मंगलवार, 30 अगस्त 2011

प्रतिनिधि प्रणाली का सबसे बडा दोष है......भ्रष्टाचार..!!!

-अरविन्द सीसौदिया
एक तरफ पूरा देश अन्ना की जीत के जश्न में ढूबा है....!! दूसरी तरफ राजस्थान में कृषि उपज मण्डी समितियों के 11 संचालकों के लिये चुनाव के लिये हुये...., कृषक वर्ग के 8 वार्डों के लिये मतदाता पंचायतीराज के जनप्रतिनिधि थे.....!!! पंच से लेकर जिला परिषद सदस्य तक..., कृछ चुनाव लडने वाले मेरे मित्र भी थे..!! उन्होने बताया कि वोट के लिये जम कर खरीद फरोफत हुई..., एक वोट पर खर्चा 20 हजार रूपये तक हुआ ।...कहीं 55 - 60 वोट थे तो कहीं 150 के लगभग ....!! 
वोट हुए 25 अगस्त को ,गिनती हुई 29 अगस्त को .., अध्यक्ष का चुनाव 14 सितम्बर को ..., यानी खरीद फरोख्त अब चुने संचालकों की होगी....., बोली लगेगी...!! जैसी मण्डी वैसी बोली...!!!
इसी तरह से कुछ दिन पहले चम्बल के सिंचाई तंत्र के अध्यक्ष के चुनाव थे..!! न जिलावाद चला .., न क्षैत्रवाद चला.., न पार्टीवाद चला..., अध्यक्ष वहां का बना जंहा के सबसे कम वोट थेकृ।। क्यों कि भारी बोली में जिसने 50 लाख खर्च किये वह पद ले गया....!!! 
प्रतिनिधि प्रणाली का यह सबसे बडा दोष है कि मुखिया चुनने का सौदा होता है। मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री चुनने के बदले डी एम के ने दूरचसंचार विभाग लिया और उसमें मनचाहा भ्रष्टाचार किया...!! पी एम को जानकर भी खामोश रहना पडा....!! क्यों कि यह समर्थन की कीमत थी..!!
मगर यदि जनता को ही मुखिया चुनने का अधिकार दे दिया जाये तो यह फुटकर बिक्री तो बंद हो...!! जब तक नेता बिक्री होती रहेगी..., तब तक भ्रष्टाचार नहीं मिटेगा...!! नेता बिक्री पर रोक के लिये हमें चुनाव प्रणाली बदलनी होगी....!!!!
       

समाज की एकता में ” फूट डालो राज करो “



प्रस्तावित साम्प्रदायिक और लक्षित हिंसा विधेयक 2011
सत्ता के स्वार्थ के लिये, देश को आराजकता में छोंक देनें की कोशिश
कोटा 26 अगस्त । कांग्रेस अपनी सत्ता स्वार्थ के लिये, ठीक उन्ही अंग्रेज पद चिन्हों ” फूट डालो राज करो “ पर चल रही है । जिससे पूरे समाज में वैमनस्यता और आराजकता फैल जाये । यह तथ्य प्रशिद्ध शिक्षाविद, लेखक और कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डाॅ.सुभाष कौशिक ने 26 अगस्त शुक्रवार को राष्ट्रचेतना अभियान समिति कोटा महानगर के द्वारा 
” प्रस्तावित साम्प्रदायिक और लक्षित हिंसा विधेयक 2011 “ विषय पर आयोजित बुद्धिजीवी वर्ग की विचार गोष्ठी में कहे । 
उन्होने इस असंवैधानिक कानून को बनाये जाने के यूपीए की अध्यक्षा श्रीमति सोनिया गांधी और केन्द्र सरकार के राजनैतिक स्वार्थ पर विस्तार पूर्वक प्रकाश डालते हुय बताया कि जिस तरह से 1857 के प्रथम भारत स्वतंत्रता संग्राम के पश्चात अंग्रेजों ने सत्ता को बनाये रखने के लिये समाज को आपस में लडानें और विभाजित करने की नीति को अपनाया था, उसी तरह से वर्तमान कांग्रेसनीत केन्द्र सरकार अपनी सत्ता को बनाये रखने और आगे बढाने के लिये वही अंग्रेज नीति फूट डालो राज करो पर चल रही है। 
उन्होने कहा एक असंवैधानिक संस्था राष्ट्रीय सलाहकार समिति बनाई गई, उसकी अध्यक्षा पद पर कांगेेस अध्यक्षा सोनिया गांधी को स्थापित किया गया, उन्होने हिन्दू विरोधी मानसिकता के व्यक्तियों को उस समिति का सदस्या बनाया । और इन सदस्यों के सहयोग से एक कानून ड्राफट किया, जिसका नाम दिया गया ” साम्प्रदायिक एवं लक्षित हिंसा रोकथाम विधेयक 2011 “ । यह कानून इस सदी का सबसे काला कानून है।
उन्होने कहा समाज के लोगों को विभजित करने के लिये अंग्रेजों के हंटर कमीशन की ही तरह राजेन्द्र सच्चर कमेटी बनाई गई । सच्चर कमेटी की 60 प्रतिशत सिफारिशें हंटर कमीशन की तरह है । अंग्रेजों के समय हिन्दू और मुसलमान को आपस में लडाने का काम हंटर कमीशन ने किया था और उसका अंत देश के विभाजन से हुआ । अल्पसंख्यक को बहूसंख्यक से अधिक तरजीह देनें के लिये प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि देश के संसाधनों पर पहला हक अल्पसंख्यकों का है । अल्पसंख्यक हितों के नाम पर 15 सूत्रीय योजना भी अमल में लाई गई जिसके जर्ये सरकार ने तुष्टिकरण की सभी हदें पार कर दीं ।
कौशिक ने कहा ” इसी तरह अल्पसंख्यकों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के नाम पर,अंग्रेजों के रोलेट एक्ट की तर्ज पर लक्षित हिंसा विधेयक बनाया जा रहा है जिसमें बहुसंख्यक वर्ग को हिंसक मान लिया गया है और एक आदतन अपराधी की तरह कभी भी, कहीं भी गिरफतार कर लिये जाने को सहज बना दिया गया है । बहुसंख्यक वर्ग के व्यक्ति पर मामूली से मामूली बात पर और झूठी शिकायत पर भी कार्यवाही की अनिवार्यता थोपते हुये उसकी गिरफतारी और भारी जुर्माना वसूली के प्रावधन किये हैं कि बुहुसंख्यक हिन्दूओं का जीना मुस्किल हो जायेगा। 
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व सांसद और भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष रघुवीरसिंह कौशल ने कहा पूरे देश में कोई प्रांत साम्प्रदायिक हिंसा से सबसे अधिक पीडित है तो वह जम्मू और कश्मीर प्रांत है । मगर यह कानून वहां लागू नहीं किया जायेगा , क्योंकि वहां हिन्दू अल्प संख्यक है । केन्द्र सरकार के इस प्रस्तावित भेदभाव पूर्ण प्रावधान का क्या मतलब है ? जिस प्रांत से अल्पसंख्यक अपने घरवार छोड कर भाग रहे हंैं दिल्ली सहित तमाम दूसरी जगहों पर शरण लिये हुये हैं । उन कश्मीरी पंडितों को इस कानून का संरक्षण नहीं मिलेगा। संविधान कहता है सरकार के लिये सब समान हैं उनके लिये न्याय और विधि के समक्ष समता का अधिकार है। मगर यह भेदभाव सरकार को स्वंय साम्प्रदायिकता की संलिप्तता में खडा करता है ।
कौशल ने कहा बहुसंख्यक पर एक अपराध के दो मुकदमें चलेंगें, दो बार सजा होगी ! उसे यह भी जानने का अधिकार नहीं होगा कि उसके खिलाफ शिकायत किसने की और गवाही किसने दी । भारी जुर्माना जायदाद बेंच कर चुकाना होगा और सजा ! आखिर बहुसंख्यक पर शोषण और अत्याचार की यह विभिषिका किस दुश्मनी के कारण केन्द्र सरकार लाद रही है। केन्द्र सरकार बहुसंख्यक हिन्दू समाज जो शताब्दियों से शांतिप्रिय और शरणदाता रहा है उस पर अल्पसंख्यकवाद के नाम पर जुल्म ढहाने का नया सिलसिला क्यों प्रारम्भ करना चाहती है। समाज की एकता को छिन्न भिन्न कर आराजकता की स्थिती में क्यों ढकेलना चाहती है। यह सभी राजनैतिक समझ वाले जानते हैं कि यह कानून संविधान विरोधी होनें से प्रभावी नहीं हो सकेगा । मगर हमारी शिथिलता और अन देखी से यह पारित हो गया तो देश में नया खून खराबे का युग आ जायेगा। इसलिये समाज से इसका प्रबल विरोध जाना चाहिये। केन्द्र सरकार का उद्देश्य इस कानून का हल्ला मचा कर अल्पयंख्यक वर्ग के वोट बटोरना मात्र है।
कार्यक्रम की अध्ष्क्षता वरिष्ठ अधिवक्ता दीनानाथ गालव ने की विशिष्ठ अतिथि गायत्री परिवार के जी डी पटेल और विश्व हिन्दू परिषद कोटा महानगर अध्यक्ष युधिष्ठर सिंह थे । अतिथियो को धन्यवाद समिति के महानगर संयोजक महेश शर्मा ने दिया ।  

अरविद सीसौदिया
9414180151         

सोमवार, 29 अगस्त 2011

अग्निवेश एक बार फिर से पकडे गये...




स्वामी अग्निवेश एक बार फिर से पकडे गये.......उन पर विश्वास करना ही नहीं चाहिये, ये व्यक्ति जहां भी रहा वहीं गद्दारी की है उसने......!!!!

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अन्ना हजारे के करीबी रहे स्वामी अग्निवेश आंदोलन के दौरान दोहरी भूमिका में थे। यू ट्यूब और कई समाचार चैनलों पर रविवार को जारी वीडियो में इसका खुलासा हुआ है। वीडियो में अग्निवेश किसी कपिल नाम के व्यक्ति से मोबाइल पर बात करते हुए अन्ना को पागल हाथी कह रहे हैं।

साथ ही सरकार की ओर से सख्ती दिखाने की भी मांग कर रहे हैं। इस बीच स्वामी अग्निवेश ने तमाम आरोपों से इनकार किया है। हालांकि अन्ना की मददगार किरण बेदी ने कहा कि स्वामी जी की हकीकत सामने आ गई है।

अग्निवेश ने कहा कि वीडियो फुटेज को छेड़छाड़ कर तैयार किया गया है। यह उनके खिलाफ दुष्प्रचार अभियान का हिस्सा है। वे केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल से बात नहीं कर रहे थे। किरण बेदी ने आरोप लगाया कि अग्निवेश रंगे हाथों पकड़े गए हैं। यह महाराज कौन है? क्या ये कपिल सिब्बल हैं?

