शनिवार, 26 नवंबर 2011

खुदरा क्षैत्र एफ डी आई की मंजूरी का मतलब,भारतीय खुदरा तथा फुटकर व्यापार और उत्पादन क्षैत्र की बली......




- अरविन्द  सिसोदिया 
खुदरा क्षैत्र एफ डी आई की मंजूरी का मतलब...
गरीबों के जले पर नमक.....
भारतीय खुदरा तथा फुटकर व्यापार और उत्पादन क्षैत्र की बली.......
देश के आम आदमी को मंहगाई से मारते - मारते अब मनमोहन सिंह एंड सोनिया गांधी सरकार भारतीय छोटे,खुदरा तथा फुटकर दुकानदारों , उत्पानकर्ताओं के धंधे की बली लेने पर उतारू है। यह सब यूरोप और अमरीका की बडी नामी कंपनियों को लाभ पहुचानें के लिये हो रहा है। पहले एक ईस्ट इण्डिया कंपनी आई थी जिसने सैंकडों वर्षों तक देश को गुलाम बना कर रखा, स्वदेशी व्यापार और उत्पादन प्रक्रिया को नष्ट कर दिया और संशाधनों को वे ब्रिटेन लूट ले गये। अब सैंकडों ईस्ट इण्डिया कंपनीयों जैसे वालमार्ट और दूसरी बडी कंपनियां आ रहीं है। जो हमारे देश के लघु व्यापार और उत्पादन को समाप्त कर देगी। वहीं इनके दुष्प्रभाव सें सामाजिक और सांस्कृतिक सहित राजनैतिक पराभव का आसन्न संकट आ खडा होगा । एफ डी आई की अनुमति रोकने के हर कार्यक्रम का समर्थन करना चाहिये । तमाम राष्ट्रहित चिन्तकों को एक जुट हो जाना चाहिये।
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1 http://business.bhaskar.कॉम

एफडीआई में रिटेल ? ना बाबा ना, व्यापारी करेंगे विरोध
देशभर के कारोबारियों ने मल्टीब्रांड रिटेल में एफडीआई के फैसले का विरोध किया है। कारोबारियों ने इसके खिलाफ आंदोलन की चेतावनी दी है। कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स ने 1 दिसंबर को पूरे देश में थोक और रिटेल कारोबार बंद रखने की घोषणा की है। कनफेडरेशन का कहना है कि इस फैसले से छोटे व मझोले कारोबारी खत्म हो जाएंगे। इस बीच कई राज्य सरकारों ने भी मल्टीब्रांड रिटेल में एफडीआई का विरोध किया है। हालांकि पंजाब में सत्तारूढ़ और बीजेपी के सहयोगी अकाली दल ने इसे स्वागत योग्य कदम बताया है।
फेडरेशन ऑफ राजस्थान ट्रेड एंड इंडस्ट्री (फोर्टी) ने इस फैसले के खिलाफ जयपुर के सभी उद्योग व व्यापार संगठनों की 29 नंवबर को बैठक बुलाई है। विरोध के लिए सकल व्यापार उद्योग संघर्ष समिति का भी गठन किया गया है। फोर्टी महामंत्री प्रेम बियानी ने बताया कि मल्टी ब्रांड रिटेल में एफडीआई को मंजूरी नहीं देने के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र भी लिखा गया था। लेकिन व्यापारियों के इस आग्रह को दरकिनार कर दिया गया। इस तरह सरकार ने व्यापारियों को आंदोलन के लिए मजबूर कर दिया है।
इस फैसले को लेकर शुक्रवार को भोपाल में भी विभिन्न व्यापारी संगठन और व्यापारी चर्चा करते रहे। इस संबंध में भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स आगे की रणनीति पर शनिवार को बैठक करेगा। भोपाल किराना व्यापरी महासंघ ने तय किया है कि केंद्र सरकार के निर्देशों की प्रतियां जलाकर वे इसका विरोध करेंगे।
इस बीच केरल में करीब दस लाख कारोबारियों ने मल्टीब्रांड में एफडीआई के खिलाफ 29 नवंबर को कारोबार बंद रखने का ऐलान किया है। केरल के व्यापारियों के शीर्ष संगठन ने कहा है कि ज्यादातर कारोबारी छोटे और मझोले स्तर के हैं और वे इस फैसले से प्रभावित होंगे।
मल्टीब्रांड रिटेल में विदेशी निवेश का कई राज्य भी विरोध कर रहे हैं। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विरोध कहा है कि सरकार का यह कदम देश में बेरोजगारी बढ़ाएगा और मैं इसका पूरी तरह से विरोध करता हूं। यह जहां देश में रिटेलरों को बर्बाद कर देगा वहीं दूसरी तरफ बेरोजगारी को भी अप्रत्याशित रूप से बढ़ाने वाला साबित होगा। उन्होंने कहा, मैंने सेज का भी विरोध किया था लेकिन उस पर अमल किया गया। परिणाम आज सारे देश के सामने है। हमारा देश दूसरे मॉडलों के आधार पर तरक्की नहीं कर सकता।
हमें तरक्की का अपना मॉडल विकसित करना होगा।  अकाली दल के नेता सुखबीर सिंह बादल ने केंद्र सरकार द्वारा मल्टीब्रांड रिटेल क्षेत्र में एफडीआई के फैसले का समर्थन किया है। बादल ने कहा कि इससे पंजाब के किसानों और लोगों को जबर्दस्त लाभ मिलेगा। गौरतलब है कि शिरोमणि अकाली दल राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का एक महत्वपूर्ण घटक है। सप्लाई चेन में निवेश होने से हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा।
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2 http://www.amarujala.com
रिटेल में एफडीआई से 'गुलाम' हो जाएगा देश
रिटेल क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के केंद्र सरकार के फैसले का उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने कड़ा विरोध किया है। मायावती ने एक प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि सरकार के इस फैसले से देश आर्थिक रूप से गुलाम हो जाएगा। उत्तर प्रदेश में किसी भी विदेशी रिटेल कंपनियों के खुदरा कारोबार करने की इजाजत नहीं दी जाएगी।
मायावती ने साफ किया कि बहुजन समाज पार्टी सरकार के इस फैसले के खिलाफ संसद में भी विरोध जताएगी। उन्होंने केंद्र सरकार से तुरंत इस निर्णय को वापस लेने की अपील की।
कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए मायावती ने कहा कि राहुल ने विदेशी सोच के ‌चलते ही इस प्रस्ताव को मंजूर करने में मदद की।
रिटेल क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ सियासी भूचाल आ गया है। सरकार के घटक दल तृणमूल कांग्रेस के साथ समूचे विपक्ष ने शुक्रवार को संसद में इस मसले पर संप्रग सरकार पर निशाना साधा।


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