बीच साध्वी ने हंगामा शुरू कर दिया। उन्होंने यहां तक कहा कि यदि मुझे यहां से ले जाएंगे तो मैं आत्महत्या कर लूंगी। हंगामे के कारण रात 8.15 बजे की फ्लाइट चूक गई।
पुलिस का कहना है कि साध्वी को मंगलवार को अवंतिका एक्सप्रेस से ले जाएंगे।एमवायएच पहुंचने के बाद साध्वी को केजुअल्टी के आईसीयू में शिफ्ट किया गया।
यहां उन्हें सीएमओ डॉ. हेमंत द्विवेदी ने प्रारंभिक तौर पर देखा। डॉ. द्विवेदी से साध्वी ने कमर और रीढ़ की हड्डी में तेज दर्द होने की बात कही। डॉक्टरों की टीम ने सबसे पहले ब्लड प्रेशर का परीक्षण और ईसीजी किया। इसके बाद रक्त परीक्षण के तहत सीवीसी, आरएफटी और हिमोग्लोबीन की जांच की गई। दोपहर 3.45 से शाम 7 बजे तक सभी परीक्षण के बाद डॉक्टरों की टीम ने उन्हें मुंबई जाने के लिए फिट पाया। इसके बाद उन्हें 8.15 बजे की फ्लाइट से मुंबई ले जाने के लिए 5 टिकट बुक कराए थे। यहां से उन्हें उपचार के लिए मुंबई के जेजे अस्पताल ले जाया जाना था। यह सुनते ही साध्वी ने आईसीयू में ही हंगामा मचाना शुरू कर दिया। हंगामा एक घंटे से अधिक देर तक चला। महिला पुलिस से भी वे नियंत्रित नहीं हो पा रही थीं। उन्होंने डॉक्टरों पर पुलिस के दबाव में रिपोर्ट तैयार करने का आरोप लगाने के साथ दोबारा स्वास्थ्य परीक्षण की मांग कर रही थी। साध्वी ने यहां से शिफ्ट करने की स्थिति मे आत्महत्या करने की धमकी भी दी।
"बैठने का कह खींच लेते हैं कुर्सी"
देवास. साध्वी के साथ देवास पहुंचे उनके बहनोई भगवान झा ने महाराष्ट्र पुलिस एवं एटीएस पर प्रज्ञा के साथ बर्बरता का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि एटीएस पूछताछ के दौरान प्रज्ञा को कुर्सी पर बैठने के लिए कहती है, उसके बाद कुर्सी पीछे से खींच ली जाती है।
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सोनिया , दिग्विजय,करकरे ने रची थी माले गाँव की साजिश  : साध्वी प्रज्ञा  
२६ अप्रैल २०११ 
भोपाल। 2006 में हुए मालेगांव बम धमाके और 2007 में हुए सुनील जोशी हत्याकांड में मुख्य आरोपी साध्वी प्रज्ञा ने खुद पर लगे आरोपों से पल्ला झाड़ते हुए कांग्रेस अध्यक्ष सेनिया गांधी, कांग्रेस के महासचिव दिग्विजय सिंह, केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार और मुंबई आतंकी हमले में मारे गए एटीएस के चीफ हेमंत करकरे पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहाकि इन दोनों मामलों मे इस सभी लोगों का हाथ है।

साध्वी ने कहा इन सब लोगों ने मिलकर इन दोनों मामलों की साजिश रची थी। साध्वी प्रज्ञा को मुंबई से इंदौर लाया गया है और मेडिकल चेकअप के लिए यहां अस्पताल में भर्ती किया गया है। सोमवार को उन्हें सुनील जोशी हत्यकांड से संबंधित मामले के लिए देवास ले जाया गया था। साध्वी प्रज्ञा की तबियत खराब होने की शिकायत पर मामले की सुनवाई एम्बुलेंस में ही की गई।

साध्वी प्रज्ञा ने कहा कि इन सभी को जेल भेजा जाना चाहिए। प्रज्ञा ने कहा सुनील जोशी हत्याकांड मामले में दिग्विजय सिंह मुख्य आरोपी हैं। साध्वी ने मांग की इन दोनों मामलों में शरद पवार और दिग्विजय सिंह की जांच होनी चाहिए।

Oneindia hindi
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साध्वी प्रज्ञा 

के भाई ने जांच एजेंसियों पर उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए खुदकुशी की कोशिश की

मालेगांव विस्फोट में फंसाई गईं साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के भाई ने जांच एजेंसियों पर उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए जहर खाकर खुदकुशी की कोशिश की है। पुलिस सूत्रों ने कहा कि अनंत ब्रह्मचारी जहर खाने के बाद दक्षिण दिल्ली के जंगपुरा इलाके में अचेत अवस्था मिले। 