बेदी ने आरोप लगाया कि अग्निवेश ने टीम अन्ना को तोड़ने का प्रयास किया। वे ही इसका जवाब दे सकते हैं। हमें कोई संदेह नहीं है। अग्निवेश ने एक निजी टीवी चैनल से बातचीत में कहा कि वे कपिल सिब्बल से बात नहीं कर रहे थे।

वे एक मुनिजी से बात कर रहे थे जिनका नाम कपिल है। वह एक निजी और अनौपचारिक बातचीत थी,लेकिन उनका मूल स्टैंड उस बातचीत में भी वही था, जो वे टीवी चैनलों पर लगातार दोहराते रहे हैं। वह स्टैंड यह था कि संसद की अपील के बाद ही अन्ना को अनशन तोड़ देना चाहिए था।

वीडियो में क्या?

वीडियो में अन्ना किसी बिल्डिंग के ग्राउंड फ्लोर पर उतरते हुए दिखते हैं। वे फोन पर बातचीत कर रहे हैं। उन्हें संसद की हजारे को अनशन खत्म करने की अपील के बारे में बात करते सुना गया। हजारे अड़े थे कि अनशन जारी रहेगा। अग्निवेश ने कहा, सरकार बहुत ज्यादा कमजोर नजर आ रही है।

आंदोलन की आलोचना करते हुए वह कहते हैं, ‘बहुत जरूरी है कपिलजी. वरना ये तो पागल हो रहे हैं जैसे हाथी हो।’ अग्निवेश कहते हैं कि वे तो इस बात पर शर्मिदा हैं कि सरकार कितनी कमजोर नजर आ रही है। सरकार जितना झुक रही है उतना ही ये सर पर चढ़ते जा रहे हैं।
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स्वामी अग्निवेश पर बरसी किरण बेदी

स्वामी अग्निवेश की कथित दगाबाजी से अन्ना हजारे के सहयोगी भड़क गए हैं। किरण बेदी ने कहा है कि अग्निवेश रंगे हाथों पकड़े गए हैं। उन्होंने अनैतिक काम किया है। अग्निवेश ने पहले भी टीम अन्ना को तोड़ने का प्रयास किया था। किरण बेदी का यह बयान उस वीडियो के सामने आने के बाद आया है जिसमें स्वामी अग्निवेश कथित रूप से केन्द्रीय मंत्री कपिल सिब्बल से फोन पर बातचीत के दौरान टीम अन्ना को पागल हाथी कह रहे हैं।

हालांकि अग्निवेश ने इस वीडियो को फर्जी बताया है। अग्निवेश का कहना है कि यह वीडिया कट, कॉपी और पेस्ट कर बनाया है। अग्निवेश ने इस बात से इनकार किया है कि वह कपिल सिब्बल से बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वह किसी कपिल महाराज से बात कर रहे थे। जब उनसे कपिल महाराज के फोन नंबर मांगे गए तो उन्होंने नंबर देने से इनकार कर दिया।

गौरतलब है कि अन्ना हजारे ने सरकार से वार्ता के लिए किरण बेदी और केजरीवाल को भेजा था। इससे अग्विनेश काफी नाराज हो गए थे। लोकसभा की अनशन तोड़ने की अपील के बाद भी जब अन्ना ने अनशन तोड़ने से इनकार कर दिया तो स्वामी अग्निवेश और भड़क गए और टीम अन्ना से अलग हो गए। उन्होंने किरण बेदी और अरविंद केजरीवाल पर अन्ना हजारे को बहकाने का आरोप लगाया था। 
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एक और खबर ....
रायपुर। अन्ना हजारे की टीम में दोहरी भूमिका निभाने वाले स्वामी अग्निवेश छत्तीसगढ़ में भी संदिग्ध हो चुके हैं। उन्होंने कुछ महीने पहले चार सरकारी कर्मचारियों को नक्सलियों के चुंगल से छुड़ाने के लिए मध्यस्थता की थी। उनकी मध्यस्थता से चारों कर्मचारी छूट तो गए, लेकिन बाद में इसमें स्वामी अग्निवेश की भूमिका पर गृहमंत्री ननकीराम कंवर ने सवाल उठाए।
उन्होंने एक सीडी जारी की जिसमें स्वामी अग्निवेश नक्सलियों के समर्थन करते दिखाए गए। वे जन अदालत में लाल सलाम के नारे लगा रहे थे। इसके बाद दूसरी बार ताड़मेटला में उनके दौरे पर ग्रामीणों ने पथराव किया था। इसे भी स्वामी अग्निवेश ने अतिरंजित करते हुए बताया था। दोनों ही मामले में स्वामी अग्निवेश की भूमिका संदेहास्पद रही।

बुधवार, 24 अगस्त 2011

अमर सिंह के खिलाफ आपराधिक मुकदमा....

- अरविन्द सिसोदिया 


नई दिल्ली. अमर सिंह के खिलाफ नोट फॉर वोट मामले में शिकंजा कसता जा रहा है। समाजवादी पार्टी के पूर्व नेता के खिलाफ इस मामले में जल्द ही चार्जशीट दाखिल की जाएगी। अमर सिंह पर 2008 में बीजेपी के तीन सांसदों को घूस देने के आरोप है। इसके मुताबिक तीनों सांसदों को एक करोड़ रुपये दिए गए थे।

मीडिया में सूत्रों के हवाले से आ रही खबरों के मुताबिक सिर्फ अमर सिंह के खिलाफ ही नहीं बल्कि सुधींद्र कुलकर्णी के खिलाफ भी आरोप पत्र दाखिल किया जा सकता है।   2008 में बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के सलाहकार सुधींद्र कुलकर्णी पर इस पूरे ऑपरेशन के जरिए तत्कालीन यूपीए सरकार की बहुमत जुटाने की कोशिश को उजागर करने का आरोप है। कुलकर्णी पर आपराधिक मुकदमा दर्ज होने के आसार हैं। इसमें उकसाने का आरोप भी लग सकता है।

बीजेपी के तीन सांसद-अशोक अर्गल, फग्गन सिंह कुलस्ते और महावीर भगोरा- नोट लेकर लोकसभा में पहुंच गए थे और वहां नोट लहराए थे। बीजेपी ने आरोप लगाया है कि अमर सिंह ने एक बिचौलिये के जरिए सांसदों को घूस देने की कोशिश की थी। उस समय अमर सिंह समाजवादी पार्टी के नेता थे और पार्टी ने सरकार को बाहर से समर्थन दिया था।  

शनिवार, 20 अगस्त 2011

सबसे बडा प्रश्न,सरकार की अयोग्यता !!



- अरविन्द सिसोदिया 
आज सबसे बडा प्रश्न सरकार की अयोग्यता का है। यदि कोई ड्राईवर कार चलाने की योग्यता का वायदा कर नौकरी हांसिल करता है और ड्राइविंग नहीं जानता तो उसे हटाना ही पडता है। केन्द्र सरकार कहती है कि वह भ्रष्टाचार ए मंहगाई नहीं रोक सकती विदेशों में जमा काला धन वापस नहीं ला सकती तो अपनी अयोग्यता के आधार पर स्वंय हट जाना चाहिये। या कोई इस तरह का रास्ता भी होनेा चाहिये कि अयोग्य को हटाया जा सके या उसे वापस बुलाया जा सके।
अन्ना की बात केन्द्र सरकार मानती है उनके साथ पांच मंत्रियों को बिठाती है उनके अन्स चार सहयोगियों के साथ उन्हे भी ड्राफट कमेटी में शामिल करती है। और फिर उन्हे ही जेल में डाल देती है और फिर ठोड देती है। क्या मजाक है। ऐसा ही बाबा रामदेव के साथ किया जाता है चार चार मंत्री उनकी अगुवाई के लिये हवाई अडडे पर पहुचते हैंए उनसे सीधे होटलों में बाम चीत की जाती है। और फिर आधी रात में उन्हे अपराधियों की तरह खदेडा जाता हे। क्या कहीं भी लगता है कि सरकार के पास सही नैतिकतापूर्ण दिमाग है घ् आंध्रप्रदेश में जगन के पिता कांगेेसी मुख्यमत्री थे उनने कोई आय से अधिक सम्पत्ति जमा की थी तो तब कार्यवाही क्यों नहीं हुई घ् अब जगन आपके साथ नहीं है तो आप ने सीबीआई से उस से छापे उस पर डलवाने शिरू कर दिये | सरकारी तंत्र को बदले की भावना  से दुरूउपयोग में इस सरकार ने नई मिसाल कायम की है

शुक्रवार, 19 अगस्त 2011

21वि सदी का काला कानून - साम्प्रदायिक एवं लक्षित हिंसा रोकथाम विधेयक-2011

विनोद बंसल 
अभी हाल ही में यूपीए अध्यक्षा श्रीमती सोनिया गांधी की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय सलाहकार परिषद द्वारा एक विधेयक का मसौदा तैयार किया गया है। इसका नाम सांप्रदायिक एव लक्षित हिंसा रोकथाम (न्याय एवं क्षतिपूर्ति) विधेयक 2011 [‘Prevention of Communal and Targeted Violence (Access to Justice and Reparations) Bill,2011’] है। ऐसा लगता है कि इस प्रस्तावित विधेयक को अल्पसंख्यकों का वोट बैंक मजबूत करने का लक्ष्य लेकर, हिन्दू समाज, हिन्दू संगठनों और हिन्दू नेताओं को कुचलने के लिए तैयार किया गया है। साम्प्रदायिक हिंसा रोकने की आड़ में लाए जा रहे इस विधेयक के माध्यम से न सिर्फ़ साम्प्रदायिक हिंसा करने वालों को संरक्षण मिलेगा बल्कि हिंसा
के शिकार रहे हिन्दू समाज तथा इसके विरोध में आवाज उठानेवाले हिन्दू संगठनों का दमन करना आसान होगा। इसके अतिरिक्त यह विधेयक संविधान की मूल भावना के विपरीत राज्य सरकारों के कार्यों में हस्तक्षेप कर देश के संघीय ढांचे को भी ध्वस्त करेगा। ऐसा प्रतीत होता है कि इसके लागू होने पर भारतीय समाज में परस्पर अविश्वास और विद्वेष की खाई इतनी बड़ी और गहरी हो जायेगी जिसको पाटना किसी के लिए भी सम्भव नहीं होगा।

