शुक्रवार, 23 दिसंबर 2011

मौत का खेल बंद हो ... : चिकित्सक हड़ताल में ११ मौतें



- अरविन्द सिसोदिया 
मौत का खेल बंद हो ...
राजस्थान में चिकित्सक हड़ताल में ११ मौतें हो चुकी हें .., हजारों लोग बेहाल हें ,हड़ताल अभी ही जरी हे.., डोक्टर हड़ताल का यह तरिका अमान्य होना चाहिए ..इन्हें हड़ताल का कोई और मानवीय तरीका अपनाना चाहिए..जिस में मरीज की मौत  भी न हो और मांगें भी मानली जाएँ  ...लोगों  को तकलीफ भी न हो और विरोध दर्ज हो जाये ...! जिस  व्यक्ति के कारण किसी की मौत होती हो वह हत्यारा कहा जाता हे ...जिस व्यक्ति के कारण किसी को दुःख पहुँचता हे वह अपराधी कहलाता हे ! डाक्टर भगवान के दर्जे को प्राप्त करते हे .. उन्हें यह शोभा नहीं देता की वे जल्लाद बनें .......
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जयपुर. सेवारत डॉक्टरों और रेजीडेंट डॉक्टरों की हड़ताल शुक्रवार को भी जारी है। प्रदेश में चिकित्सा व्यवस्था चरमरा गई है। इलाज के अभाव में दम तोड़ देने वाले मरीजों की तादाद बढ़कर 11 हो गई है। सभी जिला प्रशासनों को अलर्ट किया गया है। मुख्‍यमंत्री अशोक गहलोत ने हड़ताली डॉक्‍टरों से काम पर लौटने की अपील की है।
 
गुरुवार को ही आठ मरीजों ने दम तोड़ दिया था। हड़ताल से परेशान मरीज अब हिंसा पर उतारू हो गए हैं। हिंडौन सिटी के राजकीय अस्पताल में इलाज में हुई देरी पर परिजनों ने कंपाउंडर की पिटाई कर दी। 
इस बीच पुलिस ने रेस्‍मा के तहत 123 डॉक्टरों को गिरफ्तार किया है। इनमें 83 सेवारत तथा 40 रेजीडेंट डॉक्टर है। नव नियुक्त 100 डॉक्टरों ने जिलों में कामकाज संभाला। उधर सरकार ने नौ डॉक्टरों को निलंबित कर दिया है।
इनमें सेवारत डॉक्टर्स एसोसिएशन की महासचिव नसरीन भारती (जयपुर) सहित राकेश गुप्ता, एसके बृजेश (टोंक), अशोक चौधरी (सीकर), राजकुमार सक्सैना, एमसी जैन, जेएस शर्मा (अलवर), सीपी कोठारी व प्रदीप चौहान (सिरोही) हैं।
ओपीडी सूने, ऑपरेशन टले
प्रदेश में दो दिनों में इलाज के अभाव में 11 लोगों की मौत हो चुकी है। गुरुवार को जयपुर, पाली, जोधपुर, सीकर, बाड़मेर और करौली में एक-एक और श्रीगंगानगर में दो लोगों की मौत हुई।
जोधपुर संभाग :
682 डॉक्टर हड़ताल पर रहे। अस्पतालों में ऑपरेशन टले। बाड़मेर में बीएसएफ, सेवानिवृत डॉक्टरों और आयुर्वेदिक चिकित्सकों ने संभाला मोर्चा। पाली के धामली गांव की रेखा ने उपचार के अभाव में दम तोड़ा। 
उदयपुर :
महात्मा गांधी चिकित्सालय में पांच घंटे बाद युवक का पोस्टमार्टम हो पाया। अस्पताल में कोई भी ऑपरेशन नहीं हुआ।
बीकानेर :
इलाज के अभाव में युवक की मौत। श्रीगंगानगर के जिला अस्पताल की ओपीडी बंद रही। 
कोटा संभाग :
संभाग में 450 से अधिक डॉक्टर हैं। इनमें से अधिकांश अवकाश पर हैं।
