रविवार, 31 जुलाई 2011

कांग्रेस में सर फुटब्बल : क्रिकेट की चाँदी पर कब्जे के लिए कांगेस के जोशी बनाम जोशी


- अरविन्द सिसोदिया 
         आजाद भारत के नोकरशाहों और राजनेताओं नें मुह मारनें से एक भी वह जगह नहीं छोड़ी जहाँ धन सम्पत्ति और पैसा हो ..!! जब से देश में २० -२० का फटाफट क्रिकेट आया और उस पर आसमान से पानी की तरह पैसा वर्षा तब से तो हर राजनेता किसी न किसी क्रिकेट संघ का अध्यक्ष बनना चाहता है ! राजनेता से शरद पंवार तो विश्व क्रिकेट  के  मालिक हो गए ..!! भारत की राष्ट्रिय और प्रांतीय क्रिकेट में खिलाडियों को तो कोई तब्बजो नहीं है ..,, मगर नेता और नोकरशाही का हर जगह कब्ज़ा है !! इस अन्याय और अधर्म को सभी सरकारें जानते बूझते हुए भी नहीं रोक रहीं ! क्यों की उनका ही कोई बंधु माल उड़ा रहा है !
        राजस्थान में जब तक सी पी जोशी की तूती बोल रही थी और वे राहुल के खास थे तब तक उन्हें किसी नें नहीं छेड़ा, जैसे ही पर्दे के पीछे चलने वाले षडयंत्र  के द्वारा चुगल खोरी जीती, कोंग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष से हटाया , मंत्रालय भी बदलवा  दिया ..! फिर क्या था अब उनसे राजस्थान क्रिकेट संघ के अध्यक्ष का पद भी छीनना था जो लगभग छीन लिया गया है ..! जयपुर के कांगेसी सांसद महेश जोशी इतने अपरिपक्व नहीं हैं की वे एक नोकरशाह के बहकावे में अध्यक्ष बनने चले जाएँ !! जरुर कोई पीछे से मजबूत बेकअप  है .., और वह कोई बड़ी ही ताकत है ! अन्यथा एक नोकरशाह अपने घर में बैठक बुला कर एक केन्द्रीय मंत्री को पद से हटा दे ! यह  असंभव है !!   आई पी एल के  कारण राजस्थान क्रिकेट में भी रुतवा और काफी पैसा है ! 
-------


यह इस लिक पर पूरी पड़ी जा सकती है ....
http://www.patrika.com/news.aspx?id=646631
जयपुर। राजस्थान क्रिकेट संघ (आरसीए) पिछले कुछ वर्षो से विवादों का अखाड़ा बनी हुई है। नोट और वोट की इस राजनीति में दोस्तों को दुश्मन बनते देर नहीं लगती। यही वजह है कि पिछले सात वर्षो में आरसीए और विवादों का चोली दामन का साथ रहा है। 

दो बार हुए चुनाव
आरसीए में एक साल में दो बार चुनाव की नौबत भी आई। वर्ष 2009 में प्रदेश के ज्यादातर जिला संघों ने एकजुट होकर ललित मोदी को हटाकर क्रिकेट की बेहतरी का दावा किया। लेकिन इस दावे की हवा जल्दी ही निकल गई। एक मार्च 2009 में हुए चुनाव में संजय दीक्षित अध्यक्ष और अशोक ओहरी सचिव बने। लेकिन एक माह बाद ही दीक्षित और अशोक ओहरी के बीच शुरू हुए विवाद के कारण जल्द ही पहले एडहॉक कमेटी बनी और फिर नए चुनाव की मांग उठी। नौ माह बाद दिसम्बर में हुए चुनाव में केन्द्रीय मंत्री डॉ. सी.पी. जोशी अध्यक्ष और संजय दीक्षित सचिव बने। लेकिन यह कैमेस्ट्री भी ज्यादा समय तक नहीं चली और फिर विवाद खड़े होने लगे।

आयोजन में अव्यवस्था
पिछले दो वर्षो में आरसीए ने दो अंतरराष्ट्रीय वनडे और आईपीएल के कुल 10 मैचों की मेजबानी की, इसके अलावा ईरानी ट्रॉफी व देवधर ट्रॉफी के मैच भी जयपुर के सवाई मानसिंह स्टेडियम में आयोजित हुए थे। इनमें से भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच फरवरी 2010 में हुआ वनडे मुकाबला भी अव्यवस्थाओं का शिकार बना।

क्रिकेटरों को नुकसान
गुलाबीनगर में क्रिकेट के बड़े आयोजनों से भले ही प्रदेश में क्रिकेट का ग्लेमर बढ़ा हो लेकिन क्रिकेटरों की सुध लेने वाला कोई नहीं है। इन वर्षो में राजस्थान रणजी चैम्पियन तो बना लेकिन बाहरी खिलाडियों की बदौलत।

राजस्थान के खिलाड़ी वहीं के वहीं रह गए। पहले ही अंडर 19 भारतीय टीम का नेतृत्व करने वाले उदयपुर के अशोक मेनारिया और दीपक चाहर को छोड़कर कोई भी खिलाड़ी अपनी छाप नहीं छोड़ सका। जयपुर में अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं होने के बावजूद गुलाबीनगर से इतने भी खिलाड़ी नहीं निकल पाए जिन्हें अंगुलियों पर भी गिना जा सके। 

आईपीएल में हुए विवाद
जयपुर में इस वर्ष हुए आईपीएल -4 के मैचों में भी विवाद खड़ा हुआ। शेन वार्न और दीक्षित के बीच कहासुनी खासी चर्चा का विषय बनी। जयपुर के एसएमएस स्टेडियम में आईपीएल-4 के बेंगलूरू रॉयल चैलेंजर्स के खिलाफ हुए अंतिम मैच में राजस्थान रॉयल्स के कप्तान वार्न और सचिव दीक्षित के बीच तू-तू मैं-मैं हो गई थी। यह मामला बीसीसीआई तक पहुंचा और वार्न को भारी जुर्माना भरना पड़ा। सूत्रों के अनुसार किसी टीम फ्रेंचाइजी के निर्देश पर मैच के लिए पिच बदलने को लेकर यह हंगामा हुआ था। 

सचिन की आलोचना पड़ी भारी
दीक्षित को मुम्बई इंडियंस के कप्तान सचिन की आलोचना भारी पड़ गई थी। गत 29 अप्रेल को जयपुर में हुए मैच के दौरान मुम्बई इंडियंस के महज 98 रन पर ढेर हो जाने के बाद सचिन ने पिच को दोषी ठहराया था और टीम फ्रेंचाइजी ने बीसीसीआई में इसकी शिकायत भी दर्ज कराई थी। अगले ही मैच में सचिन के सस्ते में आउट होने के बाद दीक्षित ने उन पर व्यंग्यात्मक टिप्पणी की थी जिसे लेकर मीडिया में काफी बवाल खड़ा हो गया था।

क्रिकेट का अच्छा माहौल बने
हम अध्यक्ष सी.पी. जोशी के नेतृत्व में क्रिकेट की बेहतरी के लिए कार्य करेंगे। हम सभी जिला संघों को साथ लेकर कर चलेंगे। हमारा प्रयास रहेगा कि बेहतर तरीके से क्रिकेट चले और प्रदेश में खेल का अच्छा माहौल बने। के.के. शर्मा,कार्यवाहक सचिव आरसीए

