मंगलवार, 19 जुलाई 2011

शीला दीक्षित ने चुनावों में फायदा उठाने के लिए कहा कि 60 हजार फ्लैट बनकर तैयार हैं



- अरविन्द सीसौदिया
  चुनाव आयोग और न्यायपालिका को मिल कर इस तरह के कानून बनाने चाहिये कि सभी राजनैतिक दलों को चुनाव की पूर्व तैयारियों और चुनाव के दौरान क्या क्या कहने और करने का अधिकार है। दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने 60 हजार सस्ते मकान तैयार हैं और उन्हे बांटने के लिये लाखों फार्म नागरिकों से भरवाये गये। लालच देकर ठगी तो की ही गई। येशा ही तमिलनाडु में होता है कोई टीवी दे रहा है,पंखा दे रहा है,मिक्सी दे रहा है, सोने के गहने दे रहा है। कोई 2 रूप्ये किलो अनाज दे रहा है। आप नागरिक को सक्षम बनाओ उसकी आर्थिक आय बढाओ। यदि शराब पिलाना मना है।नगद नोट बांटना मना है। तो लालच देना भी मना होना चाहिये। जबकि यह सब खुले आम हो रहा है। अब यह आचार संहिता में आ जाना चाहिये कि प्रलोभन देनें की बात,नहीं कही जा सकेगी। विकास की बात भी वही कही जाये जिसे करने की वास्तविक क्षमता हो। चुनाव कानून और नियमों में व्यापक सुधार की जरूरत है।प्रलोभन देश के वास्तविक जन उत्थान से धोखा है। नागरिक से भी धोखा  है।
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चुनावों में फायदा उठाने के लिए कहा गया कि 60 हजार फ्लैट बनकर तैयार हैं और साल 2012 तक ऐसे 4 लाख फ्लैट बनाए जाएंगे। अब लोकायुक्त की जांच में ये बात सामने आई है कि शीला दीक्षित ने सिर्फ और सिर्फ 2008 के चुनावों में फायदा उठाने के लिए ऐसा किया था। आज तक फ्लैट तैयार नहीं हैं। लोकायुक्त ने राष्ट्रपति से सिफारिश की है कि शीला दीक्षित से इस मसले पर सफाई मांगी जाए।
अक्टूबर 2009 में वकील सुनीता भारद्वाज ने लोकायुक्त से ये शिकायत की थी। सुनीता के मुताबिक दिल्ली सरकार ने अगस्त 2008 में विज्ञापन दिया था कि चार लाख गरीबों को फ्लैट दिए जाएंगे। 2012 तक ऐसा होगा। 60 हजार फ्लैट तो तैयार भी कर लिए गए हैं। विज्ञापन देखकर लोगों ने इसमें रुचि दिखाई और सौ-सौ रुपये जमाकर इसका फॉर्म भी भरा।