बताया जा रहा है कि अनंत को एनआईए ने पूछताछ के लिए दिल्ली बुलाया था। उसी के बाद उन्होंने जहर खाकर खुदकुशी की कोशिश की। ब्रह्मचारी अनंत के परिजन ने बताया कि एनआईए ने ब्रह्मचारी अनंत को पूछताछ के लिए बुलाया था और उन्हें प्रताड़ित किया। अनंत ने आत्महत्या का प्रयास इसी प्रताड़ना के बाद किया। 

पुलिस ने कहा कि उन्हें एम्स पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। सूत्रों ने कहा कि उसके पास से एक नोट मिला है जिसमें उन्होंने आरोप लगाया है कि बहन साध्वी प्रज्ञा सिंह पर आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के आरोपों की जांच कर एजेंसियों की पूछताछ से वह डिप्रेशन में आ गए थे।


सोमवार, 25 अप्रैल 2011

सत्य साई : नाशवान शरीर छोड़ना ही होगा .....


- अरविन्द सिसोदिया 
 भारतीय मान्यताओं में विलक्ष्ण शक्ति से युक्त अवतार होनें की पुष्ठी अनेकों  अवसरों पर की है और अन्तः यह नाशवान शारीर छोड़े ने के  भी प्रमाण है ..! श्री कृष्ण ने भी अपना शरीर छोड़ दिया था ..!! सांई ने भी शरीर छोड़ दिया है .., हिदू दर्शन आत्मा को अमर होने और स्थूल शरीर का सूक्ष्म शरीर होनें की बात पहले से ही कहता आया है ! सत्य साई को भी जाना ही था .., सभी को मरना और फिरसे आना है ..! हमारी सच्ची सद्भावना यही हो की हम .., दृश्य जगत के अतिरिक्त अदृश्य जगत के अस्तित्व को स्वीकार करें और समय समय पर उन परम शक्तियों  के द्वारा दिखाए मार्ग पर चलें .., सम्पूर्ण सृष्टि का निर्माता एक है .., उसको अलग अलग नाम हमनें ही दिए हैं और हम ही बेकार में आपस में लड़ते रहते हैं ..! उसके लिए हर जीव उसकी संतान है ..! सच्ची भक्ति भी यही है कि समाज में सुधार के प्रयत्न करें ..!! एकता  सदभाव और समन्वय के प्रयत्न करें ..!!!
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आजतक कि अभिव्यक्ति 
आम आदमी से लेकर राष्ट्रपति तक उनके भक्तों में शामिल रहे हैं, लेकिन पुट्टपर्थी के सत्य साईं बाबा के आध्यात्मिक प्रभाव के साथ ही उनसे विवाद भी जुड़े रहे हैं.
भारत में अनेक आध्यात्मिक संत हुए और हैं, लेकिन माना जाता है कि सत्य साईं बाबा के नाम और प्रसिद्धि की बराबरी शायद ही कोई कर सके.
सत्य साईं बाबा का असर पूरी दुनिया में फैला हुआ है और भारत के अलावा विदेश में भी उनके लाखों भक्त हैं. बाबा के नामचीन भक्तों में प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री, राज्यपाल, मुख्यमंत्री समेत आला दर्जे के नेता, फिल्मी सितारे, उद्योगपति और खिलाड़ी शामिल रहे हैं.
आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले में पुट्टपर्थी गांव में एक सामान्य परिवार में 23 नवंबर 1926 को जन्मे सत्यनारायण राजू ने शिरडी के साईं बाबा के पुनर्जन्म की धारणा के साथ ही सत्य साईं बाबा के रूप में पूरी दुनिया में ख्याति अर्जित की.
आंध्र प्रदेश का छोटा-सा गांव पुट्टपर्थी अंतरराष्ट्रीय नक्शे पर छा गया और इसकी वजह है कि बाबा के आध्यात्मिक स्थल प्रशांति निलयम में दिन-रात विदेशी भक्त आते जाते रहे हैं. इस कस्बे में एक विशेष हवाई अड्डे पर दुनिया के अनेक हिस्सों से बाबा के भक्तों के चार्टर्ड विमान उतरते रहे हैं.
