बुधवार, 28 सितंबर 2011

बेटी


Roaming Journalist
अगर बेटा वारस है, तो बेटी पारस है l
अगर बेटा वंश है, तो बेटी अंश है l
अगर बेटा आन है, तो बेटी शान है l
अगर बेटा तन है, तो बेटी मन है l
अगर बेटा मान है, तो बेटी गुमान है l
.... अगर बेटा संस्कार, तो बेटी संस्कृति है l
अगर बेटा आग है, तो बेटी बाग़ है l
अगर बेटा दवा है, तो बेटी दुआ है l
अगर बेटा भाग्य है, तो बेटी विधाता है l
अगर बेटा शब्द है, तो बेटी अर्थ है l
अगर बेटा गीत है, तो बेटी संगीत है l


Komal Shrivastava
अगर बेटा वंश है, तो बेटी अंश है l
अगर बेटा तन है, तो बेटी मन है
अगर बेटा आन है, तो बेटी शान है l
अगर बेटा मान है, तो बेटी गुमान है l
अगर बेटा संस्कार, तो बेटी संस्कृति है
Komal Shrivastava
Maa Durge,
Maa Ambe,
Maa Jagdambe,
Maa Bhawani,
Maa Sheetla,
Maa Vaishnao,
Maa Chandi,
Mata Rani meri aur apki manokamna puri karey..
JAI MATA DI.


Kamlesh Kumar Dwivedi
जा बेटी जगमग तू कर दे ,
घर आँगन हर कोना ,
कहीं बना दे सीता प्यारी ,
कहीं राम भरत व् कान्हा ,
जग जननी तू जीवन ज्योति ,
जितने नामकरण सब कम हैं ,
सभी कर्म या सभी धरम हों ,
सभी मूल या सभी मंत्र हों ,
“माँ ’ बिन सभी अधूरा ,

तेरे रूप अनेक हैं बेटी ,
गायत्री , काली या दुर्गा ,
जब जो चाहे धर ले ,
जग का है कल्याण ही होना

Gopal Krishna Shukla
प्यारी बेटी "अन्नू" के लिये....
देखकर मुखडा तुम्हारा खिल-खिल जाता है मन का सुमन
जल्द बजेगी द्वार पर शहनाइयां गूंज उठेगा ये सारा गगन॥

Ranjeet Singh
लाड़ प्यार का समंदर मां
मोह ममता का मंदिर मां

अच्छी-अच्छी बात बताती
लोरी गाए सुलाए मां

धमकाती जब करें शरारत
रूठें तब पुचकारें मां

मां कहने से मुंह भर आता
हृदय नेह सरसाए मां

मनुज भले बुढ़ा हो जाए
उसे समझती बच्चा मां

सारे तीर्थ-धाम वहीं पर
जिस घर में मुस्काए मां

मां सम नही जगत में दूजा
परमेश्वर भी पूजे मां



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