पीयूष् कुलश्रेष्ठ 


३१ जुलाई:सरदार उधम सिंह का शहीदी दिवस


- अरविन्द सिसोदिया 
३१ जुलाई हमारे महान शहीदों में से एक सरदार उधम सिंह का शहीदी दिवस है , उन्होंने तेरह अप्रैल 1919 को अमृतसर में बैसाखी के दिन हुए 'जलियांवाला बाग नरसंहार' का बदला लिया |  नरसंहार के समय ओ.ड्वायर ही पंजाब प्रांत का गवर्नर था तथा  उसीके आदेश पर ब्रिगेडियर जनरल रेजीनाल्ड डायर ने जलियांवाला बाग में सभा कर रहे निर्दोष भारतवासियों  पर अंधाधुंध गोलियां बरसाईं थीं. जिसमें  १८०० लोग शहीद हुए थे!! उधम सिंह ने इस नरसंहार की अपनी बदला लेने की प्रतिज्ञा को लन्दन में १३ मार्च १९४० को ओ.ड्वायर को गोली मार कर हत्या कर पूरी की ! ३१ जुलाई १९४० में उन्हें फंसी दे दी  गई थी !! उन्होंने भारत माता की कोख का मान बढाया वे सदियों तक स्मरणीय रहेंगें..!! 
-------
पूरी स्टोरी जागरण के  इस लिंक से ली गई है ...
शहीद-ए-आजम ऊधम सिंह एक ऐसे महान क्रांतिकारी थे जिन्होंने जलियांवाला बाग हत्याकांड का बदला लेने के लिए अपना जीवन देश के नाम कुर्बान कर दिया। लंदन में जब उन्होंने माइकल ओ. ड्वायर को गोली से उड़ाया तो पूरी दुनिया में इस भारतीय वीर की गाथा फैल गई।
तेरह अप्रैल 1919 को अमृतसर में बैसाखी के दिन हुए नरसंहार के समय ओ.ड्वायर ही पंजाब प्रांत का गवर्नर था। उसी के आदेश पर ब्रिगेडियर जनरल रेजीनाल्ड डायर ने जलियांवाला बाग में सभा कर रहे निर्दोष लोगों पर अंधाधुंध गोलियां बरसाई थीं। 26 दिसंबर 1899 को पंजाब के संगरूर जिले के सुनाम गांव में जन्मे ऊधम सिंह ने जलियांवाला बाग में हुए नरसंहार का बदला लेने की प्रतिज्ञा की थी जिसे उन्होंने अपने सैकड़ों देशवासियों की सामूहिक हत्या के 21 साल बाद खुद अंग्रेजों के घर जाकर पूरा किया।
जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर चमन लाल का कहना है कि ऊधम सिंह एक ऐसे निर्भीक योद्धा थे जिन्होंने अपनी प्रतिज्ञा पूरी कर दुनिया में भारतीयों की वीरता का परचम फहराया। सन 1901 में ऊधम सिंह की मां और 1907 में उनके पिता का निधन हो गया। इस घटना के चलते उन्हें अपने बड़े भाई के साथ अमृतसर के एक अनाथालय में शरण लेनी पड़ी।
ऊधम सिंह के बचपन का नाम शेर सिंह और उनके भाई का नाम मुक्ता सिंह था, जिन्हें अनाथालय में क्रमश: ऊधम सिंह और साधु सिंह के रूप में नए नाम मिले। अनाथालय में ऊधम सिंह की जिंदगी चल ही रही थी कि 1917 में उनके बड़े भाई का भी देहांत हो गया और वह दुनिया में एकदम अकेले रह गए। 1919 में उन्होंने अनाथालय छोड़ दिया और क्रांतिकारियों के साथ मिलकर आजादी की लड़ाई में शामिल हो गए। डा. सत्यपाल और सैफुद्दीन किचलू की गिरफ्तारी तथा रोलट एक्ट के विरोध में अमृतसर के 
जलियांवाला बाग में लोगों ने 13 अप्रैल 1919 को बैसाखी के दिन एक सभा रखी जिसमें ऊधम सिंह लोगों को पानी पिलाने का काम कर रहे थे। इस सभा से तिलमिलाए पंजाब के तत्कालीन गवर्नर माइकल ओ.ड्वायर ने ब्रिगेडियर जनरल रेजीनल्ड डायर को आदेश दिया कि वह भारतीयों को सबक सिखा दे। इस पर जनरल डायर ने 90 सैनिकों को लेकर जलियांवाला बाग को घेर लिया और मशीनगनों से अंधाधुंध गोलीबारी कर दी, जिसमें सैकड़ों भारतीय मारे गए। जान बचाने के लिए बहुत से लोगों ने पार्क में मौजूद कुएं में छलांग लगा दी। बाग में लगी पट्टिका पर लिखा है कि 120 शव तो सिर्फ कुएं से ही मिले। आधिकारिक रूप से मरने वालों की संख्या 379 बताई गई, जबकि पंडित मदन मोहन मालवीय के अनुसार कम से कम 1300 लोग मारे गए थे।
स्वामी श्रद्धानंद के अनुसार मरने वालों की संख्या 1500 से अधिक थी, जबकि अमृतसर के तत्कालीन सिविल सर्जन डाक्टर स्मिथ के अनुसार मरने वालों की संख्या 1800 से अधिक थी। राजनीतिक कारणों से जलियांवाला बाग में मारे गए लोगों की सही संख्या कभी सामने नहीं आ पाई। इस घटना से वीर ऊधम सिंह विचलित हो उठे और उन्होंने जलियांवाला बाग की मिट्टी हाथ में लेकर माइकल ओ.ड्वायर को सबक सिखाने की शपथ ली। ऊधम सिंह अपने काम को अंजाम देने के उद्देश्य से 1934 में लंदन पहुंचे।
वहां उन्होंने एक कार और एक रिवाल्वर खरीदी तथा उचित समय का इंतजार करने लगे। भारत के इस योद्धा को जिस मौके का इंतजार था, वह उन्हें 13 मार्च 1940 को उस समय मिला जब माइकल ओ.ड्वायर लंदन के काक्सटन हाल में एक सभा में शामिल होने के लिए गया। ऊधम सिंह ने एक मोटी किताब के पन्नों को रिवाल्वर के आकार में काटा और उनमें रिवाल्वर छिपाकर हाल के भीतर घुसने में कामयाब हो गए। सभा के अंत में मोर्चा संभालकर उन्होंने ओ.ड्वायर को निशाना बनाकर गोलियां दागनी शुरू कर दीं।
ओ.ड्वायर को दो गोलियां लगीं और वह वहीं ढेर हो गया। इस मामले में 31 जुलाई 1940 को पेंटविले जेल में ऊधम सिंह को फांसी पर चढ़ा दिया गया जिसे उन्होंने हंसते-हंसते स्वीकार कर लिया। 31 जुलाई 1974 को ब्रिटेन ने उनके अवशेष भारत को सौंप दिए।