मजे की बात यह है कि एक समानान्तर व असंवैधानिक सरकार की तरह काम कर रही राष्ट्रीय सलाहकार परिषद बिना किसी जवाब देही के सलाह की आड़ में केन्द्र सरकार को आदेश देती है और सरकार दासत्व भाव से उनको लागू करने के लिए हमेशा तत्पर रहती है। जिस ड्राफ्ट कमेटी ने इस विधेयक को बनाया है, उसका चरित्र ही इस विधेयक के इरादे को स्पष्ट कर देता है। जब इसके सदस्यों और सलाहकारों में हर्ष मंडेर, अनु आगा, तीस्ता सीतलवाड़, फराह नकवी जैसे हिन्दू विद्वेषी तथा सैयद शहाबुद्दीन, जॉन दयाल, शबनम हाशमी और नियाज फारुखी जैसे घोर साम्प्रदायिक शक्तियों के हस्तक हों तो विधेयक के इरादे क्या होंगे, आसानी से कल्पना की जा सकती है। आखिर ऐसे लोगों द्वारा बनाया गया दस्तावेज उनके चिन्तन के विपरीत कैसे हो सकता है।
जिस समुदाय की रक्षा के बहाने से इस विधेयक को लाया गया है इसको इस विधेयक में 'समूह' का नाम दिया गया है। इस 'समूह' में कथित धार्मिक व भाषाई अल्पसंख्यकों के अतिरिक्त दलित व वनवासी वर्ग को भी सम्मिलित किया गया है। अलग-अलग भाषा बोलने वालों के बीच सामान्य विवाद भी भाषाई अल्पसंख्यक-बहुसंख्यक विवाद का रूप धारण कर सकते हैं। इस प्रकार के विवाद 
किस प्रकार के सामाजिक वैमनस्य को जन्म देंगे, इसकी कल्पना आसानी से की जा सकती है। विधेयक अनुसूचित जातियों व जनजातियों को हिन्दू समाज से अलग कर समाज को भी बांटने का कार्य करेगा। कुछ वर्गों में पारस्परिक असंतोष के बावजूद उन सबका यह विश्वास है कि उनकी समस्याओं का समाधान हिन्दू समाज के अंगभूत बने रहने पर ही हो सकता है। 
यह विधेयक मानता है कि बहुसंख्यक समाज हिंसा करता है और अल्पसंख्यक समाज उसका शिकार होता है जबकि भारत का इतिहास कुछ और ही बताता है। हिन्दू ने कभी भी गैर हिन्दुओं को सताया नहीं, उनको संरक्षण ही दिया है। उसने कभी हिंसा नहीं की, वह हमेशा हिंसा का शिकार हुआ है। क्या यह सरकार हिन्दू समाज को अपनी रक्षा का अधिकार भी नहीं देना चाहती ? क्या हिन्दू की नियति सेक्युलर बिरादरी के संरक्षण में चलने वाली साम्प्रदायिक हिंसा से कुचले जाने की ही है ? किसी भी महिला के शील पर आक्रमण होना, किसी भी सभ्य समाज में उचित नहीं माना जाता। यह विधेयक एक गैर हिन्दू महिला के साथ किए गए दुर्व्यवहार को तो अपराध मानता है; परन्तु हिन्दू महिला के साथ किए गए बलात्कार को अपराध नहीं मानता जबकि साम्प्रदायिक दंगों में हिन्दू महिला का शील ही विधर्मियों के निशाने पर रहता है।
इस विधेयक में प्रावधान है कि 'समूह' के व्यापार में बाधा डालने पर भी यह कानून लागू होगा। इसका अर्थ है कि अगर कोई अल्पसंख्यक बहुसंख्यक समाज के किसी व्यक्ति का मकान खरीदना चाहता है और वह मना कर देता है तो इस अधिनियम के अन्तर्गत वह हिन्दू अपराधी घोषित हो जायेगा। इसी प्रकार अल्पसंख्यकों के विरुद्ध घृणा का प्रचार भी अपराध माना गया है। यदि किसी
बहुसंख्यक की किसी बात से किसी अल्पसंख्यक को मानसिक कष्ट हुआ है तो वह भी अपराध माना जायेगा। अल्पसंख्यक वर्ग के किसी व्यक्ति के अपराधिक कृत्य का शाब्दिक विरोध भी इस विधेयक के अन्तर्गत अपराध माना जायेगा। यानि अब अफजल गुरु को फांसी की मांग करना, बांग्लादेशी घुसपैठियों के निष्कासन की मांग करना, धर्मान्तरण पर रोक लगाने की मांग करना भी अपराध बन जायेगा।
दुनिया के सभी प्रबुध्द नागरिक जानते हैं कि हिन्दू धर्म, हिन्दू, देवी-देवताओं व हिन्दू संगठनों के विरुध्द कौन विषवमन करता है। माननीय न्यायपालिका ने भी साम्प्रदायिक हिंसा की सेक्युलरिस्टों द्वारा चर्चित सभी घटनाओं के मूल में इस प्रकार के हिन्दू विरोधी साहित्यों व भाषणों को ही पाया है। गुजरात की बहुचर्चित घटना गोधरा में 59 रामभक्तों को जिन्दा जलाने की प्रतिक्रिया के कारण हुई, यह तथ्य अब कई आयोगों के द्वारा स्थापित किया जा चुका है। अपराध करने वालों को संरक्षण देना और प्रतिक्रिया करने वाले समाज को दण्डित करना किसी भी प्रकार से उचित नहीं माना जा सकता। किसी निर्मम तानाशाह के इतिहास में भी अपराधियों को इतना बेशर्म संरक्षण कहीं नहीं दिया गया होगा।

भारतीय संविधान की मूल भावना के अनुसार किसी आरोपी को तब तक निरपराध माना जायेगा जब तक वह दोषी सिद्ध न हो जाये; परन्तु, इस विधेयक में आरोपी तब तक दोषी माना जायेगा जब तक वह अपने आपको निर्दोष सिद्ध न कर दे। इसका मतलब होगा कि किसी भी गैर हिन्दू के लिए अब किसी हिन्दू को जेल भेजना आसान हो जाएगा। वह केवल आरोप लगाएगा और पुलिस अधिकारी आरोपी हिन्दू को जेल में डाल देगा। इस विधेयक के प्रावधान पुलिस अधिकारी को इतना कस देते हैं कि वह उसे जेल में रखने का पूरा प्रयास करेगा ही क्योंकि उसे अपनी प्रगति रिपोर्ट शिकायतकर्ता को निरंतर भेजनी होगी। यदि किसी संगठन के कार्यकर्ता पर साम्प्रदायिक घृणा का कोई आरोप है तो उस संगठन के मुखिया पर भी शिकंजा कसा जा सकता है। इसी प्रकार यदि कोई प्रशासनिक अधिकारी हिंसा रोकने में असफल है तो राज्य का मुखिया भी जिम्मेदार माना जायेगा।
यही नहीं किसी सैन्य बल, अर्ध्दसैनिक बल या पुलिस के कर्मचारी को तथाकथित हिंसा रोकने में असफल पाए जाने पर उसके मुखिया पर भी शिकंजा कसा जा सकता है।
भारतीय संविधान के अनुसार कानून व्यवस्था राज्य सरकार का विषय है। केन्द्र सरकार केवल सलाह दे सकती है। इससे भारत का संघीय ढांचा सुरक्षित रहता है; परन्तु इस विधेयक के पारित होने के बाद अब इस विधेयक की परिभाषित 'साम्प्रदायिक हिंसा' राज्य के भीतर आंतरिक उपद्रव के रूप में देखी जायेगी और केन्द्र सरकार को किसी भी विरोधी दल द्वारा शासित राज्य में प्रत्यक्ष हस्तक्षेप का अधिकार मिल जायेगा। इसलिए यह विधेयक भारत के संघीय ढांचे को भी ध्वस्त कर देगा। विधेयक अगर पास हो जाता है तो हिन्दुओं का भारत में जीना दूभर हो जायेगा। देश द्रोही और हिन्दू द्रोही तत्व खुलकर भारत और हिन्दू समाज को समाप्त करने का षडयन्त्र करते रहेंगे; परन्तु हिन्दू संगठन इनको रोकना तो दूर इनके विरुध्द आवाज भी नहीं उठा पायेंगे। हिन्दू जब अपने आप को कहीं से भी संरक्षित नहीं पायेगा तो धर्मान्तरण का कुचक्र तेजी से प्रारम्भ हो
जायेगा। इससे भी भयंकर स्थिति तब होगी जब सेना, पुलिस व प्रशासन इन अपराधियों को रोकने की जगह इनको संरक्षण देंगे और इनके हाथ की कठपुतली बन देशभक्त हिन्दू संगठनों के विरुध्द कार्यवाही करने के लिए मजबूर हो जायेंगे।

इस विधेयक के कुछ ही तथ्यों का विश्लेषण करने पर ही इसका भयावह चित्र सामने आ जाता है। इसके बाद आपातकाल में लिए गए मनमानीपूर्ण निर्णय भी फीके पड़ जायेंगे। हिन्दू का हिन्दू के रूप में रहना मुश्किल हो जायेगा। देश के प्रधान मंत्री श्री मनमोहन सिंह ने पहले ही कहा था कि देश के
संसाधनों पर मुसलमानों का पहला अधिकार है। यह विधेयक उनके इस कथन का ही एक नया संस्करण लगता है। किसी राजनीतिक विरोधी को भी इसकी आड़ में कुचलकर असीमित काल के लिए किसी भी जेल में डाला जा सकता है।

इस खतरनाक कानून पर अपनी गहरी चिन्ता व्यक्त करते हुए विश्व हिन्दू परिषद
की केन्द्रीय प्रबन्ध समिति की अभी हाल ही में सम्पन्न प्रयाग बैठक में भी एक प्रस्ताव पारित किया गया है। इस प्रस्ताव में कहा गया है कि विहिप इस विधेयक को रोलट एक्ट से भी अधिक खतरनाक मानती है। और सरकार को चेतावनी देती है कि वह अल्पसंख्यकों के वोट बैंक को मजबूत करने के लक्ष्य को पूरा करने के लिए हिन्दू समाज और हिन्दू संगठनों को कुचलने के अपने कुत्सित और अपवित्र इरादे को छोड़ दे। यदि वे इस विधेयक को लेकर आगे बढ़ते हैं तो हिन्दू समाज एक प्रबल देशव्यापी आन्दोलन करेगा। विहिप ने देश के राजनीतिज्ञों, प्रबुध्द वर्ग व हिन्दू समाज तथा पूज्य संतों से अपील भी की है कि वे केन्द्र सरकार के इस पैशाचिक विधेयक को रोकने के लिए सशक्त प्रतिकार करें। 
आइये हम सभी राष्ट्र भक्त मिल कर इस काले कानून के खिलाफ़ अपनी आवाज बुलन्द करते हुए भारत के प्रधान मंत्री व राष्ट्रपति को लिखें तथा एक व्यापक जन जागरण के द्वारा अपनी बात को जन-जन तक पहुंचाएं। कहीं ऐसा न हो कि कोई हमें कहे कि अब पछताये क्या होत है जब चिडिया चुग गई खेत?
http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/9337062.cms
पता : 329, संत नगर, पूर्वी कैलाश, नई दिल्ली - 110065 
Email vinodbansal01@gmail.com

विदेशी ताकतों से प्रेरित.. हिन्दुओं को समूल समाप्त करने की योजना !!