एमबीएस में अस्थि विभाग के 8, नाक-कान व गला के 8, सर्जरी विभाग के 7 ऑपरेशन नहीं हुए। बारां का जिला अस्पताल महज 6 डॉक्टरों के भरोसे रहा। बूंदी अस्पताल में दो चिकित्सक काम पर लौट आए, जबकि तीन डॉक्टर पदस्थापित हुए। नागौर जिला अस्पताल में नौ प्रशिक्षु डॉक्टर लगाए गए, जबकि 2 डॉक्टर अजमेर से बुलाए गए।
अजमेर संभाग : 
अजमेर में मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जेएलएन अस्पताल और जनाना अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित रहीं। कलेक्टर मंजू राजपाल ने प्राइवेट अस्पताल प्रभारियों व चिकित्सा अधिकारियों की बैठक कर स्थिति की समीक्षा की।
जयपुर में डॉक्टरों की हड़ताल का असर
जयपुर में एसएमएस मेडिकल कॉलेज से संबद्ध रेजीडेंट डॉक्टरों के भी हड़ताल पर चले जाने से चिकित्सा व्यवस्था गड़बड़ा गई है। इस बीच एसएमएस अस्पताल में चौमूं निवासी रामकरण गुर्जर की मौत हो गई। 
उधर, सभी जिला व अन्य अस्पतालों में डॉक्टरों के अवकाश पर चले जाने के दूसरे दिन भी कमोबेश पहले दिन जैसी ही स्थिति रही। मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों, नर्सिग होम्स के भरोसे ही रहना पड़ा। 
इस बीच कलेक्टर ने 35 डॉक्टरों की जयपुरिया, कांवटिया सहित सभी सेटेलाइट अस्पतालों व ग्रामीण क्षेत्र के प्रमुख अस्पतालों में नियुक्ति दे दी है। जयपुर के एसएमएस अस्पताल में रेजीडेंट्स व मेडिकल ऑफिसर्स के नहीं होने से मरीज परेशान होते रहे। 
एक गंभीर रूप से घायल बीकानेर से रैफर होकर एक एक मरीज वासुदेव को करीब 6 घंटे बाद भी इलाज नहीं मिलने पर फोर्टिस अस्पताल की ओर रुख करना था। ऐसे ही अन्य कई मरीज यहां-वहां भटकते रहे। 
अस्पतालों में ऑपरेशन तो नहीं के बराबर हुए। उधर, कलेक्टर नवीन महाजन ने सेवानिवृत चिकित्सा अधिकारियों, डिग्रीधारी डॉक्टरों को 1 हजार रुपए प्रतिदिन पारिश्रमिक पर अस्पतालों में सेवा रखने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा निजी व स्वयंसेवी अस्पतालों को भी ओपीडी, आपातकालीन व जांच सुविधाओं के लिए अधिकृत किया है।
प्राइवेट नर्सिग होम भी समर्थन में
सेवारत डॉक्टर्स के समर्थन में प्राइवेट नर्सिग होम के डॉक्टर भी आ गए हैं।जयपुर में शुक्रवार को प्राइवेट नर्सिग होम के 300 से ज्यादा डॉक्टर ओपीडी में सुबह 8 से 12 बजे तक अपनी सेवाएं नहीं देंगे। दूसरी ओर, राजस्थान नर्सिग एसोसिएशन ने भी अपनी मांगों को लेकर सरकार को तीन दिन का अल्टीमेटम दिया है। इसके बाद तय किया जाएगा कि वे हड़ताल पर जाएंगे या सामूहिक अवकाश पर रहेंगे। प्रदेश में इस एसोसिएशन से 34 हजार नर्सिगकर्मी जुड़े हुए हैं।
हाईकोर्ट की सख्ती, मुख्यमंत्री की अपील, लेकिन नहीं पसीजे डॉक्टर
तीन दिन से जारी हड़ताल पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार व सेवारत डॉक्टरों की एसोसिएशन को नोटिस जारी किया है। 