शनिवार, 30 जुलाई 2011

जिन्ना सनकी थे,पागल थे - माउंटबैटन


- अरविन्द सीसौदिया
माउंटबैटन - जिन्ना सनकी थे,पागल थे,बिलकुल असंभब..!  मैं नहीं समझता हम उनके मरने का इंतजार करते.....न हमारे पास समय था, न हम निश्चित थे,लेकिन हम उनके साथ दूसरों की तरह बहस कर सकते थे। मैंने सोचा था कि मैं एक ऐसे आदमी के साथा पेश आ रहा हमं जो हमेशा बना रहेगा। जिसका लक्ष्य पाकिस्तान है और मैं उसे इस लक्ष्य से हटा नहीं सकता था। एक पल मान लीजिए कि अगर सत्ता के हस्तांतरण के पहले जिन्न मर जाते तो अपने सबसे बउे दुश्मन के हट जानें से कांग्रेस पार्टी निश्चित ही राहत की सांस लेती। बाकी लोगों को सिर्फ जिन्न की छाया माना जाता था। तब हम ऐसे आाधार पर काम करते जहां कांग्रेस को कहीं जादा देनें के लिए तैयार हो जाता और दूसरे लोग उसे स्विकार करते। भयंकर बात है कि हमें कुछ भी नहीं बताया गया। (पृष्ठ 57)
माउंटबैटन - ....अगर जिन्ना दो वर्ष पहले अपनी बीमारी से मर जाते तो हम भारत को एक रख सकते थे। वही थे जिन्होंने इसे असम्भव बना दिया था। जब तक में जिन्ना से मिला नहीं , मैं सोच भी नहीं सकता था कि कितनी असम्भव स्थिति है। (पृष्ठ 60)
जिन्ना- नहीं। मैं भारत का एक हिस्सा नहीं बनना चाहता। हिन्दू राज्य के अधीन होने से तो सब कुछ खो देना पशंद करूंगा। (पृष्ठ 61)
माउंटबैटन - ....जिन्ना की नीचता सब पर जाहीर हो गई। वह सचमुच नीच था। मेरी तो उससे इसलिये निभ गई कि मेरी सबसे निभ जाती हे। उसने एक भी कोशिश नहीं की । मेरे साथ उसने जो सबसे बुरा किया वह यह कि मुझसे कहता रहता कि आप मत जाइए, यहीं बनें रहीए इसलिये कि अगर में चला जाउगा तो उनकी सम्पत्ती उनको नहीं दी जायेगी। कहते हैं कि सत्ता हस्तांतरण के बाद भी में इन्चार्ज बना रहूं।
माउंटबैटन - आजादी के बाद एक वाइसराय के अन्र्तगत दो गर्वनर जनरल नहीं रह सकते थे। अतः तय हुआ कि सत्ता सौंचने के दौरान में दोनों राज्यों का गर्वनर जनरल रहूं। दोनों पक्षों ने यह बात खामोशी से मान ली। मेरे और जिन्ना के स्टाफों में बातचीत हुई। पहले भारतीयों ने सुझाव दिया था कि मैं उनके साथ रहूं। यह आश्चर्य चकित कर देने बाली बात थी कि वे मुझे अपने साथ चाहते हैं।
मैंनें कहा कि अगर जिन्ना भी चाहते हैं कि मैं उनके साथ रहूं तो तरकीब यह होगी कि मैं पाकिस्तान का भी गर्वनर जनरल बनूं। दो घरों में एक ही समय में रहना कष्टकर होता लेकिन में कोशिश करने के लिए तैयार था। लेकिन जिन्ना ने  यहां भी चकमा दिया। आखिरी मौके पर उस आदमी ने जो पाकिस्तान कर शासन करना चाहता था, प्रधानमंत्री का पद न लेकर राज्य के संवैधनिक प्रमुख ( गर्वनर जनरल ) का पद ले लिया जिसके संविधान के अंतर्गत कोई प्रशासकीय अधिकार नहीं था।
माउंटबैटन - ...और इस तरह पाकिस्तान का टूटना पहले से ही निश्चित कर दिया,क्योंकि सम्पत्ती और आबादी पूर्वी बंगाल में थी, वे दूसरों से नफरत करते थे,वे अलग हो गये पूरी तरह। 
........ उत्तर  के छोटे छोटे कबीले भी बिखर जायेंगे। अगर अमरीका उनकी मदद नहीं  करेगा तो जीना मुश्किल हो जायेगा उनका। जिस दिन अमरीका हाथ खींच लेगा , ये लोग खत्म हो जाएंगे। ये कैसे बचेंगे में नहीं जानता। सेना,वायु सेना के बावजूद से भारत के रहमों करम पर रहेंगे। मेंने यह सब जिन्ना को समझाने की कोशिश की ,किन्तु  कोई असर नहीं हुआ। 
( एक पुस्तक “ माउन्टबैटन और  भारत विभाजन” है, जो कि प्रसिद्ध लेखक लैरी कांलिन्स और दामिनिक लैपियर ने लिखी है इसका मुख्य आधार उनके द्वारा ही लिखी गई “ फ्रीडम ऐट मिडनाइट ” का ही संझिप्त रूप है। से ये अंश लिये गये है। यह 2005 में अनु प्रकाशन ,जयपुर से प्रकाशित एवं डा. शाहिद अहमद द्वारा सम्पादित है।
-----
कश्मीर पर पाकिस्तान का पहला हमला भी जिन्ना की सनक थी....
क्या कोई भरोसा करेगा कि जिस कश्मीर समस्या ने पिछले 62 सालों से भारत की नाक में दम कर रखा है उसका मूल कारण पाकिस्तान के कायदा-ए-आजम जिन्ना के कश्मीर में छुट्टी मनाने के आवेदन को अस्वीकार करना था।

एक नादानी जीवन भर का संकट ..

एक नादानी जीवन भर का संकट ..
जयपुर में एक सरकारी  कमर्चारी ने अपनी सारी उम्र की कमाई,आखिरी दिन आखिरी छड़ों में गँवा दी ....!! इस आदमी का बुढ़ापा ख़राब हो गया , न जानें कितने चक्करों के बाद यह सुलझेगा या फंसेगा, भगवान जानें..!! 
------
जयपुर। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की टीम ने देवस्थान विभाग के एक मैनेजर को 11 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए शुक्रवार को उसके ऑफिस में रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। आरोपी मैनेजर ने यह रिश्वत एक समाजसेवी से किसी ट्रस्ट का रजिस्ट्रेशन करने की एवज में ली थी।

एसीबी के एएसपी आशाराम चौधरी ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी भंवरसिंह राजपुरोहित है। वह पुरानी विधानसभा के सामने रामचंद्र जी के मंदिर में स्थित देवस्थान विभाग में मैनेजर है। इस संबंध में निवाई महंत का रास्ता रामगंज बाजार निवासी सामाजिक कार्यकर्ता दुर्गालाल पांचाल ने एसीबी में भंवरसिंह राजपुरोहित के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी, कि वह करीब एक माह पहले नर नारायण सेवा समिति ट्रस्ट के रजिस्ट्रेशन के लिए भंवरसिंह से मिला था।
काफी दिनों तक दुर्गालाल को चक्कर कटवाने के बाद भंवरसिंह ने उसे सेवा पानी की व्यवस्था करने को कहा। बाद में, भंवरसिंह ने दुर्गालाल से ट्रस्ट का रजिस्ट्रेशन करने की एवज में 11 हजार रुपयों की मांग की। इस पर परिवादी दुर्गालाल गुरुवार को देवस्थान के कार्यालय में पहुंचा और भंवरसिंह को ऑफिस में 1 हजार रुपए दे आया। इस बीच दुर्गालाल ने एसीबी में इसकी शिकायत दर्ज करा दी।  
सत्यापन में शिकायत सही पाए जाने पर एएसपी आशाराम चौधरी के नेतृत्व में गठित टीम ने ट्रैप की कार्रवाई की। शुक्रवार दोपहर को दुर्गालाल रिश्वत के 10 हजार रुपए लेकर भंवरसिंह को देने उनके ऑफिस पहुंचा। रिश्वत की राशि देने के बाद दुर्गालाल ज्योंही ऑफिस से बाहर आया। तभी एसीबी की टीम ने भंवरलाल को रंगे हाथों पकड़ लिया।
------
जयपुर. देवस्थान विभाग के एक मैनेजर को एसीबी ने रिटायरमेंट की विदाई पार्टी से चंद घंटे पहले दफ्तर में घूस लेते गिरफ्तार कर लिया। मैनेजर ने ट्रस्ट का रजिस्ट्रेशन करने के लिए 11 हजार रु. लिए थे। एक हजार रुपए वह पहले ले चुका था। एसीबी के एएसपी आशाराम चौधरी ने बताया कि पुरानी विधानसभा के सामने रामचंद्रजी के मंदिर में स्थित देवस्थान विभाग में मैनेजर भंवरसिंह राजपुरोहित के खिलाफ निवाई महंत का रास्ता रामगंज बाजार निवासी दुर्गालाल पांचाल ने एसीबी में शिकायत की थी।