-चम्पतराय
संयुक्त महामंत्री-विश्व हिन्दू परिषद
1. भारत सरकार के सम्मुख प्रस्तुत किए गए इस बिल का नाम है ‘‘साम्प्रदायिक एवं लक्षित हिंसा रोकथाम विधेयक – 2011’’
2. इस प्रस्तावित विधेयक को बनाने वाली टोली की मुखिया हैं श्रीमती सोनिया गांधी और इस टोली में हैं सैयद शहाबुद्दीन जैसे मुसलमान, जॉंन दयाल जैसे इसाई और तीस्ता सीतलवाड़ जैसे धर्मनिरपेक्ष, इसके अतिरिक्त अनेक मुसलमान, इसाई और तथाकथित धर्मनिरपेक्ष हिन्दू हैं। सोनिया गांधी के अतिरिक्त टोली का कोई और व्यक्ति जनता के द्वारा चुना हुआ जनप्रतिनिधि नहीं है। विधेयक तैयार करने वाली इस टोली का नाम है ‘‘राष्ट्रीय सलाहकार परिषद’’।
3. विधेयक का क्या उद्देश्य है, यह प्रस्तावना विधेयक में कहीं लिखी नहीं गयी।
4. विधेयक का खतरनाक पहलू यह है कि इसमें भारत की सम्पूर्ण आबादी को दो भागों में बाँट दिया गया है। एक भाग को ‘‘समूह’’ कहा गया है, तथा दूसरे भाग को ‘‘अन्य’’ कहा गया है। विधेयक के अनुसार ‘‘समूह’’ का अर्थ है धार्मिक एवं भाषाई अल्पसंख्यक (मुसलमान व इसाई) तथा अनुसूचित जाति एवं जनजाति के व्यक्ति, इसके अतिरिक्त देश की सम्पूर्ण आबादी ‘‘अन्य’’ है। अभी तक समूह का तात्पर्य बहुसंख्यक हिन्दू समाज से लिया जाता रहा है, अब इस बिल में मुस्लिम और ईसाई को समूह बताया जा रहा है, इस सोच से हिन्दू समाज की मौलिकता का हनन होगा।
विधेयक का प्रारूप तैयार करने वाले लोगों के नाम व उनका चरित्र पढ़ने व उनके कार्य देखने से स्पष्ट हो जायेगा कि ‘‘समूह’’ में अनुसूचित जाति एवं जनजाति को जोड़ने का उद्देश्य अनुसूचित जाति एवं जनजाति के प्रति आत्मीयता नहीं अपितु हिन्दू समाज में फूट डालना और भारत को कमजोर करना है।
5. यह कानून तभी लागू होता है जब अपराध ‘‘समूह’’ (मुसलमान अथवा इसाई) के प्रति ‘‘अन्य’’ (हिन्दू) के द्वारा किया गया होगा। ठीक वैसा ही अपराध ‘‘अन्य’’ (हिन्दू) के विरूद्ध ‘‘समूह’’ (मुसलमान अथवा इसाई) के द्वारा किये जाने पर इस कानून में कुछ भी लिखा नहीं गया। इसका एक ही अर्थ है कि तब यह कानून उसपर लागू ही नही होगा। इससे स्पष्ट है कि कानून बनाने वाले मानते है कि इस देश में केवल ‘‘अन्य’’ अर्थात हिन्दू ही अपराधी हैं और ‘‘समूह’’ अर्थात मुसलमान व इसाई ही सदैव पीड़ित हैं।
6. कोई अपराध भारत की धरती के बाहर किसी अन्य देश में किया गया, तो भी भारत में इस कानून के अन्तर्गत ठीक उसी प्रकार मुकदमा चलेगा मानो यह अपराध भारत में ही किया गया है। परन्तु मुकदमा तभी चलेगा जब मुसलमान या इसाई शिकायत करेगा। हिन्दू की शिकायत पर यह कानून लागू ही नहीं होगा।
7. विधेयक में जिन अपराधों का वर्णन है उन अपराधों की रोकथाम के लिए यदि अन्य कानून बने होंगे तो उन कानूनों के साथ-साथ इस कानून के अन्तर्गत भी मुकदमा चलेगा, अर्थात एक अपराध के लिए दो मुकदमें चलेंगे और एक ही अपराध के लिए एक ही व्यक्ति को दो अदालतें अलग-अलग सजा सुना सकती हैं।
8. कानून के अनुसार शिकायतकर्ता अथवा गवाह की पहचान गुप्त रखी जायेगी अदालत अपने किसी आदेश में इनके नाम व पते का उल्लेख नहीं करेगा, जिसे अपराधी बनाया गया है उसे भी शिकायतकर्ता की पहचान व नाम जानने का अधिकार नहीं होगा इसके विपरीत मुकदमें की प्रगति से शिकायतकर्ता को अनिवार्य रूप से अवगत कराया जायेगा।
9. मुकदमा चलने के दौरान अपराधी घोषित किए गए हिन्दू की सम्पत्ति को जब्त करने का आदेश मुकदमा सुनने वाली अदालत दे सकती है। यदि हिन्दू के विरूद्ध दोष सिद्ध हो गया तो उसकी सम्पत्ति की बिक्री करके प्राप्त धन से सरकार द्वारा मुकदमें आदि पर किए गए खर्चो की क्षतिपूर्ति की जायेगी।
10. हिन्दू के विरूद्ध किसी अपराध का मुकदमा दर्ज होने पर अपराधी घोषित किए हुए हिन्दू को ही अपने को निर्दोष सिद्ध करना होगा अपराध लगाने वाले मुसलमान, इसाई को अपराध सिद्ध करने का दायित्व इस कानून में नहीं है जब तक हिन्दू अपने को निर्दोष सिद्ध नहीं कर पाता तबतक इस कानून में वह अपराधी ही माना जायेगा और जेल में ही बंद रहेगा।
11. यदि कोई मुसलमान या पुलिस अधिकारी शिकायत करे अथवा किसी अदालत को यह आभास हो कि अमुक हिन्दू इस कानून के अन्तर्गत अपराध कर सकता है तो उसे उस क्षेत्र से निष्कासित (जिला के बाहर) किया जा सकता है।
12. इस कानून के अन्तर्गत सभी अपराध गैर जमानती माने गए है। गवाह अथवा अपराध की सूचना देने वाला व्यक्ति अपना बयान डाक से अधिकृत व्यक्ति को भेज सकता है इतने पर ही वह रिकार्ड का हिस्सा बन जायेगा और एक बार बयान रिकार्ड में आ गया तो फिर किसी भी प्रकार कोई व्यक्ति उसे वापस नहीं ले सकेगा भले ही वह किसी दबाव में लिखाया गया हो।
13. कानून के अनुसार हिन्दूओं पर मुकदमा चलाने के लिए बनाये गए विशेष सरकारी वकीलों के पैनल में एक तिहाई मुस्लिम वा इसाई वकीलों का रखा जाना सरकार स्वयं सुनिश्चित करेगी।
14. कानून के अनुसार सरकारी अधिकारियों पर मुकदमा चलाने के लिए सरकार की अनुमति लेना आवश्यक नहीं होगा।
15. कानून को लागू कराने के लिए एक ‘‘प्राधिकरण’’ प्रान्तों में व केन्द्र स्तर पर बनेगा जिसमें 7 सदस्य रहेंगे, प्राधिकरण का अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष अनिवार्य रूप से मुसलमान या इसाई होगा, प्राधिकरण के कुल 7 सदस्यों में से कम से कम 4 सदस्य मुसलमान या इसाई होंगे। यह प्राधिकरण सिविल अदालत की तरह व्यवहार करेगा, नोटिस भेजने का अधिकार होगा, सरकारों से जानकारी मॉंग सकता है, स्वयं जॉंच करा सकता है, सरकारी कर्मचारियों का स्थानान्तरण करा सकता है तथा समाचार पत्र, टी.वी.चैनल आदि को नियंत्रित करने का अधिकार भी होगा। इसका अर्थ है किसी भी स्तर पर हिन्दू न्याय की अपेक्षा न रखे, अपराधी ठहराया जाना ही उसकी नियति होगी। यदि मुस्लिम/इसाई शिकायतकर्ता को लगता है कि पुलिस न्याय नहीं कर रही है तो वह प्राधिकरण को शिकायत कर सकता है और प्राधिकरण पुनः जॉंच का आदेश दे सकता है।
16. कानून के अनुसार शिकायतकर्ता को तो सब अधिकार होंगे परन्तु जिसके विरूद्ध शिकायत की गई है उसे अपने बचाव का कोई अधिकार नहीं होगा वह तो शिकायतकर्ता का नाम भी जानने का अधिकार नहीं रखता।
17. प्रस्तावित कानून के अनुसार किसी के द्वारा किए गए किसी अपराध के लिए उसके वरिष्ठ (चाहे वह सरकारी अधिकारी हो अथवा किसी संस्था का प्रमुख हो, संस्था चाहे पंजीकृत हो अथवा न हो) अधिकारी या पदाधिकारी को समान रूप से उसी अपराध का दोषी मानकर कानूनी कार्यवाई की जायेगी।
18. पीडित व्यक्ति को आर्थिक मुआवजा 30 दिन के अंदर दिया जायेगा। यदि शिकायतकर्ता कहता है कि उसे मानसिक पीडा हुई है तो भी मुआवजा दिया जायेगा और मुआवजे की राशि दोषी यानी हिन्दू से वसूली जायेगी, भले ही अभी दोष सिद्ध न हुआ हो। वैसे भी दोष सिद्ध करने का दायित्व शिकायतकर्ता का नहीं है। अपने को निर्दोष सिद्ध करने का दायित्व तो स्वयं दोषी का ही है।
19. इस कानून के तहत केन्द्र सरकार किसी भी राज्य सरकार को कभी भी आन्तरिक अशांति का बहाना बनाकर बर्खास्त कर सकती है।
20. अलग-अलग अपराधों के लिए सजाए 3 वर्ष से लेकर 10 वर्ष, 12 वर्ष, 14 वर्ष तथा आजीवन कारावास तक हैं साथ ही साथ मुआवजे की राशि 2 से 15 लाख रूपये तक है। सम्पत्ति की बाजार मुल्य पर कीमत लगाकर मुआवजा दिया जायेगा और यह मुआवजा दोषी यानी हिन्दू से लिया जायेगा।
21. यह कानून जम्मू-कश्मीर सहित कुछ राज्यों पर लागू नहीं होगा परन्तु अंग्रेजी शब्दों को प्रयोग इस ढंग से किया गया है जिससे यह भाव प्रकट होता है मानो जम्मू-कश्मीर भारत का अंग ही नहीं है।
22. यह विधेयक यदि कानून बन गया और कानून बन जाने के बाद इसके क्रियान्वयन में कोई कठिनाई शासन को हुई तो उस कमी को दूर करने के लिए राजाज्ञा जारी की जा सकती है; परन्तु विधेयक की मूल भावना को अक्षुण्ण रखना अनिवार्य है साथ ही साथ संशोधन का यह कार्य भी कानून बन जाने के बाद मात्र दो वर्ष के भीतर ही हो सकता है।
23. कानून के अन्तर्गत माने गए अपराध निम्नलिखित है-
डरावना अथवा शत्रु भाव का वातावरण बनाना, व्यवसाय का बहिष्कार करना, आजीविका उपार्जन में बाधा पैदा करना, सामूहिक अपमान करना, शिक्षा, स्वास्थ्य, यातायात, निवास आदि सुविधाओं से वंचित करना, महिलाओं के साथ लैंगिक अत्याचार। विरोध में वक्तत्व देना अथवा छपे पत्रक बॉंटने को घृणा फैलाने की श्रेणी में अपराध माना गया है। कानून के अन्तर्गत मानसिक पीडा भी अपराध की श्रेणी में रखा गया है जिसकी हर व्यक्ति अपनी सुविधानुसार व्याख्या करेगा।
24. इस कानून के अन्तर्गत अपराध तभी माना गया है जब वह ‘‘समूह’’ यानी मुस्लिम/इसाई के विरूद्ध किया गया हो अन्यथा नहीं अर्थात यदि हिन्दुओं को जान-माल का नुकसान मुस्लिमों द्वारा पहुंचाया जाता है तो वह उद्देश्यपूर्ण हिंसा नहीं माना जायेगा, कोई हिन्दू मारा जाता है, घायल होता है, सम्पत्ति नष्ट होती है, अपमानित होता है, उसका बहिष्कार होता है तो यह कानून उसे पीड़ित नही मानेगा। किसी हिन्दू महिला के साथ मुस्लिम दुराचारी द्वारा किया गया बलात्कार लैंगिक अपराध की श्रेणी में नहीं आयेगा।
25. ‘‘समूह’’ में अनुसूचित जाति जनजाति का नाम जोडना तो मात्र एक धोखा है, इसे समझने की आवश्यकता है। यह नाम जोड़कर उन्होंने हिन्दू समाज को कमजोर करने का भी काम किया।
26. यदि शिया और सुन्नी मुस्लिमों में, मुस्लिमों व इसाईयों में अथवा अनुसूचित जाति-जनजाति का मुस्लिमों/इसाईयों से संघर्ष हो गया अथवा किसी मुस्लिम दुराचारी ने किसी मुस्लिम कन्या के साथ बलात्कार किया तब भी यह कानून लागू नहीं होगा।
27. प्रत्येक समझदार व्यक्ति इस बिल को पढे, इसके दुष्परिणामों को समझे, जिन लोगों ने इसका प्रारूप तैयार किया है उनके मन में हिन्दू समाज के विरूद्ध भरे हुए विष को अनुभव करें और लोकतांत्रिक पद्धति के अन्तर्गत वह प्रत्येक कार्य करें ताकि यह बिल संसद में प्रस्तुत ही न हो सके और यदि प्रस्तुत भी हो जाये तो किसी भी प्रकार स्वीकार न हो। इस कानून की भ्रूण हत्या किया जाना ही देशहित में है।
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पकडे अन्ना-छोडे अन्ना,क्या मखौल है देश में।


