मंगलवार, 27 सितंबर 2011

चीन - एक सुरक्षा संकट, विस्तारवादी ड्रेगन से



क्या आप जानते है ?
देेश की 43183वर्ग किलोमीटर भूमि पर चीन का अवेैध कब्जा है ।
चीन हमारे अरूणाचंल प्रदेश की 90000 वर्ग किलोमीटर भूमि पर अपना दावा पूरी दादागिरी से जता रहा है ।   
चीन से लगती सम्पूर्ण सीमा पर चीन ने नो मेन्स एरिया ( सीमा का मानव रहित क्षेत्र) में आगे तक अतिक्रमण कर अपनी सीमा चैकियां स्थापित कर ली है । 
चीन ने भारतीय सीमा पर परमाणु मिसाईल्स तैनात कर दी है जिनकी जद में लगभूग पूरा भारत आ जाता है  ।
भारत को चारों ओर से घेेरने की दृष्टि से पाकिस्तान, म्यांमार, बांग्लादेश ,नेपाल एवं श्रीलंका में चीनी सैन्य अड्डे यां सैनिकों की उपस्थिति है । 
भारत की अति संवदेनशील स्थलों पर विविध परियोजनाओं के टेण्डर अत्यन्त नीची दरों पर भरकर देश के अन्दर अपनी उपस्थिति बडा रहा है । 
चीन द्वारा जम्मू-कश्मीर को अपने नक्शों में भारत का अंग नहीं  दिखाया जाता । अरूणांचल प्रदेश को चीन का हिस्सा बताया जाता है अरूणांचल प्रदेश  के नागरिकों को बिना वीसा-पासपोर्ट के चीन आने का आमऩ्त्रण दिया जाता है । 
चीन का रक्षा बजट 150 अरब डालर हेै जबकि भारत का मात्र 36 लाख अरब डालर । 
दैनंदिन उपयोग की लगभग प्रत्येक घटिया वस्तु को भारत के बाजारों में सस्ते मूल्य  में पहुंचा कर स्थानीय उद्योगों को बन्द करवाने की स्थिति तक पहुंचा दिया है ।      (चीन से भारत को निर्यात 3 लाख करोड रूपया वार्षिक हैं । )


परिणाम क्या हो सकते है ?
  सीमाओं पर हमारी अनदेखी एवं केन्द्र सरकार की ढुलमुल नीति के परिणाम स्वस्प अरूणंचल प्रदेश , लद्दाख के सीमान्त प्रदेश गहन संकट में है । 
  भारत के सभी पडौसी देशों पर चीनी सैन्य उपस्थिति से भारत सभी ओर से एक साथ संकट की स्थिति में । 
  ब्रम्हपुत्र नदी पर चीन द्वारा अपने क्षेत्र में अन्तर्राष्ट्रीय विरोध के बावजूद बडे बान्धों के निर्माण के फलस्वरूप असम एवं सम्बद्ध राज्यों में सूखे की स्थिति की आशंका । 
  सस्ते एवं घटिया उत्पादों के भारी आयात से हमारे यहां के लघु एवं मध्यम उद्योग शीघ्र ही बन्द होने के कगार पर । 
हम क्या कर सकते है ?
* सक्रिय एवं जागरूक नागरिक होने के नाते  हम चीनी एत्पादों का उपयोग तत्काल बन्द करने का दृढ संकल्प लें । 
* अगर चीन के उत्पादों की अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर खपत ( जिसका बडा हिस्सा भारत द्वारा आयात किया जाता हेै ) बन्द हो जाती है तो उसके सारे कारखाने छ से 12 माह में ही ओवर केपेसिटी का शिकार  हो, बन्द करने की स्थिति में आ जायेगें । चीन की अर्थव्यवस्था में 60 प्रतिशत हिस्सा निर्यात से ही प्राप्त होता है । 
* निकट भविष्य में देश के सन्मुख सबसे बडा संकट   चीन की विस्तारवादी नीति से ही हो सकता है । जबकि केन्द्र सरकार इस आसन्न संकट से उदासीन सी दिखती है । विभिन्न संगठनों द्वारा इस सन्दर्भ में सरकार पर दबाव डालने के लिये आयोजित धरनों, प्रदर्शनों , गोष्ठियों में सक्रियता से भाग लें । 
सावधान - चीन आज तिब्बत,हांगकांग,ताईवान देशों पर कब्जा जमा चुका है । ड्रेगन की विस्तारवादी कुदृष्टि एक बार पुनः कश्मीर,अरूणांचल प्रदेश ओर लेह पर अब भी हम नहीं जगे तो ये भी गंवाने पड सकते है ।


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