पांचाल ने बताया था कि करीब एक माह पहले नर नारायण सेवा समिति ट्रस्ट के रजिस्ट्रेशन के लिए वे भंवरसिंह से मिले थे। काफी चक्कर कटवाने के बाद भंवरसिंह ने ट्रस्ट का रजिस्ट्रेशन करने की एवज में 12 हजार रु. की रिश्वत मांगी। पांचाल ने गुरुवार को भंवरसिंह को हजार रुपए दे दिए। शुक्रवार दोपहर पांचाल 11 हजार रु. लेकर भंवर के ऑफिस पहुंचा। वहां एक तरफ भंवर के रिटायरमेंट की विदाई पार्टी की तैयारी चल रही थी, वहीं दूसरी ओर वह रिश्वत ले रहा था।

पांचाल दोपहर 3 बजे जैसे ही रिश्वत देकर ऑफिस से बाहर आए, एसीबी की टीम ने भंवरलाल को पकड़ लिया।

गिड़गिड़ाने लगा, कहा- मैंने नहीं ली रिश्वत 

रिश्वत के रुपयों को भंवरसिंह ने ऑफिस की अलमारी में रख दिया था। एसीबी टीम पहुंची तो वह गिड़गिड़ाने लगा। उसने कहा—मैंने रुपए नहीं लिए। मेरे पास रुपए कहां हैं। इस पर एसीबी ने भंवरलाल के हाथ धुलवाए तो गुलाबी रंग छूटने लगा। फिर अलमारी से रुपए बरामद कर अलमारी जब्त कर ली।

काम कराने का वादा किया था 

मैनेजर भंवरसिंह की दुर्गालाल से बातचीत

पांचाल : आपके कहे अनुसार मैं बाकी रकम ले आया हूं। अब ट्रस्ट का रजिस्ट्रेशन हो जाएगा ना।

भंवरलाल : आज मेरा रिटायरमेंट है। तुम्हारा काम करवा दूंगा।

पांचाल : साहब, आपका रिटायरमेंट हो जाएगा तो मेरे काम का क्या होगा? आप मेरी मुलाकात किसी और अधिकारी से करा दो।

भंवरलाल : काम पूरा होने की आप चिंता मत करो। मैं यहां आता रहूंगा। आपका काम हो जाएगा। आप तो कोई और काम हो तो भी बता देना।

मंगलवार, 26 जुलाई 2011

32 पुरूषों की डिलीवरी और हो गए बच्चे...!! एक महिला साल में 24 बार बच्चों को जन्म दे रही है..

गहलोत शासन में :         
       उदयपुर। राजस्थान के उदयपुर में जननी सुरक्षा योजना के तहत मिलने वाले फंड में बड़ी धांधली का मामला सामने आया है। कोटडा कस्बे के गोगंडा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एएनएम ने पैसे के लालच में एक-दो नहीं बल्कि 32 पुरूषों को प्रेग्नेंट बनाकर उनकी फर्जी डिलीवरी करवा दी, पुरुषों के बच्चे हो गए...!!।

दरअसल जननी सुरक्षा योजना के तहत मिलने वाले पैसे से कमीशन पाने के लिए एएनएम ने स्वास्थ्य केंद्र में फर्जी नामों से डिलीवरी करवाई। स्वास्थ्य केंद्र के रिकॉर्डो के अनुसार रूपराम नाम के एक व्यक्ति ने पिछले आठ महीनों के दौरान सात बार डिलीवरी करवाई। इसमें रेखा भाटी नाम की एक एएनएम पर जाली दस्तावेज पेश करने व स्वास्थ्य केंद्र के रिकॉर्डो में धांधली करने का आरोप है। ऎसी ही धांधली करनेे वाले कई मामले हैं लेकिन अब तक किसी के खिलाफ भी मामला दर्ज नहीं हो पाया है।

रिकॉर्डो के अनुसार 60 वर्ष की महिला की साल में दो बाद डिलीवरी हुई जबकि सीता नाम की महिला ने 24 बार डिलीवरी करवाई। इस घोटाले के सामने आने के बाद हालांकि प्रशासन ने वार्ड अधिकाराी को बर्खास्त कर दिया है और जांच के लिए सीनियर डॉक्टरों की टीम बनाई गई है।
---------
उदयपुरराजस्थान में कई स्वास्थ्य केंद्रों पर ऐसी गड़बड़ियां सामने आई हैं कि चौंकना लाजिमी हैं। जहां पुरुष बच्चे पैदा कर रहे हैं तो वहीं एक महिला साल में 24 बार बच्चों को जन्म दे रही है। पुरुषों द्वारा बच्चा पैदा करने की तो 32 घटनाएं दर्ज हैं। इससे साफ जाहिर है कि कहीं न कहीं कुछ गड़बड़ है। इस फर्जीवाड़े को अंजाम दिया गया है जननी सुरक्षा योजना में।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कोटड़ा कस्बे के गो गुंडा सामुदायिक केंद्र में स्थानीय स्वास्थ्य विभाग ने  इस गड़बड़झाले का पता लगाया। इस केंद्र की सहायिकाओं ने जननी सुरक्षा योजना के तहत गरीबी रेखा से नीचे की गर्भवती महिलाओं के लिए निर्धारित सहायता राशि को हड़पने के लिए गलत रिपोर्ट पेश की। अधिकारी ने बताया कि घोटाला उजागर होने के बाद वार्ड प्रमुख को पद से हटा दिया गया है और वह इस समय फरार है। उसने बताया कि विभागीय जांच के बाद शिकायत दर्ज कराई जाएगी। जांच के लिए तीन सीनियर डॉक्टरों की टीम बनाई गई है।

चपरासी के पदों के लिए :पीएचडी, एमबीए और एमसीए डिग्री धारक शामिल

26 जुलाई 2011 
उदयपुर.
सुखाड़िया विश्वविद्यालय में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के 15 पदों के लिए रविवार २४ जुलाई २०११ को भी इंटरव्यू हुए। विभिन्न जिलों के अभ्यर्थियों ने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी बनने के लिए इंटरव्यू दिया। इसमें पीएचडीधारी, एमबीए, एमसीए, मास्टर ऑफ लाइब्रेरी, एमकॉम, एमए के अभ्यर्थी सम्मिलित थे। विश्वविद्यालय में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के लिए दो दिन तक साक्षात्कार प्रक्रिया चली। सुविवि के संघटक आर्ट्स, कॉमर्स, साइंस व एफएमएस कॉलेज में प्रक्रिया सुबह 9 बजे से शुरू हुई जो शाम 6 बजे तक चली। महिला अभ्यर्थी अपने परिजनों के साथ साक्षात्कार देने पहुंची।

15 पद, ढाई हजार अभ्यर्थी :
सुविवि में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के लिए 3440 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। शनिवार से शुरू हुए इंटरव्यू में कुल ढाई हजार अभ्यर्थी उपस्थित रहे। रविवार को इंटरव्यू के लिए 1615 अभ्यर्थियों को बुलाया गया था लेकिन 1137 अभ्यर्थी ही उपस्थित हुए। कॉमर्स कॉलेज में 299, साइंस कॉलेज में 265, आर्ट्स कॉलेज में 286 व एफएमएस कॉलेज में 287 अभ्यर्थियों ने इंटरव्यू दिए।

राज्यभर से आए अभ्यर्थी :
सुविवि प्रवक्ता डॉ. संजय लोढ़ा ने बताया कि रविवार को एफएमएस कॉलेज में तीन पीएचडीधारी, एमसीए पास अभ्यर्थियों ने इंटरव्यू दिए। जबकि कॉमर्स कॉलेज में जोधपुर से एमबीए, एमकॉम, राजस्थान विद्यापीठ से एमएचआरएम के दो छात्र व कोटा ओपन से एमलिब. छात्र इंटरव्यू में सम्मिलित हुए। डॉ. लोढ़ा ने बताया कि इंटरव्यू में अभ्यर्थियों की शॉर्ट लिस्ट तैयार की जा रही है। अगस्त में फाइनल प्रक्रिया होने की संभावना है।

सोमवार, 25 जुलाई 2011

यूपीए२ की सरकार - तू क्यूँ बोला...? चल फंसजा...!!!


