गुरुवार, 7 जुलाई 2011

एंग्री यंग मैन:'बुढ्ढा होगा तेरा बाप'

'बुढ्ढा होगा तेरा बाप' में अमिताभ बच्चन स्टाइलिश दिखने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। अपने डिज़ाइनर स्कार्व्स, डेनिम्स और ब्रैंडेड ग्लेयर्स के साथ इन दिनों उन्हें बेहद कूल लुक में देखा जा सकता है। वैसे इसी स्टाइल के चलते उन्होंने फ़िल्म में एक साथ दो घडि़यां पहनी हैं। देखते हैं, स्टाइल के साथ बिग बी की यह 'डबल डोज़' स्क्रीन पर कैसी रहती है!

ड्रीम गर्ल हेमा मालिनी और अमिताभ बच्चन ने साथ में नसीब, सत्ते पे सत्ता, बाग़बान और बाबुल जैसी फ़िल्मों में साथ काम किया. अब दोनों फिर नज़र आएंगे एबी कॉर्प की अगली फ़िल्म 'बुड्ढा होगा तेरा बाप' में.
हेमा, अमिताभ को शानदार अभिनेता होने के साथ-साथ काफ़ी ख़ुशकिस्मत भी मानती हैं.
मुंबई में 'बुड्ढा होगा तेरा बाप' के प्रमोशन पर हेमा ने कहा, "इस उम्र में भी उन्हें इतने बढ़िया और चैलेंजिंग रोल करने को मिल रहे हैं. जो मेरे जैसी अभिनेत्री को अब नहीं मिलते. इसलिए मुझे उनसे जलन होती है."
इस उम्र में भी अमिताभ को इतने बढ़िया और चैलेंजिंग रोल करने को मिल रहे हैं. जो मेरे जैसी अभिनेत्री को अब नहीं मिलते. इसलिए मुझे उनसे जलन होती है.
हेमा मालिनी, अभिनेत्री
हेमा मालिनी और अमिताभ 70 के दशक की फ़िल्म 'कसौटी' में पहली बार साथ नज़र आए थे. हेमा जी के मुताबिक़ तब से लेकर अब तक अमिताभ बच्चन में कोई बदलाव नहीं आया.
वो कहती हैं, "अमिताभ अब भी उसी संजीदगी से अभिनय करते हैं. अमित जी जो रोल करते हैं उसमें जान डाल देते हैं. उनके जैसे ज़बरदस्त ऐक्टर के साथ काम करना हमेशा बेहतरीन अनुभव रहता है."
हेमा ने अमिताभ की तारीफ़ जारी रखते हुए कहा कि अच्छा अभिनय तो काफ़ी सारे कलाकार कर लेते हैं, लेकिन अमिताभ बेहतरीन अभिनय, शानदार डांसर होने के साथ-साथ ज़ोरदार गायक भी हैं. वो सब कुछ कर सकते हैं. मैंने उन्हें एक बार सितार बजाते हुए भी देखा. यक़ीन जानिए वो सितार भी बहुत अच्छा बजा रहे थे.
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फिल्म: बुड्ढा होगा तेरा बाप
कलाकार: अमिताभ बच्चन, सोनू सूद, सोनल चौहान, हेमा मालिनी
निर्देशक: पुरी जगन्नाथ
निर्माता: एबीकॉर्प
अमिताभ का एक्शन रिप्ले
रेटिंग: दो स्टार

अमिताभ बच्चन फिल्म पा के बाद पहली बार अभिनेता के तौर पर दर्शकों के सामने बुड्ढा होगा तेरा बाप में नजर आ रहे हैं। निस्संदेह ऑरो की भूमिका में उन्होंने फिल्म पा में जो छाप छोड़ी है। वह अदभुत है, लेकिन उनकी ऑरो के बाद जब फिल्म बुङ्ढा होगा तेरा बाप में उनके अभिनय की शैली को देखें तो निराशा होती है।

चूंकि अमिताभ निस्संदेह अभिनय क्षमता वाले अभिनेता हैं। वे जब भी दर्शकों के सामने आते हैं तो दर्शकों की उम्मीदें उनसे बढ़ जाती हैं, लेकिन फिल्म बुङ्ढा को देखने के बाद शायद दर्शक दुखी हों। क्‍योंकि बुङ्ढा में उन्हें जिन जिन भी रूपों व स्टइल में दिखाने की कोशिश की गयी है। वह एक तरह से अमिताभ की पुरानी फिल्मों व उनके स्टाइल का एक्शन रिप्ले है। वे सारी चीजें जो हमने अमिताभ की फिल्मों में आज से पहले कई बार देख ली है।

