शुक्रवार, 5 अगस्त 2011

मुख्यमंत्री शीला दीक्षित : अब कैग की रिपोर्ट में भी १०० करोड़ रूपये का लाभ ठेकेदारों को पहुचानें का आरोप



- अरविन्द सिसोदिया 
      दिल्ली के लोकायुक्त पहले ही मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को झूठे वायदे कर वोट ठगनें की दोषी ठहरा चुकी हैं ! अब कैग की रिपोर्ट में भी  १०० करोड़ रूपये का लाभ ठेकेदारों को पहुचानें का आरोप लगाया  गया  है !! इससे पहले प्रधानमंत्री द्वारा नियुक्त शुंगलू कमेटी और सीवीसी ने भी शीला सरकार को दोषी करार दिया था। जब इसी तरह  के मामूली आरोप में कर्णाटक के यदुरप्पा  का इस्तीफा लिया जाता है तो शीला दीक्षित  को बनें रहनें का क्या अधिकार है ??
            दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित  उन भाग्यशाली लोगों में से हैं गिन पर हमेशा आरोप लगते रहे और उनका कुछ नहीं बिगड़ा !! मगर अब अति हो चुकी है , जब कॉमनवेल्थ खेलों के आयोजन की तैयारियां चल रहीं थी , यह तब ही सबको जग जाहिर था की खूब लुट मची है , जम कर खाया  कमाया जा रहा है !! 
             अब  नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग)|  रिपोर्ट में राष्ट्रमंडल खेलों को लेकर शीला सरकार पर कई सवाल ख़डे किए गए हैं।  ७०० से अधिक पेज की रिपोर्ट , कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान पूरे किए गए कई प्रोजेक्टों के मुद्दे पर दिल्ली सरकार को विभिन्न एजेंसियों ने कठघरे में खड़ा किया है। आरोप है कि दिल्‍ली सरकार ने सरकार ने स्ट्रीट लाइट लगाने वाली कंपनियों को मौजूदा दर से काफी ज्यादा पेमेंट की, जिससे करदाताओं के कई सौ करोड़ रुपए ठेकेदारों की जेब में चले गए। इसके कई ऐसी कंपनियों को सौंदर्यीकरण का ठे‍का मिला जो 'काली सूची' में डाल दी गई थीं।
        रिपोर्ट में कहा गया है कि कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान दिल्ली सरकार ने स्ट्रीट लाइट और सड़कों के सौंदर्यीकरण में 100 करोड़ रुपए से अधिक फालतू खर्च किए हैं। रिपोर्ट में पीएमओ पर भी अनदेखी का आरोप लगा है। दीक्षित पर तो धांधली के कई आरोप हैं।
          कॉमनवेल्थ गेम्स से ठीक पहले एक कंपनी को दिल्ली में मलबा उठाने का ठेका दिए जाने का मामला भी तूल पकडऩे लगा है। हाल ही में आई कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि जिस कंपनी को मलबा उठाने का ठेका दिया गया, उस कंपनी में मुख्यमंत्री के रिश्तेदार शामिल थे। 

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