- अरविन्द सिसोदिया 

हम पहले भी कई वार लिख चुके हैं की यह सरकार, यूरोप के एक भ्रष्ट और गिरे चरित्र के देश की छाया  में चल रही यू पी ए २ की सरकार , अलीबाबा चालीसा चोर के रास्ते पर चल रही है और इसकी सबसे बड़ी विषेसता यह है की अपने हर विरोधी को यह सी बी आई  और आयकर विभाग के जरिये फंसाने पहुच जाती है की तू क्यूँ  बोला.........??????  चल फंसजा...!!! जगन की बगावत के बाद सी बी आई जा पहुची , बाबा रामदेव के आन्दोलन के बाद सी बी आई जा पहुची.., नितिन गडकरी के बेटे के घर आयकर विभाग जा पंहुचा ....., दिल्ली  पुलिस नोट के बदले  वोट  के मामले को जानबूझ कर भाजपा और सपा को फंसने में लगा है..!  मायावती , मुलायम , लालू को पहले ही उलझा ही रखा है....
------------------------------------------------------
भाजपा ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पी चिदंबरम के त्यागपत्र की मांग की

सोनिया गांधी

नितिन गडकरी ने  कहा, "मैं सोनिया जी से ये पूछना चाहता हूँ कि इस प्रकरण में शामिल दोनों नेताओं पर वे क्या कार्रवाई करेंगी. क्योंकि इन दोनों ने राजनीतिक, वैधानिक और नैतिकता के आधार पर पद पर बने रहने का अधिकार गँवा दिया है."
सोनिया जी से ये पूछना चाहता हूँ कि इस प्रकरण में शामिल दोनों नेताओं पर वे क्या कार्रवाई करेंगी. क्योंकि इन दोनों ने राजनीतिक, वैधानिक और नैतिकता के आधार पर पद पर बने रहने का अधिकार गँवा दिया है
नितिन गडकरी
दूसरी ओर केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने भाजपा की मांग को ख़ारिज करते हुए कहा है कि विपक्ष एक अभियुक्त की बात पर इस्तीफ़े की मांग कर रहा है.
उन्होंने कहा कि इस मामले की सीबीआई जाँच चल रही है और कुछ भी साबित नहीं हुआ है और भाजपा त्यागपत्र की कैसे मांग कर सकती है.
कपिल सिब्बल ने कहा, "भाजपा की मांग दुर्भाग्यपूर्ण है. एक अभियुक्त अपने बचाव में कुछ भी कह सकता है."
कांग्रेस ने भी भारतीय जनता पार्टी की मांग पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है. कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने भाजपा की मांग को ठुकराते हुए कहा कि एक अभियुक्त के बयान पर ऐसी मांग करना बेकार है.

ये कैसे प्रतिमान हुए ,

साथ बहुत लेते लोग..,
साथ देता  कोई नहीं ...,
गर साथ देनें का मौका आये ,
तो शत्रुता की तलवारें उठा लेते लोग,
ये जिन्दगी किससे  करें मित्रता ,
इस वेश में तो शत्रुता के  शिवा कोई नहीं ...! 
-------
ये  कैसे प्रतिमान हुए  ,
खलनायक भगवान हुए, 
बगिया के परिजीवी पौधे ,
सबके सब धनवान हुए ,
उस घर का क्या होगा ,
जिसके मुखिया बेईमान हुए ! 
-  महेंद्र नेह जी , कोटा .



रविवार, 24 जुलाई 2011

कैलाश मानसरोवर यात्रा क्षेत्र का विकास, संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम योजना से...




विपुल गोयल, संवाददाता, उत्तराखण्ड़
भारतनेपाल और चीन तीनों देशों से जुड़ी कैलाश मानसरोवर यात्रा क्षेत्र का विकास अब तीनों देश मिलकर करेंगे संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम( यूएनईपी) की 13 वर्षों की इस महत्वाकांक्षी योजना पर काम शुरू हो गया है इसके लिये यूएनईपी 70करोड़ रूपए खर्च करेगा इस योजना में तीनों देशों के यात्रा क्षेत्र से जुड़े इलाकों में पर्यावरण संरक्षणऐतिहासिक धरोहरों के संवर्धन और संरक्षणवन्य जीवों की सुरक्षा व्यापार व स्थानीय लोगों की आजीविका सुधार के कार्यक्रम चलाये जायेंगे संयुक्त योजना को मूर्त रूप देने के लिये तीनों देशों के अधिकारियों की दो कार्यशालाएं हो चुकी है 
भारतनेपाल और चीन की सीमा से जुड़े कैलाश मानसरोवर क्षेत्र तीनों देशों के लिए काफी मत्वपूर्ण क्षेत्र हैभारत में बसे हिन्दुओं व तिब्बती बौद्धों की आस्था भी यहाँ से जुड़ी है यूएनईपी ने तीनों देशों के कहीं न कहीं इस क्षेत्र से जुड़े होने के कारण इस योजना पर कार्य शुरू किया है इसके लिये कैलाश मानसरोवर क्षेत्र संरक्षण की योजना पर तीनों देशों के साथ तैयारी की जा रही है इस योजना में भारत की सीमावर्ती जनपद पिथौरागढ़ व बागेश्वर के क्षेत्र के अलावा नेपाल के दार्चुला और करनाली और चीन के तकलाकोट क्षेत्र को शामिल किया गया है।  हाल ही में तीनों देशों के अधिकारियों की चीन के चैगई-जोशाईगु में कार्यशाला संपन्न हुई है इस कार्यशाला में भारतीय वन सेवा के अधिकारी मनोज चंद्रन ने हिस्सा लिया लौटने पर मनोज चंद्रन ने बताया कि तीनों देश मिलकर  यूएनईपी के सहयोग से इस योजना पर काम करेंगे 13 वर्षों तक चलने वाली ये योजना 2023 में समाप्त होगी तीनों देश अपने-अपने क्षेत्र की जरुरत के हिसाब से पर्यावरण संरक्षणसंस्कृति,व्यापार व वन्य जीव संरक्षण के साथ-साथ ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षणस्थानीय लोगो की आजीविका व पर्यटन आदि को ध्यान में रखते हुए एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेंगे इस रिपोर्ट के साथ काठमांडू में अंतिम बैठक होगी उसके बाद यूएनईपी के मुख्यालय नैरोबी में तीनों देशों की रिपोर्ट के आधार पर अंतिम रूप दिया जायेगा इस योजना पर 2012 तक क्षेत्रों में काम शुरू हो जायेगा 
भारत में इस योजना के लिये जी बी पन्त पर्यावरण संस्थान कोसी कटारमलनेपाल की त्रिभुवन यूनिवर्सिटी और चीन में सीनियर एकेडमी आफ साइंसेज नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करेंगे केंद्री स्तर पर इंटरनेशनल कमेटी आफ इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमैंट( आईसीआईएमओडी) को जिम्मेदारी दी गयी है

