गुरुवार, 7 जुलाई 2011

सम्पूर्ण हिन्दू समाज का मनोबल बडा है- राजेन्द्र प्रसाद द्विवेदी


          कोटा 10 जून।राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ की 85 वषों की साधना के फलस्वरूप हिन्दू समाज जाग्रत , क्रियाशील और संगठित हुआ है। संघ कार्य में प्रभावीवृद्धि हुई है। समाज के प्रत्येक क्षैत्र में संघ के स्वंयसेवक प्रभावी भूमिका निभा रहे है। हिन्दू समाज ने श्रीराम जन्मभूमि , रामसेतु और बाबा अमरनाथ से जुडे तीन बडे संर्घषों में संगठन शक्ति के बल पर सफलता पाई है।यह तथ्य राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के राजस्थान क्षैत्र के क्षैत्रीय सम्पर्क प्रमुख राजेन्द्र प्रसाद द्विवेदी ने कोटा में प्रथम वर्ष ,संघ शिक्षा वर्ग के समापन समारोह को सम्बोधित करते हुए कहे।
          उन्होने कहा “ जिस हिन्दू समाज का संगठन करना मजाक का विषय समक्षा जाता था,उस सोये हिन्दू समाज को जाग्रत कर एक जुट करने का चमत्कार संघ ने कर दिखया है। संघ की स्थापना से लेकर आज तक 85 साल की साधना में सफलता के कई आयाम जुडे हैं। संघ देश में अनुशासन और देशभक्ती का वातावरण देखना चाहता है और इस दिशा में उसका अभियान जारी है।” मुख्यवक्ता ने कहा संघ की साधना व्यर्थ नहीं जा रही ,बल्कि परिणाम खडे कर रही हे।
         द्विवेदी ने विस्तारपूर्वक बताया कि अयोध्या में बाबरीढाचा हिन्दू समाज को गर्दन झुकाने को मजबूर करता था,आंख झुका कर वहां जाना होता था। अब वहां बाबरी ढांचा नहीं है,श्रीराम मंदिर है, उसे भव्य बनाने का कार्य भी आगे पूरा हो ही जायेगा। यह हिन्दू समाज के संगठित होनें से ही संभव हुआ। इसी प्रकार हिन्दुओं का पवित्र आस्था केन्द्र रामसेतु तोडा जाना प्रारम्भ हो गया था,पूरे देश में दो घंटे का चक्काजाम हुआ और रामसेतु तोडा जाना बंद हो गया । इसी प्रकार जम्मू-कश्मीर सरकार ने पवित्र बाबा अमरनाथ यात्रा से जुडी शाइनबोर्ड को दी गईं विकास सुविधाओं की योजना कुछ कटटरपंथियों के दबाव में वापस ले ली गईं थी, तब 2 महीनें तक कर्फयू में वहां हिन्दू समाज ने संर्घष किया, 2-2 लाख महिलायें बच्चे संर्घष में जुटे,अभूतपूर्व आंदोलन के द्वारा सफलता हांसिल की गई। उन्होने कहा इन सफलताओं से सम्पूर्ण हिन्दू समाज का मनोबल बडा है।
          उन्होने कहा समाज को दुष्टों की दुष्टता से कहीं अधिक क्षति सज्जनों की उदासीनता से पहुचती है। सज्जन समाज में 90 प्रतिशत होते हैं जबकि दुर्जनों की संख्या 10 प्रतिशत से भी कम होती है। किन्तु वे अधिक सक्रीयता से प्रभावित करते है। समाज को सबल होने के लिये सज्जनों की प्रभावी सक्रीयता होनी चाहिये, इसमें निरंतर क्रियाशीलता की आवश्यकता है। द्विवेदी ने कहा देशभक्ती की आग जलती रहनी चाहिये , स्वंयसेवक वही जो निरंतर क्रियाशील हो। क्रियाशीलता को जगायें और मातृभूमि को परम वैभव पर पहुवानें कर स्वप्न साकार करें।
         उन्होने कहा हमेशा सत्य की विजय होती है, दुर्जन हमेशा हारता है,श्रीराम ने रावण को , श्रीकृष्ण ने कंस को और प्रहलाद ने हिरण्यकश्यपु को पराजित किया । रावण , कंस और हिरण्यकश्यपु राजा थे ,सत्ताशीन थे , सभी शक्तियां उनके पास थीं। जबकि राम,कृष्ण और प्रहलाद उनके सामने कुछ भी नहीं थे मगर वे सत्य के मार्ग पर थे और ध्येय के प्रति सक्रीयता से अंन्ततः उनकी विजय हुई। 
द्विवेदी ने संघ कार्यों के विस्तार के वारे में बताते हुये कहा “ संघ के कार्या का आंकलन मात्र संघ की शाखायें गिनने से नहीं हो सकता,संघ कार्य का अब अनेकों क्षैत्रों में विस्तार हुआ है और यह वट वृक्ष की तरह विशाल और बहुआयामी हुआ है। शिक्षा, वनवासी कल्याण,चिकित्सा, सेवा प्रकल्प,श्रमिक, किसान और विद्यार्थी क्षैत्रों सहित बहु आयामी हुआ हे। कार्य का कई गुना विस्तार हुआ है।”
       उन्होने कहा “ एक समय था जब हिन्दु समाज का संगठित करना दुर्लभ कार्य माना जाता था , हिन्दू कहलाने में भी शर्म महसूस की जाती थी। संघ की 85 वर्षों की साधना अब सफल हो रही है, हिन्दू हिन्दू के नाम के साथ स्वाभिमान के साथ खडा हुआ है। हिन्दु समाज के संगठन कार्य में समय तो लगा है जिस तरह बडे भगोनें में उवाल आने में समय लगता है यह कार्य बडे समाज को संगठित करने सेे जुडा हुआ था, अब बोइलिंग प्वाइंट की ओर हम बड रहे है।अब वह दिन दूर नहीं है जब यह जाग्रह समाज देशहित की भूमिकाओं को प्रभावी ढग से निभानें में सक्षम होगा।” कार्यक्रम के मुख्यअथिति प्रमोद पालीवाल और वर्गाधिकारी चांदमल सोमानी थे। इससे पूर्व में वर्ग कार्यवाह महेन्द्र जैन ने प्रतिवेदन पढ कर सुनाया ।

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