गुरुवार, 7 जुलाई 2011

दयानिधि मारन का इस्तीफा

 ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) ने गुरुवार को केंद्रीय कपड़ा मंत्री दयानिधि मारन द्वारा अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को सौंपने का स्वागत किया। पार्टी ने मारन के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल करने के साथ ही उनकी गिरफ्तारी की भी मांग की।

एआईएडीएमके के सांसद वी. मैत्रेयन ने आईएएनएस से कहा, "यह अच्छी बात है कि मारन ने अब इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने पहले इस्तीफा दिया होता तो और बेहतर होता। अब कानून अपना काम तेजी से करेगा। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को अपनी जांच में तेजी लाते हुए उनके खिलाफ आरोपपत्र दायर कर उन्हें गिरफ्तार करना चाहिए।"
सूत्रों ने बताया कि 2जी स्पेक्ट्रम मामले में मारन द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के दूसरे नेता हैं जिन्हें मंत्रिमंडल से हटना पड़ा है। माना जाता है कि उन्होंने अपना इस्तीफा मंत्रिमंडल की बैठक के बाद प्रधानमंत्री को सौंपा।

मारन के इस्तीफे पर राजनीतिक टीकाकार चो रामास्वामी ने कहा, "कभी नहीं के बजाय उन्होंने देरी से ही इस्तीफा दिया जो कि अच्छी बात है।"

चो ने आईएएनएस से कहा, "डीएमके अपना गठबंधन कांग्रेस के साथ जारी रखेगा..इस बीच कांग्रेस चाहती है कि डीएमके खुद ही गठबंधन से अलग हो जाए।"

उल्लेखनीय है कि 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले की जांच कर रही सीबीआई ने बुधवार को सर्वोच्च न्यायालय में अपनी स्थिति रिपोर्ट दाखिल की। रिपोर्ट में उसने वर्ष 2006 में केंद्रीय दूरसंचार मंत्री रहे मारन की भूमिका पर अंगुली उठाई। इसके बाद मारन ने केंद्रीय कपड़ा मंत्री के पद से इस्तीफा दिया है 

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केंद्रीय कपड़ा मंत्री दयानिधि मारन भी 2जी घोटाले मामले में सीबीआई के रडार में आ गए हैं.
सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में पेश अपनी स्टेटस रिपोर्ट में कहा है कि पूर्व टेलीकॉम मंत्री दयानिधि मारन ने वर्ष 2006 में एअरसेल टेलीकॉम कंपनी के मालिक शिवशंकरन पर अपनी कंपनी को मलेशिया की एक कंपनी मैक्सिस को बेचने के लिए कथित तौर पर दबाव डाला था.
सीबीआई ने जस्टिस जीएस सिंघवी और जस्टिस एके गांगुली से कहा कि उसे जाँच पूरी करने के लिए तीन महीने का वक्त चाहिए. हालांकि सीबीआई की तरफ़ से मारन का नाम नहीं लिया गया.
सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय ने अदालत को बताया कि उसने सात देशों में जाँच की है और उसे 2जी घोटाले के पैसे को ढूंढने में 18 से ज़्यादा महीने लग जाएंगे.
दयानिधि मारन पर आरोप है कि उन्होंने वर्ष 2004 और 2007 के अपने टेलीकॉम मंत्री के कार्यकाल के दौरान एअरसेल के मालिक सी शिवशंकरन पर कथित तौर पर दबाव डाला कि वो अपनी कंपनी एअरसेल को मैक्सिस के मालिक और मारन के मित्र टी आनंद कृष्णन को बेच दें.
शिवशंकरन टेलीकॉम लाईसेंसे लेने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद उनकी मेहनत रंग नहीं लाई. मजबूरन उन्होंने अपनी कंपनी मैक्सिस को बेच दी.
मैं खुश हैं कि सीबीआई नेक कदम उठाया है. दयानिधि मारन से ये उम्मीद करना कि वो मामले की नैतिक ज़िम्मेदारी लेकर पद से इस्तीफ़ा दे दें. वक्त आ गया है कि प्रधानमंत्री उन्हें अपने कैबिनट से निकाल दें
जयललिता, एआएडीएमके प्रमुख
इस सौदे के कुछ हफ़्तों के अंदर ही मैक्सिस की एक दूसरी कंपनी ने मारन की कंपनी में निवेश किया था.
सीबीआई को दिए गए अपने वक्तव्य में शिवशंकन ने इस आरोप को दोहराया था कि उन पर अपनी कंपनी को बेचने का दबाव डाला गया था.
मारन ने इन आरोपों से इंकार किया था. मारन ने कहा था कि शिवशंकरन खुद अपनी कंपनी को बेचने के इच्छुक थे.
सीबीआई के वक्तव्य के बाद मारन पर इस्तीफ़ा देना का दबाव बढ़ेगा.
उधर तमिलनाडु की मुख्यमंत्री और एआईडीएमस प्रमुख जयललिता ने मारन के इस्तीफ़े की मांग की है.
जयललिता ने कहा कि सीबीआई वही कर रही है जो देश के लोग उससे उम्मीद कर रहे हैं, वक्त आ गया था कि सीबीआई इस बारे में कार्रवाई करे.
उन्होंने कहा "मैं खुश हूँ कि सीबीआई ने ये कदम उठाया है. दयानिधि मारन से ये उम्मीद करना कि वो मामले की नैतिक ज़िम्मेदारी लेकर पद से इस्तीफ़ा दे दें. वक्त आ गया है कि प्रधानमंत्री उन्हें अपनी कैबिनेट से निकाल दें."

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