शनिवार, 23 जुलाई 2011

चन्द्रशेखर आज़ाद : शहादत को सलाम

- अरविन्द सिसोदिया
          एच०एस०आर०ए० द्वारा किये गये साण्डर्स-वध और दिल्ली एसेम्बली बम काण्ड में फाँसी की सजा पाये तीन अभियुक्तों- भगत सिंहराजगुरुव सुखदेव ने अपील करने से साफ मना कर ही दिया था। अन्य सजायाफ्ता अभियुक्तों में से सिर्फ ३ ने ही प्रिवी कौन्सिल में अपील की। ११ फरवरी १९३१ को लन्दन की प्रिवी कौन्सिल में अपील की सुनवाई हुई। इन अभियुक्तों की ओर से एडवोकेट प्रिन्ट ने बहस की अनुमति माँगी थी किन्तु उन्हें अनुमति नहीं मिली और बहस सुने बिना ही अपील खारिज कर दी गयी। चन्द्रशेखर आज़ाद ने मृत्यु दण्ड पाये तीनों प्रमुख क्रान्तिकारियों की सजा कम कराने का काफी प्रयास किया। वे उत्तर प्रदेश की सीतापुर जेल में जाकर गणेशशंकर विद्यार्थी से मिले। विद्यार्थी से परामर्श कर वे इलाहाबाद गये और जवाहरलाल नेहरूसे उनके निवास आनन्द भवन में भेंट की। आजाद ने पण्डित नेहरू से यह आग्रह किया कि वे गांधी जी पर लॉर्ड इरविन से इन तीनों की फाँसी को उम्र- कैद में बदलवाने के लिये जोर डालें। नेहरू जी ने जब आजाद की बात नहीं मानी तो आजाद ने उनसे काफी देर तक बहस भी की। इस पर नेहरू जी ने क्रोधित होकर आजाद को तत्काल वहाँ से चले जाने को कहा तो वे अपने तकियाकलाम 'स्साला' के साथ भुनभुनाते हुए ड्राइँग रूम से बाहर आये और अपनी साइकिल पर बैठकर अल्फ्रेड पार्क की ओर चले गये। अल्फ्रेड पार्क में अपने एक मित्र सुखदेव राज से मन्त्रणा कर ही रहे थे तभी सी०आई०डी० का एस०एस०पी० नॉट बाबर जीप से वहाँ आ पहुँचा। उसके पीछे-पीछे भारी संख्या में कर्नलगंज थाने से पुलिस भी आ गयी। दोनों ओर से हुई भयंकर गोलीबारी में आजाद को वीरगति प्राप्त हुई। यह दुखद घटना २७ फरवरी १९३१ के दिन घटित हुई और हमेशा के लिये इतिहास में दर्ज हो गयी।
पुलिस ने बिना किसी को इसकी सूचना दिये चन्द्रशेखर आज़ाद का अन्तिम संस्कार कर दिया था। जैसे ही आजाद की शहादत की खबर जनता को लगी सारा इलाहाबाद अलफ्रेड पार्क में उमड पडा। जिस वृक्ष के नीचे आजाद शहीद हुए थे लोग उस वृक्ष की पूजा करने लगे। वृक्ष के तने के इर्द-गिर्द झण्डियाँ बाँध दी गयीं। लोग उस स्थान की माटी को कपडों में शीशियों में भरकर ले जाने लगे। समूचे [[शहर] में आजाद की शहादत की खबर से जब‍रदस्त तनाव हो गया। शाम होते-होते सरकारी प्रतिष्ठानों प‍र हमले होने लगे। लोग सडकों पर आ गये।
आज़ाद के शहादत की खबर जवाहरलाल नेहरू की पत्नी कमला नेहरू को मिली तो उन्होंने तमाम काँग्रेसी नेताओं व अन्य देशभक्तों को इसकी सूचना दी। । बाद में शाम के वक्त लोगों का हुजूम पुरुषोत्तम दास टंडन के नेतृत्व में इलाहाबाद के रसूलाबाद शमशान घाट पर कमला नेहरू को साथ लेकर पहुँचा। अगले दिन आजाद की अस्थियाँ चुनकर युवकों का एक जुलूस निकाला गया। इस जुलूस में इतनी ज्यादा भीड थी कि इलाहाबाद की मुख्य सडकों पर जाम लग गया। ऐसा लग रहा था जैसे इलाहाबाद की जनता के रूप में सारा हिन्दुस्तान अपने इस सपूत को अंतिम विदाई देने उमड पडा हो। जुलूस के बाद सभा हुई। सभा को शचीन्द्रनाथ सान्याल की पत्नी प्रतिभा सान्याल ने सम्बोधित करते हुए कहा कि जैसे बंगाल में खुदीराम बोस की शहादत के बाद उनकी राख को लोगों ने घर में रखकर सम्मानित किया वैसे ही आज़ाद को भी सम्मान मिलेगा। सभा को कमला नेहरू तथा पुरुषोत्तम दास टंडन ने भी सम्बोधित किया। इससे कुछ ही दिन पूर्व ६ फरवरी १९२७ को पण्डित मोतीलाल नेहरू के देहान्त के बाद आज़ाद भेष बदलकर उनकी शवयात्रा में शामिल हुए थे पर उन्हें क्या पता था कि इलाहाबाद की इसी धरा पर कुछ दिनों बाद उनका भी बलिदान होगा!
---------
आज़ाद के प्रशंसकों में पण्डित मोतीलाल नेहरूपुरुषोत्तमदास टंडन का नाम शुमार था। जवाहरलाल नेहरू से आज़ाद की भेंट आनन्द भवन में हुई थी उसका ज़िक्र नेहरू ने अपनी आत्मकथा में 'फासीवादी मनोवृत्ति' के रूप में किया है। इसकी कठोर आलोचना मन्मथनाथ गुप्त ने अपने लेखन में की है। कुछ लोगों का ऐसा भी कहना है कि नेहरू ने आज़ाद को दल के सदस्यों को समाजवाद के प्रशिक्षण हेतु रूस भेजने के लिये एक हजार रुपये दिये थे जिनमें से ४४८ रूपये आज़ाद की शहादत के वक़्त उनके वस्त्रों में मिले थे। सम्भवतः सुरेन्द्रनाथ पाण्डेय तथा यशपाल का रूस जाना तय हुआ था पर १९२८-३१ के बीच शहादत का ऐसा सिलसिला चला कि दल लगभग बिखर सा गया। जबकि यह बात सच नहीं है।चन्द्रशेखर आज़ाद की इच्छा के विरुद्ध जब भगत सिंह एसेम्बली में बम फेंकने गये तो आज़ाद पर दल की पूरी जिम्मेवारी आ गयी। साण्डर्स वध में भी उन्होंने भगत सिंह का साथ दिया और बाद में उन्हें छुड़ाने की पूरी कोशिश भी की । आज़ाद की सलाह के खिलाफ जाकर यशपाल ने २३ दिसम्बर १९२९ को दिल्ली के नज़दीक वायसराय की गाड़ी पर बम फेंका तो इससे आज़ाद क्षुब्ध थे क्योंकि इसमें वायसराय तो बच गया था पर कुछ और कर्मचारी मारे गए थे। आज़ाद को २८ मई १९३० को भगवतीचरण वोहरा की बम-परीक्षण में हुई शहादत से भी गहरा आघात लगा था । इसके कारण भगत सिंह को जेल से छुड़ाने की योजना भी खटाई में पड़ गयी थी। भगत सिंहसुखदेव तथा राजगुरु की फाँसी रुकवाने के लिए आज़ाद ने दुर्गा भाभी को गाँधीजी के पास भेजा जहाँ से उन्हें कोरा जवाब दे दिया गया था। आज़ाद ने अपने बलबूते पर झाँसी औरकानपुर में अपने अड्डे बना लिये थे । झाँसी में मास्टर रुद्र नारायण, सदाशिव मलकापुरकर, भगवानदास माहौर तथा विश्वनाथ वैशम्पायन थे जबकि कानपुर में पण्डित शालिग्राम शुक्ल सक्रिय थे। शालिग्राम शुक्ल को १ दिसम्बर १९३० को पुलिस ने आज़ाद से एक पार्क में मिलने जाते वक्त शहीद कर दिया था।
http://hi.wikipedia.org

शुक्रवार, 22 जुलाई 2011

23 जुलाई : जन्म तिथि : चन्द्रशेखर आजाद





- अरविन्द सीसौदिया
मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले में स्थित रियासत अलीराजपुर के ग्राम भादरा में माता जगरानी देवी की कोख से जन्में चन्द्रशेखर तिवारी उर्फ चन्दू के पिता सीताराम तिवारी थे। सीताराम तिवारी मूलतः उत्तरप्रदेश के उन्नव जिला स्थित बदरका के थे तथा दुर्भिक्ष अकाल के दौरान भादरा आ गये थे। डा.भगवानदास माहौर और सदासिव मल्कापुर ने भादरा जा कर आजाद की माताजी जगरानी देवी को ढॅढकर , अपने साथ झांसी में रखा था तथा खूब सेवा की थी। माता जगरानी के क्षरा ही पुत्र चन्दू की जन्म तिथि तय की गई जो सावनी दूज सोमवार अर्थात 23 जुलाई 1906 की तारीख होती है।

