शनिवार, 16 जुलाई 2011

केन्द्र सरकार कालाधन वापस नहीं लाना चाहती

भारतीय मुद्रा


- अरविन्द सीसौदिया
सर्वोच्च न्यायालय की पीठ ने कालाधन खोजने और उसे वापस लाने के लिये जो विशेष दल गठित किया था। उसके विरूद्ध सेनिया गांधी के नेतृत्व वाले यूपीए की केंद्र सरकार ने अपील की है। यह इस बात का प्रतीक है कि सोनिया निर्देशित यह केन्द्र सरकार कालाधन वापस नहीं लाना चाहती,बल्की उसमें अडंगे पर अडंगे लगाना चाहती हे। 
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तैयारी - आदेश की समीक्षा और आदेश वापस लेने के लिए दायर की याचिका

रस्साकसी
सुप्रीम कोर्ट ने काले धन के मामलों की जांच के लिए विशेष जांच टीम गठित करने का दिया था आदेश
जस्टिस बीपी जीवन रेड्डी को एसआईटी का चेयरमैन और एमबी शाह को वाइस चेयरमैन नियुक्त करने पर सरकार को आपत्ति

काले धन के खिलाफ युद्ध छेड़ें : राष्ट्रपति
नई दिल्ली। राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने काले धन को अर्थव्यवस्था के लिए बेहद खतरनाक बताते हुए इसके खिलाफ युद्ध छेडऩे का आह्वान किया है। देश में आयकर के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में मनाये जा रहे समारोह के समापन पर राष्ट्रपति ने कहा कि काले धन के खिलाफ विदेशी और घरेलू दोनों मोर्चों पर युद्ध छेडऩे की आवश्यकता है। इसके लिए क्रॉस-बॉर्डर उपाय भी करने होंगे। वैश्विक स्तर पर बेहतर तालमेल बनाने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि विभिन्न देशों के साथ कर संबंधी सूचनाओं के आदान-प्रदान संबंधी समझौतों के अलावा पारस्परिक सहयोग की भी आवश्यकता है। इसके लिए जहां संभव हो समझौते भी किये जाने चाहिए। काले धन पर लगाम लगाने के लिए दुनियाभर में अपनाये जा रहे बेहतरीन तरीकों का उपयोग यहां करने का भी आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि इससे कर संबंधी प्रशासन आसान हो जाएगा। इस कार्यक्रम के दौरान वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने बताया कि भारत में भी दुनियाभर में अपनाये जा रहे तरीकों का अनुपालन किया जा रहा है। (ब्यूरो)

काले धन पर सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश से सरकार के पसीने छूट गए हैं। इस आदेश के पालन में परेशानियों को देखते हुए केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया है कि वह अपने फैसले की समीक्षा करे और अपने आदेश को वापस ले। हाल ही में ४ जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि सरकार काले धन से संबंधित मामलों की जांच के लिए विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन करे जिसमें सुप्रीम कोर्ट के दो सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को शामिल किया जाए। एसआईटी को पुणे के व्यवसायी हसन अली खान सहित सभी मामलों की जांच करनी है।



सुप्रीम कोर्ट ने विदेशों में जमा काले धन धीमी जांच के लिए लताड़ लगाते हुए यह फैसला दिया था। अब सरकार सुप्रीम कोर्ट से अपने फैसली की समीक्षा चाहती है और आदेश को पूरी तरह वापस लेने की गुहार लगा रही है। सूत्रों का कहना है कि आदेश वापस लेने के लिए याचिका देने के अपने अधिकार का उपयोग केंद्र सरकार इसलिए करना चाहती है ताकि खुली अदालत में वह अपने पक्ष को मजबूती से रख सके। समीक्षा याचिकाओं पर फैसला सुप्रीम कोर्ट ऐसे चेंबर में करता है जिसमें वकील तक नहीं होते।



सूत्रों ने बताया कि 4 जुलाइ के आदेश को वापस लेने के लिए सरकार ने अगल से याचिका दायर की है। सरकारी सूत्रों का कहना है कि 4 जुलाई को जस्टिस बी.सुदर्शन और एसएस निज्जर की बेंच ने उसका पूरा पक्ष सुने बिना ही निर्देश जारी कर दिया था। सरकार ने आवेदन में कहा है कि बेंच ने तत्कालीन सॉलिसिटर जनरल गोपाल सुब्रमण्यम को सरकार द्वारा काले धन को वापस लाने के बारे में उठाए गए कदमों के बारे में पूरा पक्ष नहीं रखने दिया।


सूत्रों ने बताया कि आदेश की समीक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट जाने का फैसला एक बंद कमरे में वित्त और गृह मंत्रालयों के शीर्ष अधिकारियों की मौजूदगी में हुई बैठक में लिया गया। बैठक में कानून मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों और अटॉर्नी जनरल जीई वाहनवटी ने भी भाग लिया।
सरकार ने अपने आवदेन में कोर्ट के आदेश के उन अंशों पर आपत्ति जताई है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस बीपी जीवन रेड्डी को एसआईटी का चेयरमैन और एमबी शाह को वाइस चेयरमैन नियुक्त किया था।


सरकार का कहना है कि आदेश के पहले 20 पैराग्राफ गोपाल सुब्रमण्यम से सरकार का पक्ष पूरी तरह सुने बिना ही जारी कर दिए। विदेशी बैंकों में जमा काले धन पर बेंच ने कहा था कि यह सरकार की कमजोरी को दर्शाता है। यह अपराध को रोकने और कर संग्रह दोनों ही मामलों में उचित नहीं है।
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