-मोहनलाल गालव (कोयला जिला बांरा,राजस्थान)
पकडे अन्ना-छोडे अन्ना,क्या मखौल है देश में।
धूर्तों का दिवाला निकला , खाकी वर्दी वेष में।। 1।।
सरकार गृहमंत्रालय , देखो करते मनमानी।
दूरदर्शिता बिलकुल नहीं है,बन गये ऐशे अभिमानी।। 2।।
गांधीमार्ग कलंकित कर रहे , देखो आज संसद में।
रावण की लंका में जैसे, पग रोपा हो अंगद ने।। 3।।
ईमानदारी,सत्य,अहिंसा की, शपथ जो ये खाते है।
घर भरने में नहीं चूकते,रिश्वत खूब कमाते हैं।। 4 ।।
उपर से करते हैं थोथी बातें, भ्रष्टाचार मिटाने की।
मंशा इनकी तीव्र होती है,कालाधन कमानें की ।। 5 ।।
भ्रष्टाचारी कालेधन को , लेकर आवे देश में।
देश समृद्धि की गणना हो,सम्पूर्ण विश्व में।। 6 ।।
देशवासियों जागों अब तो, माता तृम्हे पुकारती।
देख कर इनके करतब सारे,इनको वह दुत्कारती ।। 7।।
भारतमाता -
कालेधन पर परत पडी है,उसको में तुडवा दूंगी।
तुम मुझे अहिंसा दो , में तुम्हे वैभव दूंगी।। 8 ।।
अन्ना के लिये -
कत्तव्य मार्ग पर अडे रहो, सत्य मार्ग मिल जावेगा।
जीवन लक्ष्य प्राप्त करो तुम, काल कभी न आवेगा।। 9 ।।

गुरुवार, 18 अगस्त 2011

सोनिया गांधी की हिन्दू विरोधी मानसिकता



- अरविन्द सिसोदिया 
             श्रीमती सोनिया गांधी की अध्यक्षता में बनाई गई राष्ट्रीय सलाहकार परिषद द्वारा तैयार किया गया प्रस्तावित साम्प्रदायिक हिंसा रोकथाम विधेयक यदि संसद द्वारा पारित कर दिया गया तो मुस्लिम, ईसाई आदि अल्पसंख्यक समूहों को हिन्दुओं के प्रति घृणा फैलाने, हिन्दुओं को प्रताड़ित करने और हिन्दू महिलाओं से बलात्कार करने के लिए प्रोत्साहन मिल जाएगा | क्योंकि इस प्रस्तावित कानून के अन्तर्गत यदि बहुसंख्यक वर्ग अर्थात हिन्दू किसी अल्पसंख्यक समूह के प्रति घृणा फैलाएं या हिंसा करें या यौन उत्पीड़न करें तो हिन्दुओं को दंडित करने का प्रावधान है | किन्तु मुस्लिम, ईसाई आदि अल्पसंख्यक समूहों द्वारा हिन्दुओं के प्रति घृणा फैलाई जाए या हिंसा की जाए या बलात्कार आदि यौन शोषण किया जाए, तो उन अल्पसंख्यकों को किसी प्रकार का दंड देने का कोई प्रावधान नहीं है।
                इतना ही नहीं यदि कोई अल्पसंख्यक उपरोक्त अपराधों के 
लिए किसी बहुसंख्यक व्यक्ति या संगठन के विरुद्ध शिकायत करता है तो उसकी जांच किए बिना ही उस व्यक्ति एवं संगठन को अपराधी मानकर उसका संज्ञान लिया जाएगा। इस अपराध की असत्यता सिद्ध करना अपराधी का दायित्व होगा। ध्यान देने योग्य बात यह है कि इस विधेयक में ‘समूह की परिभाषा’ धार्मिक या भाषाई अल्पसंख्यक वर्ग ही है बहुसंख्यक वर्ग के लिए समूह शब्द का प्रयोग नहीं है और केवल समूह के विरुद्ध घृणा, हिंसा आदि किया गया अपराध ही अपराध माना जाएगा। 
                 इस विधेयक के भाग दो की धारा 7 में निर्धारित किया गया है कि किसी व्यक्ति को उस स्थिति में यौन संबंधी अपराध के लिए दोषी माना जाएगा यदि वह अल्पसंख्यक समूह से संबंध रखने वाले व्यक्ति से यौन अपराध करता है। इस विधेयक कि धारा 8 में यह निर्धारित किया गया है कि घृणा संबंधी प्रचार उस स्थिति में अपराध माना जाएगा जब कोई व्यक्ति किसी अल्पसंख्यक समूह से संबंध रखने वाले व्यक्ति के विरुद्ध घृणा फैलाता है। धारा 9 में साम्प्रदायिक हिंसा संबंधी अपराधों का वर्णन है। कोई व्यक्ति अकेले या मिलकर या किसी संगठन के कहने पर किसी अल्पसंख्यक समूह के विरुद्ध कोई गैर कानूनी कार्य करता है तो उसे संगठित साम्प्रदायिक एवं लक्षति हिंसा के लिए दोषी माना जाएगा। धारा 10 में उस व्यक्ति को दंड दिए जाने का प्रावधान है जो किसी अल्पसंख्यक समूह के खिलाफ किसी अपराध को करने अथवा उसका समर्थन करने हेतु पैसा खर्च करता है या पैसा उपलब्ध कराता है।   
            
इस प्रस्तावित विधेयक में यह मान लिया गया है कि साम्प्रदायिक हिंसा केवल बहुसंख्यक समुदाय के सदस्यों द्वारा ही पैदा की जाती है और अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्य कभी ऐसा नहीं करते। अत: बहुसंख्यक समुदाय के सदस्यों द्वारा अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों के खिलाफ किए गए साम्प्रदायिक अपराध तो दंडनीय हैं, अल्पसंख्यक समूहों द्वारा बहुसंख्यक समुदाय के खिलाफ किए गए ऐसे अपराध कतई दंडनीय नहीं माने गए हैं। अत: इस विधेयक के तहत यौन संबंधी अपराध इस हालात में दंडनीय हैं यदि वह किसी अल्पसंख्यक समूह के किसी व्यक्ति के विरुद्ध किया गया हो। अल्पसंख्यक समुदाय के विरुद्ध घृणा संबंधी प्रचार को अपराध माना गया है जबकि बहुसंख्यक समुदाय के मामले में ऐसा नहीं है। संगठित और लक्षित हिंसा, घृणा संबंधी प्रचार, ऐसे व्यक्तियों को वित्तीय सहायता, जो अपराध करते हैं, यातना देना या सरकारी कर्मचारियों द्वारा अपनी ड्यूटी में लापरवाही, ये सभी उस हालात में अपराध माने जाएंगे यदि वे अल्पसंख्यक समुदाय के किसी सदस्य के विरुद्ध किए गए हो अन्यथा नहीं। अल्पसंख्यक समुदाय का कोई भी सदस्य इस कानून के तहत बहुसंख्यक समुदाय के विरुद्ध किए गए किसी अपराध के लिए दंडित नहीं किया जा सकता। केवल बहुसंख्यक समुदाय का सदस्य ही ऐसे अपराध कर सकता है और इसलिए इस कानून का विधायी मंतव्य यह है कि चूंकि केवल बहुसंख्यक समुदाय के सदस्य ही ऐसे अपराध कर सकते हैं अत: उन्हें ही दोषी मानकर उन्हें दंडित किया जाना चाहिए। इस विधेयक में धर्म या जाति के आधार पर भेदभाव क्यों किया गया है? अपराध तो अपराध है चाहे वह किसी भी वर्ग के व्यक्ति ने किया हो। इस विधेयक को तैयार करने वाली एनएसी के सदस्य सोनिया जी द्वारा चुने हुए लोग ऐसे लोग है जो प्राय: माओवादियों के पक्ष में वक्तव्य देते रहे हैं। इस विधेयक से श्रीमती सोनिया गांधी की हिन्दू विरोधी मानसिकता का पता चलता है।

अन्ना के साथ जन आक्रोश क्यों , देश के प्रमुख घोटाले......


. अरविन्द सीसौदिया
1. 2 जी स्पैक्ट्रम घोटाला,
देश का सबसे बडा घोटाला,  1.76 लाख करोड का,मुख्य आरोपी दूरसंचार संचार मंत्री ए राजा...!
2. कामनवेल्थ गेम घोटाला।
देश को शर्मसार करने वाला 70 हजार करोड का,मुख्य आरोपी सुरेश कलमाडी,शीला दीक्षित
3. आदर्श हाउसिंग घोटाला।
कारगिल शहीदों के नाम पर मुंम्बई के कोलाबा के पाॅश इलाके में सोसाइटी के नाम पर जमीन का आवंटन करने के बाद आवंटियों ने करीब 9 अरब का फायदा उठाया।
4.एस बैंड स्पैक्ट्रम आवंटन
लगभग 2 लाख करोड के अनुमानित फायदा आवंटियों उठाना चाहते थे,यह मामला सीधे प्रधानमंत्री से जुडा हे।
5.यूपी खाद्यान्न घोटाला
सन् 2001 से 2007 तक के बीच 35 हजार करोड का घोटाला है, यह जनता की राहत योजनाओं जैसे कि अंत्योदय,अन्नपूर्णा,मिड डे मील के नाम पर मिले खाद्यान्न को बेच कर किया गया हे। 
इनके अलावा इन पिघले 20 सालों में कम से कम 36 घोटाले और भी हैं जिनमें जनता के धन की जम कर लूट हुई है। फायदा उठाने वोले फायदा उठा चुका,नुकसान पाने वाला रोता रहा हे। सबसे अहम सवाल यह है कि इन घोटालों ने देश की आम जनता को गरीब बनाने के साथ साथ,उनको मिलने वाली राहत तक को छीना है। यह पैसा देश के आम व्यक्ति पर खर्च पर होता तो उसको सुविधा मिलती । अर्थात घोटाले जनता के मुंह से निवाला छीनते हे। इस लिये ये अत्यंत घ्रणित और राष्ट्रीय अपराध है।

मंगलवार, 16 अगस्त 2011

अन्ना की रिहाई में भी राजनीती ...