प्रसिद्ध क्रांतीकारी विश्वनाथ वैशम्पायन अपने अन्य साथियों के साथ, आजाद की शहादत के बाद ,उनसे भादरा जा कर मिले थे व कुछ दिन उनकी माता जी के साथ रहे थे। वे रतलाम से दोहाद पहुचे थे वहां से बस द्वारा अलीराजपुर रियासत के भादरा गांव में पंहुचे थे जो कि कुकसी नदी के किनारे बसा हुआ , भील जनजाती बहुल क्षैत्र है।

चंद्रशेखर बचपन से ही साहसी प्रकृति के थे, वे वनारस में संस्कृत का अध्ययन करने गये थे तब 15 वर्ष की किशोर आयु में उन्हे सरकार के विरूद्ध महात्मा गांधी के किसी आंदोलन के पक्ष में प्रचार करते हुए गिरिफतार कर लिया गया था। जब उन्हे मजिस्टैट के समझ प्रस्तुत किया गया । मजिस्टैट पारसी बिरादरी के थे खरेघाट। जब खरेघाट ने उनसे उनका नाम पूछा जो वे बोले - आजाद, पिता का नाम पूछा तो वे बोले - स्वाधीन,जब निवास पूछा तो वे बोले - जेलखाना ....! इस पर मजिस्टैट ने चिढ कर 15 बेंत की अतिरिक्त सजा सुनाई थी, जो कि बहुत कष्टदायक थी। तभी से वे क्रांतिकारियों के बीच आजाद नाम से ख्याती प्राप्त हुए।
आजाद तबसे भारतमाता की सेवा तल्लीन हो गये,साहस और सटीक व्यूह रचना के कारण, कुछ ही समय में उत्तर भारत के क्रांतिकारियों के नेता बन गये। उनकी क्षमता और गुणबत्ता इसी से साबित होती है कि 7 साल तक सक्रीय क्रांतीकारी रहे और उनका मार्गदर्शन शहीद भगतसिंह ने भी स्विकार किया।

दुश्मन की गोलियों का सामना करेंगे।
आजाद ही रहे और आजाद ही मरेंगे।।

वे हमेशा अपने साथियों से कहते थे, पुलिस की पक डमें आने से बेहतर है कि हम अपने आप को गोली मार लें। यह उन्होने किया भी,जब 27 फरवरी 1931 को इलाहबाद में एल्फे्रड पार्क में वे पुलिस से घिर गये तो उन्होने साहस पूर्वक दुश्मन का मुकाबला किया और आखिरी गोली अपनी कनपाटी में मारकर शहादत दी। देश उन्हे सदा ही शहीद भगतसिंह की बराबरी के साथ याद करता है और याद करता रहेगा।
---

चंद्रशेखर आजाद को उनकी पुण्यतिथि पर नमन...
बताता चलू की कम लोग इस बात को जानते हैं की चंद्रशेखर आजाद की मुखबिरी करने वाले हमारे प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु थे.. फेसबुक पर तर्क और सबूत के साथ बात करने की दुहाई देने वाले सेक्युलर नाम के हिंदू और देश द्रोहियो से बस एक सवाल,,,,, जिस महान चंद्र शेखर आज़ाद को पूरी ब्रिटिश सरकार पूरी दुनिया मे कई साल खोजने के बाद पकड़ना तो दूर उसकी एक फोटो तक ना खोज पाई.....उसी महान भारत माता के सपूत को ब्रिटिश सरकार ने ३ भाग खंडित भारत के सब से बड़े ज़िम्मेदार जवाहर लाल नेहरू के घर से बस कुछ कदम की दूरी पर कैसे खोज लिया जिस मे भारत माता का सब से बहादुर सपूत वीरगति को प्राप्त हुआ ??? क्या इसमे उस गद्दार की मुखबिरी और साजिश की बू नही आती ????? तर्क ये है की चंद्र शेखर जी के जीते जी भारत के 3 टुकड़े करने के सपने पालने वाले के 300 टुकड़े हो जाते..... इसलिए महान आज़ाद जी की वीरगति की अंग्रेज़ो से ज़यादा जल्दी भारत के उस गद्दार को थी जिस के मन मे सिर्फ़ और सिर्फ़ भारत की सत्ता पाने की इच्छा थी...जैसे आज कल हर कांग्रेसी मे है....भले ही उस का अंजाम भारत और हिंदुत्व के विनाश के रूप मे सामने आए.... 25 साल की उम्र में भारत माता के लिए शहीद होने वाले इस महापुरुष के बारें में जितना कहा जाए उतना कम है. अपने पराक्रम से उन्होंने अंग्रेजों के अंदर इतना खौफ पैदा कर दिया था कि उनकी मौत के बाद भी अंग्रेज उनके मृत शरीर को आधे घंटे तक सिर्फ देखते रहे थे, उन्हें डर था कि अगर वह पास गए तो कहीं चन्द्रशेखर आजाद उन्हें मार ना डालें. वीरता के ऐसे नमूने कम ही देखने को मिलते हैं

गुरुवार, 21 जुलाई 2011

झूठ कौन बोल रहा है...प्रधानमंत्री,विकिलीक्स या गिरिफ्तार आरोपी....?




- अरविन्द सीसौदिया
अब लगभग यह स्पष्ट हो चुका है कि नोट के बदले वोट में मामले में कांग्रेस और सपा नेता अमरसिंह ने सांसदों को खरीदा था। दिल्ली पुलिस ने न्यायालय की लताड के बाद कार्यवाही प्रारम्भ की दो गिरिफतारी हुईं हैं। मामला प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह और यूपीए 1 सरकार के विरूद्ध है। लगता नहीं है कि तह तक जांच जायेगी। जांच तह तक जानी होती तो इसका स्टिंग आपरेशन करने वाले चैनल से पूछताछ में सबसे ज्यादा जानकारी हांसिल हो सकती थी। खैर सवाल यह है कि जब विकिलीक्स का खुलासा आया था कि नोट के बदले वोट का प्रयास हुआ था। तब प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह ने इंकार किया था। 
अब फिर से 
पीएम के करीबी और कांग्रेस के नेता 
अहमद पटेल का नाम आया है। अब प्रधानमंत्री क्या कहेंगे।
  

