बुधवार, 7 सितंबर 2011

कायरता के कारण आतंकवाद....





- अरविन्द सीसौदिया,कोटा,राजस्थान ।
...कायरता के कारण आतंकवाद....
मेरा बहुत स्पष्ट मत है कि देश में आतंकवाद भारत सरकार की कायरता के कारण है। आतंकवाद से इजराईल , चीन , अमेरिका और ब्रिटेन भी निबंट रहे हैं । वे आतंकवाद से सख्ती से ही नहीं बल्कि सर्वोच्च क्रूरता से निवंटते हैं । अमरीका और ब्रिटेन में एक एक आतंकी हमले के बाद दूसरा हमला नहीं हुआ । मगर हमारे देश में आये दिन का खेल बन गया आतंकवाद !!
अब स्क्रेच जारी हुए है, इस पर शंका - उस पर शंका, कोई ई मेल , कोई बहाना, गुप्तचर संस्थायें सर्तक नहीं थी, कैमरा होता तो पकडना आसान होता , बेमलतब के कई तर्क तथ्य गडे जा रहे हैं । सच यह है कि कांग्रेस सरकार ने आतंकवाद और वोट में सम्बंध बना कर देखने की राष्ट्रघाती नीति को अपना लिया है। इसीलिये वह पकडे गये आतंकवादियों तक को सजा नहीं दे पा रही है। आतंकवाद की जड पर कभी भी वार नहीं किया गया । झूठे तमासों के द्वारा देश को बेवकूफ बनाना ही सरकार का मकसद रहता हे। इसलिये यह आतंकवाद,आतंकवादियों से कहं अधिक सरकारी कायरता के कारण हे।
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नई दिल्ली. दिल्‍ली हाईकोर्ट के बाहर बुधवार सुबह हुए बम धमाके ने दिल्‍ली सहित पूरे देश को दहला दिया है। मौजूदा गृह मंत्री पी चिदंबरम के कार्यकाल में दिल्‍ली में यह तीसरा धमाका है। मुंबई में 26 नवंबर 2008 को हुए आतंकवादी हमले के बाद चिदंबरम को गृह मंत्री बनाया गया था। इसके बाद से देशभर में कम से कम आठ धमाकों में 48 लोगों की जानें गई हैं।

चिदंबरम से पहले शिवराज पाटिल गृह मंत्री थे। मुंबई हमले और इससे पहले हुई आतंकी वारदात के चलते फजीहत के बाद पाटिल को कुर्सी छोड़नी पड़ी थी। लेकिन चिदंबरम के कार्यकाल में भी आतंकवादी हमलों में कमी होती नजर नहीं आ रही है। भाजपा ने चिदंबरम पर निशाना साधते हुए कहा है कि वो अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों पर निशाना साधने के बजाय आतंकवादी हमलों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाएं।

हाईकोर्ट के बाहर आज हुए धमाके के बाद राज्‍यसभा में नेता प्रतिपक्ष अरुण जेटली ने कहा, ‘चिदंबरम को 26/11 हमलों के बाद गृह मंत्री बनाया गया था। उस वक्‍त चिदंबरम को शिवराज पाटिल की तुलना में बेहतर गृह मंत्री होने का दावा किया गया था लेकिन नतीजा अब सबके सामने है। गृह मंत्रालय लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित कराने में बार-बार नाकाम हो रहा है।’
चिदंबरम के गृह मंत्री रहते देश में हुए बड़े धमाकों पर एक नजर ...

7 सितंबर 2011: दिल्‍ली हाईकोर्ट के बाहर बम धमाका, 11 मरे, 76 घायल (आंकड़ा और बढ़ सकता है)

25 मई 2011: दिल्ली हाईकोर्ट परिसर में धमाका, कोई घायल नहीं। एक कार क्षतिग्रस्‍त।
13 जुलाई 2011: मुंबई में तीन बम धमाके। 21 लोग मारे गए, 131 घायल।
7 दिसंबर 2010: वाराणसी में गंगा घाट पर बम धमाका, एक बच्‍ची की मौत, 25 घायल।
19 सितंबर 2010: दिल्ली में जामा मस्जिद के बाहर धमाका। दो ताईवानी नागरिक घायल।
17 अप्रैल 2010: बंगलुरू के चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर दो बम धमाके, 15 घायल।
10 फरवरी 2010: पुणे में जर्मन बेकरी में धमाका, 5 महिलाओं और कुछ विदेशियों समेत 9 लोग मारे गए। 45 घायल।
6 अप्रैल 2009: गुवाहाटी के मालेगांव में ब्‍लास्‍ट, छह मरे, 32 घायल।  

पिछले सालों में हुए कुछ और आतंकी वारदात/बम धमाके

26-29 नवंबर 2008: मुंबई में तीन जगहों- ताज और ऑबराय होटलों और विकटोरिया टर्मिनस पर हुए आतंकवादी हमले तीन दिन तक चले और इनमें लगभग 170 लोग मारे गए जबकि 200 अन्य घायल हो गए।
30 अक्तूबर 2008: असम में एक साथ 18 जगहों पर हुए बम धमाकों में 70 से अधिक लोग मारे गए और सौ से अधिक घायल।
27 सितंबर 2008:  दिल्‍ली के मेहरौली में बम धमाका, चार मरे, 15 घायल।
13 सितंबर, 2008: दिल्‍ली के करोल बाग, ग्रेटर कैलाश और कनॉट प्‍लेस में हुए बम धमाकों में 24 मारे गए। 100 से अधिक घायल।
13 मई 2008: जयपुर में सात बम धमाके, कम से कम 63 लोगों की मौत।
25 जुलाई 2008: बंगलौर में हुए सात धमाके, दो की मौत, कम से कम 15 घायल।
26 जुलाई 2008: अहमदाबाद में लगातार कई धमाके, 49 लोग मारे गए।
13 सितंबर 2008: दिल्ली में हुए सिलसिलेवार धमाकों में 22 लोगों की मौत।
19 फरवरी 2007: भारत से पाकिस्तान जा रही ट्रेन में धमाका, 66 लोगों की मौत।
18 मई 2007: हैदराबाद की मशहूर मक्का मस्जिद में धमाका, 11 लोगों की मौत।
25 अगस्त 2007: हैदराबाद के एक पार्क में तीन धमाके, कम से कम 40 लोग मारे गए।

11 अक्तूबर 2007: अजमेर में गरीब नवाज की दरगाह पर धमाका, दो लोगों की मौत।
23 नवंबर, 2007: वाराणसी, फैजाबाद और लखनऊ के अदालत परिसर में सिलसिलेवार धमाके। 13 लोगों की मौत, 50 से ज़्यादा घायल।

7 मार्च 2006: वाराणसी में तीन धमाकों में कम से कम 15 लोग मारे गए, 60 से ज़्यादा घायल।

11 जुलाई 2006: मुंबई में कई ट्रेन धमाकों में 180 से ज़्यादा लोगों की मौत।
 
8 सितंबर 2006: महाराष्ट्र के मालेगांव में सिलसिलेवार धमाकों में 32 लोग मारे गए।

13 मार्च 2003: मुंबई में एक ट्रेन में हुए धमाके में 11 लोगों की मौत।
25 अगस्त 2003: मुंबई में दो कार बम धमाकों में 60 लोगों की मौत।

15 अगस्त 2003: असम में हुए धमाके में 18 लोग मारे गए।
29 अगस्त 2003: नई दिल्ली के तीन व्यस्त इलाक़ों में हुए धमाकों में 66 लोगों की मौत। 

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