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वर्ष 2008 के विधानसभा चुनाव से पहले कम कीमत के 60 हजार फ्लैट तैयार होने की घोषणा करने के मामले में लोकायुक्त ने सोमवार को मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को आड़े हाथों लिया और राष्ट्रपति से उन पर निंदा प्रस्ताव पारित करने की सिफारिश की। इस बाबत दीक्षित की निंदा करते हुए लोकायुक्त ने अपने फैसले में कहा कि लोगों को अनैतिक कामकाज के खिलाफ खड़े होना चाहिए और जनता का मजबूत दृष्टिकोण सामने आना चाहिए ताकि सरकारी ओहदेदार निष्ठा के उच्च मानकों का पालन करें।
भाजपा कार्यकर्ता और वकील सुनीता भारद्वाज की ओर से दाखिल एक शिकायत के मामले में जांच के बाद लोकायुक्त न्यायमूर्ति मनमोहन सरीन ने यह फैसला सुनाया। शीला दीक्षित ने इस बारे में कोई टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा कि उन्होंने अभी फैसला पढ़ा नहीं है। हालांकि उन्होंने कहा कि फ्लैटों का आवंटन एक जटिल प्रक्रिया है और सरकार किसी को दिग्भ्रमित करने की कोशिश नहीं कर रही।
लोकायुक्त ने कहा कि वर्ष 2008 के विधानसभा चुनाव से पहले दीक्षित ने जनता को गलत जानकारी दी कि 60 हजार फ्लैट जनता को सौंपे जाने के लिए तैयार हैं जबकि उन्हें पता था कि फ्लैट तैयार नहीं हैं लेकिन उन्होंने खुद को या अपनी राजनीतिक पार्टी को फायदा या समर्थन हासिल करने के लिए ऐसा किया।
लोकायुक्त ने जनता से अनैतिक कामकाज के खिलाफ खड़े होने का आह्वान करते हुए कहा कि यह बदलाव रातों रात नहीं आ सकता और इसमें समय लगेगा। इसलिए कम से कम सरकारी ओहदेदारों के गलत आचरण के बारे में सच बताने और उनकी सार्वजनिक तौर पर निंदा होने की जरूरत है।
लोकायुक्त के फैसले के मुताबिक दीक्षित द्वारा तथ्यों की गलत तरह से जानकारी एक पुस्तिका में दर्ज उनके संदेश में थी जो कि शहरी गरीबों और झुग्गिवासियों के लिहाज से फ्लैटों के आवंटन के लिए पंजीकरण फार्म के साथ थी।
आदेश के अनुसार, लोकायुक्त की ओर से राष्ट्रपति से सिफारिश की जाती है कि मुख्यमंत्री को भविष्य में उनके संदेश के प्रकाशन में सावधान रहने के लिए आगाह किया जाए। लोकायुक्त के अनुसार परिस्थितियां बताती हैं कि यह महज इत्तेफाक नहीं था कि फ्लैट संबंधी घोषणा और योजना के लिहाज से आवेदन आमंत्रित करना, दोनों काम चुनाव के समय किए गए।
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 लोकायुक्त ने शीला दीक्षित पर चुनावी वादे के जरिए 
राजनीतिक फायदा उठाने का दोषी ठहराया है। 
दिल्ली। 
        दिल्ली के लोक निर्माण मंत्री राजकुमार चौहान के बाद दिल्ली के लोकायुक्त मनमोहन सरीन ने सूबे की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है। लोकायुक्त ने शीला दीक्षित पर चुनावी वादे के जरिए राजनीतिक फायदा उठाने का दोषी ठहराया है। लोकायुक्त ने रिपोर्ट में कहा है कि मुख्यमंत्री जैसे अहम पद पर बैठ व्यक्ति से इस तरह के झूठ बोलने की अपेक्षा नहीं की जा सकती। आपको बता दें कि शीला दीक्षित से पहले भी दिल्ली सरकार के एक अन्य मंत्री राजकुमार चौहान को लोकायुक्त ने पद के दुरुपयोग का दोषी पाया गया था। लोकायुक्त ने राष्ट्रपति को एक रिपोर्ट भेजकर चौहान को बर्खास्त करने की सिफारिश की थी, लेकिन राष्ट्रपति ने गृह मंत्रालय की सलाह लेने के बाद लोकायुक्त की वह रिपोर्ट खारिज कर दी थी।
गौरतलब है कि वर्ष 2008 के विधानसभा चुनाव से पहले शीला दीक्षित ने 6 हजार परिवारों को सस्ते मकान देने का वादा किया था। लेकिन इनमें से एक को भी मकान नहीं दिया गया। ये मकान राजीव गांधी रत्न आवास योजना के तहत बनाए जाने थे। लोकायुक्त ने अपनी यह रिपोर्ट राष्ट्रपति को भेजी है। रिपोर्ट में मुख्यमंत्री को भविष्य में इस प्रकार के वायदे व संदेश देने में सावधानी बरतने की चेतावनी देने का आग्रह किया है। हालांकि लोकायुक्त ने इस मामले को शीला दीक्षित के खिलाफ आंचार संहिता उल्लंघन का मामला मानने से इंकार कर दिया। इस मामले में मुख्यमंत्री का कहना है कि उन्होंने किसी को गुमराह नहीं किया है। सोमवार को दिल्ली सचिवालय में पत्रकारों से बातचीत में शीला दीक्षित ने कहा कि गरीबों के लिए बनाए जा रहे फ्लैट तैयार हो चुके हैं और लोगों से जो वादा किया गया था उसे पूरा किया जाएगा। लोकायुक्त मनमोहन सरीन ने मुख्यमंत्री से जुड़ा फैसला सुनीता भारद्वाज नामक एक अधिवक्ता एवं भाजपा नेता की शिकायत पर सुनाया है।
सीबीआई ने भी कसा शिकंजा
राष्ट्रमंडल खेल के तहत हुए निर्माण कार्य में कथित घोटालों को लेकर सीबीआई ने दिल्ली सरकार पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। सूत्रों का कहना है कि इसी संदर्भ में बारापुला एलिवेटिड मार्ग को लेकर दो अधिकारियों से सीबीआई ने पूछताछ की। इस बारे में जब मुख्यमंत्री शीला दीक्षित से पूछा गया तो उन्होंने कुछ भी टिप्पणी करने से इंकार कर दिया। गौरतलब है कि अधिकारी बारापुला एलिवेटिड मार्ग के निर्माण के समय लोक निर्माण विभाग में कार्यरत थे। बारापुला मार्ग की जांच सीबीआई कर रही है। इस मार्ग के निर्माण में हुए कथित घोटालों को लेकर सीबीआइ की तरफ से एक एफआईआर भी दर्ज कराई गई है।


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