रविवार, 31 जुलाई 2011

कांग्रेस में सर फुटब्बल : क्रिकेट की चाँदी पर कब्जे के लिए कांगेस के जोशी बनाम जोशी


- अरविन्द सिसोदिया 
         आजाद भारत के नोकरशाहों और राजनेताओं नें मुह मारनें से एक भी वह जगह नहीं छोड़ी जहाँ धन सम्पत्ति और पैसा हो ..!! जब से देश में २० -२० का फटाफट क्रिकेट आया और उस पर आसमान से पानी की तरह पैसा वर्षा तब से तो हर राजनेता किसी न किसी क्रिकेट संघ का अध्यक्ष बनना चाहता है ! राजनेता से शरद पंवार तो विश्व क्रिकेट  के  मालिक हो गए ..!! भारत की राष्ट्रिय और प्रांतीय क्रिकेट में खिलाडियों को तो कोई तब्बजो नहीं है ..,, मगर नेता और नोकरशाही का हर जगह कब्ज़ा है !! इस अन्याय और अधर्म को सभी सरकारें जानते बूझते हुए भी नहीं रोक रहीं ! क्यों की उनका ही कोई बंधु माल उड़ा रहा है !
        राजस्थान में जब तक सी पी जोशी की तूती बोल रही थी और वे राहुल के खास थे तब तक उन्हें किसी नें नहीं छेड़ा, जैसे ही पर्दे के पीछे चलने वाले षडयंत्र  के द्वारा चुगल खोरी जीती, कोंग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष से हटाया , मंत्रालय भी बदलवा  दिया ..! फिर क्या था अब उनसे राजस्थान क्रिकेट संघ के अध्यक्ष का पद भी छीनना था जो लगभग छीन लिया गया है ..! जयपुर के कांगेसी सांसद महेश जोशी इतने अपरिपक्व नहीं हैं की वे एक नोकरशाह के बहकावे में अध्यक्ष बनने चले जाएँ !! जरुर कोई पीछे से मजबूत बेकअप  है .., और वह कोई बड़ी ही ताकत है ! अन्यथा एक नोकरशाह अपने घर में बैठक बुला कर एक केन्द्रीय मंत्री को पद से हटा दे ! यह  असंभव है !!   आई पी एल के  कारण राजस्थान क्रिकेट में भी रुतवा और काफी पैसा है ! 
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यह इस लिक पर पूरी पड़ी जा सकती है ....
http://www.patrika.com/news.aspx?id=646631
जयपुर। राजस्थान क्रिकेट संघ (आरसीए) पिछले कुछ वर्षो से विवादों का अखाड़ा बनी हुई है। नोट और वोट की इस राजनीति में दोस्तों को दुश्मन बनते देर नहीं लगती। यही वजह है कि पिछले सात वर्षो में आरसीए और विवादों का चोली दामन का साथ रहा है। 

दो बार हुए चुनाव
आरसीए में एक साल में दो बार चुनाव की नौबत भी आई। वर्ष 2009 में प्रदेश के ज्यादातर जिला संघों ने एकजुट होकर ललित मोदी को हटाकर क्रिकेट की बेहतरी का दावा किया। लेकिन इस दावे की हवा जल्दी ही निकल गई। एक मार्च 2009 में हुए चुनाव में संजय दीक्षित अध्यक्ष और अशोक ओहरी सचिव बने। लेकिन एक माह बाद ही दीक्षित और अशोक ओहरी के बीच शुरू हुए विवाद के कारण जल्द ही पहले एडहॉक कमेटी बनी और फिर नए चुनाव की मांग उठी। नौ माह बाद दिसम्बर में हुए चुनाव में केन्द्रीय मंत्री डॉ. सी.पी. जोशी अध्यक्ष और संजय दीक्षित सचिव बने। लेकिन यह कैमेस्ट्री भी ज्यादा समय तक नहीं चली और फिर विवाद खड़े होने लगे।

आयोजन में अव्यवस्था
पिछले दो वर्षो में आरसीए ने दो अंतरराष्ट्रीय वनडे और आईपीएल के कुल 10 मैचों की मेजबानी की, इसके अलावा ईरानी ट्रॉफी व देवधर ट्रॉफी के मैच भी जयपुर के सवाई मानसिंह स्टेडियम में आयोजित हुए थे। इनमें से भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच फरवरी 2010 में हुआ वनडे मुकाबला भी अव्यवस्थाओं का शिकार बना।

क्रिकेटरों को नुकसान
गुलाबीनगर में क्रिकेट के बड़े आयोजनों से भले ही प्रदेश में क्रिकेट का ग्लेमर बढ़ा हो लेकिन क्रिकेटरों की सुध लेने वाला कोई नहीं है। इन वर्षो में राजस्थान रणजी चैम्पियन तो बना लेकिन बाहरी खिलाडियों की बदौलत।

राजस्थान के खिलाड़ी वहीं के वहीं रह गए। पहले ही अंडर 19 भारतीय टीम का नेतृत्व करने वाले उदयपुर के अशोक मेनारिया और दीपक चाहर को छोड़कर कोई भी खिलाड़ी अपनी छाप नहीं छोड़ सका। जयपुर में अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं होने के बावजूद गुलाबीनगर से इतने भी खिलाड़ी नहीं निकल पाए जिन्हें अंगुलियों पर भी गिना जा सके। 

आईपीएल में हुए विवाद
जयपुर में इस वर्ष हुए आईपीएल -4 के मैचों में भी विवाद खड़ा हुआ। शेन वार्न और दीक्षित के बीच कहासुनी खासी चर्चा का विषय बनी। जयपुर के एसएमएस स्टेडियम में आईपीएल-4 के बेंगलूरू रॉयल चैलेंजर्स के खिलाफ हुए अंतिम मैच में राजस्थान रॉयल्स के कप्तान वार्न और सचिव दीक्षित के बीच तू-तू मैं-मैं हो गई थी। यह मामला बीसीसीआई तक पहुंचा और वार्न को भारी जुर्माना भरना पड़ा। सूत्रों के अनुसार किसी टीम फ्रेंचाइजी के निर्देश पर मैच के लिए पिच बदलने को लेकर यह हंगामा हुआ था। 

सचिन की आलोचना पड़ी भारी
दीक्षित को मुम्बई इंडियंस के कप्तान सचिन की आलोचना भारी पड़ गई थी। गत 29 अप्रेल को जयपुर में हुए मैच के दौरान मुम्बई इंडियंस के महज 98 रन पर ढेर हो जाने के बाद सचिन ने पिच को दोषी ठहराया था और टीम फ्रेंचाइजी ने बीसीसीआई में इसकी शिकायत भी दर्ज कराई थी। अगले ही मैच में सचिन के सस्ते में आउट होने के बाद दीक्षित ने उन पर व्यंग्यात्मक टिप्पणी की थी जिसे लेकर मीडिया में काफी बवाल खड़ा हो गया था।

क्रिकेट का अच्छा माहौल बने
हम अध्यक्ष सी.पी. जोशी के नेतृत्व में क्रिकेट की बेहतरी के लिए कार्य करेंगे। हम सभी जिला संघों को साथ लेकर कर चलेंगे। हमारा प्रयास रहेगा कि बेहतर तरीके से क्रिकेट चले और प्रदेश में खेल का अच्छा माहौल बने। के.के. शर्मा,कार्यवाहक सचिव आरसीए

पीयूष् कुलश्रेष्ठ 


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