मंगलवार, 19 अप्रैल 2011

भ्रष्टाचार मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है ....



- अरविन्द सिसोदिया 
   एक तरफ तो अपनी सम्पत्ति का ब्यौरा जनता के बिच सार्वजानिक करने का दौर चल रहा है .. दूसरी तरफ बालाकृष्णन जैसे लोग .. जो सर्वोच्च न्यायलय के सर्वे सर्व रहे हों ...? अभी अभी हटे सतर्कता आयुक्त थामस साहब जो पोमा आयल में भ्रष्टाचार के लिए नाम जद थे ..! ए राजा जो केन्द्रीय मंत्री थे ... सुरेश कलमाड़ी कांग्रेस की प्रमुख टीम में सचिव थे संसद हैं .., नाम जितने आरोप उतनें.., जैसे ही लोग तो शिखर पर हैं .. , उनमें से ही एक लोकपाल होगा तब अन्ना क्या करेंगें ...!! 

खबर है तिरुवनंतपुरम से .......
देश के वर्तमान में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष  एवं पूर्व मुख्य न्यायाधीश केजी बालकृष्णन ने अपनी संपत्ति के खुलासे से इंकार किया है। उनका कहना है कि ये उनकी निजता का हनन है। साथ ही उन्होने आयकर विभाग को ये सूचना भी भेजी है कि वह अपनी संपत्ति का खुलासा इसलिए नहीं करना चाहते क्योंकि ये किसी भी प्रकार से जनकल्याण के मुद्दे से जुड़ी नहीं है। उल्लेखनीय है कि अत्याधिक दबाव के बाद बालकृष्णन पिछले महीने अपनी संपत्ति के खुलासे के लिए तैयार हुए थे। 
मालूम हो कि जब पिछले साल न्यायाधीशों की अपनी संपत्ति को सार्वजनिक करने का मसला उठा था उस समय भी बालकृष्णन ने इसका विरोध किया था बल्कि इसे सिरे से खारिज भी कर दिया था। उस समय कर्नाटक के एक न्यायाधीश ने बालकृषणन की अवमानना करते हुए ना केवल उनके फैसले के विरोध किया था बल्कि अपनी संपत्ति सार्वजनिक भी कर दी थी। इसके बाद देश के अन्य न्यायाधीशों और वरिष्ठ वकीलों ने न्यायाधीशों के संपत्ति विवरण को सार्वजनिक करने पर अपनी सहमति दी थी।
     पूर्व न्यायाधीश के बेटी और दामाद पर पहले ही भ्रष्टाचार से संबंधित जांच चल रही है। इसके अलावा उनकी पत्नी और भाई के पास भी आय से अधिक संपत्ति के मसले खुल चुके हैं। उनके भतीजे अभिलाष टी चंद्रन के पास भी अचानक मानो सोना ही बरस पड़ा है। पहले वह क्लर्क थे, इस समय वह चार कंपनियों के मालिक हैं और अकूत दौलत भी उनके पास है। 

  यह खबर कह रही है की भ्रष्टाचार मेरा जन्म सिद्ध अधिकार है ...

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