फिर से दर्शकों के सामने हैं। पूरी फिल्म में अमिताभ ने एकाधिकार राज किया है। फिल्म की कहानी में फिल्म की कहानी विज्जू के इर्द-गिर्द घूमती है। वह पेरिस में गैंगस्टर है। वापस लौट कर मुंबई आता है और एसीपी करण को मारने की जिम्मेदारी लेता है। इसी दौरान करण-तान्या से उनकी मुलाकात होती है। फिल्म में रवीना विज्जू को पसंद करती है और कहानी में कई मोड़ आते जाते हैं।

फिल्म के गाने अत्यधिक लाउड हैं। खासतौर से फिल्म का गीत 'गो मीरा गो' में अमिताभ कुछ भी खास असर नहीं छोड़ पा रहे। मसाला फिल्मों के रूप में भी इस फिल्म में कुछ भी नया नहीं। अमिताभ जिस स्तर पर हैं। उन्हें अब पा जैसी अधिक से अधिक फिल्में करनी चाहिए। फिल्म में प्रकाश राज ने बेहतरीन भूमिका निभाई है। हेमा मालिनी के साथ के दृश्यों में भी अमिताभ कुछ खास प्रभाव नहीं छोड़ पाते। बावजूद इसेक अमिताभ के फैन फिल्म जरूर देखना पसंद करेंगे।

सदी के महानायक लंबे अरसे के बाद फिर से बुङ्ढा होगा तेरा बाप में नजर आनेवाले हैं। पेश है उनसे बातचीत के मुख्य अंश अब तो आप दादा भी बनने जा रहे हैं, और इसके बावजूद आप मानने को तैयार नहीं कि आप बुजुर्ग हो चुके हैं। यह आपसे किसने कह दिया। मैं इस फिल्म में एक किरदार निभा रहा हूं। लेकिन सच यह है कि मैं अब बुङ्ढा हो गया हूं। और मुझे बेहद खुशी है कि हमारे घर में नया मेहमान आने जा रहा है।

उम्र के इस पड़ाव पर बुङ्ढा होगा तेरा बाप जैसी फिल्मों में अभिनय करने की खास वजह?

ऐसी कोई भी खास वजह नहीं है। मैं कलाकार हूं और कोशिश रहती है कि मेरे सामने जो भी ऑफर आये उसे सोच समझ कर देख कर ही चयनीत करूं। वही कर राह हूं। राम गोपाल वर्मा ने मुझे पुरी जगन्नाथ से मिलवाया था। उनके पास मेरे लिए विषय था। मेरे पास वक्त था। मेरे लिए यह किरदार एक चुनौती थी। सो स्वीकार लिया।

आरक्षण फिल्म भी जल्द ही रिलीज होगी।
जी हां एक बार फिर से अलग तरह के किरदार में आपलोगों के सामने होगा। उस फिल्म के बारे में कुछ दिनों में विस्तार से बातचीत करेंगे।
फिल्म के चरित्र के बारे में बतायें इसमें मैंने एक बुजुर्ग हिटमैन का चरित्र निभाया है, जो कि कई वर्षों से मुंबई छोड़ कर पेरिस में रह रहा है। अचानक उसे एक काम के सिलसिले में मुंबई आना पड़ता है। और फिर उसके साथ जो कुछ होता है उसका चित्रण है।

फिल्म के एक्शन सीन

फिल्म में तमाम बेहतरीन एक्शन सीन हैं। अच्छे नृत्य हैं। संगीत भी अच्छा है। फिल्म में डब स्टेपवाले गाने के अलावा चार गाने हैं, जिनमें से तीन गाने मैंने गाये हैं। जिसमें से एक गाना हैं हाल ए दिल जो मुझ पर और हेमाजी पर फिल्माया गया है। बुङ्ढा होगा तेरा बाप को अक्कारपेला स्टाइल में गाया है। मैंने पहली बार यह प्रयोग किया है। दरअसल, इसमें होता यह है कि जो गीत गाता है, वही अपनी आवाज में इंस्ट्रूमेंट भी बजाता है। इसके अलावा मेरी पुरानी फिल्मों के कुछ पुराने गीत भी हैं। सभी गाने अच्छे हैं।

फिल्मों में गालियों का प्रयोग धड़ल्ले से हो रहा है।

बिल्कुल नहीं। मैं व्यक्तिगत रूप से इस तरह के संवादों व गीतों के खिलाफ हूं। मेरी परवरिश जैसी है। मुझे अपने पूरे खानदान की मान मर्यादा का ख्याल रखना होता है। इसलिए मैं तो कम से कम ऐसा कभी नहीं करूंगा।

