शुक्रवार, 16 दिसंबर 2011

जननी जन्मभूमि स्वर्ग से महान है




जननी जन्मभूमि.............
जननी जन्मभूमि स्वर्ग से महान है
जिसके वास्ते ये तन है मन है और प्राण है || द्य ||
ईसके कण कण में लिखा रामकृष्ण नाम है,
हुतात्माओं के रुधिर से भूमि सष्य श्याम है,
धर्म का ये धाम है सदा ईसे प्रणाम है,
स्वतंत्र है यह धरा स्वतंत्र आसमान है, 
॥ १ ॥
ईसकी आन पर अगर जो बात कोई आ पडे,
ईसके सामने जो जुल्म के पहाड हो खडे,
शत्रु सब जहान हो विरुद्ध आसमान हो,
मुकाबला करेंगे जब तक जान मे ये जान है, 
॥ २ ॥
ईसकी गोद मे हजारो गंगा यमुना झूमती,
ईसके पर्वतोंकी चोटियाँ गगन को चूमती,
भूमि यह महान है निराली ईसकी शान है,
ईसकी जय-पताक पर लिखा विजय निशान है, 
॥ ३ ॥
jananī janmabhūmi svarga se mahāna hai
jisake vāste ye tana hai mana hai aura prāa hai ||dh||

īsake kaa kaa me likhā rāmakṛṣṇa nāma hai
hutātmāoke rudhirase bhūmi saya śyāma hai
dharma kā ye dhāma hai sadā īse praāma hai
svatatra hai yaha dharā svatatra āsamāna hai ||1||

īsakī āna para agara jo bāta koī ā pae
īsake sāmane jo julma ke pahāa ho khae
śatru saba jahāna ho viruddha āsamāna ho
mukābalā karege jaba taka jāna me ye jāna hai ||2||

īsakī goda me hajāro gagā yamunā jhūmatī
īsake parvatokī coiyā gagana ko cūmatī
bhūmi yaha mahāna hai nirālī īsakī śāna hai
īsakī jayapatāka para likhā vijaya niśāna hai ||3||


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