बुधवार, 8 जून 2011

चिदंबरम साहब , अच्छे कामों के पीछे अच्छे लोग ही रहते हैं .....!



- अरविन्द सिसोदिया 
देश के गृह मंत्री ने जाने अनजाने यह तो बता दिया की देश की ज्वलंत  समस्याओं का हल करवानें में संघ की प्रभावी भूमिका है , संघ को इंगित कर वे जो  बयान  पढ़ रहे हैं उसकी ध्वनी  यह है कि सिर्फ बाबा रामदेव ही नहीं जो भी भ्रष्टाचार के विरुद्ध है , उन्हें संघ का समर्थन है ! इसमें बुराई क्या है ? अच्छे काम के लिए अच्छे लोग खड़े होंगे और उसके आगे पीछे भी अच्छे ही लोग रहेंगे ..! संघ ने किसी बुरे काम का समर्थन नहीं किया है ! इसलिए मुझे इसमें बुराई नहीं दिखाती ..! यह तो उन्हें  बधाई देनें योग्य कार्य है !! कांग्रेस में दम होतो वह भ्रष्टाचार का विरोध करके दिखाए , विदेशों से काला धन वापस देश में लाकर बताये ..!! बात के बतंगड़ बनानें से कुछ नहीं होगा , देश काम चाहता है ,लुट नहीं ..!!

        हाल ही में भारत के गृह मंत्री पि चिदंबरम का एक बचकाना और गैर जिम्मेवरण बयान आया है कि " बाबा रामदेव के आन्दोलन के पीछे संघ का हाथ है | " एक गृह मंत्री देश का होता है वह पार्टी भाषा बोले यह ठीक नहीं , इस तरह के बयान सिरफिरे लोगों के लिए तो ठीक  हो सकते हैं , मगर देश के गृह मंत्री के लिए शोभायमान नहीं ...! 
* पहली बात देश का जो भी नागरिक है उसे देश के अच्छे बुरे पर विचार करने और अभिव्यक्ति देनें का अधिकार संविधान देता है ! यह अधिकार संघ को भी है , बाबा रामदेव को भी है और अन्ना हजारे को भी है ..| देश में असंख्य संस्थाएं हैं जो देश हित में सोचती रहती हैं , समय समय पर तथ्यों को उठाती रहती हैं ...! राष्ट्रिय स्वंयसेवक संघ इन में सबसे अग्रणी है , इसमें कोई संदेह नहीं है | कांग्रेस के एक तरफ़ा सत्ता हड्पो और देश लुटावाओ  अभियान में यह संस्था वाधक है , इसलिए इसे कोसना कांग्रेस कि पुरानी आदत है , मगर सारी उम्र संघ को कोसनें वाले पंडित जवाहर लाल नेहरु को चीन युद्ध में जो सहयोग संघ ने दिया उससे प्रभावित हो कर  नेहरु जी ने संघ के स्वंयसेवक को गणतंत्र दिवस की परेड १९६३ में सम्मिलित किया था ! देश को जब जरुरत पढ़ी तब संघ सबसे पहले देश हित को खड़ा मिला है ! संघ के लिए देश हित सर्वोपरी है !
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पी चिदंबरम ने भारत के सरकारी चैनल दूरदर्शन को दिए गए एक साक्षात्कार में कहा, "आपको मालूम होना चाहिए कि बाबा रामदेव के पीछे कौन है. मार्च 2011 में कर्नाटक के पुथुर में आरएसएस की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक हुई थी. उस बैठक में उन सभी संस्थाओं और व्यक्तियों का साथ देने का फ़ैसला लिया गया जो भ्रष्टाचार के विरुद्ध आवाज़ उठाएंगे."
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Role during the 1962 Sino-Indian War

The RSS which had been keeping low profile after the lifting of the ban, earned recognition based on its volunteer work during the Sino-Indian War in 1962. RSS was invited by Prime Minister Jawaharlal Nehru to take part in the Indian Republic day parade of 1963. It along with several other civilian organizations took part in the parade.This event helped the RSS increase its popularity and its patriotic image.
Later in 1965 and 1971 Indo-Pak wars too, the RSS volunteers offered their services to maintain law and order of the country and were apparently the first to donate blood.



5 टिप्‍पणियां:

  1. I think Chidambaram and Digvijay are so blinded by their hatred of RSS and Co. that they do not realize that they are discounting the contributions of Muslim maulanas who were present in Ramdev's campaign. And Chidambaram's and Digvijay's statements are doing dis-service to their own cause. Chidambaram and Digvijay are talking about RSS and co. as if RSS is a banned political outfit of some hardened criminals.

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  2. काँग्रेस नाम की बिल्ली खिशिया कर हमेशा आर.एस.एस नाम के खंभे को नोचती है. एक राजस्थानी कहावत याद आ रही है कि "अवसर चुकी डूमणी गावै ताल बेताल"

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  3. KAL KO AGAR GALTI SE RAHUL GANDHI KI SHAADI HO GAI AUR GALTI SE COLAMBIAN YA KISI ANYA BALA SE KOI BACHCHA VACHCHA HO GAYA TOO BHI CONGRESS/SONIA KE IN BHOPUO KO USME BHI RSS V BJP.VHP,BAJRANG DAL KAHI HAATH NAZAR AAYEGA..

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