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अमिताभ बच्चन...वो नाम जिनके लिए किरदार लिखे जाते है। पिछले चालीस सालों से बॉलीवुड में राज कर रहे बच्चन साहब की जिंदगी में शायद ही कोई ऐसा रोल होगा जो उन्होंने नहीं निभाया होगा। संजिदा, कॉ मिक, खलनायक, चरित्र...वो सबकुछ जो एक अभिनय की लिस्ट में होता है... अमित जी ने निभा दिया है। वो चलती फिरती किताब है जिसका हर एक अंक बहुत ही दिलचस्प है।

इन दिनों अमिताभ की चर्चा उनकी आने वाली फिल्म 'बुड्ढा होगा तेरा बाप' को लेकर हो रही है। इस फिल्म में जो किरदार अमिताभ निभा रहे हैं वो बेहद ही दिलचस्प है, ये एक ऐसे बूढ़े इंसान की कहानी है जो केवल नाम का बूढ़ा है। उसका दिल आज भी नहीं मानता कि वो बूढ़ा हो चुका है। वो रंगीले कपड़े पहनता है, रसिया बनने की कोशिश करता है।

लड़कों की तरह चुहलबाजी करता है और तो और वो डांस भी करता है। सबसे दिलचस्प बात ये है कि इस रसिया की सब सुनते भी है। जीं हां ये ही मजेदार किरदार अमित जी अपनी फिल्म में निभा रहे हैं। अमित जी ने कहा है कि ये एक बहुत मजेदार फिल्म है जिसे उम्मीद करता हूं कि लोग जरूर पसंद करेगें। फिल्म 1 जूलाई को रूपहले पर्दे पर आ रही है।

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मैं बुड्ढा नहीं हूं : अमिताभ बच्चन

