मंगलवार, 18 अक्तूबर 2011

सूचना के अधिकार कानून से सरकार घबरा गई है..




- अरविन्द सिसोदिया 
सूचना के अधिकार कानून से बहुत से राज बाहर आये और इस कारण कई कार्यकताओं को जान से भी हाथ धोना पडा, नेता , नौकरशाह और लुटेरों की मिली भगत को ,इस कानून ने काफी हद तक उजागर किया है। पोलें बाहर आनें से सरकार घबरा गई है, उसने चोर को मारने के बजाये....चोर को पकडने वाले कानून को ही मारने का फैसला कर लिया है। अब कांग्रेस सरकार सूचना के अधिकार कानून को बाधित करने की योजना में लग गई है, कांग्रेस सरकार के केंद्रीय कारपोरेट मामलों के मंत्री एम. वीरप्पा मोइली ने सोमवार को कहा कि सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम बनाने के समय में जो ” खामियां “ रह गई थीं, उन पर विचार करने की जरूरत है। “ आरटीआई का इस्तेमाल कुछ राजनीतिक दलों के एजेंडे के लिए नहीं किया जा सकता। कुछ लोगों का एजेंडा निर्माण न होकर विध्वंस है। ऐसे लोग देश को अस्थिर देखना चाहते हैं।” कॉमनवेल्थ गेम्स से लेकर आदर्श घोटाले तक के ज्यादातर पहलुओं का खुलासा इसी कानून के इस्तेमाल से हुआ। अत: सरकार का इससे परेशान होना लाजिमी है। यह विडंबना ही है कि जो आरटीआई यूपीए के ताज का एक चमकता हीरा रहा है, वही आज उसे चुभने लगा है।


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