- अरविन्द सिसोदिया 


अन्ना हजारे की गलत तरीके से गिरफतारी और उन्हे छोडनें में राहुल 


गांध को श्रेय देनें के पीछे साजिश यह है कि भारतीय राजनेताओं को 


अयोग्य साबित किया जाये और इटालियन माता के राजकुमार को 


योग्य साबित किया जाये।


     नई दिल्ली. दिल्ली पुलिस ने अन्ना हजारे का रिलीज़ वारंट तिहाड़ जेल भेज दिया है। सूत्रों के अनुसार अन्ना अबसे थोड़ी देर में जेल से रिहा हो सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक रिहाई के बाद उन्हें पुणे ले जाया जा सकता है।
इधर किरण बेदी ने कहा है कि अन्ना ने रिहाई के लिए कोई शर्त नहीं रखी है। अन्ना को बिना शर्त छोड़ा जा रहा है। अन्ना की रिहाई पर प्रशांत भूषण ने प्रतिक्रिया देते हुए  कहा कि देर आए दुरुस्त आए।
सूत्र के अनुसार टीम अन्ना रिहाई को लेकर थोड़ी नर्म पड़ी है जिसके बाद सरकार ने उन्हें रिहा करने का फैसला लिया है।  टीम अन्ना के सदस्यों का कहना है कि रिहा होने के बाद अन्ना सीधे जेपी पार्क जाएंगें। मगर सूत्रों के अनुसार दिल्ली पुलिस उन्हें सीधे एअरपोर्ट ले जाने का प्रयास कर रही है। उनके टिकट का भी बंदोबस्त किया जा रहा है।

गांधीवादी सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे को दिल्ली पुलिस ने दंड प्रक्रिया संहिता की दो धाराओं- धारा 107 और 151 के तहत गिरफ्तार किया गया।
धारा 107 के तहत किसी भी क्षेत्र में शांति तथा सौहार्द का उल्लंघन करने पर गिरफ्तारी का प्रावधान है।

इसके अनुसार,कार्यकारी मजिस्ट्रेट को यदि सूचना मिलती है कि कोई व्यक्ति शांति भंग या सार्वजनिक सौहार्द को बाधित करने वाला है,उसके किसी कदम से शांति या सौहार्द को नुकसान पहुंचता है या यदि मजिस्ट्रेट को कानूनी प्रक्रिया के पर्याप्त आधार नजर आते हैं तो वह ऐसे व्यक्ति से एक निश्चित अवधि के दौरान शांति बनाए रखने का आश्वासन ले सकते हैं। अवधि का निर्धारण मजिस्ट्रेट के विवेक पर निर्भर होगा। यह एक साल से अधिक नहीं हो सकती।

वहीं,धारा 151 के तहत  संज्ञेय अपराधों की रोकथाम के लिए किसी भी आशंकित व्यक्ति को गिरफ्तार किया जा सकता है। इसके अनुसार,यदि पुलिस को किसी  संज्ञेय अपराध के बारे में जानकारी मिलती है और उसे लगता है कि सम्बंधित व्यक्ति को गिरफ्तार किए बिना इसे रोकना मुश्किल है तो वह मजिस्ट्रेट के आदेश या वारंट के बगैर भी उसे गिरफ्तार कर सकती है।

ज्ञात हो कि अन्ना हजारे को मंगलवार सुबह उस समय हिरासत में ले लिया गया था, जब वह भ्रष्टाचार निरोधी जनलोकपाल विधेयक के समर्थन में अपना प्रस्तावित आमरण अनशन शुरू करने के लिए घर से निकले थे।
दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता राजन भगत ने कहा, "अन्ना हजारे ने निजी मुचलके पर हस्ताक्षर करने से इंकार कर दिया, लिहाजा उन्हें सात दिनों की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया गया है।"

अन्ना हजारे को जेल के जिस ब्लॉक में रखा गया है, उसी अहाते में राष्ट्रमंडल खेल आयोजन समिति के पूर्व अध्यक्ष सुरेश कलमाडी को भी रखा गया है। अन्ना हजारे के प्रमुख सहयोगी अरविंद केजरीवाल और 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले के आरोपी पूर्व दूरसंचार मंत्री ए.राजा के एक अहाते में रखा गया है।
तिहाड़ जेल के महानिदेशक नीरज कुमार के अनुसार अन्ना हजारे को दोपहर बाद लगभग 3.40 बजे यहां लाया गया और उन्हें जेल संख्या चार में रखा गया।
अन्ना हजारे के निकट सहयोगी मनीष सिसोदिया एवं अन्य तीन जेल के इसी ब्लॉक में रखे गए हैं।
कुमार ने कहा, "अरविंद केजरीवाल जेल संख्या एक में अन्य चार समर्थकों के साथ हैं।"
उन्होंने हालांकि स्पष्ट किया कि अन्ना हजारे को उसी ब्लॉक में रखा गया है जिसमें कलमाडी हैं लेकिन उनके निकटवर्ती वार्ड में नहीं रखा गया है।
कुमार ने संवाददाताओं से कहा, "अन्ना हजारे जिस वार्ड में हैं, वह कलमाडी के वार्ड से दूर है। हमने पहले ही उनकी चिकित्सीय जांच कराई है।"
उप महानिरीक्षक (करागार) आर.एन. शर्मा ने आईएएनएस से कहा, "अन्ना हजारे अनशन कर रहे हैं। उन्होंने पानी तक लेने से इंकार कर दिया।"
शर्मा ने यह भी कहा कि दोनों जेलों (जेल संख्या एक और चार) में 2,000 से अधिक कैदी हैं।
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अन्ना की गिरफ्तारी पर घमासान
नई दिल्ली। अन्ना हजारे की गिरफ्तारी क्या हुई सडक से लेकर संसद तक हंगामा मच गया। सरकार के आला मंत्रियों समेत पीएम और राहुल गांधी ने बैठक की। उधर एनडीए ने भी साफ कर दिया कि वो अन्ना की गिरफ्तारी का विरोध करेंगे। अन्ना ने भ्रष्टचार के खिलाफ हुंकार क्या भरी सरकार बौखला गई। सुबह अन्ना दिल्ली के मयूर विहार स्थित सुप्रीम एनक्लेव से जैसे ही बाहर निकले दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। अन्ना की गिरफ्तारी हुई तो गिरफ्तारी के विरोध में अन्ना समर्थक सडकों पर उतरने लगे। देश भर में अन्ना समर्थक विरोध पर उतारू हो गए। स्थिति को भांपते हुए सुबह 10 बजे संसद भवन में ही कैबिनेट कमेटी ऑन पार्लियामेंट्री अफेयर्स की मीटिंग हुई। उधर 10 बजे ही संसद परिसर के भीतर एनडीए के नेता भी बैठक के लिए जुटे। एनडीए की बैठक में फैसला लिया गया कि सरकार की कदम का एनडीए विरोध करेगी। बैठकों का दौर खत्म हुआ तो अन्ना की गिरफ्तारी की गूंज लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही शुरू होते ही सुनाई दी। 11 बजे जब संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही शुरू हुई तो विपक्ष ने दोनों सदनों में जमकर बवाल मचाया। लोकसभा और राज्यसभा पहले 12 बजे तक फिर बाद में कल तक यानी 17 अगस्त तक के लिए स्थगित कर दिया गया। जो भी लेकिन सरकार अन्ना की गिरफ्तारी पर बयान देने में टालमटोल करती रही। इस बीच दोपहर होते होते संसद भवन के परिसर में ही सरकार के आला मंत्री, राहुल गांधी और प्रधानमंत्री स्थिति का आकलन करने के लिए जुटे। इसके बाद सरकार की तरफ से केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने सरकार का पक्ष सामने रखा। प्रणब ने साफ कर दिया कि लोकतंत्र में विरोध का हक सभी को है लेकिन अन्ना ने कानून के मुताबिक विरोध नहीं किया। इधर सरकार के दूसरे मंत्रियों ने भी अन्ना की मुहिम को गैरकानूनी बताया। सरकार ने भले अन्ना को गिरफ्तार कर लिया हो लेकिन सरकार की दलीलें लोगों को पच नहीं रही हैं। लोगों की जुबां पर बस एक ही सवाल है कि आखिर क्या वजह है कि शांतिपूर्ण तरीके से अनशन को उतारू अन्ना को सरकार ने गिरफ्तार कर लिया। कांग्रेस ने जिस अन्ना पर आरोपों की झडी लगा थी उन्हें ही अब सम्मानित शब्दों से बुला रही है। अब इसे मजबूरी कहें या फिर सियासत का दांव लेकिन अन्ना के लिए सरकार के सुर बदले बदले नजर आने लगे हैं। 

सोमवार, 15 अगस्त 2011

अन्ना को जगह नहीं ...खुद के लिए मेला लगाया ...