प्रारंभिक जीवन में सत्यनारायण राजू को ‘असामान्य प्रतिभा’ वाले परोपकारी बालक की संज्ञा दी गयी. नाटक, संगीत, नृत्य और लेखन प्रतिभा वाले इस बालक ने अनेक कविताएं और नाटक लिखे. गायक के रूप में भी उनकी पहचान बनी और उनके भजनों की अनेक सीडी आईं.
सत्यनारायण राजू ने 20 अक्तूबर 1940 को 14 साल की उम्र में खुद को शिरडी वाले साईं बाबा का अवतार कहा. जब भी वह शिरडी साईं बाबा की बात करते थे तो उन्हें ‘अपना पूर्व शरीर’ कहते थे.
सत्य साईं बाबा अपने चमत्कारों के लिए भी प्रसिद्ध रहे और वे हवा में से अनेक चीजें प्रकट कर देते थे और इसके चलते उनके आलोचक उनके खिलाफ प्रचार करते रहे.
सत्य साईं बाबा के आश्रम में कथित स्कैंडलों की भी खबरें सामने आईं. उनके खिलाफ यौन व्यवहार संबंधी सवाल भी खड़े होते रहे, लेकिन उन्होंने व उनके भक्तों ने इसे उनके विरोधियों की साजिश कहकर खारिज किया.
उनके करीबी सहयोगियों ने ही 6 जून 1993 को कथित तौर पर उन्हें जान से मारने की भी कोशिश की. प्रशांति निलयम में बाबा के कक्ष में उनके छह शिष्यों की इसमें मौत हो गयी. ये सभी बाबा के करीबी लोगों में से थे, जिनमें उनके निजी सहयोगी राधा कृष्ण मेनन भी शामिल थे. इस पूरे मामले की सचाई रहस्य में ही रही.
सत्य साईं बाबा के अनुयायियों ने 1944 में पुट्टपर्थी में एक छोटा मंदिर बनवाया और 1950 में एक विशाल आश्रम बनाया गया जो ‘प्रशांति निलयम’ के तौर पर उनका स्थाई केंद्र बन गया.
बाबा ने आध्यात्मिक उपदेशों के साथ ही सामाजिक क्षेत्र में भी अनेक सेवा कार्य किये. जिनकी शुरुआत पुट्टपर्थी में एक छोटे से अस्पताल के निर्माण के साथ हुई, जो अब 220 बिस्तर वाले सुपर स्पेशलिटी सत्य साई इंस्टीट्यूट ऑफ हायर मेडिकल साइंसेस का रूप ले चुका है.
इसके अलावा बेंगलूर के बाहरी इलाके में 333 बिस्तर वाला एक और सुपर स्पेशलिटी अस्पताल एसएसआईएचएमएस खोला गया. यहां बाबा का ग्रीष्मकालीन केंद्र वृंदावन है. सत्य साई सेंट्रल ट्रस्ट इन सभी सामाजिक सेवा गतिविधियों को देखता है और पुट्टपर्थी में सत्य साई विश्वविद्यालय भी संचालित करता है. इसके अलावा यह ट्रस्ट अलग अलग प्रदेशों में अनेक स्कूलों और डिस्पेंसरियों का भी संचालन करता है. सत्य साई सेंट्रल ट्रस्ट ने आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और महाराष्ट्र में बड़ी जल आपूर्ति परियोजनाओं पर भी काम किया है.
सत्य साईं सेवा संगठन के स्वयंसेवक आंध्र प्रदेश ही नहीं बल्कि देश के अन्य हिस्सों में प्राकृतिक आपदाओं के वक्त राहत व पुनर्वास कार्यों में भी आगे से आगे सेवाकार्य करते देखे जा सकते हैं.
सत्य साईं बाबा ने भारत में तीन मंदिर भी स्थापित किये, जिनमें मुंबई में धर्मक्षेत्र, हैदराबाद में शिवम और चेन्नई में सुंदरम हैं. इनके अलावा दुनियाभर के 114 देशों में सत्य साई केंद्र स्थित हैं.
सत्य साईं बाबा ने 1957 में उत्तर भारत के मंदिरों का भ्रमण किया और अपनी एक मात्र विदेश यात्रा पर 1968 में युगांडा गये. सत्य साईं बाबा ने 1963 में चार बार गंभीर हृदयाघात का सामना किया था.
वर्ष 2005 से ही बाबा व्हीलचेयर पर थे और खराब स्वास्थ्य के कारण बहुत कम ही सार्वजनिक कार्यक्रमों में आते थे. वर्ष 2006 में बाबा को कूल्हे में फ्रेक्चर हो गया जब लोहे के स्टूल पर खड़े एक विद्यार्थी के फिसलने से वह और स्टूल दोनों ही बाबा पर गिर गये. वह अपने भक्तों को कार से या पोर्ट चेयर से दर्शन देते थे.