शनिवार, 3 सितंबर 2011

अन्ना की हुकांर.....





- अरविन्द सिसोदिया 

रालेगण सिद्धि ------

* समाजसेवी अन्ना हजारे ने अपने प्रमुख सहयोगी अरविंद केजरीवाल को आयकर विभाग की ओर से दिये गए नोटिस पर कड़ी आपत्ति जतायी और सरकार से कहा कि वह सत्यनिष्ठ और चरित्रवान व्यक्ति के साथ ‘शातिर खेल न खेले’.

* अन्ना ने कहा, "आजादी की दूसरी लड़ाई की मशाल जल चुकी है और यह मशाल जलती रहनी चाहिए क्योंकि अभी लम्बी लड़ाई लड़नी है. "

* अरविंद को काफी नजदीक से देखा है. वह स्वार्थरहित समाजसेवा कर रहे हैं. वह चाहते तो धन कमा सकते थे लेकिन उन्होंने ऐसा कुछ नहीं किया. यदि ऐसी चीजें होते रहीं समाज को मजबूरन अलग रास्ता चुनना पड़ेगा.’

* अन्ना हजारे ने अपने आंदोलन को मिले समर्थन पर कहा कि इस आंदोलन के जरिए देश की जनता एकजुट हुई है. उनके मुताबिक देश भर में लोग धर्म-जाति, अमीरी-गरीबी से ऊपर उठकर साथ खड़े हुए हैं |

* शिक्षा के व्यवसायीकरण पर अन्ना हजारे ने कहा कि शिक्षा का व्यवसायीकरण हो गया है जिसकी वजह से देश का सही विकास नहीं हो पा रहा है. स्कूलों में बच्चों को दाखिला दिलाने के लिए रिश्वत देनी पड़ती है|

* हजारे ने कहा कि आज सत्ता केंद्रित हो गई है. सत्ता कुछ चुनिंदा हाथों में है. लोकतंत्र और जनतंत्र का मतलब है जो जनता चाहे लेकिन यह तो नौकरशाही है. इसे हमें जनतंत्र बनाना होगा. सत्ता का विकेंद्रीकरण करना होगा|

* हजारे ने भीड़ को संबोधित करते हुए कहा कि भ्रष्टाचार से मुक्ति के लिए लड़ाई आसान नहीं है. इसके लिए जनता को जागना होगा और सरकार को हिलाना होगा.

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