कांग्रेस ने पिछले ही साल अपना ८३ वां राष्ट्रिय महा अधिवेशन दिल्ली के पास बुराड़ी गाँव में हुआ .., तीन दिवसीय इस महा अधिवेशन में लगभग २० हजार लोग सम्मिलित हुए.., १८ से २० दिसंबर २०१० के इस अधिवेशन में हजारों चार पहिया वाहन आये..मेला लगा रहा .., मगर इसी कांग्रेस को देखिये कि वह अन्ना हजारे  को अनशन के लिए जगह तक नहीं दे रही ..!! यह अघोषित आपातकाल है जो भी कोंग्रेस सरकार के विरोध में कुछ बोलेगा , उसी के खिलाफ झूठा मुक़दमा बना देंगे या कोई दुष्प्रचार प्रारंभ कर देते हैं ...!!! कोंग्रेस के अधिवेशन में पुलिस दुमदवाये थे ...मगर यही अन्ना की टीम के पीछे दुश्मन की तरह पीछे पड़ गई है...  
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साम्प्रदायिकता को देश के समक्ष खतरा करार दिया था।
कांग्रेस महाधिवेश शुरू होने से ऐन पहले राहुल गांधी से जुड़े कथित विकीलीक्स खुलासे का भी सत्र पर कुछ प्रभाव पड़ सकता है जिसकी आरएसएस और भाजपा ने कड़ी आलोचना की है। राहुल गांधी ने अमेरिकी राजदूत टिमोथी रोमर को कट्टरपंथी हिन्दू संगठनों से लश्कर ए तैयबा के समान खतरा बताया था। कांग्रेस ने इस विषय पर स्पष्टीकरण जारी किया है जिससे यह स्पष्ट हुआ है कि राहुल ने रोमर से बातचीत की थी कांग्रेस ने हालांकि कहा कि इसके तथ्यों की जांच के बाद कुछ कहा जायेगा और विकीलीक्स के प्रत्येक खुलासे पर प्रतिक्रिया व्यक्त करने पर अफरातफरी की स्थिति उत्पन्न हो जायेगी।
देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी कांग्रेस के सवा सौ साल पूरे होने के उपलक्ष्य में इस तंबुओं के शहर में पार्टी का महाधिवेशन आयोजित किया गया है। इस दौरान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी सहित कांग्रेस के सभी आमोखास वहीं रहेंगे। सोनिया गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद यह पार्टी का तीसरा महाधिवेशन है।
दिल्ली में 32 वर्ष के अंतरराल पर कांग्रेस महाधिवेशन हो रहा है पिछला महाधिवेशन 1978 में हुआ था जिसकी अध्यक्षता इंदिरा गांधी ने की थी। कांग्रेस की स्थापना के सवा सौ साल के इतिहास में दिल्ली में शनिवार से उसका छठा महाधिवेशन शुरू हो गया।आजादी के बाद से राष्ट्रीय राजधानी में उसका यह तीसरा महाधिवेशन है। राष्ट्रीय राजधानी में 32 वर्ष के अंतराल के बाद कांग्रेस महाधिवेशन का आयोजन किया जा रहा है।
महाधिवेशन की तैयारियों के सिलसिले में बुराड़ी में अस्थायी तौर पर निर्मित हो रहा यह तम्बुओं का शहर कांग्रेस के झंडे के रंग में रंग गया है। यहां प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी सहित कुछ वरिष्ठ नेताओं के लिए अटेच बाथरूम वाले तंबुओं के विशेष कक्ष तैयार किये गये हैं।

प्रधानमंत्री सहित सरकार से जुड़े अनेक वरिष्ठ लोगों के वहां प्रवास करने को देखते हुए इसे अत्याधुनिक संचार उपकरणों से जोड़ा गया है जिससे कि सरकार का आवश्यक काम काज भी वहीं से चलता रहे। प्रदेश कांग्रेस एवं आयोजन समिति के अध्यक्ष जयप्रकाश अग्रवाल ने कहा कि इस महाधिवेशन की विषयवस्तु कांग्रेस की सेवा एवं समर्पण के 125 वर्ष रखा गया है।
इस महाधिवेशन में पिछले 125 वर्ष में देश के विकास में कांग्रेस के योगदान को प्रदर्शित करने के साथ भविष्य में राष्ट्र सेवा के बारे में पार्टी की रणनीति को पेश किया जायेगा। आयोजन स्थल में कांग्रेस कार्यकर्ताओं एवं प्रतिनिधियों के ठहरने के लिए 500 तंबुओं के आशियाने बनाये गए है। महिला कार्यकर्ताओं के ठहरने के लिए विशेष प्रबंध किये गए हैं और उनके लिए अलग से टेंटों के ही 80 आवास क्षेत्र बनाये गए हैं। दस बिस्तरों वाला एक अस्थायी अस्पताल भी आयोजन स्थल पर बनाया गया है। दिसंबर में सिहरा देने वाले ठंडक को देखते हुए आयोजन स्थल एवं कक्षों में रूम हीटर एवं अन्य उपकरण लगाये गए हैं। कांग्रेस के 83वें महाधिवेशन में पार्टी के लगभग 8000 प्रतिनिधियों के अलावा जिला एवं ब्लाक स्तर के कार्यकर्ताओं के आने की उम्मीद है। आयोजन स्थल पर करीब पांच हजार लोगों के रूकने की व्यवस्था की गई है।

कांग्रेस कार्यकर्ताओं के रूकने के लिए आयोजन स्थल के अतिरिक्त होटलों गेस्ट हाउस धर्मशालाओं में भी व्यवस्था की गई है। सांसदों से भी अपने सरकारी आवास पर कार्यकर्ताओं के रूकने का प्रबंध करने को कहा गया है। आयोजन स्थल पर एक वृहद कांफ्रेंस हाल बनाया गया है जहां करीब 14 हजार कुर्सियां रखी जा सकती है।
इसके अलावा इस मुख्य कक्ष से बाहर एक बड़ा टेलीविजन स्क्रीन लगाया गया है जहां लोग कार्यवाही देख सकते हैं। महाधिवेशन में शामिल होने आने वाले लोगों के लिए आयोजन स्थल पर खानपान का विशेष प्रबंध किया गया है और इनके लिए चार फूड कोर्ट बनाये गए हैं। यहां तीन दिनों में करीब 20 हजार लोगों के खानपान की व्यवस्था है।
महाधिवेशन के दौरान लोगों के खानपान की विशेष व्यवस्था की गई है। चूंकि आयोजन में शामिल होने के लिए देश के कोने कोने से कार्यकर्ता आ रहे हैं इसलिए हर क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए भोजन की व्यवस्था की गई है। तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, केरल जैसे क्षेत्र से आने वाले कार्यकर्ताओं के लिए इडली, डोसा, उत्थपम जैसे दक्षिण भारतीय व्यंजन के अलावा पंजाब राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, बिहार से आने वाले लोगों के लिए उत्तर भारतीय खाना परोसा जायेगा। पूवोर्त्तर क्षेत्र से आने वाले प्रतिनिधियों के लिए भी क्षेत्र विशेष को ध्यान में रखते हुए भोजन का प्रबंध किया जा रहा है। महाधिवेशन के दौरान व्यवस्था की जिम्मेदारी कांग्रेस सेवादल को सौंपी गई है। इसके तहत 76 पुरूष और 25 महिला दस्ते तैनात किए जायंगे। प्रत्येक दस्ते में 12 सदस्य होंगे।

अन्ना हजारे ने राजघाट में गांधी जी की समाधि के समाने मौन धारण कर लिया


नई दिल्ली। गांधीवादी सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे और उनके समथर्कों को 16 अगस्त से दिल्ली के जयप्रकाश नारायण राष्ट्रीय उद्यान में आमरण अनशन करने की अनुमति नहीं मिलने के बाद स्थिति में नया मोड़ आ गया है। अन्ना हजारे ने राजघाट में गांधी जी की समाधि के समाने मौन धारण कर लिया है। उनके साथ उनके समर्थक भी साथ हैं। इस बीच दिल्ली पुलिस भी वहां पहुंच गई है। इस बीच कोई भी यह नहीं समझ पा रहा है कि कहीं अन्ना आज से ही अपना अनशन न शुरू कर दें। अन्ना के राजघाट पर पहुंचने के बाद फिर से माहौल गरमा गया है। राजनीतिक सरगर्मी फिर से तेज हो गई है। दिल्ली पुलिस अपने दल-बल के साथ राजघाट पर पहुंच गई है।

पुलिस का अनशन की अनुमति देने से इंकार

गांधीवादी सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे और उनके समथर्कों को 16 अगस्त से दिल्ली के जयप्रकाश नारायण राष्ट्रीय उद्यान में आमरण अनशन करने की अनुमति नहीं दी गई। अन्ना हजारे व उनके सहयोगियों द्वारा पुलिस की ओर से रखी गई कुछ शर्तों को मानने से इंकार करने के बाद दिल्ली पुलिस ने यह कदम उठाया है।

संयुक्त पुलिस आयुक्त सुधीर यादव ने कहा कि इसके बावजूद यदि अन्ना हजारे व उनके समर्थक जयप्रकाश नारायण राष्ट्रीय उद्यान में अनशन करने की कोशिश करेंगे तो वह गैरकानूनी होगा। यादव ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, ‘‘हमनें उन्हें अनुमति देने से इंकार किया है।’’ ज्ञात हो कि दिल्ली पुलिस ने अन्ना हजारे के समक्ष 22 शर्तें रखी थी, जिनमें अनशन स्थल पर 5000 से अधिक लोगों के इकट्ठा होने और तीन से अधिक दिनों तक अनशन जारी रखने पर प्रतिबंध भी शामिल था।

प्रतिबंधों से अन्ना हजारे पक्ष नाराज
गांधीवादी सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे के 16 अगस्त से प्रस्तावित आमरण अनशन के मद्देनजर सरकार की ओर से लगाए गए प्रतिबंधों पर सामाजिक संगठन के सदस्यों ने नाराजगी जताई है। अन्ना हजारे के सहयोगी व सूचना का अधिकार कार्यकर्ता अरविंद केजरीवाल ने संवाददाताओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि ये प्रतिबंध सरकार के तानाशाही और मनमाने रवैये को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा कि अन्ना हजारे का अनशन किसी भी सूरत में स्थगित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस सरकार के आदेशों का अनुसरण करते हुए अन्ना हजारे के अनशन को रोकने में लगी हुई है।

केजरीवाल ने कहा कि पुलिस ने आयोजकों से कहा है कि आयोजन स्थल पर 5000 से अधिक लोग नहीं इकट्ठा होंगे, 50 से अधिक गाड़ियां नहीं खड़ी की जा सकेंगी, टेंट को फैलाया नहीं जा सकेगा और अनशन के दौरान सरकारी डॉक्टर ही अन्ना हजारे के स्वास्थ्य पर नजर रखेंगे। उन्होंने कहा कि ये सभी शर्तें न्यायोचित नहीं हैं और अकारण भी हैं। केजरीवाल ने कहा कि कानून व व्यवस्था के मद्देनजर कुछ प्रतिबंध जायज हैं लेकिन उनका यह कहना कि टेंट फैलाने की अनुमति नहीं दी जाएगी, चौंकाने वाला है। टेंट से कैसे कानून व व्यवस्था बिगड़ सकती है। उन्होंने कहा, ‘‘बारिश हो रही है। ऐसे में लोग कहां जाएंगे। और सिर्फ 50 गाड़ियों को खड़ा करने की ही अनुमति क्यों। यह सरकार का मनमाना रवैया है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘वे आपातकाल जैसी परिस्थितियां पैदा कर रहे हैं।’’

अन्ना को जनजीवन बाधित न करें : कांग्रेस

केंद्रीय कानून व न्याय मंत्री सलमान खुर्शीद ने सोमवार को कहा कि सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे व उनके सहयोगियों को विरोध करने का पूरा अधिकार है लेकिन इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित करना जरूरी है कि कानून व व्यवस्था का पालन हो और उससे जनजीवन बाधित न हो। खुर्शीद ने यहां पत्रकारों से चर्चा में कहा, ‘‘सब कुछ नियम व कायदों के भीतर होना चाहिए। आज की परिस्थितियों में बहुत बड़े स्तर पर जनसमूह के इकट्ठा होने की अनुमति नहीं दी जा सकती। कहीं वह अनियंत्रित हो गया तो।’’

उन्होंने कहा कि इस बात का ध्यान रखना आवश्यक है कि कानून व व्यवस्था बनी रहे और जनजीवन प्रभावित न हो। उन्होंने कहा, ‘‘यदि वे प्रदर्शन और विरोध करना चाहते हैं तो यह उनका अधिकार है। लेकिन आम जीवन प्रभावित न हो यह सुनिश्चित करना सरकार व सम्बंधित विभागों की जिम्मेदारी है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘यहां तक कि हम सत्ताधारी दलों को भी रैली के लिए अनुमति लेनी होती है और हमें भी प्रतिबंधों का सामना करना होता है। हम उसे स्वीकार भी करते हैं।’’

रविवार, 14 अगस्त 2011

आओ बच्चों तुम्हें दिखाएं झाँकी हिंदुस्तान की...





