शनिवार, 9 जुलाई 2011

टू जी: क्या समर्थन की कीमत वसूली है



- अरविन्द सीसौदिया
* डीएमके ने जिस तरह से दूरसंचार मंत्रालय को लूट का साधन बनाया, उसकी जांच होनी चाहिये, कहीं यह मामला सरकार बनाने के लिये समर्थन कांग्रेस पार्टी के द्वारा खरीदा तो नहीं गया था। यह जांच उच्चस्तरीय पैनल से हो तभी सच्चाई सामने आ सकती है।
* टू जी स्पेक्ट्रम घोटाला, एस बैण्ड स्पैक्ट्रम घोटाला , हसन अली खान,आदर्श सोसायटी क्या पस बात के सबूत नहीं हैं कि भारत का राजनैतिक तंत्र धन की अथाह भूख में फंस गया है। वह स्वंय अति सम्पनन बनने और सम्पन्न वर्ग के हित साधने मात्र का साधन रह गया है।
* देश की अकूत संपदा से , गरीबी को दूर किया जा सकता था। मगर देश की सम्पदा बेंच कर स्वंय पूंजीपति बनने और पूंजीपतियों के द्वारा विदेशी बैंकों की तिजोरियों को भरने का औजार बन गई है,लोकतंत्र प्रणाली!!
* यदि गरीब एक जुट हो कर अपनी , खुर्द बुर्द की जा रही संम्पदा को बचानें आगे नहीं आयेगा। अपने हिस्से और हिसाब की मांग नहीं करेगा। तो ये लूट देश को नंगा करके छोडेगी !

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें