शनिवार, 1 अक्तूबर 2011

रियलटी शो : धन कमानें के लिए गंदगी और गंदे लोग



- अरविन्द सीसौदिया , कोटा, राजस्थान ।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने स्टार प्लस चैनल का “ सच का सामना ” कार्यक्रम गंदा और अश्लील करार दिया है। 2009 के इस मामले में उच्च न्यायालय ने बहुत बाद में निर्णय दिया है। समाल के सीधे सरोकारों के मामालों को सरकार और न्यायालय को डे टू डे की सुनवाई कर निबंटाने चाहिये । आज चैनलों के नंगेपन में मां - बेटा साथ बैठ कर टीवी नहीं देख सकते । दिल्ली उच्च न्यायालय ने आज स्टार प्लस टेलीविजन चैनल के सच का सामना कार्यक्रम को अश्लील. गंदा. बेहूदा और छिछला करार देते हुए कहा कि चैनल को सूचना और प्रसारण मंत्रालय द्वारा जारी किया गया कारण बताओ नोटिस वैध है |

में तो केंद्र सर्कार को नाकारा ही मानूगा जिन्होनें सामाजिक मर्यादाओ तक को शर्म सार कर रखा है...नंगापन और अश्लीलता को प्रभावी तरीके से रोकनें के उपाय किये ही नहीं गए...
-----
रियलिटी शो की रियलिटी.....
http://manavaajkal.blogspot.com
देश में एक नई तरह की क्रान्ति आयी है। यह रियलटी शो की क्रान्ति है। पहले की हर क्रान्तियों की तरह यह भी दुनिया के तथाकथित विकसित देशों में पुष्पित और पल्लवित हुई है। अब भारत में कुछ लोग इस मिशन में लग गये हैं कि भारत आखिर दुनिया से इस क्रान्ति में पीछे क्यों रहे। देर ही सही उसे इस क्रान्ति का अगुवा बनना है। सोच अपने नहीं तो उधार लेने में हम माहिर तो हैं ही, चार्वाक के वंशज जो ठहरे। जैसे-जैसे रियलटी शो की नई-नई क्रान्ति पश्चिम में सामने आने लगी, वैसे-वैसे अपने यहाॅं इसके चरम पर प्रयोग शुरु हो गये। इसके बाद से तो शुरु हो गया बाजार का नंगा नाच भी।
------
कोमार्य की भी रियलिटी  ..
एक समय था जब लडकियां अपना कौमार्य बचाने के लिए सब कुछ करती थीं, अपने कौमार्य को एक अमूल्य धन की तरह रखती थीं. लेकिन अब समय बदल गया है, आज न सिर्फ कौमार्य बिकता है बल्कि कई लड़कियां खुद इसकी बोली भी लगाती हैं. कलयुग के इस दौर में वासना इस कदर फूट-फूट कर भरी हुई है कि वेश्यावृत्ति के दलालों को अब लड़कियों का कौमार्य भी पैसा कमाने का एक तरीका नजर आता है. पश्चिम में फैलता यह काला कारोबार किस कदर हमारे ऊपर हावी हो सकता है आइए डालते हैं एक नजर.हाल ही में ब्रिटेन में एक समाचार के अनुसार एक ऐसे गैंग का भंडाफोड़ हुआ है जो नाबालिग और कुंवारी लड़कियों को वेश्याओं की तरह इस्तेमाल करते थे. यह लोग इंटरनेट के सहारे एक वेबसाइट पर इन लडकियों को इस दलदल में डालते थे. इस सारे प्रकरण में तीन महिलाओं समेत एक युवक को एक होटल से पकड़ा गया. देखने वाली बात यह थी कि जिन लड़कियों को वेश्याओं के तौर पर बेचा जा रहा था उसका बकायदा प्रचार भी किया गया कि इनका कौमार्य लूटिए और मजे उड़ाइए यानी कौमार्य को निशाना बना अधिक पैसा कमाने की चाहत थी इन लोगों की और सहारा लिया गया इंटरनेट का.अब समाज और संस्कृति के लिहाज से इस पूरे प्रकरण में दो चीजें दांव पर लगी हैं पहली इंटरनेट और इसकी उपयोगिता और साथ ही क्या वासना और पैसों के लिए अब शरीर इतना सस्ता हो चुका है. 

इंटरनेट का ऐसा रुप

आज कल इंटरनेट से अधिक सुगम और व्यापक आपसी आदान प्रदान का कोई माध्यम नहीं रह गया है. हर जगह इसकी आसान पहुंच और ने इसे हवा से भी ज्यादा तेज तरीके से हमारे समाज में जमा दिया है. आज इंटरनेट पर ऐसी कई पोर्न और अश्लील वेबसाइट हैं जिनके द्वारा न सिर्फ पोर्न और नग्नता को परोसा जाता है बल्कि देह व्यापारियों के लिए ऐसी वेबसाइट विज्ञापन करने का एक जरिया होता है.

लड़कियों की तस्वीर और उनकी जानकारी डाल उन्हें नीलाम किया जाता है और कई साइटें तो बाकायदा नीलामी भी लगवाती हैं. ऐसी वेबसाइटों को बंद करना या इनके मालिकों का पता लगाना बहुत मुश्किल होता है क्योंकि अगर आप एक वेबसाइट बंद कर देते हैं तो दो और वेबसाइट शुरु हो जाती है. कई वेबसाइटों को विदेशों की लड़कियां खुद ही चलाती है उस पर अपने कौमार्य की बोली लगवाती हैं.

इंटरनेट ने हमें बहुत कुछ दिया है. सुगमता, समय की बचत और ढ़ेरों जानकारी एक साथ एक ही समय इंटरनेट पर ही मिलती है. लेकिन भोग और वासना के इन भूखों के लिए इंटरनेट किसी खजाने से कम नहीं है जहां बेपनाह पोर्न और अश्लीलता भरी हुई है. आज भारत में भी ऐसी हजारों साइटे खुलती जा रही हैं क्योंकि पैसों की चाहत और देह व्यापार को चलाने का एक बेहतर उपाय जो ठहरा इंटरनेट. इंटरनेट की ग्लोबल पहुंच से अब छोटे-छोटे देह व्यापारी और वेश्याएं भी हाई प्रोफाइल बनती जा रही हैं.
क्या कौमार्य की भी कीमत लगाई जा सकती है

अधिकतर पश्चिमी सभ्यता और समाज के बारें में कहा जाता है कि वहां खुलेपन को स्वीकारा जाता है और कौमार्य आदि को इतनी महत्ता नहीं दी जाती. वहां शादी से पहले सेक्स को भी गलत नहीं मानते, यानी कि पूरे खुले विचार से जीवन अपने नियमों पर जीने की आजादी है लेकिन क्या सभ्यता और नैतिकता को खुलेपन से अलग किया जा सकता है. चाहे पश्चिम हो या पूर्व हर जगह समाज है. समाज में कुछ अच्छे तो कुछ बुरे लोग रहते हैं.

वेश्यावृत्ति का यह फंडा

जो लोग कौमार्य की बोली लगाते हैं या जो लड़किया ऐसा करवाती हैं वह कहीं न कहीं समाज के सामने एक गलत उदाहरण पेश करती हैं. ऐसे मामले भी देखने में बहुत आते हैं जब लड़कियां अपने परिवार के लिए या किसी मजबूरी में पैसा कमाने के लिए अपना विज्ञापन वेबसाइटों पर डालती हैं और ऐसा करने वाली कोई अनजान लड़की नहीं बल्कि पूरी जानकार होती हैं. पैसा और पेट पहले भी मजबूरी और शोषण का रास्ता थे लेकिन इंटरनेट ने इस रास्ते में एक फ्लाईओवर की तरह काम किया है.

ज्यादा मुनाफा और लोकप्रियता को हासिल करने के लिए कौमार्य को निशाना बनाया जा चुका है, अब बस इंतजार है तो इस शोषण के पूर्वी देशों में पहुंचने का. छोटी-छोटी लड़कियों को जबरन देह-व्यापार में घसीट कर उनसे यह पाप करवाना हैवानियत की हद दर्शाता है.

यहां भी धोखा है

कहते हैं धोखे के खेल में धोखा ही मिलता है. इंटरनेट पर जिन लड़कियों के कौमार्य को विज्ञापन बना दिखाया जाता है वास्तव में अक्सर ऐसा कौमार्य नकली होता है. जी हां, कौमार्यता भी आप एक सर्जरी से दुबारा प्राप्त कर सकते हैं. असल में कौमार्यता की निशानी एक झिल्ली को सजर्री से द्वारा पुन: प्राप्त किया जा सकता है. टीन-एज सेक्स, रेप या खेल-कूद से चोट लगने पर कई बार भूलवश जब यह झिल्ली(हाइमन) फट जाती है तो इसे पुन: प्राप्त किया जा सके इसके लिए इस सर्जरी का निर्माण हुआ लेकिन अब यह देह-व्यापारियों की चांदी कर रहा है. यह सर्जरी अधिकतर चीन और जापान में होती है और वह भी बेहद सस्ती.
सर्जरी से बार-बार कौमार्यता को हासिल कर यह देह-व्यापारी अधिक पैसा कमाते जा रहे हैं.

बचें कहीं यह पाप हम पर भारी न पड़े

भारत जहां लड़कियां शादी से पहले अपने कौमार्य को बेहद संभाल कर रखती थीं, अब पश्चिमी कल्चर की वजह से उन्हें भी यौवनावस्था (टीनएज) में सेक्स की आदत लगती जा रही है. अब हमारे अपने भारत में कई लड़कियां शादी से पहले सेक्स को बुरा नहीं मानतीं बल्कि इसे खुल कर स्वीकारने लगी हैं. लेकिन फिर भी हम अभी अपनी संस्कृति के साथ चल रहे हैं. आज भी भारत में लड़कियां मयार्दा को लांघने से पहले कई बार सोचती हैं.
लेकिन देह-व्यापारियों की गंदी निगाहें हमारे भारत पर पड़ चुकी हैं और अब वह हमारे यहां से नाबालिग लड़कियों को जबरन अगवा कर उन्हें विदेशों में ले जा रहे हैं. मानव-तस्करी में लापता अधिकतर लड़कियों को देह-व्यापार में ही लगाया जाता है. यह गंदा फैल बेशक बाहर रहा हो लेकिन डर का माहैल अंदर तक आ चुका है.

वेश्यावृत्ति और मानव- तस्करी के खिलाफ सरकार समेत अंतराष्ट्रीय संगठनों को भी गंभीरता से सोचना चाहिए ताकि मानव जीवन जानवर बनने से रुक सके. एक बेहतर कल के लिए आज ही छोटे से छोटा कदम प्रभावशाली हो सकता है.
बदले समय के साथ बदल रहा है आज का युवा. कल तक जिस युवा को हम कॅरियर की राह में अपना सब कुछ न्यौछावर करने के लिए तैयार मानते थे वह बेशक आज भी कॅरियर के लिए अपना सब कुछ समर्पण करने को तैयार है पर नित नए ट्रेंड और आने वाले कल को दांव पर लगा युवा ऐसे कई कदम उठा रहे हैं जो चिंताजनक हैं.

आजकल युवाओं में बिना विवाह एक साथ रहना यानि लिव इन रिलेशनशिप में रहना और शादी से पहले सेक्स की प्रवृति में बढ़ोतरी हो रही है. पश्चिमी सभ्यता और तथाकथित आजादी की मांग में युवा अपने आप को हर तरफ से मुक्त पाना चाहते हैं. आजादी की राह में चलते हुए बोर्डिंग स्कूल से हॉस्टल और फिर कॅरियर की तरफ जाते हुए वह हमेशा अकेले और आजाद रहना चाहते हैं. पर वक्त के साथ शरीर की भी कुछ मांग होती है. कॅरियर संवारने की दौड में युवा अपनी शादी को काफी लंबे समय तक खींचते हैं. अक्सर मेट्रोज में लड़के-लड़कियां 30-35 के बाद ही शादी करते हैं. इसका परिणाम शादी के उनकी सेक्स लाइफ पर साफ नजर आता है. लेकिन ऐसा नहीं है कि शारीरिक संबंध बनाने के लिए युवा शादी तक का इंतजार करते हैं.

34 वर्ष की सुजो एक बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी में सहायक मैनेजर की पोस्ट पर हैं लेकिन अब तक शादी के बंधन में बंधी नहीं हैं. और वह मानती हैं कि शादी के बिना ही वह आजाद हैं और वह अपनी आजादी को खोना नहीं चाहती पर सेक्स के मामले में उनका कहना है कि शारीरिक संबंध बनाने या सेक्स के लिए शादी की जरुरत नहीं बस एक प्रेमी होना ही काफी है. और यह सोच सिर्फ सुनीता की नहीं बल्कि उन अधिकतर युवा लोगों की है जो शादी से दूर रहते हैं और बिना शादी ही सेक्स और शारीरिक संबंधों की दुनिया में जीते हैं.

युवा पीढ़ी अपने आप को रिश्तों से तो दूर रखती है पर अपने प्रेमी या साथी के साथ सेक्स संबंध बनाने में बिलकुल भी पीछे नहीं हटती. और यह ट्रेंड लड़कों में ही नहीं बल्कि लड़कियों में भी पाया जाता है. आजकल लड़कियां भी 30 से 35 की उम्र में शादी करती हैं और तब तक अपने प्रेमी या साथी के साथ अंतरंग पलों का भरपूर आनंद उठाती हैं. और ऐसे में गर्भनिरोधक गोलियों “पिल्स” ने उन्हें हर तरह की आजादी प्रदान कर दी है.

दरअसल आजकल के युवा अपनी आजादी छिनने नहीं बल्कि परिवार के बोझ से बचने के लिए शादी से भागते हैं. बचपन में बोर्डिंग स्कूल और बाद में हॉस्टल में रहने के कारण वह परिवार की अहमियत और सामाजिक दायित्व को सही से समझ नहीं पाते. उनके लिए परिवार से ज्यादा उनका कॅरियर मायने रखता है. परिवार और समाज की समझ देने के लिए बुजर्गों का साथ रहना जरुरी है जो आजकल की सिंगल फैमली में संभव नहीं हो पाता. कई बार मां-बाप को देखते हुए बच्चे भी उनकी तरह सिंगल रहना पसंद करते हैं.

यह ट्रेंड एक समय के लिए तो सही होता है. जब तक आप जवान हैं तब तक आपको सभी सुख मिलेंगे. आजाद रहकर अपने कॅरियर को आगे बढ़ाने का मौका, लेकिन उम्र की जिस दहलीज पर आपको सहारे की जरुरत होगी वहां आप तन्हा महसूस करेंगे. शादी के बाद भी अगर पति-पत्नी के बीच अच्छी अंडरस्टैंडिग है तो कॅरियर को आगे बढ़ाया जा सकता है और सेक्स लाइफ को तो शादी के अलावा किसी दूसरे रिलेशनशिप में एंज्वाय किया ही नहीं जा सकता.

यह मुद्दा हर उस परिवार के लिए महत्वपूर्ण है जिनके बच्चे हॉस्टल या कॅरियर बनाने के लिए अकेले रहते हैं.
इस मामले में चाहे युवाओं की सोच कैसी भी हो पर आपका एक कदम उनकी सोच को बदल सकता है

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें