सोमवार, 6 जून 2011

मायावती की मांग और सर्वोच्च न्यायालय का स्वत: संज्ञान

- अरविन्द सिसोदिया 
  क्या सर्वोच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती के बेंगलोर में दिए भाषण को महत्त्व दे दिया है .....  

सर्वोच्च न्यायालय ने रामलीला मैदान पर आधी रात को पुलिस द्वारा बर्बर कार्रवाई पर स्वत: संज्ञान लेते हुए दिल्ली पुलिस कमिश्नर, दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव और केंद्र के गृह सचिव को नोटिस जारी कर कारण जानना चाहा है कि आखिर क्या वजह थी कि आधी रात के वक्त शांत लोगों पर लाठियां बरसानी पड़ीं? रामलीला मैदान में अनशन पर बैठे बाबा रामदेव के खिलाफ शनिवार मध्यरात्रि को हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को केंद्रीय गृह सचिव जी. के. पिल्लै तथा दिल्ली पुलिस के प्रमुख बी. के. गुप्ता को नोटिस जारी किया। अदालत ने पूछा है कि आखिर किन परिस्थितियों में बाबा रामदेव तथा उनके समर्थकों को जबरन दिल्ली से बाहर ले जाया गया। दिल्ली के मुख्य सचिव पी. के. त्रिपाठी को भी नोटिस जारी किया गया है। दो सप्ताह के भीतर नोटिस का जवाब देना है। 
*उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने बाबा रामदेव और उनके समर्थकों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की कड़ी निन्दा की.
मुख्यमंत्री ने रविवार को सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया कि इस मुद्दे पर जांच का आदेश दिया जाए और कहा कि ‘केंद्र से न्याय की उम्मीद नहीं है.’मायावती ने दिल्ली के रामलीला मैदान में हुई धरपकड़ को ‘अमानवीय’, ‘अलोकतांत्रिक’ और ‘निन्दनीय’ करार दिया.बंगलुरु में कर्नाटक बसपा के पदाधिकारियों के सम्मेलन में अपने भाषण की शुरुआत में मायावती ने कहा, ‘हमारी पार्टी इसकी कड़ी आलोचना करती है.’
मायावती ने मीडिया के जरिए सुप्रीम कोर्ट से इस मुद्दे पर ‘विशेष संज्ञान लेने’ और यह निर्देश देने का आग्रह किया कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, राष्ट्रीय महिला आयोग और राष्ट्रीय अनुसूचित जाति-जनजाति आयोग घटनाक्रम की स्वतंत्र व अलग से जांच करें.बसपा सुप्रीमो ने कहा, ‘हमारी पार्टी माननीय सुप्रीम कोर्ट से न्यायिक जांच या जो भी जांच आवश्यक लगे का निर्देश देने का आग्रह करती है.’उन्होंने कहा कि दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए ताकि देश के किसी भी भाग में धरने पर बैठे किसी व्यक्ति के साथ इस तरह की ‘गुंडागर्दी’ न होने पाए.
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मायावती ने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की कर्नाटक इकाई की बेंगलुरू पैलेस मैदान में आयोजित एक सभा को सम्बोधित करते हुए कहा, “हम सर्वोच्च न्यायालय से अनुरोध करते हैं कि वह रामलीला मैदान में की गई पुलिस कार्रवाई की एक न्यायिक जांच का आदेश दे, जहां सैकड़ों बेगुनाह महिलाओं और बच्चों को क्रूरता के साथ पीटा गया।”बाबा रामदेव के साथ अनशन पर बैठे सैकड़ों महिलाओं और बच्चों पर आंसू गैस के गोले दागने और पानी की बौछारें करने के लिए जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए मायावती ने कहा कि रामलीला मैदान की इस घटना ने संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार की मनमानी को बेनकाब कर दिया है। मायावती ने कहा, “रामलीला मैदान में शनिवार को आधी रात के बाद जो कुछ हुआ वह अमानवीय और शर्मनाक था। वहां महिलाओं और बच्चों सहित हजारों लोग बाबा रामदेव के साथ अनशन के लिए मौजूद थे। बाबा रामदेव को जबरन वहां से हटाना और उनके समर्थकों को खदेड़ना अवैधानिक, गैर लोकतांत्रिक और राष्ट्रविरोधी था।”मायावती ने एक लिखित बयान पढ़ते हुए कहा, “सर्वोच्च न्यायालय और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा बाबा रामदेव के समर्थकों पर की गई पुलिस कार्रवाई की सिरे से जांच की जानी चाहिए और दोषियों के खिलाफ जल्द से जल्द कार्रवाई की जानी चाहिए, क्योंकि संप्रग सरकार घटना के लिए सीधे जिम्मेदार है।”मायावती पार्टी की राज्य इकाई के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की बैठक में हिस्सा लेने के लिए देर शनिवार से दो दिनों के बेंगलुरू दौरे पर हैं।

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