-------------------
दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की टीम
नई दिल्ली.  सुप्रीम कोर्ट के आदेश की रोशनी में नोट के बदले वोट मामले की जांच कर रही दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की टीम ने सुहैल हिंदुस्तानी को गिरफ्तार कर लिया। भारतीय जनता युवा मोर्चा के कार्यकर्ता रह चुके सुहैल हिंदुस्तानी की इस डील में भूमिका थी। उसकी गिरफ्तारी के बाद अब कैश फॉर वोट जांच की गाज समाजवादी पार्टी के पूर्व महासचिव अमर सिंह पर गिर सकती है। दिल्ली पुलिस अमर सिंह से कभी भी पूछताछ कर सकती है।
सुहैल ने सांसदों की खरीद फरोख्त के मामले में अमर सिंह के साथ ही सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल का भी नाम लिया है। हिंदुस्तानी ने दावा किया था कि उसका रोल विश्वास मत के दौरान बीजेपी सांसदों की खरीद फरोख्त की कोशिश का पर्दाफाश करने तक सीमित था।
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच इसी मामले में सुहैल हिंदुस्तानी के पहले संजीव सक्सेना की भी गिरफ्तारी कर चुकी है। संजीव सक्सेना के पूर्व में अमर सिंह से रिश्ते रहे हैं और उसने ही एक करोड़ की रकम बीजेपी सांसद अशोक अर्गल के आवास 4 फिरोजशाह रोड पर पहुंचाई थी।
 सूत्रों के मुताबिक क्राइम ब्रांच को 21 और 22 जुलाई 2008 को संजीव सक्सेना और अमर सिंह के बीच हुई बातचीत के सबूत मिल चुके हैं। गौर करने वाली बात है कि 22 जुलाई 2008 को यूपीए 1 की सरकार को संसद में विश्वास मत का सामना करना था।
 जानकारी के मुताबिक संजीव सक्सेना और अमर सिंह के रिश्तों से जुड़े कुछ ऐसे तथ्य क्राइम ब्रांच की जानकारी में आए हैं जो अमर सिंह की मुश्किलें बढ़ा सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक दिल्ली पुलिस को संजीव के मोबाइल नंबर 9811721499 से अहम जानकारियां मिली हैं। 21 और 22 जुलाई को संजीव की इस नंबर से अमर सिंह के घर के नंबर 01124616827 पर कई बार बातचीत हुई। इतना ही नहीं उस दौरान संजीव सक्सेना के कॉल डिटेल रिकार्ड की लोकेशन भी अमर सिंह की भूमिका पर उंगलियां उठा रही है।
सक्सेना जिस सफेद जिघ्सी से बीजेपी सांसद अशोक अर्गल के घर पहुंचा था, वो कार मेसर्स पंकजा आर्ट एंड क्रेडिट के नाम रजिस्टर्ड है जो अमर सिंह की पारिवारिक कंपनी है। इस कंपनी का पता ग्रेटर कैलाश-2, ई-593 है जो अमर सिंह के निजी आवास का पता है। ये वे सारे सबूत हैं जो इस डील में अमर सिंह के रोल को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं।
ये कहा सुहैल ने
नोट के बदले वोट कांड में अमर सिंह की मुख्य भूमिका रही। अमर सिंह ने अहमद पटेल का इस्तेमाल किया।
मैंने अमरसिंह और पटेल का साथ दिया।
पीएम के करीबी और कांग्रेस के नेताओं ने मुझे फोन किया था।
सच्चाई का पता लगाने के लिए मेरा और अमर सिंह का नारको टेस्ट कराइए। संभव हो तो पीएम का भी नारको परीक्षण कीजिए।
फोन करने वालों ने कहा कि तुम भाजपा के साथ क्यों हो? हमारे साथ आओ तुम्हें बड़ी पोस्ट देंगे।
उन्होंने कहा कि यदि तुम एक एमपी ले आते हो तो हम तुम्हें 5 से 10 करोड़ बतौर कमीशन देंगे।
सुहैल ने आरोप लगाया कि अमर सिंह प्रधानमंत्री मनमोहन के निर्देश पर काम कर रहे थे और सरकार बचाने में अहमद पटेल भी उनके साथ थे।
ये था मामला
22 जुलाई 2008 को यूपीए-1 की सरकार को संसद में विश्वास मत का सामना करना था। विश्वासमत से चंद मिनट पहले भाजपा सांसद अशोक अर्गल महावीर भगोरा व फगन सिंह कुलस्ते ने लोस में नोटों की गड्डियां लहराई थीं। इन्होंने कांग्रेस पर अपने पक्ष में मतदान करने के लिए घूस देने का आरोप लगाया था।
अमर सिंह समेत चार नेताओं की जांच की इजाजत
डीएनए नेटवर्क. नई दिल्ली.  गृह मंत्रालय ने बुधवार को नोट के बदले वोट के मामले में दिल्ली पुलिस को अमर सिंह समेत दो वर्तमान और दो पूर्व सांसदों की जांच की इजाजत दे दी है। मंत्रालय ने यह निर्णय बुधवार की देर शाम गृहमंत्री पी चिदंबरम से पुलिस कमिश्नर बीके गुप्ता की मुलाकात के बाद किया है।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि अमर सिंह के अलावा समाजवादी पार्टी के सांसद रेवती रमन सिंह और भाजपा के पूर्व सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते और महावीर भगौरा से भी इस मामले में पूछताछ की जाएगी। उम्मीद है कि इन नेताओं से अगले दो-तीन दिनों के अंदर पूछताछ की जाएगी।
माना जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा मामले की जांच की गति धीमी होने के इशारे के बाद इन नेताओं की जांच करने की तैयारी की गई है। उल्लेखनीय है कि विशेषाधिकार के कारण सांसदों से पूछताछ या किसी जांच के लिए पुलिस को सरकार से इजाजत लेनी पड़ती है।

---------------------------------




PM ने नकारा वोट के बदले नोट का आरोप
18 Mar 2011, 1430 hrs IST, पीटीआई

प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार सांसदों को वोट के बदले रिश्वत के आरोपों को खारिज करती है
नई दिल्ली: विकिलीक्स द्वारा वोट के बदले नोट के खुलासे के बाद इस मामले में हो-हल्ला मचाने के लिए
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने विपक्ष को ही आड़े हाथों लिया। विपक्षा के भारी दबाव पर लोकसभा में प्रधानमंत्री ने कहा कि विकिलीक्स के संदेशों की सत्यता की पुष्टि नहीं की जा सकती है। उन्होंने कहा कि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि विपक्ष ऐसे मुद्दे को उठा रहा है, जिस पर चर्चा हो चुकी है और जनता उसे खारिज भी कर चुकी है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार सांसदों को वोट के बदले रिश्वत के आरोपों को खारिज करती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस या सरकार की ओर से कोई भी इस तरह की गैरकानूनी कार्रवाई में लिप्त नहीं था। उन्होंने कहा कि विकिलीक्स केबल और उनमें दी गई सामग्री की सरकार पुष्टि नहीं कर सकती। सरकार रिश्वत के आरोप को पूरी तरह नकारती है। जिन लोगों के इसमें नाम आए हैं, उन्होंने भी इसका खंडन किया है।

उन्होंने कहा कि 14वीं लोकसभा में विश्वास मत हासिल करने के लिए रिश्वत दिए जाने के आरोपों की जांच के लिए सदन की एक समिति गठित की थी और उसने भी कहा था कि इसके पर्याप्त सबूत नहीं हैं।

इससे पहले सुबह एक प्रोग्राम में प्रधानमंत्री ने कहा कि यूपीए सरकार को बचाने के लिए 2008 में विश्वास मत के दौरान उन्हें किसी भी तरह की सौदेबाजी की जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि न तो वह इसमें शामिल थे और न ही उन्होंने किसी को भी वोट खरीदने के लिए अधिकृत किया था।

गौरतलब है कि एक न्यूज पेपर में छपी रिपोर्ट के अनुसार, विकिलीक्स द्वारा लीक किए गए अमेरिकी संदेशों में कहा गया है कि भारत-अमेरिका परमाणु समझौते पर 2008 में हुए विश्वास मत के दौरान कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकार को बहुमत में बनाए रखने के लिए सांसदों को रिश्वत दी गई थी।

इस संदेश में कांग्रेस नेता सतीश शर्मा के एक राजनीतिक सहयोगी नचिकेता कपूर के हवाले से कहा गया है कि सांसदों को रिश्वत के रूप में देने के लिए 50 करोड़ रुपये जुटाए गए थे।

दूसरी तरफ अमेरिका ने इस मामले में कोई भी टिप्पणी करने से इंकार कर दिया है। अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता मार्क टोनर ने कहा,'यह नहीं कहने जा रहा हूं कि ये संदेश गोपनीय थे या नहीं लेकिन निश्चित रूप से यदि ये गोपनीय थे तो हम इसके बारे में कुछ भी नहीं बोलेंगे। हम इस पर किसी भी तरह की कोई भी टिप्पणी नहीं करेंगे।'