वे सदी के महानायक हैं, क्योंकि वे अनुशासित हैं और निर्भीक भी. उनका मानना है कि वे कलाकार वाकई भाग्यशाली हैं, जिन्हें हर बार नये-नये किरदार निभाने के मौके मिलते हैं. खासतौर से अपने बारे में उनकी यही राय है. यह उनकी कला की खासियत है, जिसने इस बुजुर्ग को अपने से कम उम्र का किरदार निभाने का मौका दिया है.
बात हो रही है बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ बच्चन की. सिनेमा को कला का ही एक रूप माननेवाले महानायक अमिताभ बच्चन एक बार फ़िर से दर्शकों के सामने फ़िल्म बुड्ढा होगा तेरा बाप लेकर आ रहे हैं. आज भी अमिताभ अपने किरदारों से दर्शकों को अचंभित कर देते हैं. अपनी आनेवाली फ़िल्मों से जुड़े कई पहलुओं पर अमिताभ बच्चन से उर्मिला कोरी  ने विस्तार से बातचीत की. .
एक बार फ़िर दर्शक मुझे विजय न सही लेकिन विजू नाम वाले किरदार में देख पायेंगे. इस फ़िल्म में मेरे किरदार का नाम विजू है. जो एक रिटायर्ड गैंगस्टर है. वह दुबई में रहता है, किसी काम की वजह से उसे मुंबई आना पड़ता है. वह काम कौन-सा है यह तो मैं नहीं बताऊंगा. उसके लिए आपको फ़िल्म देखनी पड़ेगी. भले ही विजू की उम्र ज्यादा हो गयी है, लेकिन उसे गुस्सा बहुत आता है. ( हंसते हुए ) आप उसे एंग्री ओल्ड मैन का खिताब दे सकते हैं. उसका गुस्सा किस तरह से उसे एक के बाद एक मुसीबत में फ़ंसाता है इसी की कहानी है बुढ्ढा होगा तेरा बाप.
रोमांस के साथ एक्शन भी :
इस फ़िल्म में जिस तरह से मेरे कप़ड़े रंगीन हैं, उसी तरह मेरा किरदार भी काफ़ी रंगीन है. फ़िल्म में मैं तीन-तीन अभिनेत्रियों के साथ नजर आऊंगा. मीडिया में इस बात की जमकर चर्चा हो रही है. ( हंसते हुए ) अरे भाई सिर्फ़ रोमांस ही नहीं किया. काफ़ी मार-धाड़ भी की है. इस उम्र में एक्शन सीन करना बहुत मुश्किल भरा काम होता है, लेकिन किया. मुझे उम्मीद है कि रोमांस ही नहीं मेरा एक्शन भी मेरे दर्शकों को पसंद आयेगा.
सिर्फ़ कालिया का डॉयलाग है :
इस फ़िल्म के प्रोमो में कालिया का डॉयलाग-जहां से हम खड़े होते हैं, वहीं से लाइन शुरू हो जाती है, को आप लोग इन दिनों सुन रहे होंगे. यदि लोग सोचते हैं कि इस फ़िल्म में कई मेरी पुरानी फ़िल्मों से मिलते-जुलते डॉयलाग होंगे तो ऐसा बिल्कुल नहीं है. इस फ़िल्म में पुरानी फ़िल्मों के जैसा सिर्फ़ यही एक डॉयलॉग है. वैसे मैं मौजूदा दौर की फ़िल्मों की पटकथा में इस बात को मिस करता हूं. अब वैसे डॉयलाग फ़िल्मों में सुनने को नहीं मिलते हैं. अकसर लोग कहते हैं कि आजकल की युवा पीढ़ी लफ्फ़ाजी पसंद नहीं करती है. वह साधारण शब्दों में बात को सुनना पसंद करती है, लेकिन अपने वर्ल्ड टूर शोज के दौरान मैंने बिल्कुल इसके विपरीत देखा है. मेरे वर्ल्ड टूर शोज के दौरान एक सेगमेंट ऐसा होता है जब मैं प्रशंसकों के बीच अपनी फ़िल्म दीवार, अग्निपथ, सिलसिला सहित कई फ़िल्मों के डॉयलाग को आधे घंटे तक बोलता हूं. आप विश्वास नहीं करेंगे सारे दर्शक एकदम चुपचाप मेरे हर डॉयलाग को न सिर्फ़ सुनते हैं, बल्कि जमकर तालियां भी बजाते हैं. उन दर्शकों की भीड़ में ज्यादातर मौजूदा दौर की युवा पीढ़ी ही होती है.
डायरेक्टर एक्टर हूं :
इस फ़िल्म में मैंने तीन गाने गाये हैं. मैं गाऊं, यह आइडिया पुरी जगन्नाथ जी का ही था. उन्होंने मुझसे कहा कि मुझे गाना चाहिए. एक एक्टर के तौर पर मैं हमेशा से डायरेक्टर एक्टर रहा हूं. वैसे इस फ़िल्म की टाइटल धुन यूं ही बन गयी थी. वर्ल्ड टूर के दौरान यूं ही बैठे-बैठे एक दिन डिनर करते हुए विशाल शेखर ने वह धुन बना दी थी. मुंबई वापस आने के बाद हम सभी भूल गये थे, लेकिन जब पुरी जगन्नाथ जी मुझसे इस फ़िल्म के गीत-संगीत की चर्चा कर रहे थे, उस वक्त विशाल भी वहां मौजूद थे.
हमारा ध्यान अचानक उस धुन पर चला गया, जो हमने यूरोप में खाने के टेबल पर बैठे-बैठे बनायी थी और उस पर गाना बन गया. इस गाने में मैंने कई सारे वाद्य यंत्रों की आवाज भी अपने मुंह से निकाली है, जिसकी चर्चा मीडिया में भी हुई थी. मैं बता देना चाहूंगा कि मुंह से वाद्य यंत्रों की आवाज निकालना उतना मुश्किल नहीं है, जितना कि उन्हें बजाना.
मेरे घर और ऑफ़िस में आपको कई सारे ऐसे वाद्य यंत्र मिल जायेंगे. मेरे ऑफ़िस में तो बड़ा सा पियानो भी है जो हाल में किसी ने मुझे गिफ्ट किया है. लेकिन, मैं उसे बजा नहीं पाता हूं. ( हंसते हुए ) हां ऑफ़िस में खाली समय में उसे बजाने का नाटक जरूर कर लेता  हूं. वैसे मैं सोच रहा हूं कि जब फ़िल्मों में मुझे काम मिलना बंद हो जायेगा तो मैं खाली समय में उन वाद्य यंत्रों को बजाना सीखूंगा.
एंग्री यंग मैंन विजय का किरदार था :
एंग्री यंग मैन यानि अमिताभ बच्चन को इस टैग से मुक्त कीजिए. मैं आपको बता देना चाहूंगा कि मैं एंग्री यंग मैन नहीं हूं. एंग्री यंग मैन विजय का किरदार था. वह विजय जिसे सलीम -जावेद ने क्रिएट किया था. वो किरदार उस व  भारत के हर आम आदमी का प्रतिनिधित्व करता था, क्योंकि उस दौर का आदमी बेरोजगारी का शिकार था. उसी दर्द के गुस्से ने विजय को जन्म दिया. मुझे एंग्री यंग मैन के तौर पर अभिनेता उल्लास याद आते हैं.

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