   भारत की स्वतंत्रता हो और कवि पंडित प्रदीप को याद नहीं किया जाये तो लगता है कि हम कुछ भूल रहे हैं .......उनके लिखे राष्ट्र भक्ति गीतों ने परतंत्र भारत में भी धूम मचा दी थी......,आजादी के बाद भी उनका सबसे ज्यादा चर्चित राष्ट्रभक्ति  गीत ये मेरे वतन के लोगों जरा आँख में भरलो पानी ..रहा ...!!
 एक गीत यद्यपि कवि प्रदीप ने स्वयं गाया नहीं था, लेकिन उनकी लिखी इस रचना ने ब्रिटिश शासकों को हिला दिया था, जिसके बोल हैं - आज हिमालय की चोटी से फिर हमने ललकारा है, दूर हटो ऐ दुनिया वालों हिंदुस्तान हमारा है। ब्रिटिश अधिकारी ढूंढ़ने लगे कवि प्रदीप को। जब उनके कुछ मित्रों को पता चला कि ब्रिटिश शासक कवि प्रदीप को पकड़कर कड़ी सजा देना चाहते हैं तो उन्हें कवि प्रदीप की जान खतरे में नजर आने लगी। मित्रों और शुभचिंतकों के दबाव में कवि प्रदीप को भूमिगत हो जाना पड़ा।


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फ़िल्म - जागृति (Jagriti)
गायक- प्रदीप
संगीत - हेमंत कुमार

आओ बच्चों तुम्हें दिखाएं झाँकी हिंदुस्तान की
इस मिट्टी से तिलक करो ये धरती है बलिदान की
वंदे मातरम ...

उत्तर में रखवाली करता पर्वतराज विराट है
दक्षिण में चरणों को धोता सागर का सम्राट है
जमुना जी के तट को देखो गंगा का ये घाट है
बाट-बाट पे हाट-हाट में यहाँ निराला ठाठ है
देखो ये तस्वीरें अपने गौरव की अभिमान की,
इस मिट्टी से तिलक करो ये धरती है बलिदान की
वंदे मातरम ...

ये है अपना राजपूताना नाज़ इसे तलवारों पे
इसने सारा जीवन काटा बरछी तीर कटारों पे
ये प्रताप का वतन पला है आज़ादी के नारों पे
कूद पड़ी थी यहाँ हज़ारों पद्मिनियाँ अंगारों पे
बोल रही है कण कण से कुरबानी राजस्थान की
इस मिट्टी से तिलक करो ये धरती है बलिदान की
वंदे मातरम ...

देखो मुल्क मराठों का ये यहाँ शिवाजी डोला था
मुग़लों की ताकत को जिसने तलवारों पे तोला था
हर पावत पे आग लगी थी हर पत्थर एक शोला था
बोली हर-हर महादेव की बच्चा-बच्चा बोला था
यहाँ शिवाजी ने रखी थी लाज हमारी शान की
इस मिट्टी से तिलक करो ये धरती है बलिदान की
वंदे मातरम ...

जलियाँ वाला बाग ये देखो यहाँ चली थी गोलियाँ
ये मत पूछो किसने खेली यहाँ खून की होलियाँ
एक तरफ़ बंदूकें दन दन एक तरफ़ थी टोलियाँ
मरनेवाले बोल रहे थे इनक़लाब की बोलियाँ
यहाँ लगा दी बहनों ने भी बाजी अपनी जान की
इस मिट्टी से तिलक करो ये धरती है बलिदान की
वंदे मातरम ...

ये देखो बंगाल यहाँ का हर चप्पा हरियाला है
यहाँ का बच्चा-बच्चा अपने देश पे मरनेवाला है
ढाला है इसको बिजली ने भूचालों ने पाला है
मुट्ठी में तूफ़ान बंधा है और प्राण में ज्वाला है
जन्मभूमि है यही हमारे वीर सुभाष महान की
इस मिट्टी से तिलक करो ये धरती है बलिदान की
वंदे मातरम ...
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शनिवार, 13 अगस्त 2011

रक्षाबंधन : रक्षा सम्बन्धी संदभों का गंभीरता से विवेचना करनीं चाहिए




रक्षाबंधन का त्यौहार मुख्यतः भाई और बहन का है .., किन्तु पौराणिक और अन्य सन्दर्भ इसे सुरक्षा के महत्व से ही जोड़ते हैं ...! बहन की रक्षा से लेकर राष्ट्र की रक्षा तक इसके महत्व को स्मरण करने वाले इस पर्व पर हमें रक्षा सम्बन्धी संदभों का गंभीरता से विवेचना करनीं चाहिए !!!

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गाना / Title: ये राखी बंधन है ऐसा - ye raakhii ba.ndhan hai aisaa

चित्रपट / Film: बेईमान

संगीतकार / Music Director: शंकर - जयकिशन-(Shankar-Jaikishan)

गीतकार / Lyricist: Varma Malik

गायक / Singer(s): मुकेश-(Mukesh) , लता मंगेशकर-(Lata Mangeshkar)

(ये राखी बंधन है ऐसा \-३ 
 जैसे चँदा और किरण का 
 जैसा बदरी और पवन का 
 जैसे धरती और गगन का) \-२ 
ये राखी बंधन है ऐसा \-३
 दुनिया की जितनी बहनें हैं 
उन सबकी श्रद्धा है इसमें है 
धरम करम भैया का ये 
बहना की रक्षा इसमें है 
जैसे सुभद्रा और किशन का 
जैसे बदरी और पवन का 
जैसे धरती और गगन का ये राखी बंधन ... 
 म: आज खुशी के दिन 
भाई के भर\-भर आए नैना \-२ 
 कदर बहन की उनसे पूछो 
 जिनकी नहीं है बहना 
 मोल नहीं कोई इस बंधन का 
 जैसे बदरी और पवन का
 जैसे धरती और गगन का 
 ये राखी बंधन है ऐसा \-३ ------
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क्षाबंधन के यादगार गीत
मेरे भैया, मेरे चंदा, मेरे अनमोल रतन

गायत्री शर्मा
हमारी भारतीय संस्कृति में त्योहारों का बहुत अधिक महत्व है। ये त्योहार ही है, जो हमारे रिश्तों के बीच प्रेम को जीवित रखते हैं। कितनी भी दूरियाँ ही क्यों न हो, हम सभी सीमाओं का लाँघकर रिश्तों में प्यार की ऊर्जा भरने के लिए त्योहारों पर अपने परिवारजनों के पास पहुँच जाते हैं। भाई-बहन के प्यार के प्रतीक के रूप में मनाया जाने वाला एक ऐसा ही त्योहार है - रक्षाबंधन। 

हमारे रिश्तों और फिल्मों का साथ बहुत गहरा है क्योंकि रूपहले पर्दे की फिल्में एक तरह से हमारी जिंदगी का आईना है। बॉलीवुड में हर रिश्ते व हर तीज-त्योहार को लेकर कई फिल्में बनाई गई। फिल्मों व उनके गीतों का हम पर इतना अधिक प्रभाव है कि कई बार हमें अपने जीवन की परिस्थितियाँ फिल्मी और कई बार फिल्मों के किस्से हकीकत नजर आते हैं। 

भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को अलग-अलग दृष्टिकोणों से रूपांकित करती हुई कई फिल्में आईं, जिनमें से कुछ फिल्मों के डायलॉग व गीतों का हम पर इतना अधिक प्रभाव पड़ा कि हर खुशी या त्योहार के मौके पर हमें उन्हें गुनगुनाए बगैर नहीं रह सकते हैं। यदि आप भी इस राखी पर अपने प्यारे से भाई या बहन के लिए ये गीत गुनगुनाएँगे तो शायद यह उनके लिए राखी का सबसे बड़ा तोहफा होगा। तो क्यों न इन गीतों के साथ इस राखी को यादगार बनाया जाएँ। 

भाई-बहन के प्यार की मिठास का अनुभव कराने वाले कुछ फिल्मी गीत इस प्रकार है - 

बहना ने भाई की कलाई पर प्यार बाँधा है .... 
(फिल्म-रेशम की डोरी, निर्देशक-आत्माराम, गायक-लता मंगेशकर) 

रंग-बिरंगी राखी लेकर आई बहना, राखी बँधवा लो मेरे वीर रे ...
(फिल्म-अनपढ़, निर्देशक-मोहन कुमार, गायक-लता मंगेशकर) 

भैया मेरे राखी के बँधन को निभाना, भैया मेरे छोटी बहन को ना भुलाना ... 
(फिल्म-छोटी बहन, निर्देशक-एलवी प्रसाद, गायक-लता मंगेशकर) 

अबके बरस भेज भैया को बाबुल में .....
(फिल्म-बंदिनी, निर्देशक-बिमल रॉय, गायक-आशा भोंसले) 

चंदा रे मेरे भैया से कहना, बहना याद करे ... 
(फिल्म-चबंल की कसम, निर्देशक-राम माहेश्वरी, गायक-लता मंगेशकर)

मेरे भैया को संदेसा पहुँचाना चंदा तेरी जोत जले .... 
(फिल्म - दीदी, गायक-लता मंगेशकर)

मेरे भैया, मेरे चंदा, मेरे अनमोल रतन ... 
(फिल्म-काजल, गायक-आशा भौसले)

फूलों का तारों का सबका कहना है, एक हजारों में ... 
(फिल्म-हरे रामा, हरे कृष्णा, गायक-किशोर कुमार)

ये राखी बंधन है ऐसा ...
(फिल्म-बेईमान)

हम बहनों के लिए मेरे भैया आता है दिन .... 
(फिल्म-अंजाना)




सुमन कल्याणपु
 का फिल्म रेशम की डोरी के लिये गाया गीत -
बहना ने भाई की कलाई से, प्यार बाँधा है
प्यार की एक डोर से संसार बाँधा है
रेशम की डोरी से-२
रेशम की डोरी से संसार बाँधा है



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भाई बहन या राखी पर लिखा गया आपका पसंदीदा गीत कौन सा है -
  • फूलों का तारों का सबका कहना है (33%, 9 Votes)
  • भैय्या मेरे, राखी के बंधन को निभाना (19%, 5 Votes)
  • बहना ने भाई की कलाई से, प्यार बाँधा है (11%, 3 Votes)
  • राखी धागों का त्यौहार (11%, 3 Votes)
  • मेरे भैय्या मेरे चंदा, मेरे अनमोल रतन (7%, 2 Votes)
  • चंदा रे मेरे भैय्या से कहना (7%, 2 Votes)
  • वो गीत इनमें नही (7%, 2 Votes)
  • ये राखी बंधन है ऐसा (4%, 1 Votes)
  • रंग बिरंगी राखी लेकर आयी बहना (0%, 0 Votes)
  • हम बहनों के लिये मेरे भैय्या (1%, 0 Votes)