मंगलवार, 17 मई 2011

पेट्रोल की कीमत बढानें से राज्य सरकारें मालामाल




- अरविन्द सिसोदिया 
पेट्रोल की ज्यादा कीमत चुकाते हुए आपका गुस्सा जायज है। लेकिन इस वृद्धि के लिए तेल कंपनियों के साथ सरकार भी जिम्मेदार है।  राज्य सरकार चाहे तो आम उपभोक्ता पर पड़ने वाले असर को कम कर सकती है। तेल के दाम में जितनी वृद्धि होती है, राज्य सरकार का खजाना भी उसी हिसाब से बढ़ जाता है, क्योंकि राज्य सरकारें पेट्रोल-डीजल के दाम पर प्रतिशत के हिसाब से टैक्स वसूल करती हैं।
पेट्रोल के दाम में पांच रुपये लीटर बढ़ने से दिल्ली सरकार को करीब 80 पैसे और यूपी सरकार को करीब एक रुपया प्रति लीटर का फायदा हुआ है। दिल्ली में प्रति लीटर पेट्रोल पर 20 प्रतिशत, जबकि यूपी में 26.55 प्रतिशत वैट वसूला जाता है।
दिल्ली पेट्रोल पम्प ऐसोसिएशन के अध्यक्ष अतुल पेशावरिया कहते हैं कि राजधानी में प्रतिदिन करीब 30 लाख लीटर पेट्रोल की बिक्री होती है। ऐसे में दिल्ली सरकार को रोजाना 24 लाख रुपये की अतिरिक्त आय होगी। वहीं, उत्तर प्रदेश में रोजाना करीब 65 लाख लीटर पेट्रोल बिकता है।
लिहाजा यूपी सरकार को पेट्रोल के दाम बढ़ने से करीब 65 लाख रुपए प्रतिदिन का फायदा हुआ है। बिहार में पेट्रोल पर वैट 24.50, झारखंड में 20 और उत्तराखंड में 25 प्रतिशत वैट लगता है। इस तरह बिहार व उत्तराखंड को करीब एक रुपया और झारखंड सरकार को करीब 80 पैसे प्रति लीटर का अतिरिक्त लाभ हुआ है।
पेट्रोलियम मंत्रालय कई बार राज्य सरकारों को पत्र लिखकर प्रति लीटर टैक्स तय करने की अपील कर चुका है। पर राज्य सरकारें कीमत पर प्रतिशत की दर से ही टैक्स वसूल कर रही हैं। केंद्र सरकार ने केंद्रीय उत्पाद शुल्क को प्रति लीटर की दर पर तय कर रखा है। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि से उस पर कोई फर्क नहीं पड़ता है।

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