शुक्रवार, 16 सितंबर 2011

क्या भंवरी पूरी तरह ठिकानें लगा दी .........




-अरविन्द सीसौदिया,कोटा ,राजस्थान 
भंवरी देवी प्रकरण में जिस सीडी की चर्चा हेै उसमें, कुछ नहीं होता तो भंवरी को गायव क्यों किया जाता..? कुछ येशा सच तो है जो किसी जो राजनेता की शान शौकत बिगाड सकता है । अब राजस्थान सरकार क ेजल संसाधन मंत्री महीपाल मदेरणा ने पत्रकार वार्ता में घोषणा की है कि उसका भंवरी देवी से कोइ्र सम्बंध नहीं था। इसका मतलब क्या भंवरी पूरी तरह ठिकानें लगा दी गई हे। अन्यथा अब तक पत्रकारवार्ता क्यों नहीं की..... 



जोधपुर: लापता भंवरी देवी का कोई सुराग नहीं......
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भंवरी आखिर कहां है. राजस्थान की इस लापता नर्स का अबतक कोई सुराग नहीं मिल सका है. जिस मंत्री पर इस मामले में उंगली उठाई जा रही है, उसने भी कहा है कि मेरा इस मसले से कोई लेना-देना नहीं है.
फर्श से अर्श तक पहंची एक नर्स की कहानी है ये. पेशे से नर्स भंवरी देवी को मरीजों की तीमारदारी नहीं, बल्कि अपनी अदाओं से मॉडलिंग की रंगीन दुनिया में छा जाने का शौक था और वही शौक उसे राजस्थान के सत्ता गलियारों के बड़े नामों के बीच ले गया. लेकिन 1 सितंबर से भंवरी लापता हो गयी.


राजस्थान की हुकूमत से लेकर सियासत तक इस सवालों के भंवर में फंसा है कि भंवरी है कहां. अगर उसका अपहरण हुआ तो इसे अंजाम किसने दिया. और एक सवाल ये भी है कहीं भंवरी देवी का कत्ल तो नहीं हो गया. भंवरी देवी के पति का बयान राजस्थान के जल संसाधन मंत्री महिपाल मदेरणा पर उंगली उठाता है.


करीब सात-आठ साल पहले भंवरी को एक सरकारी डिस्पेंसरी में एएनएम यानि नर्स के नीचे वाला पोस्ट मिला था. लेकिन लापरवाही के आरोप में वो सस्पेंड कर दी गयी. अपनी नौकरी बचाने के चक्कर में वो पहले मलखान सिंह विश्नोई से मिली और फिर विश्नोई के जरिये महिपाल मदेरणा से.


मदेरणा की सिफारिश पर भंवरी की ना सिर्फ बहाली हुई, बल्कि अपने घर के पास के अस्पताल में वो आ गयी. लेकिन कहते हैं कि तब तक उसे ऊंचे रसूख वालों के बीच उठने-बैठने का चस्का लग चुका था. फिर तो उसकी तरक्की इस तरह हुई कि गाड़ी, बंगला, नौकर-चाकर, क्या नहीं है उसके पास.


लेकिन कुछ समय पहले ये अफवाह फैली कि भंवरी के पास मदेरणा और विश्नोई की एक सीडी है, जिसके बल पर वो उन्हें ब्लैकमेल कर रही है. कहते हैं कि इसके बाद से दोनो नेताओं ने भंवरी से दूरी बढ़ा ली. लेकिन करीब ढाई महीने ये खबर आने लगी कि तीनों में अब समझौता हो चुका है. इसके बाद फिर से तीनों के बीच फोन पर बातचीत भी शुरू हो गई. आखिरी ढाई महीने के कॉल डिटेल इस बात की तस्दीक करते हैं. पर सीडी की चर्चा इसके बाद भी जोरों पर थी.


इस बीच अगस्त में भंवरी ने अपनी पुरानी स्विफ्ट कार मलखान विश्नोई के भतीजे सोहनलाल विश्नोई को साढ़े चार लाख रुपये में बेच दी. इसमें पचास हजार रुपये तो तुरंत मिल गये लेकिन कहते हैं कि बाकी चार लाख रुपये के लिए सोहन ने ही एक सितंबर को फोन करके भंवरी को बुलाया था और तभी से भंवरी गायब है.


इस बीच मंत्री महिपाल मदेरणा भी गायब हो गये. लेकिन गुरुवार को वो सामने आए और कहा कि भंवरी मामले से उनका कोई लेना-देना नहीं है. राज्य सरकार ने मामले की जांच सीबीआई से कराने का ऐलान किया है. लेकिन अब ये मामला पूरी तरह सियासी रंग पकड़ चुका है.

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