मुख्य न्यायाधीश अरुण मिश्रा व न्यायाधीश कैलाशचन्द्र जोशी की खंडपीठ ने दोनों को ही चिकित्सा सुविधाएं सुचारु रूप से मुहैया करवाने के भी आदेश दिए हैं। शांतिलाल जैन ने इस संबंध में याचिका दायर की थी।
जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त महाधिवक्ता आनंद पुरोहित को हाथोंहाथ नोटिस थमा कर जवाब तलब किया। सेवारत डॉक्टर्स एसोसिएशन, जयपुर के पदाधिकारियों को भी नोटिस जारी किया गया।
जैन ने याचिका में कहा है कि डॉक्टरों की हड़ताल के कारण राज्य में सरकारी अस्पतालों की चिकित्सा सुविधाएं चरमरा रही हैं। मरीजों का जीवन संकट में पड़ गया है। डॉक्टरों का हड़ताल पर जाना पूर्णतया गैरकानूनी व अमानवीय कदम है।
जनहित में तुरंत काम पर लौटें : गहलोत
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने डॉक्टरों से काम पर वापस लौटने की अपील की है और हड़ताल को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। गहलोत ने कहा- आम आदमी डॉक्टर को ईश्वर के रूप में देखता है। हड़ताल के कारण उस गरीब की क्या स्थिति होगी, जिसके पास पैसे नहीं है और इलाज के लिए निजी अस्पताल में जाएगा। 
उन्होंने कहा कि हड़ताल के अलावा कई गांधीवादी तरीके भी हैं। अतिरिक्त काम करके दिखा दो, जिससे सरकार को पता लग जाएगा कि नाराजगी है। सरकार ने डॉक्टरों को समय पर प्रमोशन दिया है। 
प्रोबेशन का समय दो साल से घटाकर एक साल कर दिया है। हड़ताल के लिए डॉक्टरों को कौन भड़का रहा है? यह जनहित में नहीं है। सामूहिक अवकाश हड़ताल की तरह ही है, डॉक्टरों को हड़ताल पर जाना तो भूल ही जाना चाहिए। 
मैंने सीएस से कहकर रात में गिरफ्तारियां रुकवाईं : गहलोत ने कहा कि रेस्मा के तहत रात को गिरफ्तारियों की तैयारी थी। मैंने इन्हें रुकवाया। मुख्य सचिव से कहा कि रात में गिरफ्तारियां मत करिए, क्योंकि इससे उनके परिजनों को तकलीफ होगी। 
वैकल्पिक इंतजाम काफी नहीं : मुख्यमंत्री ने कहा कि हड़ताल के चलते सरकार ने वैकल्पिक इंतजाम किए हैं लेकिन ये काफी नहीं है। इससे स्थिति पूरी तरह दुरुस्त नहीं कही जा सकती।
दिनभर बैठकें पर नहीं बनी बात
डॉक्टरों की मांगों पर विचार करने के लिए बनी तीन सदस्यीय मंत्रिमंडलीय उपसमिति में शामिल चिकित्सा मंत्री ए.ए.खान, ऊर्जामंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह और उद्योग मंत्री राजेंद्र पारीक ने शाम को मुख्यमंत्री से मुलाकात की। उधर, ए.ए.खान और राजस्थान मेडिकल कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन के बीच हुई वार्ता में भी कोई हल नहीं निकला।
एक प्रतिनिधिमंडल के बीच गुरुवार शाम एक घंटे से ज्यादा चली बातचीत में भी कोई हल नहीं निकला। एसोसिएशन के सचिव डॉ आर के जैन ने कहा कि एक मुश्त प्रमोशन पर सरकार के साथ बातचीत नहीं बन पाई है।

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