रविवार, 22 मई 2011

मुकेश अंबानी का 27 मंजिलों वाला नया घर : स्वतंत्रता का अनर्थ ही कहा जाएगा

- अरविन्द सिसोदिया 
  क्या भारत के गरीवों के मुह पर यह तमांचा  नहीं है की मुकेश अंबानी या अन्य कोई इतनें बड़े मकानों में रहे की वह अन्य नागरिकों की भावनाओं को अपमानित करे ..? समता के संवैधानिक मूल अधिकार पर आघात करे .., भारत सरकार तय करे की एक नागरिक को अधिकतम कितना स्थान आवास हेतु चाहिए ..? १००० वर्ग फुट, १५०० या २००० वर्ग फुट ...अनाप सनाप क्यों ..असीमित क्यों.! यह स्वतंत्रता का अनर्थ ही कहा जाएगा !!
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 मुकेश अंबानी का 27 मंजिलों वाला नया घर , एक चॅनल के अनुसार २० लाख वर्ग फीट में बनें इस बंगले में , ४ मंजिल गार्डन और ६ मंजिला पार्किंग , ५ सदस्यीय परिवार के लिए बनें इस महल में ६०० कर्मचारी साफ़ सफाई के लिए है | ७० लाख रूपये बिजली का बिल है | सुख-सुविधा इतनीं  की फाइव और इससे अधिक सितारा वाले  होटल भी कहीं नहीं लगते ..!! क्या यह एसो आराम , हराम नहीं है ..!!
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दुनिया के चौथे सबसे अमीर व्यक्ति रिलायंस इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष मुकेश अंबानी का 27 मंजिलों वाला नया घर दुनिया का सबसे महंगा घर है।प्रतिष्ठित पत्रिका ‘फोर्ब्स’ के मुताबिक अंबानी परिवार की इस माह अपने नए घर ‘अंतिला’ में प्रवेश करने की योजना है।


 
      स्थानीय समाचार पत्र ‘द टेलीग्राफ’ ने फोर्ब्स के हवाले से कहा है कि इस घर की कीमत 63 करोड़ पाउंड यानी करीब एक अरब डॉलर ( १ डालर लगभग ४५ से ५० रूपये के मध्य कीमत रखता है )है। यह दुनिया का सबसे महंगा घर है। इससे पहले वर्ष 2009 में पत्रिका की सूची में सबसे महंगा घर कैन्डी स्पेलिंग्स का बेवरली हिल्स स्थित मकान सबसे महंगा था जिसकी कीमत 15 करोड़ डॉलर थी।पत्रिका ने कहा कि एक अरब डॉलर का अंतिला दुनिया के किसी भी कोने में मौजूद महंगे घरों के मुकाबले सबसे महंगा घर है।
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         टाटा समूह के प्रमुख रतन टाटा ने रिलायंस इंडस्ट्रीज़ के प्रमुख मुकेश अंबानी के मुंबई में बने 27 मंज़िला घर 'एंटिला'के बारे में कहा है कि ये इस बात का उदाहरण है कि अमीर भारतीयों को ग़रीबों के प्रति कोई सहानुभूति नहीं है.लंदन के 'द टाइम्स' अख़बार को दिए इंटरव्यू में रतन टाटा ने कहा कि,''मुझे ये देखकर हैरानी होती है कि कोई ऐसा कैसे कर सकता है?''
रतन टाटा ने ये टिपण्णी अख़बार के भारत में आय की बढ़ती असमानता पर पूछे गए सवाल के जवाब में कही.
रतन टाटा ने ये भी कहा कि जो व्यक्ति इतने महंगे घर में रह रहा हो, उसे अपने आसपास के माहौल के प्रति भी संवेदनशील होना चाहिए और ख़ुद से ये सवाल पूछना चाहिए कि क्या वो इसमें कुछ बदलाव ला सकता है? अगर ऐसा नहीं है तो ये दुख का विषय है क्योंकि भारत को ऐसे लोगों की ज़रूरत है जो अपनी अकूत संपत्ति का कुछ हिस्सा लोगों की परेशानियों को कम करने के उपाय ढूंढने में लगाने को तैयार हों.'द टाइम्स' को दिए इंटरव्यू में 73 वर्षीय रतन टाटा ने कहा कि, ''भारत में अमीरों और ग़रीबों के बीच जो खाई है उसे कम करने के लिए हम बहुत कम प्रयास कर रहे हैं, लेकिन चाहते ज़रूर हैं कि ये असमानता ख़त्म हो जाए.''

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